MAY INTERNATIONAL HINDI ASSOCIATION'S NEWSLETTER
मई 2024, अंक ३५ | प्रबंध सम्पादक: संपादक मंडल
|
|
|
Human Excellence Depends on Culture. The Soul of Culture is Language
भाषा द्वारा संस्कृति का प्रतिपादन
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति परिवार के सभी सदस्यों और हिन्दी प्रेमियों का अभिवादन।
बुद्ध पूर्णिमा एवं रविन्द्रनाथ जयंती की हार्दिक शुभकामनायें प्रेषित करती हूँ।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की विशेष प्रस्तुति हास्य कवि सम्मेलन का कार्यक्रम अमेरिका के महानगरों में २५ कवि सम्मेलनों की काव्य श्रंखला १२ अप्रैल २०२४ से २७ मई २०२४ के बीच आयोजित थे और बहुत अच्छी तरह से संपन्न हुए ।आयोजित कार्यक्रमों की शुरुआत से अंत तक सभी कार्यक्रम खूब शानदार रहे। ज़्यादा जगहों पर पुरी टिकट समय से पहले ही रिज़र्व हो चुकी थीं और हाउस फुल का ऐलान हो चुका था। आशा करती हूँ कि आप सभी अपने शहरों में या आसपास के आयोजन स्थलों पर इसका आनंद लिए होंगें।
मैं सभी शाखाओं और अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के सहयोगी और मित्रों जिन्होंने अपने शहरों में प्रोग्राम आयोजित किया, सबों को उनके प्रयासों के लिये धन्यवाद ज्ञापन करती हूँ। सभी शाखा अध्यक्ष / संयोजक अपने कार्यक्रमों के सचित्र विवरण भिजवाएं जिससे उन्हें पाठकों के साथ साझा किया जा सके ।
मासिक ‘संवाद’ पत्रिका में बालकों और युवा वर्ग को भी जगह देने का प्रावधान है ।बच्चों के द्वारा, बच्चों के लिये और बच्चों के शुभचिंतकों की कलम से लिखी रचनाओं को भी इसमें स्थान दिया जा रहा है। सभी पाठकों से निवेदन है कि इस दिशा में लेखन कार्य करें,अपनी रचनायें भेजें तथा युवाओं को भी प्रोत्साहित कर उनकी रचनायें भी भिजवायें। ईस महीने में युवा कॉर्नर में एक १२ वर्ष की युवा जो नॉर्थ कैरोलिना में रहती है,उसने अपने अनुभव का लिखित विवरण दिया है। उम्मीद करती हूँ कि आप उसे ज़रूर पढ़ेंगे ।
हमारी समिति अभी “seal of biliteracy” पर काम कर रही है और यदि आप इसके लिए अपने शहर में काम करना चाहते हैं या अपने बच्चों के स्कूल में कोशिश कर रहें हैं और सफलता नहीं मिल रही है, तो हम से संपर्क करें और हम आपकी सहायता करने की पूरी कोशिश करेंगें।
‘संवाद’ पढ़कर अपनी प्रतिक्रियाओं को ज़रूर हमें साझा करें। आपकी प्रतिक्रिया आने से सम्पादक-मंडल को अपना कार्य करने में आसानी होगी।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के लिये अगर आप किसी विशेष कार्य के लिए अपनी सेवा अर्पित करना चाहते हैं या हमें अपनी राय देना चाहतें हैं तो निःसंकोच हमें बताने का कष्ट करें।
सहयोग की अपेक्षा के साथ,
धन्यवाद
शैल
डॉ. शैल जैन
राष्ट्रीय अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति २०२४-२५
ईमेल: president@hindi.org
shailj53@hotmail.com
सम्पर्क: 330-421-7528
***
|
|
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति – हिंदी सीखें
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- हास्य कवि सम्मेलन 2024
अमेरिका के महानगरों में 12 अप्रैल से 27 मई तक सफल पूर्वक संपन्न
|
|
|
|
|
२५ कवि सम्मेलनों की काव्य श्रंखला सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। तीनों अतिथि हास्य कवि सैनफ्रांसिस्को हवाई अड्डे से भारत के लिये प्रस्थान करते हुए।
फोटो आलोक मिश्रा, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के पूर्व अध्यक्ष न्यासी समिति एवं हास्य कवि सम्मेलन के प्रमुख सूत्रधार द्वारा मिली।
|
|
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -उत्तर पूर्व ओहायो शाखा
पहले वार्षिक "कम्युनिटी चैंपियन अवार्ड गाला सेलिब्रेशन, इंडिया फेस्ट"
द्वारा आयोजित प्रोग्राम में उत्तर पूर्व ओहायो शाखा की दृश्यता
अप्रैल १३, २०२४
द्वारा: अनुराग गुप्ता
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति की उत्तर पूर्व ओहायो शाखा ने १३ अप्रैल, २०२४ को क्लीवलैंड में 'इंडिया फेस्ट' द्वारा आयोजित प्रथम वार्षिक "कम्युनिटी चैंपियन अवार्ड गाला सेलिब्रेशन, इंडिया फेस्टिवल" क्लीवलैंड, ओहायो में भाग लिया।
इंडिया फेस्टिवल द्वारा आयोजित कम्युनिटी चैंपियन अवार्ड हमारे समुदाय के सबसे प्रभावशाली नेताओं, संस्कृतियों, पीढ़ियों और समुदायों को जोड़ने वाली उपलब्धियों का सम्मान करता है। कार्यक्रम में पुरस्कार समारोह, रात्रिभोज और सांस्कृतिक प्रदर्शन शामिल थे। 'इंडिया फेस्ट' के ईस प्रोग्राम में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -उत्तर पूर्व ओहायो शाखा ने समिति की दृश्यता बढ़ाने के लिए सम्मिलित हुआ।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति उत्तर पूर्व ओहायो शाखा के सदस्यों ने हमारी हिंदी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस प्रदर्शनी में भाग लिया। एक मेज पर हमारी संस्था के पोस्टर, पैम्फलेट और मुद्रित दस्तावेज़ थे। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के कोषाध्यक्ष अनुराग गुप्ता ने शाम ५ बजे से रात्रि ८ बजे तक इस प्रदर्शन मे उपस्थित होकर इस लक्ष्य को सफल किया।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के बारे में हमारी सामग्री और जानकारी प्राप्त करने के लिए 20 से अधिक नये लोग हमारे काउंटर पर रुके। अधिकांश लोग आगामी कवि सम्मलेन कार्यक्रम में उपस्थिति होने के लिए प्रतिबद्ध दिखे, कई व्यक्तियों ने अपने बच्चों के लिए 'इंडिया संडे स्कूल' में दाखिला लेने में रुचि दिखाई और हम पंजीकरण के संबंध में उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क करेंगे। ‘समर इण्डियन हेरिटेज कल्चर कैंप’ के बारे में भी बताया गया, जहाँ बच्चे भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा सीख सकेंगे। ये ३ सप्ताह का कार्यक्रम है, जुलाई ८ से जुलाई २६ तक। ५ से १५ साल के बच्चों का ये कैम्प इंडिया संडे स्कूल के साथ उत्तर पूर्व ओहायो शाखा और चिन्मय मिशन की भागीदारी के साथ हो रहा है।
