NOVEMBER INTERNATIONAL HINDI ASSOCIATION'S NEWSLETTER
नवम्बर 2025, अंक ५२ प्रबंध सम्पादक: श्री आलोक मिश्र। सम्पादक: डॉ. शैल जैन
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Human Excellence Depends on Culture. The Soul of Culture is Language
भाषा द्वारा संस्कृति का प्रतिपादन
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति परिवार के सभी सदस्यों एवं संवाद के पाठकों का अभिनंदन !
“हिन्दी दिवस का 14 सितंबर और अपने स्थानीय समितियों के साथ मिल कर अन्य कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की शाखाओं और आउटरीच राज्यों ने अपने स्थानीय सामुदायिक क्षेत्रों में आयोजित किया। मैँ सभी शाखाओं और आउटरीच राज्यों के आयोजकों और उनकी कार्यकारिणी समिति को तहे दिल से धन्यवाद और बधाई देती हूँ। आप सबों ने कार्यक्रम को सफल बनाया , युवाओं को ज़्यादा शामिल करने की कोशिश की और अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के उद्देश्य को आगे बढ़ाने में और दृश्यमान करने में अपना संपूर्ण योगदान किया है ।
हिन्दी दिवस २०२५ कार्यक्रम ह्यूस्टन एवं वाशिंगटन डी. सी.शाखाओं ने भारतीय दूतावास के साथ मिलकर किया और इनके कार्यक्रमों की रिपोर्ट सितंबर माह के संवाद में प्रकाशित की गई । न्यू जर्सी शाखा द्वारा यूनिवर्सिटी में बच्चों के साथ हिंदी दिवस बनाया गया । इंडियाना , टेनेसी एवं न्यू जर्सी शाखाओं के कार्यक्रमों की रिपोर्ट अक्टूबर में प्रकाशित हुई । उत्तर पूर्व ओहायो शाखा और शार्लोट आउटरीच राज्य की रिपोर्ट ईस संवाद ( नवंबर में ) प्रकाशित है । उम्मीद करती हूँ कि आप कार्यक्रमों के बारे में पढ़ेगें और अपनी प्रतिक्रियाओं को हमसे साझा करेंगें ।
अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति के संविधान के अनुसार मनोनयन व चुनाव समिति (Nomination and Election Committee) ने नये कार्याधिकारी मण्डल (Officers) का निर्णय ले लिया गया है और मैं समिति को धन्यवाद देती हूँ । कार्याधिकारी मण्डल (Officers) जिन्हें मनोनीत किया है, उन सभी को धन्यवाद और उनका स्वागत है । विस्तृत समाचार संवाद में प्रकाशित है और सदस्यों को ई मेल द्वारा भी दे दिया गया है ।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के नये पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें। जिन स्थानीय शाखाओं में २०२६- २०२७ सत्र के लिए निर्वाचन या मनोनयन हो गये है, उन्हें बधाई है. । अन्य शाखाओं से निवेदन है कि वे अपनी समिति के निर्वाचित या मनोनीत पदाधिकारियों के नाम एवं अन्य विवरण की सूचना का विवरण जल्द भेजें ।
अक्टूबर महीने में उत्तर पूर्व ओहायो शाखा ने स्थानीय समिति आईएफ़ यू एस ए ( IFUSA) संस्था के साथ मिल कर पाँच स्थानीय मेयरों के साथ दिवाली मनाई । मुझे इन तीनों कार्यक्रम में उपस्थित होने का सौभाग्य मिला । आईएफ़ यूएसए (IFUSA) ने ये कार्यक्रम का आयोजन किया और उनके साथ अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, उत्तर पूर्व ओहायो शाखा और ७-८ अन्य भारतीय संस्था ने इस कार्यक्रम में भाग लिया । यह पहल विविधता के सम्मान और हमारी भारतीय संस्कृति एवं दीवाली पर्व के प्रति जागरूकता फैलाने का सुंदर उदाहरण रही। इस अवसर पर विभिन्न भारतीय संस्थाओं की एकजुट उपस्थिति ने हमारी एकता और सहयोग की भावना को भी प्रदर्शित किया।
विश्व हिंदी दिवस की तैयारियां समिति के सभी शाखाओं में जोर शोर से की जा रही है ।अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति ने भारतीय दूतावास, वॉशिंगटन डी. सी. के साथ मिलकर “विश्व हिंदी दिवस २०२६” को मनाये जाने का निर्णय लिया है और ये समिति के लिये बहुत गर्व की बात है ।जल्द ही विस्तृत समाचार भेजा जाएगा ।
समिति के लिये आप सबों के विचारों और सुझाओं का हमेशा स्वागत है। समिति के कोई विशेष कार्य करने के लिए यदि आप अपनी सेवा अर्पित करना चाहते हैं तो निसंकोच हमें बताने का कष्ट करें।
धन्यवाद
शैल जैन
डॉ. शैल जैन
राष्ट्रीय अध्यक्षा, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (2024-25)
ईमेल: president@hindi.org | shailj53@hotmail.com
सम्पर्क: +1 330-421-7528
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति- आगामी सत्र कार्यकारिणी मंडल की घोषणा
