MARCH INTERNATIONAL HINDI ASSOCIATION'S NEWSLETTER
मार्च 2025, अंक ४४ । प्रबंध सम्पादक: श्री आलोक मिश्र। सम्पादक: डॉ. शैल जैन
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Human Excellence Depends on Culture. The Soul of Culture is Language
भाषा द्वारा संस्कृति का प्रतिपादन
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति परिवार के सभी सदस्यों एवं संवाद के पाठकों का अभिनंदन।
होली, रमादान, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एवम् विश्व जल दिवस की शुभकामनाएँ ।
अ.हि.स. का द्विवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन उत्तर पूर्व ओहायो के रिचफील्ड शहर में मई २ से ३ इस वर्ष आयोजित है । कृपया ये दिन आप अपने कैलेंडर में चिह्नित कर लें। कन्वेंशन का मूल विषय है “नव पीढ़ी, डिजिटल युग में हिंदी और भारतीय संस्कृति”।पंजीकरण खुला है QR कोड स्कैन आपको पंजीकरण साइट पर ले जाएगा। आप सबों से अनुरोध है कि आप अपना सहयोग दें और कार्यक्रम में आकर इसे सफल बनायें ।
यह कार्यक्रम ३ सत्रों में हो रहा है। सत्र १– मई २, शुक्रवार की रंगीन शाम। ये शाम रात्रिभोज, उद्घाटन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और शाखाओं की जानकारी का है। सत्र २– मई ३, शनिवार दिन में ९ से ४ तक है। शैक्षिक संगोष्ठी हमारे अधिवेशन के मूल विषय पर केंद्रित है।सत्र ३– मई ३, शनिवार शाम अनोखा और रस भरा कवि सम्मेलन गीतकार, व्यंग्यकार और हास्य के साथ।
हमारी समिति युवाओं को जोड़ने का प्रयास विभिन्न कार्यक्रमों के द्वारा कर रही है ।
द्विवार्षिक अधिवेशन का मूल विषय भी इन्हीं प्रयासों के साथ रखा गया है । पाठकों से विशेष अनुरोध है कि वे अपने जानने वाले और परिवार के युवकों को इस अधिवेशन से जोड़ें ।
मुझे विश्वास है कि आप सभी हमारे इस लक्ष्य को साकार करने के लिए सक्रिय रूप से योगदान देंगे। आपकी उपस्थिति, अधिवेशन में साथ मिल कर काम करना और आर्थिक योगदान सभी की आवश्यकता है ।आइए, हम सभी मिलकर हिंदी और भारतीय संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लें और युवाओं को साथ ले आगे बढ़े ।
पिछले ४५ वर्षों से, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति ने अमेरिका और अन्य समुदायों में हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण , पुनर्जीवित करने, आगे बढ़ाने और युवाओं को जोड़ने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अमेरिका में युवा समिति बनाने का प्रयत्न किया जा रहा है । विश्वविद्यालयों और हाई स्कूल में भी युवा समिति स्थापित करने की कोशिश जारी है ।
ये युवा समितियां भारतीय संस्कृति को विविधता के साथ सभी देसों के युवाओं में विकसित करने और सतत विकास और शांति निर्माण में भी सहयोग देगी और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए युवाओं को तैयार करेगी । यह कार्यक्रम दर्शाता है कि कैसे अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति अपनी दूरदृष्टि को क्रियान्वित करके आशा और परिवर्तन की लहर युवाओं में उत्पन्न करती है।
समिति के कोई विशेष कार्य करने के लिए यदि आप अपनी सेवा अर्पित करना चाहते हैं तो निसंकोच हमें बताने का कष्ट करें। आपके विचारों और सुझाओं का हमेशा स्वागत है।
धन्यवाद,
शैल जैन
डॉ. शैल जैन
राष्ट्रीय अध्यक्षा, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (2024-25)
ईमेल: president@hindi.org | shailj53@hotmail.com
सम्पर्क: +1 330-421-7528
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- आगामी कार्यक्रम
२२ वाँ द्विवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन २०२५
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति का २२ वाँ द्विवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन
दिन -मई २ (शुक्रवार) एवं ३ (शनिवार ), २०२५
स्थान - रिचफील्ड, ओहायो
आतिथ्य – अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की उत्तरपूर्व ओहायो शाखा
अधिवेशन का मूल विषय – 'नई पीढ़ी, डिजिटल युग में हिंदी और संस्कृति'
Theme -'New Generation, Hindi and Culture in the Digital age'
पंजीकरण खुला है QR कोड स्कैन आपको पंजीकरण साइट पर ले जाएगा। Registration is open QR Code scan will take you to Registration Site,
नोट - अधिवेशन में सारी गतिविधियाँ मूल विषय के लक्ष्य की पूरक रहेंगी ।
