JUNE INTERNATIONAL HINDI ASSOCIATION'S NEWSLETTER
जून 2025, अंक ४७ प्रबंध सम्पादक: श्री आलोक मिश्र। सम्पादक: डॉ. शैल जैन
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Human Excellence Depends on Culture. The Soul of Culture is Language
भाषा द्वारा संस्कृति का प्रतिपादन
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति परिवार के सभी सदस्यों एवं संवाद के पाठकों का अभिनंदन।
पितृ दिवस और बकरीद की शुभकामनाएँ।
२०२५ का आधा वर्ष निकल गया। समय तीव्र गति से चलता रहता है और हमें साथ चलकर अपना कार्य आगे बढ़ाते रहना है।
इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अ.हि.स.)ने कई कार्यों में सफलता प्राप्त की। इस वर्ष की शुरुआत में आयोजित जनवरी के विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर भारतीय दूतावास, वाशिंगटन डी.सी. के साथ युवाओं के लिए हिंदी भाषण प्रतियोगिता।युवा प्रतिभागियों की क्षमताओं और प्रतिबद्धता को देखकर मैं बहुत प्रभावित हुई। हमारी शाखाओं ने अपने छेत्रों में अलग-अलग तरीकों से विश्व हिंदी दिवस आयोजित की।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अ.हि.स.) का 22 वाँ द्विवार्षिक अधिवेशन 2–3 मई, 2025 ओहायो के रिचफील्ड शहर में पूर्ण सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। उत्तर-पूर्व ओहायो शाखा द्वारा आयोजित किया गया यह अधिवेशन भाषा, विरासत और सांस्कृतिक एकता का एक सजीव उत्सव रहा। सम्मेलन का मूल विषय था “नई पीढ़ी, हिंदी और भारतीय संस्कृति, डिजिटल युग में”। विस्तृत समाचार और फोटो इस संवाद में संलग्न है और मैं उम्मीद करती हूँ कि आप उन्हें देखें, पढ़े और अपने विचारों को हमसे साझा करें।
मैं सभी बाहर से आये प्रतिनिधियों और न्यासी सदस्यों का आभार व्यक्त करती हूँ जिन्होंने आकर स्वागत समिति के सदस्यों को प्रोत्साहित किया और सम्मेलन की सफलता में अपना सहयोग प्रदान किया। कवियों, शैक्षिक सत्रों में प्रस्तुतकर्ता, युवा स्वयंसेवकों, सांस्कृतिक कार्यक्रम के प्रतिभागी सबों को धन्यवाद देती हूँ कि उन्होंने भाग लिया और हमारे कार्यक्रम को सफल बनाया।
उत्तर पूर्व शाखा के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और स्वागत समिति का बहुत बहुत धन्यवाद जिन्होंने पिछले कई महीनों से अकथ परिश्रम कर अधिवेशन के सभी प्रतिभागियों के लिए सफल और अविस्मरणीय अनुभव देने में सफल हुए।
हमारी समिति की शाखाएँ अपने शहरों में अगले कार्यक्रमों की तैयारियों में जुट गईं हैं। अगस्त में भारतीय स्वतंत्रता दिवस, सितंबर में हिंदी दिवस और आगे आने वाले त्योहारों दिवाली और ईद के समारोह की तैयारी सभी पर कार्य हो रहें हैं।
आपके विचारों और आपकी प्रतिक्रियाओं का हमें इंतज़ार रहेगा।
धन्यवाद,
शैल जैन
डॉ. शैल जैन
राष्ट्रीय अध्यक्षा, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (2024-25)
ईमेल: president@hindi.org | shailj53@hotmail.com
सम्पर्क: +1 330-421-7528
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- २२ वाँ द्विवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन २०२५
अमेरिकी धरती पर हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति का भव्य उत्सव
2–3 मई, 2025
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अमेरिकी धरती पर हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति का भव्य उत्सव