जनवरी 1, 2026 – दिसम्बर 31, 2027
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अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति के कार्याधिकारी मण्डल (Officers) २०२६-२०२७ सत्र हेतु मनोनीत सूची (स्लेट) निम्नलिखित है:
१. श्री संजीव जायसवाल (टैक्सस) अध्यक्ष (पूर्व सचिव)
२. श्री उमेश कुमार (टेन्नसी) सचिव (पूर्व प्रौद्योगिकी-समिति अध्यक्ष)
३. श्री चन्द्रकांत पटेल (टैक्सस) कोषाध्यक्ष (पूर्व कोषाध्यक्ष)
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति- इंडियाना शाखा
2026 –2027 शाखा नियुक्तियाँ
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श्री आदित्य कुमार — अध्यक्ष
डॉ. कुमार अभिनव — सचिव
विद्या सिंह — सलाहकार
डॉ. महेश गोयल — सलाहकार
डॉ. राकेश कुमार — सलाहकार
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति --उत्तरपूर्व ओहायो शाखा रिपोर्ट
हिंदी दिवस 14 सितंबर, 2025
प्रस्तुति : डॉ. सोमनाथ राय, सचिव, अ. हि. स. उत्तरपूर्व ओहायो शाखा
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प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की उत्तरपूर्व ओहायो शाखा ने १४ सितंबर २०२५, रविवार को हिंदी दिवस समारोह बड़ी धूमधाम से ग्रेटर क्लीवलैंड शिव विष्णु मंदिर, ओहायो के सभागार में मनाया। कार्यक्रम अपने निर्धारित समय संध्याकाल ५:३० बजे प्रारंभ हुआ। इस कार्यक्रम के संचालन की बागडोर की जिम्मेदारी डॉ. सोमनाथ राय एवम् डॉ. सुनीता द्विवेदी जी ने संभाली ।
कार्यक्रम का प्रारंभ पारंपरिक विधि से दीप प्रज्वलन द्वारा किया गया। दीप प्रज्वलन के लिए शामिल थे मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री मनहर शाह, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की राष्ट्रीय अध्यक्षा डॉ. शैल जैन, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति उत्तर पूर्व शाखा के वर्तमान अध्यक्ष श्री अश्वनी भारद्वाज, उत्तर पूर्व शाखा की पूर्व अध्यक्षा श्रीमती रेणु चड्डा, उत्तर पूर्व शाखा के २० सालों से सक्रिय सदस्य श्री सुनीत जैन, उत्तर पूर्व शाखा के समर्थक डॉ. संजय चौधरी एवं डॉ. आदित्यन।
अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति, उत्तरपूर्व शाखा के अध्यक्ष श्री अश्वनी भारद्वाज ने सभी दर्शकों का अभिनंदन किया एवं हिन्दी समिति का उद्देश्य जो कि राजभाषा हिंदी का संरक्षण, पोषण एवं प्रसार करना है, उसके लिए अपनी शाखा द्वारा किए गए और किए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाओं के बारे में संक्षिप्त विवरण दिया। तत्पचात हिंदी समिति की राष्ट्रीय अध्यक्षा डॉ. शैल जैन ने समिति द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और शाखाओं द्वारा किये गये पिछले दो सालों के कार्यों का संछिप्त विवरण प्रस्तुत किया ।हिंदी दिवस के अवसर पर दर्शकों का अभिनंदन किया एवं हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में सक्रीय भागीदारी लेने के लिए आग्रह किया। अधिक से अधिक लोगों को अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति की आजीवन सदस्यता लेने के लिए भी आग्रह किया। उन्होंने बताया कि हम अभी स्थानीय स्कूलों में हिंदी को विदेशी भाषा के रूप में मान्यता दिलाने की कोशिश में लगे हैं और इस काम में सभी दर्शकों से सहायता के लिए अनुरोध भी किया ।
कार्यक्रम की बागडोर दोनों सूत्रधार, डॉ. सोमनाथ राय एवं डॉ. सुनीता द्विवेदी ने संभाली । ‘हिंदी दिवस’ के महत्त्व को बताते हुए बीच में दर्शकों को चुटकुले सुनाते और मनोरंजन करते रहे । सांस्कृतिक कार्यक्रम की शृंखला—
१) कार्यक्रम की शुरुआत श्रीकृष्ण गोविंद भजन पर आधारित कत्थक नृत्य से हुई, जिसे श्रीमती रिचा निगम ने मंच पर प्रस्तुत किया ।
२) संस्कृत दुर्गा स्तुति - अयी गिरि नंदिनी, की प्रस्तुति तीन नन्हे मुन्ने बच्चे, श्रिया सोनार, शार्दूल सोनार एवं जिया वैद्य ने, दोनों की उम्र दस साल से कम थी ने की।
३) जगजीत सिंह जी की ग़ज़ल, “ उस मोड़ से शुरू करें …” का, अपने मधुर स्वर में प्रस्तुत किया श्रीमती रूबी झा ने।
४) शृंगार रस पर आधारित शायरी, जिसे प्रस्तुत किया डॉ. प्रांजल शर्मा ने।
५) “काव्य पाठ” जिसे प्रस्तुत किए दो नन्हे मुन्ने बच्चे, आयरा सबरवाल एवं सुहाना चौधुरी ने।