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नई पीढ़ी के बहुप्रतिष्ठित हास्य कवि तथा व्यंगकार अभिनव शुक्ल हिन्दी काव्य मंचों पर अपने गुदगुदाते घनाक्षरी छंदों के लिए पहचाने जाते हैं। अपने आसपास घटने वाली घटनाओं से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर बड़ी बेबाकी से कसे उनके व्यंग बाण किसी पत्थर का भी दिल आर पार करने की क्षमता रखते हैं। अभिनव की रचनायें देश-विदेश की अनेक पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। अनेक अवसरों पर रेडियो और टेलीविज़न पर उनका काव्य पाठ प्रसारित हो चुका है। हिन्दी कविता के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम कवितांजलि में भी अभिनव के संचालन को श्रोताओं नें पसंद किया है। अभिनव बैंगलोर से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र 'दक्षिण भारत' के नियमित व्यंग स्तंभकार भी रहे हैं। वे ई-विश्वा (अमेरिका), हिन्दी चेतना (कनाडा), कवितांजलि (बैंगलोर) समेत अनेक पत्रिकाओं के संपादक मंडल में रह चुके हैं। हिन्दी ब्लाग जगत में 'निनाद गाथा' नमक चिट्ठे पर फरवरी २००६ से नियमित लेखन करने वाले अभिनव को अखिल भारतीय साहित्य सम्मेलन (२००१) गाज़ियाबाद में 'काव्यश्री' की उपाधि से भी सम्मानित किया जा चुका है। सन २००५ में अभिनव नें प्रख्यात गीतकार सोम ठाकुर और वरिष्ठ कवि उदय प्रताप सिंह के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के १४ नगरों में हुए कवि सम्मेलनों में अपनी चुटीली कविताओं तथा प्रबुद्ध संचालन प्रतिभा से हजारों प्रवासी साहित्य प्रेमियों को चमत्कृत किया था। अभिनव आजकल सैन एन्टोनिओ नगरी में रहते हैं तथा अपनी कविताओं की सुगंध सारे संसार में बसे भारतीयों के हृदय हृदय में बिखेर रहे हैं। पेशे से अभिनव एक सॉफ्टवेर इंजीनियर हैं|
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लखनऊ के अखिल भारतीय कविता पीठ से ‘महादेवी वर्मा’ सम्मान से सम्मानित अर्चना पांडा बे-एरिया अमेरिका की एक सुविख्यात कवयित्री हैं। श्रृंगार रस में माहिर अर्चना अपनी मधुर वाणी और प्रेम गीतों के लिए प्रख्यात हैं। यह देश-विदेश के कई कवि सम्मेलनों मे भाग ले चुकी हैं और मंच पर गोपाल दास नीरज, मुन्नवर राना, कुँवर बैचेन, और कुमार विश्वास जैसे नामी कवियों के साथ अपनी कविताओं का प्रस्तुतिकरण कर चुकी हैं। अर्चना इन्टरनेट के ज़रिये बहुत प्रसिद्ध हैं। आपकी कविताओं के विडियो को यू-ट्यूब पर दस लाख से अधिक लोगों ने देखा और सराहा है। विश्व हिन्दी सम्मलेन २००७ न्यूयार्क में विमोचित ‘सृजनी’ तथा ‘काव्य-अर्चना’ नामक सीडी, और पुस्तकों में ‘तुम्हारी अर्चना’ और ‘सृजनी’ आपके प्रकाशित रचना संकलन हैं। शीघ्र ही इनकी एक और पुस्तक प्रकाशित होने जा रही है। कविता के साथ इनकी गहरी रूचि गायन, वादन, नृत्य, एवं साहित्य में भी है | अर्चना ने कई प्रसिद्ध आयोजनों का संचालन भी किया है | आजकल आप रेडियो ज़िन्दगी 1550 एएम् पर हर रविवार को काव्य कार्यक्रम ‘मैं शायर तो नहीं’ का आयोजन और प्रसारण करती हैं तथा बे-एरिया के कई सामाजिक संस्थानों में हिन्दी पढाती हैं। पेशे से अर्चना एक सॉफ्टवेर इंजीनियर हैं|
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कोलकाता में जन्मे और पले-बढ़े इन्द्र अवस्थी ने हिंदी साहित्य में अपना विशेष स्थान बनाया है। एन आई टी प्रयागराज से कंप्यूटर साइंस में स्नातक, इन्द्र 1995 में अपने परिवार के साथ पोर्टलैंड आ गए। उनके पिता, अरुण प्रकाश अवस्थी, जो कोलकाता के एक प्रसिद्ध कवि और लेखक थे, ने उनके साहित्यिक प्रयासों को बहुत प्रभावित किया। इन्द्र हिंदी संगम, पोर्टलैंड के संस्थापक सदस्य हैं, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में हिंदी भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। उनकी हास्य लेखनी और व्यंग्य को कविता में पिरोने की क्षमता ने उनकी रचनाओं को व्यापक रूप दिया, जिसे खूब सराहना मिली। कविता के अलावा, इन्द्र नाटकों और स्क्रिप्ट लेखन और निर्देशन में भी माहिर हैं, जो अक्सर सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश डालते हैं। हिंदी साहित्य के प्रति इन्द्र की प्रतिबद्धता परामर्श, साहित्यिक कार्यक्रमों के आयोजन और हिंदी प्रेमियों के लिए एक समुदाय बनाने तक विस्तारित है। उनके प्रयासों ने उन्हें विभिन्न साहित्यिक समाजों और सांस्कृतिक संगठनों से मान्यता दिलाई है। इन्द्र अवस्थी की यात्रा साहित्य की शक्ति और सांस्कृतिक संरक्षण के महत्व का प्रमाण है। अपनी कविता, हास्य लेखन और साहित्यिक समुदाय में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से, उन्होंने हिंदी भाषा और संस्कृति के प्रसार पर एक स्थायी प्रभाव डाला है, चाहे भारत में हो या विदेश में। उनकी कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो शब्दों की शक्ति के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखना चाहते हैं।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- टेनेसी शाखा रिपोर्ट