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति का 22वाँ द्विवार्षिक अधिवेशन
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अ.हि.स.) का 22 वाँ द्विवार्षिक अधिवेशन 2–3 मई, 2025 को ओहायो के रिचफील्ड शहर में उत्तर-पूर्व ओहायो शाखा द्वारा आयोजित किया गया। ये अधिवेशन हिंदी भाषा की विरासत, और आशान्वित भविष्य का सुन्दर ताना बाना था। इस आयोजन को कई स्थानीय मेयरों का समर्थन प्राप्त हुआ, जिन्होंने विशेष घोषणाओं के माध्यम से आयोजन को सम्मानित किया: रिचफील्ड और एक्रन के मेयरों द्वारा “अंतर्राष्ट्रीय हिंदी जागरूकता माह” की घोषणा तथा मेडाईना, ब्रॉडव्यूहाइट्स और इंडिपेंडेंस शहरों के मेयरों द्वारा “अंतर्राष्ट्रीय हिंदी जागरूकता सप्ताह” की घोषणा की गई। सम्मेलन में अ.हि.स के ट्रस्टी अध्यक्ष श्री तरुण सुरती; अन्य ट्रस्टी श्री आलोक मिश्र और श्री इंद्रजीत शर्मा, राष्ट्रीय पूर्व अध्यक्ष मेजर शेर बहादुर एवं अजय चड्डा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, वर्तमान एवं पूर्व राष्ट्रीय व विभिन्न शाखाओं के प्रतिनिधि के साथ-साथ स्थानीय शाखा के अधिकारी, स्वागत समिति, स्थानीय सदस्य एवं उत्तर-पूर्व ओहायो के हिंदी और संस्कृति प्रेमियों ने भी भाग लिया।सम्मेलन का मूल विषय था “ नई पीढ़ी, हिंदी और भारतीय संस्कृति, डिजिटल युग में"।
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रिचफील्ड मेयर का प्रोक्लामेशन
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एक्रोन मेयर का प्रोक्लामेशन
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मेदाईना मेयर का प्रोक्लामेशन
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इंडिपेंडेंस मेयर का प्रोक्लामेशन
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ब्रॉडव्यू हाइट्स मेयर का प्रोक्लामेशन
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अधिवेशन के तीन प्रमुख सत्र आयोजित
सत्र 1 – सांस्कृतिक संध्या (2 मई):
यह सत्र मेडाईना , ओहायो के हाइलैंड हाई स्कूल में आयोजित हुआ।
उद्घाटन कार्यक्रम
रजिस्ट्रेशन के बाद खाने का आयोजन था। भोजन का मजा लेने के साथ साथ एक दूसरे से मिलने का सुंदर माहौल था। कलाकारों, कवियों, अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के ट्रस्टी और सभी दर्शकों को आपस में बातचीत करने का मौक़ा सबों को आनंदित कर रहा था।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। हम सभी जानते हैं कि दीप प्रज्वलन भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वाहक है। दीप प्रज्ज्वलन द्वारा इस संध्या का उद्घाटन विशेष मेहमान मेडाईना के मेयर डेनिस हैनवेल, अ.हि.स. के ट्रस्टी चेयर तरुण सूरती, ट्रस्टी आलोक मिश्रा, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मेजर शेर बहादुर सिंह, वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शैल जैन, होस्ट चैप्टर ( उत्तर पूर्व ओहायो शाखा) संयोजक डॉ. राकेश रंजन और अध्यक्ष अश्वनी भारद्वाज द्वारा किया गया।
होस्ट शाखा, उत्तर-पूर्व ओहायो के संयोजक डॉ. राकेश रंजन, अ.हि.स. के ट्रस्टी चेयर तरुण सूरती, ट्रस्टी आलोक मिश्रा, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शैल जैन एवं मेदाइना के मेयर डेनिस हैनवेल ने संक्षिप्त में अपने विचारों को साझा किया। कार्यक्रम के अंत में होस्ट शाखा के अध्यक्ष अश्वनी भारद्वाज ने सबों को धन्यवाद ज्ञापन किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम
इस अवसर पर होस्ट शाखा ने एक विशिष्ट और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिसमें 5 वर्ष से लेकर 80 वर्ष तक की आयु के प्रतिभागियों ने भाग लिया। सांस्कृतिक संध्या का संचालन अ.हि.स.की सदस्याएं श्रीमती रेनू चड्ढा और डॉ. तसनीम लोखंडवाला द्वारा किया गया।
हर प्रस्तुति में भारत के किसी न किसी राज्य को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रत्येक राज्य की जानकारी वहाँ के प्रमुख तथ्यों से सजी पोस्टकार्ड के माध्यम से दी गई, जिसे दो उत्कृष्ट मंच संचालिकाओं डॉ. सुनीता द्विवेदी और डॉ. रश्मि चोपड़ा—द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात उसी राज्य से संबंधित नृत्य, गीत या कविता के रूप में एक सजीव कलात्मक अभिव्यक्ति की गई। यह संपूर्ण कार्यक्रम भारत की समृद्ध विविधता को एक मंच पर एकता के प्रतीक रूप में सुंदरता से दर्शाता है।
इस सुहावनी संध्या ने भारत की अविश्वसनीय और अद्भुत विविधता और हिंदी भाषा की समृद्धि की एक झलक एक अनूठे ढंग से प्रस्तुत की। यह आयोजन भारत की विविधता में एकता को सुंदर रूप से दर्शाने वाला था।
रोटरी डिस्ट्रिक्ट 6630 के एक एक्सचेंज छात्र शामिल–
इस अवसर पर रोटरी डिस्ट्रिक्ट 6630 के एक एक्सचेंज छात्र ‘काई टोटे’ भी उपस्थित थे, जो जुलाई 2025 में एक वर्ष के लिए भारत जाएंगे। वहाँ के स्कूल में शिक्षा लेगें और भारतीय संस्कृति और हिंदी से अवगत होंगें|
बाल पुस्तक उपहार वितरण —
सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंत में, युवाओं की भागीदारी की सराहना करते हुए सभी बच्चों को उनकी पसंद की एक हिंदी पुस्तक भेंट की गई (जिसे 8–10 विभिन्न प्रकार की पुस्तकों में से चुना जा सकता था)। यह विशेष उपहार अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की नॉर्थ ईस्ट ओहायो शाखा की ओर से प्रदान किया गया। ये विशेष उपहार, प्रामाणिक, नैतिक और जीवन मूल्यों का प्रसार करने वाली पुस्तकें, भारत के चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित थीं।
बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावक भी नॉर्थ ईस्ट ओहायो शाखा की ओर से प्रदान किए गये
इस अनोखे उपहार से बहुत प्रसन्न और आभारी थे।
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सत्र 2 – शैक्षिक संगोष्ठी (3 मई, प्रातः):
यह सत्र रिचफील्ड, ओहायो के 'क्वालिटी इन' में आयोजित हुआ। उद्घाटन और दीप प्रज्वलन में शामिल थे रिचफील्ड के मेयर माइकल व्हीलर; अ.हि.स.के नेता और अमेरिका के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि - आलोक नंदा, टेनेसी; अनिल गुप्ता, इंडियाना; भावना क़ल्याण, ह्यूस्टन; धर्मपाल सिंह, न्यूयॉर्क; चौधरी प्रताप सिंह, वाशिंगटन डी.सी.; अश्वनीभारद्वाज, उत्तर पूर्व ओहायो; अर्चना पांडा, सैन फ़्रांसिस्को के साथ किया गया।
कार्यक्रम के मंच संचालन की ज़िम्मेदारी हमारे युवा प्रतिनिधि निकुंज खंडेलवाल (कॉलेज छात्र) ने निभाई। उन्होंने युवाओं का शानदार प्रतिनिधित्व किया, धाराप्रवाह हिंदी में बात की और सभी उपस्थित लोगों पर गहरा प्रभाव डाला।
पुस्तकों का विमोचन
इस कार्यक्रम में दो पुस्तकों का विमोचन हुआ
1).”कुछ हम भी लिख गए हैं तुम्हारी किताब में गुलाब खंडेलवाल की गजलें” संपादक: ओम निश्चल -इस पुस्तक का विमोचन श्रीमती आस्था नवल,जो हिंदी जगत में जानी-मानी हस्ती हैं और वॉशिंगटन डीसी से आई थी,के कर कमलों से हुआ|