६) की-बोर्ड वाद्ययंत्र के ऊपर संगीत की प्रस्तुति, जिसे प्रस्तुत किया शिवांश अग्रवाल ने ।
७) हास्य-काव्य पाठ “ दीवाली धमाका, जितना खर्चो, उतना बचाओ” जिसे प्रस्तुत किया डॉ. गिरीश शुक्ला ने।
८) राष्ट्रभक्ति गीत, “हम करें राष्ट्र आराधन”, जिसे मंच पर प्रस्तुत किया, डॉ. अदित आदित्यान ने ।
९) “देश प्रेम” पर लिखी गई अपनी नयी कविता प्रस्तुत की कवि अनुराग गुप्ता ने।
१०)संगीत, “कई बार यूँ भी देखा है.” श्री संजीव सिंन्हा जी ने गाया ।
११)नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत “छोटा-नाट्य”, जिसमें भाग लिया कबीर लाल, आद्या जैन, विहान राजपूत, तुलसी श्रीवास्तव, राजविका अस्थाना, सात्विक आर्य, अशप्रीत मिश्रा एवं विहान गवाली ने। निर्देशिका थीं श्रीमती स्मिता राव।
१२) “हिंदी भाषा पर कविता एवं शायरी”, जिसे प्रस्तुत किया श्री नरेन्द्र सिंह(नदीम) ने।
१३) सुंदर नृत्य की प्रस्तुति नवमी तिवारी द्वारा ।
१४)“युगल-गीत … किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार..”, जिसे प्रस्तुत किया श्रीमती कविता भानवाला एवं डॉ. मधु गर्गेशा ने।
१५) बहुत ही सुंदर बाल समूह-नृत्य, जिसे प्रस्तुत किया महिका जैन, किंजल जैन, अन्वी नेवास्कर, रिया शर्मा एवं नित्या शर्मा जी ने।
१६)मनमोहक गीत,”कहीं दूर जब दिन ढल जाये”, जिसे प्रस्तुत किया हमारे सदाबहार गायक श्रीमान प्रत्यूष रंजन ने।
१७)अंतिम कार्यक्रम एक समूह-नृत्य, जिसे प्रस्तुत किया रोशन चवेली, मानसा हमचंद, रक्षा कार्थिकेयन, पावनी कोमोंडोरू एवं इंदिरा गोगीशेट्टी ने।
इस प्रकार दो घंटे के सांस्कृतिक कार्यक्रम को सभी उपस्थित लोग मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे एवं तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों को प्रोत्साहित करते रहे ।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद डॉ. राकेश रंजन , उत्तरपूर्व ओहायो शाखा के उपाध्यक्ष, ने सभी श्रोताजनों को अपने बहुमूल्य समय देकर समारोह को सफल बनाने के लिए उनका आभार प्रकट किया।उन्होंने समारोह के दोनों सूत्रधारों का, सभी कलाकारों एवं उनके परिवार वालों का, हिंदी समिति के सभी कार्यकारिणी सदस्यों का, शिवा विष्णु मंदिर के प्रबंधन समिति का, खाद्य समिति के सदस्य श्रीमती किरण गोयल एवं श्रीमति निशा राय का, साउंड एवं लाइट प्रबंधन का और फोटोग्राफी के लिए टी. वी.एशिया और श्री महेश देसाई का आभार प्रकट किया।
कार्यक्रम का अंत अमेरिकन एवं भारतीय राष्ट्रगानों के साथ किया गया ।उसके बाद मंदिर के सभागार में सबके लिय रात्रिभोज की व्यवस्था थी ।सभी खाना खाते हुए आपस में बातें कर प्रसन्न लग रहे थे ।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- शार्लोट, नार्थ कैरोलिना, रिपोर्ट
हिंदी दिवस समारोह-- सितम्बर 13 , 2025
द्वारा : प्रिया भारद्वाज ,शार्लोट आउटरीच राज्य की संजोयिका
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के आउटरीच राज्य नार्थ करौलीना के शार्लोट शहर में १३ सितंबर २०२५ , को बेटी पार्क वॉक्सह्व में हिंदी दिवस पिकनिक का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति को प्रोत्साहित करना था। इस पिकनिक में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने परिवार सहित बड़े उत्साह के साथ भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों और बड़ों के लिए मनोरंजक गतिविधियों से की गई जिसे प्रतिवर्ष पिकनिक के रूप में मनाया जाता है।शार्लोट में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सभी लोग परिवार सहित सम्मिलित होकर हिंदी के कार्यक्रमों का आनंद लिया ।
दीप प्रज्वलन करम बत्रा जी द्वारा किया गया । कुछ कार्यक्रम बड़ों के लिए किए गए और बड़ों को पुरस्कृत किया गया और सबसे ज़्यादा मज़ा तो तब आया जब सबसे सवाल किए गए और गिफ्ट भी दिए गए । प्रवीण तिवारी जी ने और तृप्ति तिवारी ने बहुत ही रोचक तरीके से कि रिड्ल का खेल खिलवाया और सभी ने पहेलियों के उत्तर देते हुए इसका आनंद लिया ।
बिंगो में बच्चों ने जमकर आनंद लिया।बच्चों ने खुश होकर पूरे उत्साह के साथ खेला इसके पश्चात् हमारे नौनिहालों ने हिंदी पहेलियों में बढ़ चढ़कर भाग लिया। हिंदी के प्रति बच्चों का उत्साह देखते हुए मन प्रफुल्लित हो उठा।
सभी परिवारों ने पिकनिक में बच्चों के हिंदी के प्रति लगाव और उत्साह को प्रोत्साहित किया ।