नार्थ ईस्ट ओहियो शाखा अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति के लक्ष्यों और स्थानीय हिन्दी शिक्षण के प्रोग्रामों को लोगों तक पहुँचाने में सक्षम रही। यह एक बहुत अच्छा अनुभव था और हम भविष्य में भी अपनी हिंदी भाषा को बढ़ावा देने और अपनी नई पीढ़ी में जागरूकता के अवसर के लिए इस प्रकार की प्रदर्शनियाँ रखना जारी रखेंगे।
***
|
|
 |
|
|
|
अंतराष्ट्रीय हिन्दी समिति - नैशविल, टैनिसी शाखा द्वारा
विश्व हिन्दी दिवस के अवसार पर प्रस्तुति
“कथा ज्ञान” ६ जनवरी, २०२४
प्रतिवेदन: पूजा श्रीवास्तव, अध्यक्षा टैनिसी शाखा
|
|
|
विश्व हिन्दी दिवस की सार्थकता हेतु, उसको एक महोत्सव की तरह मनाने के उद्देश्य से अंतराष्ट्रीय हिन्दी समिति ने इस वर्ष 6 जनवरी, २०२४ में कुछ अलग करने का प्रयास किया। इस समिति की ज्यादातर सदस्य महिलाएं हैं, जो एक माँ भी है। वे अपने बच्चों को अपनी मातृ भाषा से ना ही केवल अवगत करवाना चाहती हैं परन्तु यह भी एहसास दिलाना चाहती हैं कि इस भाषा को सीखना हम सब हिंदी भाषियों के लिये कितना महत्वपूर्ण हैं जो अपने देश से इतने जुड़े हुए है कि परदेश में रहकर भी अपने देश की मिट्टी की सुगंध को महसूस कर सकते हैं।
उन्ही में से दो माताओं दीप्ति अगरवाल और पूजा अजमेरा ने इस अवधारणा को सबके समक्ष रखा कि अगर बच्चों को हिंदी भाषा से जान-पहचान करवानी है तो किस्से और कहानियों से बेहतर और क्या हो सकता है? तब उत्पति हुई कथा ज्ञान प्रतियोगिता की, जिसके आधार पर बच्चों ने पंचतंत्र जैसी ज्ञान से परिपूर्ण कहानियों और महत्वपूर्ण ग्रंथो को समझने का प्रयास किया| इस कार्यक्रम की पूरी रुपरेखा बच्चों के लिये इन्ही दोनों सदस्यों ने तैयार की, जैसे कौन-कौन सी कहानियों का चयन होना चाहिए, प्रतियोगिता में क्या-क्या राउंड होने चाहिये इत्यादि।
इस प्रतियोगिता को दो आयु वर्ग में विभाजित किया गया- पहला वर्ग 9 से 15 वर्ष और दूसरा वर्ग 5 से 8 वर्ष का था। इस प्रतियोगिता में लगभग 20 बच्चों ने हिस्सा लिया था और यह प्रतियोगिता ब्रेन्टवुड में एक पब्लिक लाइब्रेरी में हुई थी। प्रतियोगिता को जीतने के तीन राउंड थे- पहला राउंड- शब्दों के सही अर्थों को समझना और उसका जवाब देना, दूसरा राउंड- कहानी में अलग-अलग चरित्र में से कोई एक पात्र का विवरण करना और तीसरा राउंड-कहानी को संक्षेप में बताना और उसका अपनी पसंद का एक अलग अंत बताना और कोई एक पात्र का चित्र बनाना| सभी बच्चों को पाँच कहानियाँ के ऑडियो लिंक पहले ही भेज दिए गए थे ताकि वे उनकी अच्छी तरह से तयारी कर सके।
कथा ज्ञान प्रतियोगिता के लिये कोई टिकट नहीं रखी गयी थी और लगभग 65 लोग इसको देखने के लिये वहाँ पर उपस्थित थे। इस समिति के तीन वरिष्ठ सदस्य डॉक्टर रीटा मिश्रा, श्रीमती सपना त्रिपाठी और श्रीमती नूरी ए जहाँन इस प्रतियोगिता के न्यायाधीश बने|\ .
यह प्रतियोगिता शाखा के सदस्यों की उम्मीदों से कही ज्यादा रोमांचक साबित हुई क्योंकि यह एक अद्वितीय सोच थी| सभी माताओं की उम्मीदों से बढ़कर, बच्चों ने प्रतियोगिता में उत्साहित होकर पूरी तैयारी के साथ, एक दुसरे को बराबर टक्कर दी थी। यह देखकर बच्चों के माता-पिता भी बहुत आनंदित हुए कि उनके बच्चे हिंदी भाषा में रूचि ले रहे है और नए-नए शब्दों का अर्थ सीख रहे है। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और दोनों वर्ग के विजेताओं को गोल्ड ,सिल्वर और ब्रोंज पदक दिए गये| ऐसी प्रयोगिक शिक्षा जो हमारे बच्चों को अपनी मातृ भाषा से मिलवा दे, कम देखने को मिलती है।
***
|
|
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- नैश्विल, टैनिसी शाखा की एक शाम
हिंदी साहित्य की एक अनूठी पेशकश के नाम
जनवरी २७, २०२४
द्वारा - पूजा श्रीवास्तव, अध्यक्षा टैनिसी शाखा
|
|
|
धूप छाँव थिएटर ग्रुप का शानदार नाटक "बाप रे बाप"
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति - टैनिसी चैप्टर ने इस वर्ष हिंदी दिवस के अवसर पर थियेटर ग्रूप को लाने का फ़ैसला किया । नैश्विल में पहले कभी इस प्रकार का नाट्य मंचन नहीं हुआ था ।इसके लिए हमारी टीम ने अटलांटा के नाट्य समूह “धूप छाँव “ से सम्पर्क साधा। धूप छाँव अपने आप में एक अनूठा नाट्य समूह है जो जॉर्जिया के अटलांटा शहर में सन् २००७ में शुरु हुआ । इस समूह की स्थापना संध्या सक्सेना भगत जी ने की है।