2) उपन्यास “नंदिता अभिनव” लेखक: अशोक लव- इस पुस्तक का विमोचन श्री शेर बहादुर सिंहजो अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति के पूर्व ट्रस्टी रह चुके हैं, के हाथों संपन्न हुआ।
रिचफील्ड के मेयर, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के राष्ट्रीय और शाखा के प्रतिनिधियों की रिपोर्ट
रिचफील्ड के मेयर माइकल व्हीलर ने अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (IHA) के मिशन, संस्कृति और भाषा को बनाए रखने की आवश्यकता, तथा विविधता के समर्थन पर एक संक्षिप्त भाषण दिया। उन्होंने कहा कि रिचफ़ील्ड शहर हमेशा इन मूल्यों का समर्थन करता रहा है और आगे भी करता रहेगा।
अ.हि.स के ट्रस्टी अध्यक्ष श्री तरुण सुरती ने समिति द्वारा किये गए कार्यक्रम की संछिप्त जानकारी के साथ साथ भविष्य के कार्यो की योजनाओं को साझा किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शैल ने अपने कार्यकाल में प्राप्त की गई उपलब्धियों को बताते हुए सबों को भविष्य पर ध्यान देने को प्रेरित किया समिति के उद्देश्यों पर काम करें और युवा पीढ़ी को ज़्यादा जोड़ें।अमेरिका के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों - सीमा वर्मा, टेनेसी; राकेश कुमार, इंडियाना (वीडियो प्रेजेंटेशन द्वारा); भावना क़ल्याण, ह्यूस्टन; ट्रस्टी इंद्रजीत शर्मा, न्यूयॉर्क ; चौधरी प्रताप सिंह, वाशिंगटन डी.सी.; अश्विनी भारद्वाज, उत्तर पूर्व ओहायो ने संछिप्त में अपने राज्यों में शाखा द्वारा किए कार्यक्रमों का विवरण दिया। अलग -अलग तरीकों से एक ध्येय की प्राप्ति के विचारों के बारे में जान कर सबों को बहुत ही अच्छा लगा।
शैक्षिक संगोष्ठी
सत्र की संयोजिका अर्चना पांडा और रश्मि चोपड़ा ने शानदार काम किया। शैक्षिक कार्यशाला के 5 प्रस्तुतकर्ता और विषय -
१) डॉ. आस्था नवल, हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति: शिक्षक की भूमिका;२) डॉ. राजीव रंजन, शिक्षण/अधिगम सामग्री का डिजिटलीकरण: हिंदी के लिए ओपेन शैक्षिक संसाधन (OER); ३)साधना कुमार, अमेरिका में द्वि भाषी साक्षरता की अपनी पहचान और मुहर लगा रही हैं: ४)अर्चना पांडा, आइए नई तकनीक और मनोरंजन के साथ हिंदी सीखें; ५)डॉ. राकेश कुमार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्रांति: हिंदी में परिवर्तन, संयुक्त राज्य अमेरिका में।
इस सत्र में विभिन्न विश्वविद्यालयों और राज्यों के विद्वानों द्वारा विषय वस्तु आधारित प्रस्तुतियाँ दी गईं। "डिजिटल युग में हिंदी की दिशा", जिसमें भाषा सीखने के लिए नई प्रौद्योगिकी, भारत सरकार द्वारा कार्य, AI की भूमिका, गूगल और अन्य हिंदी को प्रौद्योगिक रूप से सक्षम बनाने की संभावनाओं परचर्चा हुई। AI और डिजिटल उपकरणों के युग में हिंदी के उभरते परिदृश्य पर जानकारी दी गई। ये संसाधन हिंदी शिक्षकों, छात्रों और भारतीयसंस्कृति के समर्थकों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। यह सत्र विचारों का मंथन, ज्ञानवर्धक और संवादात्मक रहा, जिसमें व्यावहारिक मार्गदर्शन भी प्रदान किये गये।
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सत्र 3 – काव्य संध्या (3 मई, संध्या):