इस कार्यकर्म में प्रथम पुरस्कार मधुमिता शर्मा ,श्वेता पांडे , द्वितीय पुरस्कार स्वाति बंसल , प्रत्याशा जैन ,किरण कुमार और तृतीय पुरस्कार निधि शर्मा , सुप्रज्ञ मिश्रा ,रीता भारती ,रानी दांगी को मिला l
हमारे युवा बच्चों को वालंटियर कार्य और कार्यक्रम को संचालित करवाने में मदद करने के लिए सर्टिफिकेट और पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया । बालक बालिकाओं में पुरस्कार कौस्तुभ तिवारी ,अथर्व तिवारी , सार्थक , अंशिका वर्मा , वेदांत परिहार और श्रुति भारती को मिला।
वेदांत परिहार ने बिंगो कार्यक्रम का पूर्ण संचालन किया ।
कौस्तुभ तिवारी,अथर्व तिवारी ,शाश्वत भारद्वाज ,सार्थक , श्रेष्ठ भारद्वाज ,आदित्य चौबे , सभी बच्चों ने पूरे कार्यक्रम की व्यवस्थता करवायी , इसके साथ ही स्टेज डेकोरेशन , खाने की व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा ।
स्वाति बंसल , श्वेता पांडे जी , प्रत्याशा जैन ,स्वप्निल जैन और सौरभ बंसल ने सहयोग प्रदान कर इसे उच्च कोटि का बनाने में प्रमुख योगदान दिया ।
इस वर्ष भी राष्ट्रीय हिदी दिवस पूर्ण सफलता के साथ मानाया गया l कार्यक्रम के खेलों का आयोजन युवा पीढ़ी द्वारा करवाया गया और उन्होंने जमकर भाग भी लिया।
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गोष्टी गजलकार दुष्यंत कुमार को समर्पित
विचार और काव्य गोष्ठी , 7 सितंबर 2025
संयोजक: प्रो. वेद प्रकाश बटुक, प्रवासी साहित्यकार
संचालक: डॉ. राम गोपाल भारतीय, मेरठ , उत्तर प्रदेश , भारत
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श्री दुष्यंत कुमार त्यागी
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श्री दुष्यंत कुमार त्यागी (1 सितंबर 1931 – 30 दिसंबर 1975) आधुनिक हिंदी साहित्य के एक प्रतिष्ठित भारतीय कवि थे। वे हिंदी ग़ज़लों के लेखन के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं और 20वीं शताब्दी के प्रमुख हिंदी कवियों में से एक माने जाते हैं।
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दुष्यंत की गजलें आज भी प्रासंगिक हैं,प्रोफेसर बटुक ने कहा।
मास्टर सुंदरलाल स्मृति न्यास मेरठ के सौजन्य से आज प्रोफेसर बटुक जी के पैत्रक निवास कैलाशपुरी ,गढ़ रोड स्थित संस्था के कार्यालय पर एक विचार गोष्ठी और काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया ।यह गोष्ठी प्रसिद्ध गजल कार और क्रांतिकारी साहित्यकार दुष्यंत कुमार को समर्पित रही जिनकी जयंती इसी माह एक सितंबर को थी। इसमें वक्ताओं ने दुष्यंत की चर्चा के अलावा देश में हिंदी की दशा और दिशा पर भी विस्तार से विमर्श किया। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रसिद्ध समाजसेवी पूर्व कमिश्नर डॉक्टर आरके भटनागर ने की। जबकि सानिध्य सुप्रसिद्ध कवि श्री कौशल कुमार जी का रहा। कार्यक्रम के आयोजक प्रसिद्ध चिंतक लेखक और कवि प्रोफेसर वेद प्रकाश बटुक रहे जबकि कार्यक्रम का संचालन गजलकार डॉक्टर रामगोपाल भारतीय ने किया ।
गोष्ठी में वक्ताओं ने समसामयिक विषयों पर चर्चा के अलावा वर्तमान समय में कवियों के सामने आने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया। गोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध पत्रकार और लेखक श्री प्रभात राय ने कहा कि आज पत्रकारों और लेखकों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं अपने समय के विद्रोही क्रांतिकारी साहित्यकार दुष्यंत कुमार की गजलें हमें याद दिलाती हैं कि लेखक और कवियों को आम आदमी की तकलीफों और परेशानियों से बेखबर नहीं रहना चाहिए। सत्ता की चापलूसी ना करके हमें व्यवस्था को सुधारने के लिए अपने कवि धर्म को नहीं भूलना चाहिए । उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए जिन लोगों ने बलिदान दिया आज हम उनके सपनों का भारत नहीं बना पाए हैं ।आज भी समाज में असमानता भेदभाव जातिवाद और धार्मिक व्यवस्थाओं और कर्म कांडों से असंतोष और अराजकता बढ़ रही है ।सबसे पहले गोष्ठी में उपस्थित मनोविज्ञान की छात्रा और कवयित्री कुमारी शाहीन ने अपने विचार प्रकट करते हुए आज के साहित्यकार को अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने का संकल्प याद दिलाया। इसके बाद युवा कवि श्री अजय कुमार ने अपनी अपने विचार प्रकट करते हुए कहा ,,,