नैश्विल शाखा अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के आमंत्रण पर अटलांटा, जॉर्जिया से आयी “धूप और छाँव “थिएटर ग्रुप ने जनवरी २७, २०२४ को एक अनूठी प्रस्तुति की । “धूप छाँव “थीयटर ग्रूप के अत्यंत कुशल और गतिशील 12 सदस्यों वाली टीम ने देड घंटे के इस हास्य एवं हास्यस्पर्शी नाटक को जीवंत बना दिया॥ इसका हर सदस्य हिंदी और साहित्य के रंगों में रंगा हुआ हे । इनमे से एक सदस्य किन्ही कारणो से नहीं आ पाए और उनकी जगह हमारे अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति परिवार के सदस्य पुनीत अजमेरा जी ने ली। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में प्रशंसित व्यंग्यकार और लेखक, पद्मश्री केपी सक्सेना द्वारा लिखित हास्य रत्न “बाप रे बाप”प्रस्तुत किया गया। इस नाटक का कुशल निर्देशन तथा पटकथा लेखन का नेतृत्व संध्या सक्सेना भगत जी ने किया ।अन्य कलाकारों में प्रेमानंद गोस्वामी, नितीश दुबे, सुमना गोस्वामी, आकांशा तिवारी, अनिल भगत, मनीष दुबे, अवधेश भारद्वाज, आशा गुप्ता, सिद्धार्थ गर्ग शामिल थे ।
इस अत्यंत साहित्यिक, सटीक एवं सार्थक रचना और इसकी प्रस्तुति के लिए हम धूप छाँव और इसकी टीम का जितना भी आभार प्रकट करें वो कम होगा । भारत के उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ की पृष्ठभूमि पर आधारित यह नाटक अपने लापता बुजुर्ग पिता की तलाश में एक बेटे द्वारा सामना की जाने वाली कठिनाइयों के इर्द-गिर्द एक कहानी बुनता है। 'बाप रे बाप' सिर्फ एक हास्य नाटक से कहीं अधिक है; यह पारिवारिक रिश्तों की जटिल गतिशीलता को कलात्मक रूप से उजागर करता है। जैसे ही बेटा अपनी खोज पर निकलता है, परिवार की वास्तविक भावनाएँ उजागर होती दिखती हैं, जिसमें प्रेम और चिंता से लेकर छुपी हुई कुंठाओं और अनिश्चहित्ता तक की भावनाओं का मिश्रण प्रकट होता है। हास्यास्पद घटनाओं की श्रृंखला तब शुरू होती हे जब एक मीडिया विज्ञापन में पिता को उसके परिवार से मिलाने वाले को नकद इनाम देने की पेशकश की जाती हे ।
धूप छाँव थिएटर ग्रुप के शानदार नाटक "बाप रे बाप" के आयोजन के लिए हम इंटरनेशनल हिंदी एसोसिएशन (IHA) टेनेसी का हृदय से धन्यवाद और प्रशंसा करते हैं। इसका आयोजन यहाँ के गणेश मंदिर प्रांगण में किया गया ।अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति और उनके स्वयमसेवी कार्यकर्ता के योगदान का इस नाटक की सफलता में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है और इसे हमारे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बनाने में सहायक रहा है। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की हमारी टीम जिसने मंच , ध्वनि नियंत्रण एवं मंत्रण , आतिथ्य , अतिथि आवास उनसे तकल्लुफ़ ना किया जाए तो ये अन्याय होगा । सचिन गर्ग , मुकेश ,श्रुति अग्रवाल ,कार्तिका पालीवाल , प्रेरणा शर्मा ने जहां ध्वनि और मंच का कार्यभार सम्भाला वहीं दृष्टि मीरपुरी, मीनू सेनी ,सीमा वर्मा ,रीता शंकर जी ने आतिथ्या सत्कार! वहीं रीता और रूद्र मिस्रआ जी ऐवम अनिल और नीतू जैन जी ने अथिथियों के आवास का ।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति द्वारा आयोजित इस नाटक ने हिंदी भाषा एवं साहित्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया। हिंदी और साहित्य को इस रूप में अधिक से अधिक प्रचार करने हेतु इस नाटक का प्रवेश शुल्क मात्र $15 रखा गया था। इसे हर उमर के दर्शकों ने हृदयपूर्वक सराहा । नाटक खतम होने पर 160 दर्शकों से भरा सारा प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा । इस प्रकार के कार्यक्रम हमें हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान और आदर विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। नाटक के माध्यम से, विद्यार्थियों और समुदाय के सदस्यों को हिंदी भाषा की शैली, विचारधारा और मूल्यों को समझने और उनका प्रसार करने का एक महत्वपूर्ण मंच प्राप्त होता है। यह हिंदी भाषा और साहित्य की प्रतिष्ठा और प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
इस नाटक के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी स्वयंसेवकों का भी हम हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। आपके अथक परिश्रम, समर्पण और सहयोग के बिना यह नाटक संभव नहीं हो पाता। आपकी सहायता ने हमें नाटक की एक यादगार और सफल प्रस्तुति करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति का योगदान हमारे संगठन के लिए अत्यंत मूल्यवान है, और हम आपकी समर्थन की सदैव सराहना करेंगे। अध्यक्षया - श्रीमती पूजा श्रीवास्तव , उपाध्क्श्या - सीमा वर्मा, महासचिव सचिन गर्ग और सभी वरिष्ठ सदस्यों का तहे दिल से आभार। आपका साथ, उत्साह और प्रेरणा हमें भविष्य में और भी बड़े कार्यों को सफलतापूर्वक करने के लिए प्रेरित करते हैं।
***
|
|
 |
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- नोर्थ केरोलाइना में हास्यकवि सम्मेलन कार्यक्रम
हास्य कवि सम्मलेन, ४ मई, २०२४
द्वारा: प्रिया भारद्वाज : शार्लोट, नॉर्थ केरोलाइना
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति - नॉर्थ कैरलाइना के तत्वावधान में हास्यकवि सम्मेलन कार्यक्रम हिंदूसेन्टर शार्लोट में ४ मई २०२४ को सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। बड़ी संख्या में हिंदी प्रेमी लोगों ने अपना अमूल्य समय निकालकर भावी पीढ़ी के भविष्य और हिंदी के प्रचार हेतु सहयोग दिया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि आदरणीय निमिष भट्ट, हेमंत भाई के द्वारा किया गया। बच्चों के द्वारा भारतीय और अमेरिकन राष्ट्र गान प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात साधना मिश्रा के समूह की बालिकाओं द्वारा शानदार मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया गया और फैशन शो का आयोजन भी किया गया था। पूजा भगत और उनके साथी स्मिता कपूर, विनती, सुनीता, अभिलाषा ठाकुर, स्वाति मिश्रा, चंद्रप्रभा सिंह, साधना मिश्रा, नेहा कत्याल, ने प्रस्रुति किया जिसे देखकर लोग थिरक उठे l