यह सत्र 'क्वालिटी इन', रिचफील्ड, ओहायो में आयोजित हुआ। इस काव्यसंध्या में रिचफील्ड के मेयर माइकल व्हीलर और समिट काउंटी की क्लर्कऑफ कोर्ट्स ताविया गोलांस्की ने भाग लिया। दीप प्रज्वलन में शामिल थे समिट काउंटी की क्लर्क ऑफ कोर्ट्स ताविया गोलांस्की, पूर्व ओहायो सीनेटर नीरज ऐनटानी, अ.हि.स के ट्रस्टी अध्यक्ष श्री तरुण सुरती, अ.हि.स. के ट्रस्टी इंद्रजीत शर्मा, अ.हि.स. के पूर्व अध्यक्ष अजय चड्डा, अ.हि.स. की वर्तमान अध्यक्ष डॉ. शैल जैन, उत्तर पूर्व शाखा की पहली अध्यक्ष विमल शरण और उत्तर पूर्व शाखा की सहयोगी और मेजर डोनर अर्चना अग्रवाल। कार्यक्रम में कई राज्यों से आए प्रतिनिधि एवं स्थानीय हिंदी और संस्कृति प्रेमी उपस्थित थे।
सम्मान समारोह
कार्यक्रम में विशेष कार्यकर्ताओं को अ.हि.स. के उद्देश्य के लिये लंबे अरसे से समर्पित हैं या वर्तमान अधिवेशन की सफलता के लिये कठिन परिश्रम किया, उन्हें सम्मानित कर विशेष सेवा पट्टिका प्रदान की गई। इस अवसर पर जिन गणमान्य व्यक्तियों ने यह सम्मान प्राप्त किया, वे थे—श्रीमती अंजू कपूर, डॉ. आनंद खंडेलवाल, श्री अश्वनी भारद्वाज, श्री पवन खेतान, श्रीमती किरण गोयल, डॉ. राकेश रंजन, डॉ. थानमल जैन, श्री तरुण सुरती, श्री धर्मपाल सिंह, डॉ. प्रकाश चंद, श्री रमेश जोशी, श्री राकेश कुमार, श्रीमती ऋचा माथुर तथा डॉ. शैल जैन। इन सभी का योगदान संस्था के प्रति उनकी निष्ठा और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। कवि अभिनव शुक्ला द्वारा श्रीमती आस्था नवल का सम्मान कर विशेष सेवा पट्टिका प्रदान की गई। कवि अभिनव शुक्ला द्वारा उनके पुस्तकों का वितरण पांच अतिथिगण को किया गया।
कवि सम्मेलन
इस अवसर पर तीन प्रतिष्ठित कवियों—कवि इंद्र अवस्थी (पोर्टलैंड), कवयित्री अर्चना पांडा (सैन फ्रांसिस्को), और कवि अभिनव शुक्ला (सीएटल)—ने हास्य, राजनीतिक टिप्पणी, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर आधारित कविताएँ प्रस्तुत कीं, जो श्रोताओं को गहराई से प्रभावित कर गईं। ये अनूठा अनुभव चुपके से ये कह गया कि हिंदी कविता हमारे दिलों में क्यों एक शाश्वत स्थान रखती है। कवियों की प्रभावशाली कविताओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संपूर्ण प्रस्तुति के दौरान सभागार तालियों से गूंजता रहा और सभी ने इस संगीतमय व साहित्यिक संध्या का भरपूर आनंद लिया। यह एक सच्चे अर्थों में रस और आनंद से परिपूर्ण शाम रही।
अधिवेशन समापन विवरण:
इस अधिवेशन में अ.हि.स की अमेरिका की शाखाओं और आउटरीच राज्यों की सक्रिय भागीदारी रही, जिनमें बोस्टन, मैसाचुसेट्स ; नैशविल,टेनेसी; वॉशिंगटन डी.सी; इंडियाना; न्यूयॉर्क; ह्यूस्टन और उत्तर-पूर्व ओहायो के प्रतिनिधि शामिल थे। अ.हि.स की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शैल जैन (2024–25) ने संगठन की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया और भविष्य की दिशा में कार्य करने पर बल दिया:
“हमारी शाखाओं और राष्ट्रीय टीम ने बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन हमें और मेहनत करनी होगी ताकि हिंदी को अमेरिकी स्कूलों में दूसरी भाषा के रूप में मान्यता मिल सके। हमें अपनी भाषा और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना होगा, अपने बच्चों से मातृभाषा में संवाद करना होगा, और विविधता का सम्मान करते हुए अपने संस्कार साझा करने होंगे।”