कोई लगा न सका उसके कद का अंदाजा, क्योंकि वह आसमान था और सर झुका के चलता रहा।
युवा कवि श्री उस्मान भारत ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए ये पंक्तियां पढ़ी,,,
भागते हुए लड़के अक्सर भाग जाया करते हैं, समाज के कलंकित रीति रिवाज से,,,
इसके बाद मेरठ के युवा गीतकार श्री नीतीश राजपूत ने अपना एक भावपूर्ण गीत सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरी ।उनके गीत की पंक्तियां थी,,,
जमाना भूल जाएगा जमाने भर की बातों को, मगर दुनिया मोहब्बत को हजारों साल गाएगी,
गोष्ठी में मौजूद ग्रामीण परिवेश के आध्यात्मिक कवि श्रीपाल सिंह मुदकर ने अपनी अभिव्यक्ति इस प्रकार दी ,,
काव्य योग अध्यात्म का अमृत जिसके पास, उसको और क्या चाहिए माया जिसकी दास,
इसके साथ ही युवा समाजसेवी श्री हिमांशु वशिष्ठ।ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा,,
कि समाज में एकजुटता हो, समरसता का भाव हो ,त्याग की भावना हो, जीवन स्वयं से परे हो ,न कोई छोटा हो न कोई बड़ा हो, समान सबका भाव हो ,समान सबका सम्मान हो, राष्ट्र सबके हृदय में हो, राष्ट्र प्रथम की भावना हो। संचालन कर रहे डॉक्टर रामगोपाल भारतीय ने अपनी गजल प्रस्तुत करते हुए कहा ,,,
अगर सब कुछ यहां पैसा नहीं तो,
गरीबों का निरादर क्यों हुआ है।
जरा हंसने से पहले यह तो सोचो ,
वो पागल तो हुआ ,पर क्यों हुआ है ।
जनवादी लेखक संघ के जिला सचिव और प्रसिद्ध एडवोकेट श्री मुनेश त्यागी ने विस्तार से देश में पूंजीवाद के बढ़ते हुए कदमों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि आम जनता के दुख दर्द को दूर करने के लिए देश में किसान और मजदूर के हितों को संरक्षण करने के लिए समाजवाद ही एकमात्र विकल्प है ।उन्होंने एक कविता भी प्रस्तुत की ,जिनकी इन पंक्तियों को श्रोताओं द्वारा मुक्त कंठ से सराहा गया ,,,
इस अंधकार के मौसम में
हम चंदा तारे दिनमान बने
नफरत के इस माहौल में हम
होली और रमजान बने
श्री प्रभात राय जी की कविता की पंक्तियां थी,,,
कुछ को मोहन भोग बैठकर ही खाने को
कुछ सोते अधपेट तरस दाने दाने को
कुछ तो ले अवतार स्वर्ग का सुख पाने को कुछ आते बस नरक भोग कर मर जाने को श्रम है किसका और कौन है मौज उड़ाते
खाने के लिए कौन कौन उपजाकर लाते
इन क्रांतिकारी पंक्तियों के बाद श्री श्री भगवान दीक्षित जी ने वर्तमान समय में समाज में व्याप्त रूढ़िवादिता अंधविश्वास और धार्मिक पाखंड पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज हम वैचारिक और बौद्धिक रूप से दरिद्र होते जा रहे हैं। उन्होंने अपनी कविता की पंक्तियां भी प्रस्तुत की जिनके बोल थे,,,
एक क्वांटम में हलचल हुई
बड़ी बात हुई
कोई दृष्टा न था
न हीं कोई दृश्य था ।
अब बारी थी वरिष्ठ कवि श्री कौशल कुमार जी की ।उनके गीत की ये पंक्तियां श्रोताओं द्वारा बहुत सराही गई,,,
कला विलासी बल बर्बर हो ,
श्रम प्रतिभा अपराधी,
रोक सकेगा कौन इसे,
यह महानाश की आंधी ।
इसके बाद प्रोफेसर वेद प्रकाश बटुक जी ने अपने उद्गार प्रकट करते हुए ,दुखी मन से कहा कि आज हम आजाद भारत में रहकर भी स्वयं को स्वतंत्र महसूस नहीं कर रहे क्योंकि यहां पर गोरे अंग्रेजों के बजाय काले अंग्रेजों का राज है। हमारी साथ रहने की वह सांस्कृतिक साझी विरासत, देश पर मर मिटने की वह सब इच्छाएं ,अमर शहीदों की वे सारी स्वतंत्र भारत की कल्पनाएं धूल धूसरित होती नजर आ रही है ।सत्ताधारी लोग किसी भी प्रकार, येन केन प्रकारेण सत्ता में बने रहना चाहते हैं। अभिव्यक्ति का अधिकार संकट में है। लोग आपस में लड़ रहे हैं। धर्म और जाति के नाम पर समाज में वैमनस्य फैलाया जा रहा है, भारत की धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और संविधान पर लगातार चोट की जा रही है। जागरूक साहित्यकारों का यह धर्म है कि वह सुविधाजनक रास्ता चुनकर सुविधा भोगियों की भीड़ में शामिल न हो और देश की जनता के प्रति आम आदमी के दुख दर्द के प्रति अपनी लेखनी और आवाज को मुखर करें। जैसा कि दुष्यंत को मारने किया था इसलिए आज भी दुष्यंत कुमार ने किया था।उनकी गजलें आज भी प्रासंगिक है ,जब वह कहते हैं,,,,
कौन कहता है आकाश में सुराख नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो
और उनका यह शेर
इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है
नाव जर्जर ही सही लहरों से टकराती तो है
और जब वह कहते हैं
कि उसका जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा
वो सजदे में नहीं था आपको धोखा हुआ होगा
प्रोफेसर बटुक ने अपनी कविता की पंक्तियां प्रस्तुत करते हुए कहा,,,
हमारी ही वफा के पेचों खम हैं
हमारे ही किए खुद पर सितम हैं
हमीं ने दूध था उनको पिलाया
कि जिन सांपों के कैदी आज हम हैं
इस प्रकार गोष्ठी में एक से एक बढ़कर क्रांतिकारी विचार और रचनाओं ने श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
अंत में कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ आर के भटनागर ने अपने संबोधन में कहा कि आज हमारे साहित्यिक मंच भी प्रसिद्धि और धन के शिकार है और वह जनता को श्रोताओं को केवल मनोरंजन की दृष्टि से अपनी कविताएं लिख रहे हैं। हमारे राष्ट्र निर्माताओ ने यह कभी नहीं सोचा था की आने वाले समय में भारत में धर्म और जाति के नाम पर या भाषा और क्षेत्र के नाम पर भारतवासी आपस में लड़ेंगे ।जिस आजादी के लिए भगत सिंह जैसे हजारों नौजवान फांसी के फंदे पर झूल गए थे, आज उस देश का युवा बेरोजगारी महंगाई धार्मिक और जातीय झंझावातों से जूझ रहा है ।ऐसे में हमें दुष्यंत कुमार बहुत याद आते हैं जिन्होंने देश को देश की जनता को अपनी गजलों से जागरूक किया और अपने अधिकारों के लिए व्यवस्था से लड़ने का संदेश दिया। डॉ भटनागर जी ने अपनी एक रचना सुनाते हुए कहा ,,,
समरसता समर्पण संस्कार साहित्य देश की आत्मा है, समाज को संरक्षित संस्कारों के माध्यम से , सहनशीलता तथा वसुदेव कुटुंबकम से बचाया जा सकता है ।साहित्य समाज का दर्पण है।
गोष्ठी के अंत में सर्वसम्मति से देश के अनेक प्रदेशों में आई भयंकर बाढ़ और प्राकृतिक आपदा पर चिंता व्यक्त की गई और यह प्रस्ताव पास किया गया कि सभी सदस्य यथायोग्य बाढ़ पीड़ितों के लिए अपने-अपने स्तर से कुछ ना कुछ आर्थिक सहयोग अवश्य करेंगे।
अंत में प्रोफेसर बटुक ने इस सफल गोष्ठी के लिए सभी का हृदय से आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम का समापन हुआ।
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संयोजक: प्रो. वेद प्रकाश बटुक
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संचालक: डॉ. राम गोपाल भारतीय
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अपनी कलम से
"छठ पर्व का संचिप्त परिचय और महत्व"
द्वारा : डॉ. शैल जैन
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छठ पर्व का संचिप्त परिचय और महत्व
छठ (Chhath Parv) हिंदू संस्कृति में एक प्राचीन और पवित्र त्योहार है, जिसे “सूर्य षष्ठी व्रत” भी कहा जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होता है। छठी मैया को जीवन-शक्ति, मातृत्व और संरक्षण की देवी माना जाता है, और सूर्य देव को वह शक्ति का स्रोत माना जाता है जो जीवित रहने में मदद करता है। यह पर्व आत्म-संयम, शुद्धता, कृतज्ञता और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को दर्शाता है।
छठ पूजा के अनुष्ठान / रीति-रिवाज़
छठ पूजा सामान्यतः चार दिन तक मनाई जाती है। इन चार दिनों के प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं:
नहाय-खाय (Nahay Khay): पहले दिन श्रद्धालु पवित्र जलाशय में स्नान करते हैं और साधारण शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं।
खरना (Kharna): दूसरे दिन व्रती निर्जला (पानी विहीन) व्रत रखते हैं, शाम को खीर या अन्य मीठा प्रसाद तैयार कर व्रत तोड़ते हैं।
संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya): तीसरे दिन सूर्यास्त के समय नदी, तालाब या जल स्रोत के किनारे इकट्ठा होकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है (पानी और पूजा सामग्री चढ़ाई जाती है)।
उषा अर्घ्य + पारना (Usha Arghya + Parna): चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, और इसके बाद व्रत तोड़ा जाता है (पारना )।
इस पूरे व्रत में श्रद्धालु संयम, पवित्रता और एकाग्रता बनाए रखते हैं।
इस वर्ष (2025) छठ पर्व 25 से २८ अक्टूबर तक मनाया गया ।
भारत में छठ पर्व का स्थान और उत्सव