कार्यक्रम -- संगम
16 फरवरी 2025
लेखक - कोमल जोशी एवं निधि अग्रवाल
द्वारा : सीमा वर्मा, शाखा अध्यक्षा
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अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति की टेनेसी शाखा ने एक विशेष संध्या का आयोजन किया, “संगम”, जिसमें गीत, कविताएँ और वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनियों को शामिल किया गया। ये आयोजन ब्रेंटवुड लाइब्रेरी, नैशविल में १६ फ़रवरी, २०२५ को हुआ। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्धि को उजागर करना था और साथ ही एक प्रयास था, लेखकों को सम्मानित करना।
एक लेखक शब्दों को इकट्ठा करता है और एक सुंदर काव्य बनाता है, और इसमें सुर और ताल जोड़ते ही एक संगीतमई रचना बन जाती है, जो हमारे दिल को छू लेती है। श्रीमती पूजा श्रीवास्तव और श्रीमती प्रीति गज्जर जी ने इस कार्यक्रम के रचनात्मक समन्वयक के रूप में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
टेनेसी चैप्टर की टीम से कार्तिका पालीवाल और शिखा कर्णवाल ने भवन सज्जा, श्वेता सैनी ने कार्यक्रम का संचालन और सचिन गर्ग ने व्यवस्थापक का कार्यभार संभाला। टीम के अन्य सदस्य, सचिन गुप्ता, एडम, तरुण सैनी, प्रेरणा शर्मा, कोमल, निधि अग्रवाल पुरे उत्साह से कार्यक्रम को व्यवस्थित और निष्पादित करने में सहायक रहे। टेन्नेस्सी चैप्टर की टीम से श्वेता सैनी ने कार्यक्रम का संचालन बखूबी संभाला। हमारी साथी, मुक्ता शर्मा, ने अपनी स्वरचित कविता के रूप में "संगम" का परिचय दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ श्री प्रेम दीक्षित जी ने किया। हाल ही में भारतीय दूतावास, वॉशिंगटन और अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति द्वारा आयोजित हिंदी भाषण प्रतियोगिता में हमारे शहर की अंतरा वैष्णवी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था। समिति के वरिष्ठ सदस्य श्री अशोक जी द्वारा अंतरा को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में आए सभी अतिथि कलाकारों का भी अभिनंदन किया गया।
सम्मानित गायक श्री कल्याण राम जी, श्रीमती रोज़ी रॉय और श्रीमती प्रीति गज्जर जी की मधुर आवाज़ों को साथ मिला समिति की अध्यक्षा श्रीमती सीमा वर्मा का जिन्होंने कविता अनुवाचन की बागडोर सहजता के साथ सँभाली। हारमोनियम पर थे श्री शार्दुल राणे, साथ ही साथ श्री राजीव तोंडे सितार पर और उनकी अत्यंत प्रतिभाशाली बेटियों, आनंदी और नारायणी का भी वाद्य यंत्रों पर सहयोग प्राप्त हुआ। श्री शफीक और श्री ज़ायद जी ने इस कार्यक्रम में अतिथि संगीतकारों के रूप में शामिल होकर एक विशेष संगीत जुगलबंदी का प्रदर्शन किया।
गीतों एवं काव्यों का एक अनूठा संगम जिसमें सभी श्रोतागण आनंदित होते रहे।सभी फनकार एक से बढ़कर एक सुरीले मोती संगम की मधुर माला में पिरोते जा रहे थे और तालियों का सिलसिला चलता जा रहा था।
यह आयोजन हिंदी भाषा, साहित्य और हिंदुस्तानी संगीत को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। श्रोताओं ने इस प्रस्तुति की भूरी भूरी प्रशंशा की और भविष्य में ऐसे और आयोजनों की आशा जताई।
भारत में हो रहे महाकुंभ संगम की ही तरह, यह संगम भी विभिन्न सुरों, शब्दों और धुनों का पावन मिलन रहा । एक संगीतमय यात्रा जिसमें भावनाओं की गंगा और शब्दों की धारा ने सभी को भाव-विभोर कर दिया।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति - शार्लोट, रिपोर्ट
"विश्व हिन्दी दिवस समारोह", शार्लोट, नार्थ केरोलाइना
दिनांक: २ फ़रवरी, २०२५
द्वारा : प्रिया भारद्वाज, संयोजक शार्लोट, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति
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हिंदी भाषा को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है। "विश्व हिंदी दिवस" के उपलक्ष्य में कार्यकम का आयोजन हिन्दू सेन्टर विहार , शार्लोट, नॉर्थ कैरोलीना, यू.एस.ए.के सभागार में किया गया । श्रीमती प्रिया भारद्वाज के संयोजन एवं संचालन में ‘विश्व हिन्दी दिवस’ के परिप्रेक्ष्य (perspective) में सभी के सहयोग और प्रेम से सफलतापूर्वक 2 फरवरी , 2025 अपराह्न 3:30 प्रारम्भ होकर शाम 7:00 तक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। आदरणीय सुरेन्द्र पटेल, श्री हेमंत अमीन , श्री प्रफुल्ल मेहता , श्री अशोक मेहता,श्रीमती मालती मेहता , श्री विवेक वेनुमुरि एवं श्रीमती अंजू अग्रवाल के द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया । तत्पश्चात शॉर्लट, उत्तरी कैरोलिना से श्रीमती प्रिया भारद्वाज ने ‘विश्व हिन्दी दिवस’ के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि ‘विश्व हिन्दी दिवस’ की शुरुआत १० जनवरी, १९७५ को नागपुर अधिवेशन में श्रीमती इंदिरा गाँधी की अध्यक्षता में की गई और तभी से ‘विश्व हिन्दी दिवस’ मनाया जा रहा है।
कार्यक्रम की शुरुआत में बच्चों द्वारा भारतीय एवं अमेरिका का राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया और इसके साथ ही हमारे नन्हे कलाकारों में आशी आर्या के (भरतनाट्यम), तोषी शर्मा के बाल कलाकारों की शानदार प्रस्तुति "टुकुर टुकुर" ने सभी को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम के अगले पड़ाव में स्मिता पंचलंगीया के नृत्य एवं दिव्या त्रिपाठी की "सरस्वती वंदना" ने सबको सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। हमारे अन्य कोरियोग्राफर स्वाति अग्रवाल के बच्चों द्वारा ‘हिन्दी भाषा है राष्ट्र भाषा’ एवं ‘देशभक्ति’ पर बहुत ही शानदार नृत्य की प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। आशीष कुमार के देशभक्ति से ओतप्रोत गीत ‘होठों पर सच्चाई रहती है’ ने सभी श्रोताओं के मन में देशभक्ति की भावना जागृत कर दी। श्रीमती साधना मिश्रा के नृत्य को देखकर दर्शकों का मन मयूर सा नाच उठा। राकेश शेषन जी के कर्णप्रिय गीत "रहे ना रहे हम" ने सभी को मुग्ध कर दिया ।कोरियोग्राफर श्रीमती स्मिता पंचलंगिया का नृत्य देखकर संपूर्ण हॉल तालियों की गड़गड़ाहट के साथ गुंजायमान हो उठा।
बच्चों के बौद्धिक विकास और हिन्दी भाषा के प्रति लगाव विकसित करने के लिए वर्कशाप (कार्यशाला) का आयोजन श्री करम बत्रा के मार्गदर्शन में किया गया। श्रीमती नेहा वर्मा और स्वाति मिश्रा के मार्गदर्शन में पेटिंग वर्कशाप (कार्यशाला) का आयोजन किया । सभी बच्चों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। श्री करम बत्रा, नेहा वर्मा और प्रिया भारद्वाज की आर्ट गैलरी ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
कार्यक्रम के मध्य में कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें हमारे सभी कवियों ने अलग अलग शीर्षकों पर कविता सुनाई। अंजू अग्रवाल ने ‘माँ’ पर कविता पढ़ी, जो "जुदाई"पर आधारित थी। श्वेता गुप्ता ने "कवि की दुविधा" पर अपनी भावनाएं गाकर बताई। प्रवीण तिवारी जी ने "ईश्वर और आध्यात्म" पर अपने भाव व्यक्त किये । तोषी शर्मा ने "प्रेम" पर आधारित कविता सुनायी , एवं कड़ी को आगे बढ़ाते हुए तृप्ति तिवारी ने "बसंत ऋतु" पर कविता सुनाई और सबका मन मोह लिया। आशीष तिवारी की "नव वर्ष" पर कविता से सभागार तालियो से गूंज उठा। कवि सम्मेलन के अंत में प्रिया भारद्वाज की कविता" मन का दर्पण" ने सभी को भाव विभोर कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में भारतीय त्याहारों पर आधारित परिधान मे नाट्यय प्रस्तुति (फैशन शो) का आयोजन भी किया गया जिसका मुख्य विषय "भारत के त्योहार "था,जिसमें सभी महिलाओं ने हमारे त्योहारों को अपनी रंग बिरंगी भारतीय वेशभूषा के साथ प्रस्तुत किया और सभी दर्शकों का मन मोह लिया ।
कार्यक्रम के दौरान सभी के लिए अल्पाहार की भी व्यवस्थता की गई थी। समिति के द्वारा कार्यक्रम का समापन अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति समिति नॉर्थ केरोलिना, से श्रीमती प्रिया भारद्वाज के धन्यवाद ज्ञापन द्वारा किया गया। उन्होंने सभी कलाकारों को धन्यवाद दिया, साथ ही सभी कार्यकर्ताओं जिन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में तन-मन-धन से अपना सहयोग दिया ,उनको भी धन्यवाद किया। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के सभी सदस्यों को उनके सहयोग के लिये और सभी दर्शकों के प्रति भी आभार प्रकट किया।