अधिवेशन का सफल आयोजन अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति का हिंदी भाषा के प्रचार, प्रसार के प्रति योगदान और कर्मठता दर्शाता है। लेकिन तालियों की गड़गड़ाहट के पीछे एक कोमल प्रतिध्वनि छिपी है - एक अनुस्मारक कि भले ही हमारी जड़ें गहरी हों,उन्हें सींचना ज़रूरी है। आज की तीव्र गति से दौड़ती दुनिया में, हमें अपने आप से पूछना चाहिए: क्या हम हिंदी को सिर्फ़ कामकाज में ही नहीं, बल्कि भावना में भी ज़िंदा रख सकते हैं? क्या अगली पीढ़ी को एक जीवंत भाषा विरासत में मिलेगी या सिर्फ़ एक पुरानी याद? भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि हम हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए क्या कदम उठा रहें हैं। हिंदी सिर्फ़ एक भाषा नहीं है। वो एक गीत है, एक कहानी है, एक आत्मा है, हमारी पहचान है और हमारी संस्कृति है - इसलिए इस धरोहर को भावी पीढ़ी के लिए संजो कर रखना हमारा कर्त्तव्य है।
कार्यक्रम समापन संगोष्ठी / पदाधिकारियों की विशेष बैठक ( 4 मई, प्रातः)
यह संगोष्ठी राष्ट्रीय, शाखा और उत्तर पूर्व शाखा के अधिकारियों, स्वयंसेवक और प्रतिनिधियों के बीच थी। संगोष्ठी में शामिल थे तरुण सुरती, आलोक मिश्रा, इंद्रजीत शर्मा, मेजर शेर बहादुर सिंह, डॉ. शैल जैन, राकेश कुमार, विद्या सिंह, डॉ देवव्रत सिंह, धर्मपाल सिंह, डॉ राकेश रंजन, डॉ. प्रकाश चाँद, डॉ. थानमल जैन, किरण गोयल, किरण खेतान, पवन खेतान, डॉ. सोमनाथ राय, अश्विनी भारद्वाज और अंजू शर्मा। ऑन लाइन रमेश जोशी जी भी शामिल थे,क्योंकि वे कुछ आकस्मिक कारणों के कारण भारत से नहीं आ पाये। अधिवेशन के आयोजन की सफलता, दिक्कतें और आगे के लिए क्या हमें करना है सबों पर बातचीत हुई। आगे समिति को बढ़ाने के लिए विचार विमर्श भी किए गए।
उपस्थित सभी अधिवेशन की सफलता पर प्रसन्न थे। ब्रंच के बाद सभी अपने शहरों के लिए प्रस्थान कर गए।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति का २२ वाँ द्विवार्षिक अधिवेशन भाषा, विरासत और सांस्कृतिक एकता का एक सजीव उत्सव रहा, जिसमें सभी आयु वर्गों की भागीदारी रही और अगली पीढ़ी के लिए दिशा तय करने के माध्यम पर विचारों का मंथन भी हुआ।
रिपोर्टिंग टीम -
अनीता गुप्ता (इंडियाना), अनिल गुप्ता (इंडियाना), डॉ. शोभा खंडेलवाल (उत्तर-पूर्व ओहायो), सीमा वर्मा (टेनेसी), प्रेरणा शर्मा (टेनेसी), डॉ. तसनीम लोखंडवाला (उत्तर-पूर्व ओहायो), डॉ. सुनीता द्विवेदी (उत्तर-पूर्व ओहायो), डॉ. रश्मि चोपड़ा (उत्तर-पूर्व ओहायो), किरण खेतान (उत्तर-पूर्व ओहायो), डॉ. शैल जैन।
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कवि अभिनव शुक्ला द्वारा कवयित्री
आस्था नवल का सम्मान
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कवि अभिनव शुक्ला द्वारा
पुस्तकों का वितरण
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कवयित्री अर्चना पांडा
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- २२ वाँ द्विवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन २०२५
शैक्षिक संगोष्ठी की विस्तृत रिपोर्ट
द्वारा: रिपोर्टिंग टीम- अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति २२ वाँ द्विवार्षिक अधिवेशन
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शैक्षिक संगोष्ठी
सत्र की संयोजिका अर्चना पांडा और रश्मि चोपड़ा ने शानदार काम किया। कार्यशाला की आयोजक और समन्वयक किरण खेतान ने विभिन्न राज्यों से बहुत ही अच्छे प्रवक्ताओं को अधिवेशन में लाकर शैक्षिक कार्यशाला को सफल बनाया।