इंतज़ार के पल समाप्त हुए जब कार्यक्रम में हास्य कवि अरुण जैमिनि जी, शम्भू शिखर जी और मुमताज़ जी का आगमन हुआ। इस कार्यक्रम का लुत्फ़ उठाने के लिए लोग बड़ी संख्या में पहुँचे जो विदेश में रहने के बाद, आज भी अपने देश और अपनी मातृभाषा हिंदी से प्रेम करते हैं। जैसे ही अरुण जैमिनि जी और शंभु शिखर जी की हास्य व्यंग और कविताएँ सुनी सभा के लोग मंत्रमुग्ध हो गए। इसके पश्चात सुश्री मुमताज़ जी क़े काव्य पाठ और ग़ज़ल से सभी भावविभोर हो गए। तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गुंजायमान हो गया।
कोई भी सामाजिक कार्य कर्मठ कार्यकर्ताओं के बिना सफल नहीं हो सकता इसी श्रेणी में, तृप्ति तिवारी, श्वेता गुप्ता, आशीष तिवारी, प्रवीण तिवारी, रजनी, मधुमिता प्रकाश जी का नाम विशेष है। सभी स्वयंसेवक श्वेता गुप्ता, स्वाति मिश्रा, प्रवीण जी, सुप्रज्ञ मिश्रा, अंजू अग्रवाल, अपूर्वा चौपड़े, पायल जैन, शिप्रा वर्मा, कपिल वर्मा, अंशिका वर्मा, चन्द्रप्रभा सिह, नेहा वर्मा, श्वेता नीलावर, दीप्ति जी, मुस्कान नरूला, साधना मिश्रा, प्रदीप मिश्रा, शारदा शुक्ला विंती मेहता, कविता, नेहा कत्याल, निशु डागर, सोनाली दर्जी, और अवनीश शुक्ला जी ने अपना विशेष योगदान देकर कार्यक्रम को सफल बनाया। अच्छे स्वयंसेवकों के कारण ही कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित होती है, और सबों को सहृदय धन्यवाद किया गया । विवेक जी, हेमंत अमीन जी और प्रिया भारद्वाज द्वारा सभी स्वयंसेवकों और प्रतिभागियों को अंत में ट्राफ़ी, मेडल्स और सर्टिफ़िकेट्स दिये गये।
इस कार्यक्रम की सूत्रधार श्रीमती प्रिया भारद्वाज ने कहा कि आज की शाम एक और यादगार शाम हो गयी और सभी दर्शकों और भारत से आये कवियों को धन्यवाद प्रेषित कर कार्यक्रम का समापन किया।
***
|
|
|
|
|
अमेरिका में जूनियर हाई स्कूल हिन्दी व भारत की सभ्यता
कार्यक्रम के १६० छात्रों ने
राम जी की घर वापसी को आशीर्वाद दिवस के रूप में मनाया
द्वारा : अरुण प्रकाश, हूस्टन, टेक्सास
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के आजीवन सदस्य
|
|
|
देश के प्रथम औपचारिक जूनियर मिडिल स्कूल पिन ओक मिडिल स्कूल में (Pin Oak Middle School ) हिन्दी व भारत की सभ्यता कार्यक्रम के १६० छात्रों ने राम जी की घर वापसी को “आशीर्वाद दिवस” के रूप में मनाया। टेक्सास के हुस्टन इंडिपेंडेन्ट स्कूल डिस्ट्रिक्ट के "पिन ओक मिडिल स्कूल" में भारत की समृद्ध संस्कृति और सनातन धर्म की शिक्षा दी जाती है। यहां केवल हिंदी में भारतीय संस्कृति कार्यक्रम संचालित होता है। कार्यक्रम कि चर्चा पूरे अमेरिका और भारत में भी रही।
|
|
|
|
|
सुंदरलाल स्मृति न्यास की विचार एवं कवि गोष्ठी संपन्न
द्वारा : डॉ. रामगोपाल भारतीय, मेरठ
|
|
|
‘मेरठ क्रांति दिवस’ और ‘मातृ दिवस’ के शुभ अवसर पर मास्टर सुंदरलाल स्मृति न्यास मेरठ के तत्वावधान में 35 /1 कैलाशपुरी, गढ़ रोड, मेरठ में एक विचार गोष्ठी एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी के आयोजक थे स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार एवं कवि प्रोफेसर वेद प्रकाश बटुक तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री कौशल कुमार, वरिष्ठ कवि ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे पूर्व कमिश्नर और समाजसेवी डॉ आर के भटनागर और गोष्ठी का सफल संचालन गजलकार और कवि डॉ. राम गोपाल भारतीय ने किया। गोष्ठी में शामिल होने वाले अन्य महानुभावों में जनवादी लेखक संघ के महासचिव और प्रगतिशील विचारों के लेखक एडवोकेट मुनेश त्यागी और प्रसिद्ध पत्रकार लेखक और शायर जनाब शाहिद ए चौधरी रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए एडवोकेट मुनेश त्यागी ने 1857 में हुई मेरठ की क्रांति की विस्तार से चर्चा करते हुए बतलाया, कि पूरे भारत में कारतूस पर लगी चर्बी को लेकर सैनिकों में जबरदस्त आक्रोश था। बंगाल में सैनिक मंगल पांडे के आव्हान पर पूरे देश में सभी पलटनों में भारतीय सैनिकों ने कारतूस मुँह से खोलने से मना कर दिया और अंग्रेजों का विरोध किया। इसी समय क्रांतिकारियों की योजना 30 मई 1857 को पूरे देश में अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन शुरू करने की थी। किंतु मेरठ में काली पलटन के श्री माता दीन और अ`न्य सैनिकों ने 9 मई को ही अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। फल स्वरुप 85 सैनिकों को जंजीरों में बाँधकर कोड़े बरसाते हुए जेल तक ले जाया गया जिसे पूरे शहर ने आक्रोशित होकर देखा।
जब शाम को कुछ सैनिक सदर स्थित नगरवधुओं के यहाँ नाच गाना सुनने पहुँचे, तो नगरवधुओं ने उन सैनिकों को चूड़ियाँ भेंट करते हुए लानत दी और कहा कि तुम्हारे होते हुए हमारे सैनिकों को इतनी बेदर्दी से बाँधकर अंग्रेज ले गए और तुम कुछ ना कर सके। उनकी यह बात सैनिकों को लग गई और उन्होंने 10 मई के सुबह सदर स्थित अंग्रेज अफसर की कोठी में घुसकर कर्नल फिनिश को गोली मार दी। उसके बाद तो शहर में जो भी अंग्रेज मिला, उसको पीटा गया या मार दिया गया। यहाँ तक कि नगरवधुओं ने भी अपने कोठों से निकलकर अंग्रेजों के बंगलो में घुस कर जहाँ जो भी अंग्रेज मिला उसको मार गिराया।