यह पर्व बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश (विशेष रूप से पूर्वी हिस्सा), और पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में बहुत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इन राज्यों में नदियों, तालाबों और घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होकर अर्घ्य देते हैं। छठ पूजा न सिर्फ धार्मिक, बल्कि सामाजिक और पर्यावरण-सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें प्रकृति, जल और सूर्य के प्रति सम्मान की याद दिलाती है।
अमेरिका में छठ पूजा का बढ़ता उत्सव
हाल के वर्षों में, छठ पर्व अमेरिका के कई राज्यों में भी मनाया जाने लगा है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ भारतीय, विशेषकर बिहारी और पूर्वोत्तर भारत के लोगों की बड़ी आबादी है।
2025 में अमेरिका में छठ पूजा 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक हुई । उदाहरण के लिए
- न्यू जर्सी (New Jersey) में मोनरो के Thompson Park में छठ पूजा हुई
- वर्जीनिया (Virginia) में पोटोमैक नदी के किनारे उत्सव आयोजित किया जाता है।
-कैलिफोर्निया (Los Angeles के Newport Dunes Waterfront) जैसे स्थानों पर भी लोक-समूह इकट्ठा होते हैं और सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।
-नार्थ ईस्ट ओहायो ( N.E. Ohio ) में खूब धूम धाम से डॉ. सोमनाथ राय के निवास स्थल पर आयोजित की गयी।
ये आयोजन सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं हैं – सामाजिक एकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और समुदाय-बिल्डिंग के रूप में भी यह बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
छठ पर्व का सांस्कृतिक संदेश
छठ पूजा हमें प्रकृति और सूर्य के प्रति कृतज्ञता सिखाती है। यह आत्म-अनुशासन और संयम का पर्व है — व्रत, शुद्धता और प्रतिबद्धता की परीक्षा होती है। सामाजिक रूप से, यह पर्व समुदायों को जोड़ता है — चाहे भारत हो या विदेश, लोग मिलकर घाटों पर अर्घ्य देते हैं, गीत गायन करते हैं, प्रसाद बांटते हैं। छट का खास प्रसाद ठेकुआ बहुत ही स्वादिष्ट होता है।
वैश्विक स्तर पर, छठ परंपरा का प्रसार यह दिखाता है कि हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ सीमाओं को पार कर सकती हैं और विभिन्न भौगोलिक स्थानों पर भी जीवित रह सकती हैं।
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नार्थ ईस्ट ओहायो ( N.E. Ohio ) में छठ 2025, डॉ. सोमनाथ राय के निवास स्थल पर आयोजित ।
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छठ पूजा भारत , बिहार राज्य, पटना शहर में।
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द्वारा - .श्री गिरेन्द्र सिंह भदौरिया
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श्री गिरेन्द्र सिंह भदौरिया "प्राण" का जन्म इटावा जिले के एक ग्राम में एक साधारण परिवार में हुआ। आपने हिन्दी, अँग्रेजी व संस्कृत तीनों में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की। इन्दौर में 37वर्षों तक शिक्षक रह कर 2019 में सेवा निवृत्त हुए हैं। आपकी रचनाओं में भाषा का सरस प्रवाह एवं काव्य के तत्त्वों के साथ काव्य सौन्दर्य के दर्शन होते हैं। हिन्दी के उत्थान में आपकी सेवा निरन्तर चल रही है। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में नर्मदा नदी के भेड़ा घाट पर प्रसिद्ध धुआँधार जल प्रपात है। कवि की दृष्टि में यह कैसा है पढ़िए।
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चेतावनी
हर ओर धुँआँ ही धुँआँ मात्र संयोग नहीं, परिणाम निकल कर आए हैं आजादी के।
चल पड़ी तोड़ कर अनुशासन यह आबादी, जिस पथ पर पसरे राग बड़ी बर्बादी के।।
कहने को कुछ भी कहो आपकी मर्जी है, शायद कुछ भाग्य उदित हों अवसरवादी के।
पर हम सचेत करते हैं तुम को यह कहकर, ये लक्षण हैं उन्मादी और फसादी के।।
यूँ स्वतन्त्रता का अर्थ नहीं स्वच्छन्द रहो, जीवन संयम के साथ बिताना जीवन है।
खुद पर कानूनों नियमों का अंकुश न रखा, तो पराधीन बाहों में जाना जीवन है।।
सुनने में कड़ुआ लगे-लगे तो लग जाए, जनता के हक का हरण, बहाना जीवन है।
चल रहीं चालबाजियाँ उधर अपने हित में, युग के सुधार का नाम निशाना जीवन है।।
नीतियाँ अधमरीं पड़ीं स्वार्थ के वशीभूत, इस त्याग भूमि पर क्या जाने क्या हवा चली।
भर लिए खजाने लोगों ने कर लूटमार, बढ़ रही निरन्तर और निरंकुश छला- छली।।