इस अवसर पर हमारे सभी स्वयंसेवकों, श्वेता गुप्ता, तृप्ति तिवारी , प्रवीण तिवारी ,श्वेता गुप्ता , राम आर्या ,रजनी आर्या , प्रियंका वर्मा, प्रियंका हृदयंके, कपिल वर्मा, क्षिप्रा वर्मा, सुरेन्द्र हरिनखेङे, सुप्रज्ञ मिश्रा , स्वाति मिश्रा , साधना मिश्रा, प्रदीप मिश्रा, आशीष तिवारी ,चारू तिवारी ,अभिलाषा ठाकुर ,स्वाति बंसल ,सौरभ बंसल,,आलोक दवे,, दीप्ति तिवारी , आशिमा सचदेवा, विक्की सचदेवा ,प्रसन्ना ,निधिशर्मा ,जितेंद्र रघुवंशी, मधुमिता रघुवंशी , मधुमिता शर्मा , प्रकाश शर्मा, श्वेता सोनी,स्वाति शर्मा ,किनसुख आदि का योगदान काफी सराहनीय रहा।
कार्यक्रम का समापन पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र के साथ किया गया। यह कार्यक्रम मीडिया में एक ही दिन में तीन बार प्रसारित किया गया ।
हिन्दी के सम्मान में ३ पँक्तियाँ इस कार्यक्रम को पूर्ण करती है:
हम सब का अभिमान है हिंदी,
भारत देश की शान है हिंदी
जय हिंद ,जय भारत !
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति - इंडियाना शाखा का प्रतिनिधित्व
भारत के महावाणिज्य दूतावास, शिकागो में विश्व हिंदी दिवस आयोजन
द्वारा : आदित्य शाही, इंडियाना शाखा
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शिकागो में स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने 1 फरवरी 2025 को विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर एक प्रमुख कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर चर्चा करना था। कार्यक्रम में हिंदी विद्यालयों के छात्रों द्वारा नृत्य, रंगमंच नाटक, हिंदी कविता वाचन और हिंदी विद्वानों द्वारा विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर 150 से अधिक लोग उपस्थित थे, जिनमें छात्र, शिक्षाविद, और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्य शामिल थे। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, इंडियाना की अध्यक्षा विद्या सिंह, उपाध्यक्ष आदित्य कुमार, पूर्व अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार, युवा समिति के सदस्य आरिनी पारिक और अन्विता राजपूत सहित 25 सदस्य इंडियाना शाखा से उपस्थित थे।
महावाणिज्य दूत श्री सोमनाथ घोष जी ने सभी का स्वागत करते हुए अभिभावकों से अपील की कि वे अपने परिवारों में हिंदी और मातृभाषाओं के प्रयोग को बढ़ावा दें, ताकि आने वाली पीढ़ियों में हिंदी के प्रति आत्मीयता बनी रहे।
कार्यक्रम में प्रोफेसर मिथिलेश मिश्रा (UICUC), प्रो. सैयद एख्तयाल अली (U Mich), अलका शर्मा (मंडी थिएटर), राकेश कुमार (समन्वय समिति), अवतंस कुमार (प्रसिद्ध पत्रकार और स्तंभकार), और डॉ. राकेश कुमार (अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, इंडियाना) ने हिंदी को अमेरिका में बढ़ावा देने और इसकी वैश्विक पहचान को सशक्त बनाने के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। डॉ. राकेश कुमार ने “वैश्विक युग में हिंदी भाषा: एक नई दिशा की ओर” पर व्याख्यान देते हुए बताया कि भारतीय संविधान में हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्राप्त है, और इसके प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी सरकार पर है। उन्होंने अमेरिकी संविधान के 14th Amendment, First Amendment, 1923 से 1927 के बीच सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसले और Executive Order 13166 का जिक्र करते हुए भाषाई स्वतंत्रता की सुरक्षा के बारे में भी जानकारी दी जिससे हिंदी के विस्तार को बढ़ावा मिला और बताया कि अमेरिका में हिंदी को 60 से अधिक संस्थानों में एक पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाया जा रहा है।
इसके साथ ही, डॉ. कुमार ने हिंदी की डिजिटल दुनिया में बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा की, जैसे गूगल, फेसबुक और अन्य प्लेटफार्मों पर हिंदी सामग्री की बढ़ती मांग और भारत सरकार के “लीला (LILA)” प्रोजेक्ट के जरिए हिंदी शिक्षा में हो रहे तकनीकी बदलाव। डॉ. कुमार ने यह बताया कि अब हिंदी केवल साहित्य और संवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह इंटरनेट, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत पहचान बना रही है।