इसीलिए 10 मई 1857 की मेरठ क्रांति इतिहास में दर्ज है। अपनी चर्चा में उन्होंने यह भी बताया कि यदि देश में कुछ गद्दार नहीं हुए होते और जाति और धर्म के नाम पर छोटे-बड़े के नाम पर आपस में फूट ना होती तो हमारा देश उसी समय आजाद हो जाता। लेकिन समय से पहले क्रांति शुरू हो जाने के बावजूद आपसी फूट के कारण देश 1947 में आजाद हो पाया। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय हिंदू मुस्लिम साथ मिलकर लड़े थे और संगठित होकर ही अंग्रेजों का सामना कर पाए थे। यहाँ तक कि जिन 85 सैनिकों ने मेरठ में बलिदान दिया, उनमें 53 मुस्लिम सैनिक थे और 32 हिंदू सैनिक। उस समय सभी क्रांतिकारियों ने दिल्ली में बैठे बहादुर शाह जफर को अपना सरदार घोषित किया था।
आज धर्म और जाति के नाम पर हमें सियासत ने लड़वा रखा है और हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को और उनके संदेशों को भूल गए। इसके बाद पत्रकार और लेखक श्री शाहिद ए चौधरी ने मातृ दिवस के उपलक्ष में माँ के महत्व को दर्शाते हुए एक हृदय स्पर्शी और मार्मिक आलेख पढ़ा। उन्होंने बताया कि दुनिया की लगभग सभी भाषाओं में माँ के लिए शब्द ही म से शुरू होता है। हिंदी में माँ, संस्कृत में माता, अंग्रेजी में मदर, फारसी में मादर, स्पेनिस में मादरे, फ्रेंच में मे, इटालवी में मम्मी, जर्मनी में मतेर, चीनी में मकून, रूसी में ममा, बांग्ला में मा। इससे यह सिद्ध होता है कि दुनिया में ममत्व और माँ एक ही है और इसका कोई विकल्प नहीं है।
इसके बाद डॉक्टर रामगोपाल भारतीय ने माँ को समर्पित अपनी एक रचना पढ़ते हुए कहा ,,,
जब दुनिया के सारे रिश्ते हमसे नाता तोड़ चले, पास हमारे बैठी पाई केवल एक हमारी माँ।
बेटों की कड़वी बातें सुन माता का दिल भर आया, दुनिया से तो जीत गई थी पर अपनों से हारी माँ अपनी खातिर कब जीती है कोई भी बेचारी माँ, अमृत देकर विष पीती है देखो कितनी प्यारी माँ।
उनकी इस रचना के पश्चात पूर्व कमिश्नर एवं समाजसेवी डॉक्टर आरके भटनागर ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि आज संस्कारों की कमी हो गई है। समाज में ऐसी भी माँएं है जो अपने बेटों का कत्ल कर रही है। इसका अर्थ यह है कि हम अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने में विफल रहे हैं। हमारा कर्तव्य है कि हम आने वाली पीढियाँ को वह संस्कार दें ताकि वह एक आदर्श माँ बन सके एक आदर्श पिता बन सके।
इसके बाद कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री कौशल कुमार जी ने अपनी माता जी का स्मरण करते हुए अत्यंत मार्मिक वक्तव्य दिया और भावुक होकर बोले कि मैं अपनी माँ के अंतिम दिनों में उनकी सेवा नहीं कर पाया, क्योंकि मैं सर्विस में था और इसका मुझे आज तक मलाल है। उन्होंने माँ शब्द को संसार का सबसे कीमती और आवश्यक शब्द बतलाया। उन्होंने नए रचनाकारों को सलाह दी कि वह गुमनाम साहित्यकारों को ढूँढ़-ढूँढ़ कर उन पर कार्य करें और समाज को एक अच्छी साहित्यिक दिशा प्रदान करें।
अंत में कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर वेद प्रकाश बटुक ने भी अत्यंत भावुक वक्तव्य प्रस्तुत किया और कहा कि यदि हम अपनी माँ और अपने देश को प्यार नहीं कर सकते तो हमारा इंसान होना व्यर्थ है। उन्होंने बताया कि जिन बलिदानियों ने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी उनकी माताओं के लिए हमने क्या किया। अपना दर्द बयाँ करते हुए प्रोफेसर बटुक ने बताया कि शहीद चंद्रशेखर की माँ आखिरी दिनों में गरीबी में कितनी लाचार होकर मरी, यह हम सब जानते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके बड़े भाई मास्टर सुंदरलाल अपनी पेंशन से ₹5 प्रति माह उसे समय शहीद बिस्मिल की माँ को भेजते थे ताकि गरीबी में उसको कुछ मदद मिल सके। अंत में उन्होंने अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए चार पंक्तियों से कार्यक्रम का समापन किया:-
वही सब गजनवी अंदाज होगा
वतन को लूटने का काज होगा
शहीदों ने कभी सोचा नहीं था
उन्हीं के कातिलों का राज होगा
***
|
|
 |
|
|
|
|
|
द्वारा - सुनीता निमिष सिंह
|
सुनीता निमिष सिंह उदयपुर (राजस्थान), भारत से हैं। इनकी आल इंडिया रेडियो एवम 92.7 बिग एफ एम के कार्यक्रम मे भागीदारी रहती है। अन्तराष्ट्रीय मानवधिकार एवम सामाजिक न्याय संगठन (Human Rights and Social Justice Organization) मे उदयपुर इकाई की अध्यक्ष हैं। राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से "ज़िंदगी के रंग" पुस्तक प्रकाशित हुई है। ये दो वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुकी हैंl
|
|
|
|
|
अहसास
अब तो मानो उसे जैसे मेरा इंतजार सा रहता हे। मेरा धीरे से फाटक का खोलना और उसका भाग कर मेरे सामने आ जाना फिर संतोषी आँखों से देख मेरे बैग को खोलने का इशारा करना। मन ही मन उससे मेरा कहना रुक तो सही दम तो लेने दे अंदर तो आने दे। समान रखने दे ऑफिस का दरवाजा तो खोल लू फिर कहीं कुछ तेरे लिए करुँ।