मिल रहीं कैदियों को सुविधाएँ जेलों में, निर्भीक घूमते हों अपराधी गली-गली।
लग रहीं अपाहिज सरकारें इन वोटों से, बन रहे दरिन्दे देशभक्त नित बाहुबली।।
वे जियो और जीने दो वाले ध्येय कहाँ, खूँखार ज़िन्दगी अच्छी है यह हवा चली।
हो कष्ट किसी को हमको क्या वह जिए मरे, इस विकट सोच की विद्या फूली और फली।।
लग रही दया की कोख हरी होना घातक, कुछ को करुणा की आवभगत इस तरह खली।
लग उठी रोशनी ही काली जब आँखों को, दिख उठी दुष्ट को दानवता में कनक कली।।
हर ओर बिलखते नौनिहाल बच्चे देखे, अब तलक चीखती बेटी का स्वर मन्द नहीं।
हर रोज बुढ़ापा देख रहा क्यों टुकुर-टुकुर, मेहनत करने के बाद कहीं आनन्द नहीं।।
सड़कों पर बैठे नौजवान को काम नहीं, क्या बात गरीबी से हटते पैबन्द नहीं।
हर ओर बढ़ रही भूख पेट में आग लिए, हर ओर प्यास का घोर शोर तक बन्द नहीं।।
भूखे प्यासे मर गए हजारों वे पुरखे, जिनकी मेहनत को छीन विदेशी पले बढ़े।
स्वाधीन हुए थे बलिदानों के बल पर हम, जिनके लालों के लाल मात्र चातुर्य पढ़े।।
क्या इसीलिए मन मार सहीं थीं पीड़ाएँ, क्या इसीलिए अपराध बिना फाँसियाँ चढ़े।
क्या इसीलिए भोगा था नर्क बिना मर-मर, क्या इसीलिए जेलों से भी काढ़े न कढ़े।।
तो सुनो तोड़ना मर्यादा अब ठीक नहीं, आओ संयम से जिएँ कष्ट सहना सीखें।
किस तरह दूसरों की पीड़ा पर करुणा हो, किस तरह उठाएँ बात स्वयं कहना सीखें।।
हर जाति वर्ग को मान मिले उत्थान मिले, हम स्वार्थ त्याग कर बस्ती में रहना सीखें।
किस तरह बचाएँ स्वतन्त्रता एकता बढ़े, निज मातृभूमि के लिए "प्राण" दहना सीखें।।
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बाल विभाग (चिल्ड्रेन कार्नर)
अपनी कवितायेँ
"भैंस का बच्चा"
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हेमन्त देवलेकर का जन्म जुलाई 1972 में हुआ। इनकी पहली कविता संग्रह 2012 में प्रकाशित हुआ, और "हमारी उम्र का कपास' शीर्षक से राधाकृष्ण से पुनर्प्रकाशित 2023 में.हुई। दूसरा कविता संग्रह ' गुल मकई' 2017 में बोधि प्रकाशन से प्रकाशित हुआ। विभिन्न पत्रिकाओं और ब्लॉग्स पर कविताओं का निरंतर प्रकाशन होता है। नाटकों का लेखन और रूपांतरण और 25 से अधिक नाटकों में गीत लेखन और संगीत सृजन भी किया। ये वागीश्वरी सम्मान, शशिन सम्मान, स्पंदन युवा सम्मान से सम्मानित हैं। सौरभ अनंत के निर्देशन में विहान ड्रामा वर्क्स में रंगकर्म में निरंतर सक्रिय भी हैं।
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भैंस का बच्चा
भैंस का बच्चा
उपेक्षा उसका दूसरा नाम
पहला तो किसी ने दिया ही नहीं
माँ के पीछे - पीछे, गर्दन झुकाये
नगर के वैभवशाली मोहल्लों से,
चमचमाते बाज़ार से जब वह गुज़रता है
एक शर्म उठती देखी है उसके भीतर
जो दुर्गंध बनकर घेर लेती है उसे ।
छटपटाते हुए वह लगभग भागने लगता है
कि ये अपमान भरे रास्ते कट जाएं पलक झपकते
और आ जाये आदिम देहात...
खेतों का सीमांत... और राबड़े वाले तालाब
उन सबमें कितना अपनापन है ।
उसके मन मे जो 'कचोट' है
उसे माँ भूसे के साथ कब का चबा चुकी
पर उसके गले मे हड्डी की तरह अटकी हुई ।
भूख से ज़्यादा विकट है
संकट - पहचान का
इसी त्रासदी के खूंटे से वे बंधे हुए
इसी त्रासदी की सड़क से वे गुज़रते हुए ।
कितना दुखद है
कोई दरवाज़ा खुलता नहीं उसके लिए
किसी खिड़की से आती नही आवाज़
"ले , आ !! आ !! आ !!"
किसी डिब्बे के तलहट की रोटी
नहीं होती किसी भैंस के बच्चे के वास्ते
तो पकवानों भरी नैवेद्य की थाली का
सपना वह क्या देखे ?
उसके भी गलथन
गाय के बछड़े सरीखे मुलायम और झालरदार
तो इन्हें सहलाने के लिए, हाथ आगे क्यों नहीं आते ?
उसे लगा वह किसी युद्ध मे शामिल है
प्रश्न उसे छलनी करने लगे-
ती रेल से फेंक दिए गाँधी की तरह लगा
वह सोचने लगा -
इस देश की आज़ादी का हासिल क्या है ?
मुझे लगा सलाख़ों में क़ैद मंडेला चिड़िया को ढूंढ रहे हों
फिर कुछ देर चुप्पी छाई रही
आकाश पर बहुत घनी स्याह रात फैल गई
अचानक मुझे लगा-चतुर्दिक पसरा यह गहरा काला रंग
भैंस और उसके बच्चे का है
और जैसे वे दुनिया से पूछ रहे हों
"क्या इस रंग की कोई अहमियत नहीं " ??
***"हमारे लिए कोई आंदोलन क्यों नहीं ?"
माँ की आँखों मे बिजली की एक कौंध चमकी
आवाज़ कुछ देर तक आई नहीं
माँ का चेहरा उस वक़्त
चल
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