कौंसल श्री संजीव पाल और महावाणिज्य दूत श्री सोमनाथ घोष के प्रारंभिक उद्बोधन के बाद कार्यक्रम की शुरुआत एक आकर्षक कथक नृत्य प्रस्तुति से हुई, जो इंडियाना स्थित प्रसिद्ध कथक स्कूल नूपुर द्वारा आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन में युवा नर्तकियों सुहानी अवस्थी और आर्य किचंबरे (आयु 7-14 वर्ष) ने भाग लिया, और इसका कोरियोग्राफी मौसुमी मुखोपाध्याय ने किया। नर्तकों ने पारंपरिक बंदिश “अलबेला साजन आयो रे” पर प्रस्तुति दी, जो कथक नृत्य की कहानी कहने की कला का जीवंत और graceful चित्रण था। यह प्रदर्शन, जो पांच मिनट से थोड़ा अधिक समय तक चला, एक अद्भुत शास्त्रीय नृत्य प्रदर्शन था और सांस्कृतिक धरोहर की अभिव्यक्ति थी।
इसके बाद, कारमेल, इंडियाना के कारमेल हाई स्कूल के एक गतिशील छात्र समूह ने भी एक ज्ञानवर्धक प्रस्तुति दी, जिसमें हिंदी की भाषाई महत्वपूर्णता और पारंपरिक कथक नृत्य की सुंदरता को उजागर किया गया। पहले खंड में, कार्मेल हाई स्कूल के हिंदी क्लब के सदस्य, आरिनी पारिक, अन्विता राजपूत और अन्वी जमीन्स ने भारतीय-अमेरिकी युवा के लिए हिंदी के सांस्कृतिक और भाषाई महत्व पर ध्यान केंद्रित किया। ये छात्र, जो अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, इंडियाना के युवा समिति से जुड़े हैं, हिंदी को भारतीय-अमेरिकी समुदाय में संरक्षित करने के महत्व और कारमेल हाई स्कूल में हिंदी को पाठ्यक्रम के रूप में शामिल करने के प्रयासों पर चर्चा की। हिंदी क्लब का उद्देश्य है कि हिंदी को स्कूल पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए, और छात्रों ने इस उद्देश्य के लिए अपने चल रही योजनाओं को रेखांकित किया।
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भारत के महावाणिज्य दूतावास, शिकागो में विश्व हिंदी दिवस कार्यक्रम की झलकियाँ
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विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों को एक साथ लाने का प्रतीक
वार्षिक दिवाली-ईद डिनर, कैम्ब्रिज, मैसाचुसेट्स
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रूपल शाह का जन्म माउंट किलिमंजारो की तलहटी में स्थित मोशी, तंज़ानिया में हुआ और वहीँ पर पली-बढ़ी। किशोरावस्था में ये अमेरिका आ गईं। शैक्षिक पृष्ठभूमि में माइक्रोबायोलॉजी और सार्वजनिक स्वास्थ्य में मास्टर डिग्री शामिल हैं। वर्तमान में, ये वाईएमसीए (YMCA), कोलंबस, सेंट्रल ओहायो की कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्यरत हैं । ये विविधता में विश्वास करती हैं और सभी सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करती हैं । इनके पति डॉ. अनूप कनोडिया भी विविधता का समर्थन और सम्मान करते हैं।
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वार्षिक दिवाली-ईद डिनर, कैम्ब्रिज, मैसाचुसेट्स
अक्टूबर 2024 में, मैंने वार्षिक दिवाली-ईद डिनर में भाग लिया, जो कैम्ब्रिज, एमए के रिज़र्वॉयर चर्च में आयोजित किया गया था। मुझे इस कार्यक्रम के सूत्रधार (MC) बनने का सम्मान प्राप्त हुआ। बंटी सिंह, ध्वनि/प्रकाश तकनीकी विशेषज्ञ हैं। बंटी और मैं हमेशा साथ मिलकर प्रस्तुतियों को संभालते हैं। बंटी सिंह ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था का ध्यान रखते हैं, और मैं मंच संचालन (MC) करती हूँ। हम पिछले 15 वर्षों से एक टीम के रूप में यह कार्य कर रहे हैं।
मैं पिछले 15 वर्षों से इस आयोजन में शामिल हो रही हूँ। यह विशेष कार्यक्रम 30 से अधिक वर्षों से आयोजित किया जा रहा है और इसमें मैसाचुसेट्स और अन्य स्थानों से 250+ लोग शामिल होते हैं।
दिवाली और ईद का महत्व
दिवाली,हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध धर्म द्वारा मनाई जाती है। दिवाली को ‘रोशनी का पर्व’ कहा जाता है। ऐतिहासिक रूप से यह एक फसल और उर्वरता का त्योहार है। इस समय नई फसल की खुशी मनाई जाती है और पुराने लेन-देन का निपटारा किया जाता है। कई आदिवासी समुदाय आज भी इसे फसल उत्सव के रूप में मनाते हैं, विशेष रूप से वे किसान जो अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं। वर्तमान में दिवाली, हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायियों द्वारा विश्वभर में मनाई जाती है। प्रत्येक धर्म ने इस त्योहार के लिए अपनी विशिष्ट पौराणिक कथाएँ विकसित की हैं।
ईद, मुस्लिम समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला धार्मिक त्योहार है। वर्ष में दो प्रमुख ईदें होती हैं—ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा। ईद-उल-फितर रमज़ान के पवित्र महीने के अंत का प्रतीक है। रमज़ान के दौरान रोज़ा रखना इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है। ईद-उल-अजहा को बलिदान का पर्व कहा जाता है और यह उस अवसर को चिह्नित करता है जब अल्लाह ने इब्राहिम से उनकी आस्था की परीक्षा लेने के लिए बलिदान देने को कहा था।