आज तो कुछ ऐसे लगा जैसे पेट की भूख उसकी शांत हे , फिर भी मेरा स्वागत हर रोज की तरह उत्सुकता से किया। आज तो उसने अपने बच्चों को बाहर निकाल मुझे दिखाया मानो कह रही हे अब बच्चे मेरे सुरक्षित से हे। देख लो कैसे हे । अब इनका सिर्फ मेरे दूध से काम नहीं चलेगा कल से मेरे साथ इनका भी तुम्हे कुछ ले कर आना पड़ेगा। यू दूर मेरा खड़ा रहना शायद उसको अच्छा नहीं लग रहा था ।मुझे देखती हुई वह बार बार बच्चों के पास जा दुलार कर जैसे मुझे रिझा रही हो कि अब पास भी आ जाओ जरा देखो तो ।
भूल भी जाओ मेरे पुराने बर्ताव को जब मैंने तुम्हें मेरे बच्चों के पास आने नहीं दिया था ,देखने नहीं दिया था तुम्हारा उस वक्त मेरे तरफ एक कदम बढ़ाना भी मुझे मंजूर न था । क्या करती मेरे एक बच्चे को मेरा ही एक भाई मुंह में उठा कर ले गया , वो अपनी भूख का निवाला बनाना चाहता था । उसने बच्चे को लहूलुहान कर दिया बड़ा संघर्ष कर उसे बचा कर उससे लाई पर उसके प्राण फिर भी न बचा पाई। वो मेरा दौर गुजर गया। बड़ा कठिन दौर था , बहुत बुरा वक्त था मत पूछो कैसे गुजरा । अब सब अच्छा है बहुत अच्छा हे। तुम्हारा रोज आना मेरे लिए कुछ लेना बड़ा बड़ा सुखद हे।
मुझे याद हे वो बे मौसम की अचानक से बहुत तेज बारिश का होना और दिन रात लगातार जोरो से होना। सावन ,भादों में भी ऐसी बारिश नहीं हुई जो अब हो रही थी। सारी झीलें, ताल, तलैया जैसे अपने यौवन पर हो जहाँ देखे वही पानी ही पानी। प्रकृति का रूप ही बदल गया। तीन दिन पश्चात ऑफिस जाना हुआ। पास में काकी सा ने बताया कि तुम्हारे घर में पीछे की साइड एक कुत्तिया ने 3 बच्चे दिए थे। जिन्हें तुम्हारे ऑफिस के बरामदे में शिफ्ट कर दिया है, क्योंकि बारिश बहुत तेज थी। और जैसे ही मैंने गेट खोला सामने बरामदे में महारानी 2 बच्चों के साथ बड़ी सतर्क हुए आराम फ़रमा रही थी । मुझे देखते ही आग बबूला हो गई। उन्हें मेरा एक कदम अंदर आना गवारा नहीं था। बहुत देर तक यूं ही खड़े रहना पड़ा। बड़ी समझा इश के बाद ,, पुचकारने के बाद अंदर आने दिया गया । कहा मैडम जी थोड़ा समझो, ऑफिस हे घर नहीं । कोई भी व्यक्ति आएगा तो बरामदे से गुजर कर ही कमरे में जाएगा ऐसा न करे आप को सपरिवार ,आदर के साथ पीछे की तरफ शिफ्ट कर देते हे। बारिश भी धम चुकी हे मौसम भी साफ हे।
कुछ पल लगा जैसे वो मनन कर रही हो कि मेरी नस्ल से भी कहा सुरक्षित हूं एक बच्चा तो उनकी बलि चड़ चुका है।उनके तैवर कुछ नरम जान उनकी शिफ्टिंग के लिए दो जनों को और बुलाया गया उनके दोनों बच्चों को जुट की बड़ी बोरी में बिठा दिया। दो जनों ने बोरी के चारों कोनों को पकड़ धीरे धीरे ले जाकर शिफ्ट किया।बच्चों को ले जाते वक्त माता जी बच्चों के साथ
|
|
|
|
|
|
|
आहिस्ता आहिस्ता चलती रही और बीच बीच में तो लग रहा था कि वो गुर्रा कर निर्देश दे रही हे आहिस्ता चलो ,बोरी को कस के पकडो। और जैसे अहसास करा रही थी कि अहसान मानो की मेरी जगह तुम्हारे लिए छोड़ कर जा रही हूं ।
कोन कहता हे जानवर नहीं समझते ।समझते भी हे और समझाते भी हे वह अपनी ख़ुशी का अहसास भी कराते हे।जो मैं रोज देखती हूं महसूस करती हूं।आज कल मेरे ऑफिस में इनकी अठकेलिया होती है।
***
|
| |
|
|
|
|
|
|
द्वारा - डॉ. रंजना जायसवाल
|
डॉ. रंजना जायसवाल जी के लगभग 550 राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में कहानी, लेख, व्यंग्य, कविता, बाल कहानी, लघुकथा और संस्मरण प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. रंजना जायसवाल जी को अनेक सम्मानों से सम्मानित किया गया है |
|
|
|
|
|
उसके हिस्से का पेड़
उसके हिस्से का पेड़
कल्पनाओं में है उसके हिस्से का पेड़
जिसमें फूल खिलेंगे उसकी पसन्द के
लदे होएँगे उसकी खिली ख्वाहिशों से
कोई तय नहीं करेगा उसका आसमान
शाखाएँ उन्नत होगी भरपूर
वैसे ही…
जैसे अठखेलियाँ करती हैं नदी की धाराएँ
निकल जाती है बिना किसी रोक-टोक के
अनन्त की तलाश में
पेड़ के बीचों-बीच होगा एक कोटर
जिसमें सुरक्षित होएँगे उसके सपनें
जिन्हें वो शाखाओं के रथ पर सवार कर
एक-एक कर छोड़ देगी
तय करने के लिए
उसके अपने हिस्से का आसमान
कोई मौसम तय नहीं करेगा
पतझड़ और वसंत को
कोई धूप नहीं सुखाएगी
उसकी इच्छाओं को
कोई बरखा नहीं बहाएगी
उसके सपनों को
कोई कुल्हाड़ी काट नहीं सकेगी उसके सपनों को
पर क्या कभी होगा
उसके हिस्से की कल्पनाओं का पेड़…
या फिर बह जाएगा हवा की तरह
झर जाएगा पत्तों की तरह
गुम हो जाएगा ओस की तरह
क्या कभी होगा
उसके हिस्से का पेड़
या फिर रह जाएगी सिर्फ़ एक कल्पना…
***
|
|
|
|
|
|
|
सौरभ सोनी जी का जन्म उदयपुर (राजस्थान), भारत में हुआ। अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में रहते हैं। हिंदी के प्रति गहरी रूचि और कुछ लिखते रहने की इच्छा हिंदी से जोड़े रखती है। इनकी प्रयोग थिएटर ग्रुप न्यू जर्सी और नार्थ कैरोलिना साहित्य मंच पर सक्रिय भागीदारी है। स्विस बैंक में आईटी प्रोफ्रेशनल के रूप में सम्प्रति हैं।
|
|
|
|
|
सपने देखो
सपने देखो, दिन में, रात में,
जागते, सोते, सोचते, उठते, बैठते,
अगर देख सकते हो, तो पा सकते हो।
सपने देखो,
क्यों की इंसान हो!
सपनो के पंख होते हैं,
वो उड़ा के ले जा सकते हैं, आपकी कल्पनाओं को
हौसलों के सुदृढ़ धरातल से ही,
सपनों के हवाई जहाज़ उड़ान भरते हैं।
छू कर आसमां, तूफ़ानों से लड़ने की हुंकार भरते हैं
और जो देख न सको, उसको दिखाने की ललकार करते हैं
सपने देखो,
क्यों की उन्हें साकार कर सकते हो !
सपनों को नींद की दरकार नहीं,
सपनों को दर्द से सरोकार नहीं,
सपने किसी परिधि से बाधित नहीं,
सपने ऊँचाई, गहराई से भयभीत नहीं,
सपने बचपन, जवानी, बुढ़ापे के मोहताज नहीं
सपने समंदर के तूफ़ां से डगे नहीं
सपने दुनिया की रीत-रिवाज़ो के परे कहीं।
सपने देखो,
क्यों की किसी और ने नहीं देखे!
सपने पहचान नहीं ख़याली पुलावों के,
सपने आवाज़ नहीं थोथे बर्तनों की,
सपने किसी शेखचिल्ली के सपने नहीं,
सपने किसी सौदागर के सौदे नहीं|
सपने देखो,
क्यों की जागृत अनंत को नहीं देख सकते।
सपने फलते फूलते हैं
सपने अम्बानी बनाते हैं
सपने अपने होते हैं
सपने देखो,
क्यों की सपनों के धागों से हकीकत बुन सकते हो
सपनों की दुनिया ना बसाओ,
पर सपनों से अपनी दुनिया हसीं बनाओ,
सपनों की मंजिल से अपनी मंजिल मिलाओ
सपनों में, सपनों का सपना बुन लाओ
सपनों के सागर से मोती चुन लाओ|
सपने देखो,
क्यों की देख सकते हो!
मुर्दा बन कर तो सपने में आओगे
सपने देखो, क्यों की ज़िंदा हो!
***
|
|
|
बाल विभाग (किड्स कार्नर )
अपनी कलम से
“एक सफर “गिरगिट” नाटक के लिए”
द्वारा : सैयाती नयन, १२ साल, नॉर्थ कैरोलिना
|
|
|
|
|
|
|
द्वारा : सैयाती नयन, उम्र १२ साल
|
सैयाती नयन एक 12 साल की लड़की है जो एक उत्साही पाठक हैं और अपने मनपसंद किस्से और कहानियाँ पढ़ने में अत्यधिक रुचि रखती है। वह एक पेशेवर नृत्यांगना हैं जिन्होंने 10 साल की उम्र में भरतनाट्यम में अरंगेत्रम प्राप्त किया और अपने नृत्य स्कूल में सबसे कम उम्र में यह उपाधि प्राप्त की। वह भारतीय इतिहास और पौराणिक कथाओं में बहुत रुचि रखती हैं और इस साल हिंदी में पढ़ने के कौशल को और बेहतर बनाने के लिए उत्साहित हैं। वह पालतू जानवरों से बहुत प्यार करती हैं और उनका हृदय बहुत करुणावान है। सैयाती छोटी-छोटी चीजों से प्रेरित होती हैं और चुनौतियों को स्वीकार करने के लिए तैयार रहती हैं, जैसे इस वर्ष वह दिनकर जी की रश्मिरथी की "कृष्ण की चेतावनी" को याद करने में संलग्न हैं!
|
|
|
|
|
एक सफर “गिरगिट” नाटक के लिए
एक भारतीय नाटक के लिए न्यू जर्सी की यात्रा का मेरा अनुभव कुछ ऐसा था जिसका मैंने भरपूर आनंद लिया। जिस नाटक में मैंने भाग लिया उसका नाम “गिरगिट” है। गिरगिट की रचना रूस के एंटोन चेखव ने की थी।
गिरगिट उस तरीक़े के बारे में है जिसमें इंसान अपने पर्यावरण के अनुकूल ढलने के लिए बदलाव करता है। जीवित रहने के लिए वे ऐसा करता है। कहानी एक ऐसे बच्चे के बारे में है जो बाज़ार में खो जाता है और फेरीवालों और पुलिस अधिकारी सहित अपने आस-पास के लोगों की हरकतों से आसानी से प्रभावित हो जाता है।
जब निर्देशकों ने मुझसे पूछा कि क्या मैं नाटक में शामिल होना चाहती हूं, तो मुझे नहीं पता था कि क्या कहूं। सह-निर्देशक ने मेरी माँ की अपेक्षाओं को पूरा करने के डर से मेरी मदद की, जो एक अद्भुत अभिनेता हैं। निःसंदेह, यह सब मेरे दिमाग में था। लेकिन निःसंदेह, अभी भी एक समस्या थी। मेरा एक हिस्सा हाँ कहना चाहता था, लेकिन मेरा दूसरा हिस्सा डरा हुआ था। बचपन में मैं हमेशा हिंदी बोलने की कोशिश करती थी। जब मैं अमेरिका में थी तो मुझे हमेशा हिंदी बोलने में सहजता महसूस होती थी, लेकिन जब हम भारत गए तो मुझे तुरंत असहजता महसूस हुई क्योंकि मुझे डर था कि लोग मेरे हिंदी शब्दों के उच्चारण के बारे में क्या कहेंगे।
जब मैं भारत में अपने रिश्तेदारों के घर जाती थी तो हिंदी बोलने की कोशिश करता थी। इसका अंत हमेशा यह होता कि वे मुझ पर हँसते और कहते कि मैं प्यारी हूँ। लेकिन उस समय, मैं 6 साल की थी। मुझे समझ नहीं आया कि वे क्यों हँस रहे थे। मुझे लगा कि वे मेरा मज़ाक उड़ा रहे हैं। यह इस बात का एक बड़ा हिस्सा है कि मैं अब अक्सर हिंदी क्यों नहीं बोलती और यह भी कि मैं नाटक में शामिल होने में बहुत झिझक रही थी क्योंकि इसमें हिंदी भाग थे। कभी-कभी, मैं अपने सह-अभिनेताओं को भी वैसा ही व्यवहार करते हुए देखती थी, लेकिन मैंने जाना जारी रखा क्योंकि मुझे एहसास हुआ कि मैं हर किसी से प्रभावित नहीं हो सकती।
मेरी माँ ने विशेष रूप से ऐसे समय में मुझे एक तरफ ले जाकर और मेरे उच्चारण को ठीक करने में मदद करके मेरी मदद की क्योंकि दृढ़ता जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज है।
कुछ समय पहले जब मेरे भरतनाट्यम गुरु ने मुझसे कहा था कि मैं अपना अरंगेत्रम कर सकती हूँ, तो लोगों ने मुझ पर नाराजगी जताई क्योंकि उन्हें लगा कि मैं मंच पर चार घंटे तक नृत्य नहीं कर पाऊँगी। लेकिन मैंने अपनी बहन की मदद से अपना अरंगेत्रम पूरा किया क्योंकि वह हर स्थिति को मज़ेदार बनाती है, चाहे कोई भी स्थिति हो। वह निश्चित रूप से मेरे प्रदर्शन का मुख्य आकर्षण था। हार मानने के बीच दृढ़ता हमेशा सही विकल्प है। ऊपर उठने के लिए, आपको लोगों को गलत साबित करना होगा और उन्हें दिखाना होगा कि आप कठिन काम भी कर सकते हैं।
इस नाटक के दौरान नॉर्थ कैरोलिना से न्यू जर्सी तक यात्रा करना कई चुनौतियों में से एक था, लेकिन मुझे इन सभी बाधाओं पर काबू पाना पसंद था क्योंकि इससे मेरे अनुभव को विकसित करने में मदद मिली।