सांस्कृतिक एकता का संगम
रिज़र्वॉयर चर्च में, साउथ एशियन सेंटर द्वारा इस वार्षिक डिनर का आयोजन किया जाता है।
यहाँ लोग स्वादिष्ट भोजन, संगीत, नृत्य और हंसी के साथ दिवाली और ईद का संयुक्त रूप से आनंद लेते हैं। साउथ एशियन सेंटर की अगुवाई अग्रणी समाजसेवी जसपाल सिंह और हरदीप मान द्वारा की जाती है, जो कई समर्पित स्वयंसेवकों के साथ इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आरिया हुसैन हमारी सबसे कम उम्र की स्वयंसेवक हैं और जन्म से ही इन आयोजनों का हिस्सा रही हैं। उनकी माँ, सारा हुसैन, एक लंबे समय से स्वयंसेवक रही हैं और अपने पति आरिफ हुसैन के साथ मिलकर इस आयोजन के पर्दे के पीछे के कई महत्वपूर्ण कार्यों को संभालती हैं।
इस आयोजन की विशेषता यह है कि इसे एक चर्च में आयोजित किया जाता है, जो विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों को एक साथ लाने का प्रतीक है। बहुत कम लोग कह सकते हैं कि उन्होंने दिवाली और ईद को एक चर्च की छत के नीचे एक साथ मनाया है—यह वास्तव में एक अनूठा अनुभव है! इस आयोजन का मुख्य संदेश “एकता” है, जो विविधता के उत्सव और विभिन्न पृष्ठभूमियों के समुदायों को जोड़ने पर केंद्रित है। वर्तमान समय में, जब दुनिया अनेक चुनौतियों से जूझ रही है, एकता का यह संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
रचनात्मक अभिव्यक्ति और सम्मान
इस शानदार शाम को स्थानीय कवियों नीना वाहि और अली रिज़वी ने अपनी कविताओं से समृद्ध किया, जिनमें उन्होंने समुदाय और त्योहारों की भावना को दर्शाया। वाहि ने भारत में इन त्योहारों के पारंपरिक रूप से मनाए जाने के अनुभव साझा किए। स्थानीय सामुदायिक कार्यकर्ता और आयोजकों ने अपने संगठनों जैसे Muslims for Progressive Values, Saheli, और Asian Pacific Islander’s Civic Action के बारे में जानकारी दी। अरुण चौधरी और उनके बच्चों के समूह ने दिवाली का एक गीत प्रस्तुत किया। यह समूह पिछले 10 वर्षों से इस कार्यक्रम में प्रस्तुति दे रहा है, जिससे युवा पीढ़ी की भागीदारी और उत्साह प्रेरणादायक बनता है।
यह कार्यक्रम पहली बार प्रस्तुति देने वाले कलाकारों के लिए भी एक मंच प्रदान करता है, जहाँ वे दिवाली और ईद से संबंधित गीत, कविताएँ और छोटी कहानियाँ साझा करते हैं।
कार्यक्रम के मध्य में, कैम्ब्रिज, बोस्टन और आसपास के क्षेत्रों के उन स्थानीय नेताओं को सम्मानित किया गया जो अपने समुदाय में लोगों को जोड़ने और समाज को बेहतर बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके योगदान की सराहना करने के लिए उन्हें प्रतीकात्मक रूप से एक हरा या पीला शॉल भेंट किया गया। इनमें सामाजिक कार्यकर्ता, स्वास्थ्य सेवाओं के नेता, कलाकार, और अन्य प्रेरणादायक व्यक्ति शामिल थे। स्थानीय नेताओं का समूह चित्र नीचे संलग्न है , जिन्हें समुदाय में उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया।
सकारात्मकता और उत्साह के साथ समापन
इस शानदार आयोजन का समापन आपसी संवाद, हंसी-खुशी और अगले वर्ष के आयोजन को लेकर उत्सुकता के साथ हुआ। यह निश्चित है कि इस आयोजन को इस वर्ष फिर से आयोजित किया जाएगा, ताकि हमारे सुंदर समुदाय में एकता और सद्भाव का यह संदेश एक बार फिर गूंजे।
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बायें से दायें -बंटी सिंह , हरदीप मान, जसपाल सिंह, रूपल शाह
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बायें से दायें - आरिया हुसैन, सारा हुसैन, रूपल शाह, बंटी सिंह
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स्थानीय नेताओं का सामूहिक चित्र,
जिन्हें समुदाय में उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया।
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कवितायेँ / गजल
"उम्मीद की उपज"
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द्वारा - श्री गोलेन्द्र पटेल
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श्री गोलेन्द्र पटेल को कविता, नवगीत, कहानी, निबंध, नाटक, उपन्यास व आलोचना लिखने में रूचि रखते हैं। इन्होने बी.ए. (हिंदी प्रतिष्ठा) व एम.ए., बी.एच.यू., हिन्दी से नेट की शिक्षा ली हैं। इन्हें कई सम्मान एवं पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं।
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उम्मीद की उपज
उठो वत्स!
भोर से ही
जिंदगी का बोझ ढोना
किसान होने की पहली शर्त है
धान उगा
प्राण उगा
मुस्कान उगी
पहचान उगी
और उग रही
उम्मीद की किरण
सुबह सुबह
हमारे छोटे हो रहे
खेत से….!
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बाल विभाग (किड्स कार्नर )
कवितायेँ / गजल
बालविहार विद्यालय (VHPA), जर्मनटाउन, मैरीलैंड
विद्यार्थियों की कवितायेँ (भाग-2 )
द्वारा- मनीष थोरी, शिक्षक एवं प्रबंधक, बालविहार हिंदी और संस्कृति कक्षा
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द्वारा - मनीष थोरी, शिक्षक एवं प्रबंधक
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श्री मनीष थोरी, बालविहार हिंदी और संस्कृति कक्षा के शिक्षक एवं प्रबंधक हैं। एक दशक से भी ज़्यादा समय से जर्मनटाउन, मैरीलैंड में हिंदी भाषा और हिंदू संस्कृति की कक्षाएं समुदाय में सांस्कृतिक समृद्धि और शिक्षा की आधारशिला रही हैं। ये कक्षाएं पीढ़ियों के बीच एक महत्वपूर्ण पुल का काम करती हैं, जो छात्रों को हिंदू सांस्कृतिक परंपराओं से गहराई से जुड़ते हुए हिंदी भाषा सीखने का अवसर भी प्रदान करती है।
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बालविहार विद्यालय, जर्मनटाउन, मैरीलैंड
विद्यार्थियों की कवितायेँ (भाग २ )
१ -- वंदे मातरम, अब गाना है
द्वारा - -अयांश सिंह, तीसरी कक्षा
वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, अब गाना है।
धरती से आसमान तक, तिरंगे को लहराना है।
75 सालो मे बहुत सोया, अब समय नही गवाना है ।
बहुत लड चुके जाति और धर्म पर, अब मिल कर हाथ बढ़lना है।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक, प्यार का गंगा बहाना है।
वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, अब गाना है।
धरती से आसमान तक, तिरंगे को लहराना है।
बहुत किया है भारत को गन्दा, अब मिलकर स्वच्छ बनाना है।
स्वच्छ भारत अभियान को, अब घर घर टक पहुचना है।
सड़क का धूल, मन का मेल, और भ्रष्टाचार को मिटाना है।
वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, अब गाना है।
धरती से आसमान तक, तिरंगे को लहराना है।
बहुत किया भारत को गन्दा, अब मिलकर स्वच्छ बनाना है।
सालो की मजबूत नीव पर बुलंदी तक, अब ले जाना है।
बढ़ती हुई युवा शक्ति से, अब नए औजार बनाना है।
धन धन्य और कौशल को, पूरी दुनिया मे फैलाना है।
वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, अब गाना है।
धरती से आसमान तक तिरंगे को लहराना है।
शिवाजी और महा राणा प्रताप की, गौरव गाथा सुनाना है।
पड़ोसी अगर दुश्मन है, तो अब मिलकर उसे हरना है।
वैक्सीन हो या विज्ञान नया, भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।
वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, अब गाना है।
धरती से आसमान तक, तिरंगे को लहराना है।
तिरंगे को लहराना है।
जय हिंद, जय जवान, जय किसान।
२ - भारत की संस्कृति
द्वारा- ईवा पांडे , चौथी कक्षा
भारत की संस्कृति
भारत देश है सबसे प्यारा,
यहाँ रहे खुशियों की धारा ।
मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा,
सब लोगों में है भाई चारा ।
होली में हैं रंग बरसते,
दीवाली में दीप हैं सजते ।
ईद में खाएँ मिठाई,
देखो देखो क्रिस्मस आई।
बड़ों को सम्मान दिखाते,
छोटों को हम गले लगाते।
नर नारी सब में भगवान,
मेरा भारत सबसे महान !!
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