मसलन, नाटक हिंदी में था. हिंदी मेरी पहली भाषा नहीं है और इसलिए, मुझे हर शब्द का उच्चारण सीखने में संघर्ष करना पड़ा। हालाँकि मेरे पास ज्यादा लाइनें नहीं थीं, फिर भी मुझे बहुत रोना पड़ा, इसके कारण मेरी भूमिका बेहद कठिन थी। मुझे अपनी पूरी भूमिका के दौरान लगातार रोना पड़ा और ख़त्म होने के बाद मुझे याद आया कि मेरा गला दुख रहा था क्योंकि मैं कितनी देर तक रोई थी।
मुझे इस नाटक में भाग लेना अच्छा लगा क्योंकि मुझे हमेशा से ही प्रदर्शन करना पसंद रहा है। मुझे मंच पर कदम रखने का एहसास और प्रदर्शन शुरू करने से पहले ऊर्जा का प्रवाह बहुत पसंद है। मैं कलाकारों और रचनात्मक कलाकारों की युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हुए सम्मानित महसूस कर रही हूँ।
नॉर्थ कैरोलिना से न्यू जर्सी तक यात्रा करना निश्चित रूप से मेरे अनुभव का सबसे सुखद हिस्सा नहीं था। कार की यात्रा लंबी और दर्दनाक थी क्योंकि सभी पड़ावों के साथ यात्रा लगभग 10 घंटे की थी। अपना सारा सामान लेने के लिए हमें दो कारें लेनी पड़ीं। एक प्रॉप्स के साथ और एक लोगों के साथ। प्रॉप्स को कार में लोड करने में हमें लगभग 2 घंटे लग गए। हमें कार में सामान लादने और समय पर नॉर्थ कैरोलिना वापस पहुँचाने के लिए सुबह जल्दी उठना पड़ता था। तो मैं कहूँगी कि यात्रा करना मेरे अनुभव का सबसे अच्छा हिस्सा नहीं था।
दूसरी चुनौती स्क्रिप्ट याद रखने की थी। हमें यह सुनिश्चित करना था कि हर कोई तालमेल में हो और हमारे अगले कार्यों के लिए कई संकेत हों। यह शायद सबसे कठिन हिस्सा था. हमें नृत्यों की कोरियोग्राफी करनी थी और गाने लिखने थे। नृत्यों और गीतों के लिए सभी को एक ही सतह पर लाना कठिन था क्योंकि हर किसी की लय की समझ अलग होती है। हमारे लिए नाटक के प्रवाह को जारी रखना भी कठिन था क्योंकि कभी-कभी कोई अपनी पंक्तियाँ भूल जाता था और फिर प्रवाह को बर्बाद कर देता था और बाकी सभी को भ्रमित कर देता था। बेशक, इस चुनौती पर काबू पाना अभ्यास से आया। अंत में, हर कोई ट्रैक पर थी और सभी एक ही सतह पर थे।
एनजे की यात्रा के दौरान, हालाँकि हम सभी कार में ठूँस-ठूँस कर भरे हुए थे, यात्रा के दौरान हमने दिलचस्प बातचीत की और संगीत सुना। अभ्यास के दौरान हमें मजा आया जहाँ हम सभी एक साथ आते थे और रिहर्सल करते थे। हम साथ में नाश्ता करेंगे और चाय पियेंगे। हम साथ में नाश्ता करते और चाय पीते इन सभी समस्याओं के बावजूद, इसमें कोई शक नहीं, यह मेरे द्वारा किया गया सबसे मजेदार काम था।
एक बहुत ही सकारात्मक बात जो मैंने देखी वह सभी कलाकारों का स्नेह और समर्थन था। हर किसी ने हर कदम पर मेरी मदद की और हमेशा मेरे लिए चीजों को बहुत आसान बनाया।
कुल मिलाकर, मुझे यह नाटक बहुत पसंद आया और तमाम चुनौतियों और बाधाओं के बावजूद मैंने इसके हर मिनट का आनंद लिया।
(विचारों को हिंदी में अनुवादित करने में सैयाती नयन की माता जी श्रीमती मयूरी रमन नयन ने सहायता की)
***
|
|
|
|
|
पाठकों की अपनी हिंदी में लिखी कहानियाँ, लेख, कवितायें इत्यादि का
ई -संवाद पत्रिका में प्रकाशन के लिये स्वागत है।
|
|
|
|
|
"प्रविष्टियाँ भेजने वाले रचनाकारों के लिए दिशा-निर्देश"
1.रचनाओं में एक पक्षीय, कट्टरतावादी, अवैज्ञानिक, सांप्रदायिक, रंग- नस्लभेदी, अतार्किक
अन्धविश्वासी, अफवाही और प्रचारात्मक सामग्री से परहेज करें। सर्वसमावेशी और वैश्विक
मानवीय दृष्टि अपनाएँ।
2.रचना एरियल यूनीकोड MS या मंगल फॉण्टमें भेजें।
3.अपने बायोडाटा को word और pdf document में भेजें। अपने बायो डेटा में डाक का पता, ईमेल, फोन नंबर ज़रूर भेजें। हाँ, ये सूचनायें हमारी जानकारी के लिए ये आवश्यक हैं। ये समाचार पत्रिका में नहीं छापी जायेगी।
4.अपनी पासपोर्ट साइज़ तस्वीर अलग स्पष्ट पृष्ठभूमि में भेजें।
5.हम केवल उन रचनाओं को प्रकाशित करने की प्रक्रिया कhttp://president@hindi.orgरते हैं जो केवल अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति को भेजी जाती हैं। रचना के साथ अप्रकाशित और मौलिक होने का प्रमाणपत्र भी संलग्न करें।
E-mail to: shailj53@hotmail.com
or: president@hindi.org
contact
330-421-7528
***
|
|
|
|
|
“संवाद” की कार्यकारिणी समिति
|
|
|
|
|
प्रबंद्ध संपादक – संपादक मंडल sushilam33@hotmail.com
सहसंपादक – अलका खंडेलवाल, OH, alkakhandelwal62@gmail.com
डिज़ाइनर – डॉ. शैल जैन, OH, shailj53@hotmail.com
तकनीकी सलाहकार – मनीष जैन, OH, maniff@gmail.com
|
|
|
रचनाओं में व्यक्त विचार लेखकों के अपने हैं। उनका अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की रीति - नीति से कोई संबंध नहीं है।
|
|
|
|
|
 |
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
This email was sent to {{ contact.EMAIL }}You received this email because you are registered with International Hindi Association
mail@hindi.org | www.hindi.org
Management Team
|
|
|
|
|
|
|
|
|
© 2020 International Hindi Association
|
|
|
|
|