शैक्षिक कार्यशाला के 5 प्रस्तुतकर्ता और विषय -
१ ) डॉ. राजीव रंजन, शिक्षण/अधिगम सामग्री का डिजिटलीकरण: हिंदी के लिए ओपेन शैक्षिक संसाधन (OER);
२) डॉ. आस्था नवल, हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति: शिक्षक की भूमिका;
३) साधना कुमार, अमेरिका में द्वि भाषी साक्षरता की अपनी पहचान और मुहर लगा रही हैं: ४) अर्चना पांडा, आइए नई तकनीक और मनोरंजन के साथ हिंदी सीखें;
५) डॉ. राकेश कुमार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्रांति: हिंदी में परिवर्तन, संयुक्त राज्य अमेरिका में।
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कार्यशाला की आयोजक और समन्वयक
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डॉ. राजीव रंजन ( मिशिगन )—
विषय: हिंदुस्तानी विरासत के शिक्षार्थियों की विविधता और OER कीआवश्यकता
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राजीव रंजन मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी (MSU) के भाषा-विज्ञान, भाषाएँ और संस्कृतियाँ विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं। MSU में वे एशियन स्टडीज़ प्रोग्राम और मास्टर ऑफ आर्ट्स इन फॉरेन लैंग्वेज टीचिंग (MAFLT) प्रोग्राम से जुड़े हुए हैं। वे फुलब्राइट भाषा शिक्षण सहायक (FLTA) के लिए मार्गदर्शक (मेंटॉर) भी हैं। उन्होंने कीन यूनिवर्सिटी में “हिंदी और उर्दू भाषा संरचना शिक्षण हेतु” विषय भी पढ़ाया है। वे दो ओईआर (OER) पाठ्यपुस्तकों के लेखक भी हैं, जिनमें से एक है Basic Hindi (https://openbooks.lib.msu.edu/basichindi)
शिक्षाविदों और भाषा विशेषज्ञों ने हाल ही में एक सत्र आयोजित किया, जिसमें हिंदुस्तानी भाषा शिक्षार्थियों की विविधता पर चर्चा की गई। उन्होंने शिक्षण की मौजूदा चुनौतियों की पहचान की और खुला शैक्षिक संसाधनों(OER) को समाधान के रूप में प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों ने भाषा सीखने वालों की जरूरतों को समझने और उनके लिए प्रभावी संसाधनों का विकास करने पर जोर दिया।
कम प्रचारित भाषाओं (LCTLs) की सबसे बड़ी समस्या उपयुक्त और अद्यतन शिक्षण सामग्री की कमी है, जो विशेष रूप से ऑनलाइन शिक्षण और मिश्रित समूह (संवर्धन प्राप्त व गैर-संवर्धन प्राप्त) शिक्षार्थियों की ज़रूरतों को पूरा नहीं करती। पारंपरिक पाठ्यपुस्तकों और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी से यह चुनौती और बढ़ जाती है।
उन्होंने हिन्दी सीखने के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस तरह हिन्दी सीखने वालो को प्रदेश की जनसंख्या विविधता विभिन्नता प्रभावित करती है। हिन्दी सीखने में हिंदी विरासत के वर्गीकरण के महत्व के अंतर्गत बताया कि किस तरह भारतीय संस्कृति परिवार द्वारा हिन्दी भाषा का प्रयोग और संस्कृति का प्रभाव पड़ता है साथ ही साथ परंपरागत प्राचीन ऐतिहासिक पुस्तकें किस तरह अपना प्रभाव डालती हैं।
डॉक्टर राजीव रंजन ने वर्तमान समय में उपलब्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धि) (ए आए चैट जी बी टी ) का भी अभूतपूर्व प्रभाव हिन्दी सीखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है इस पर भी प्रकाश डाला।
इसका समाधान ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज़ (OER) के निर्माण में है। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी (MSU) द्वारा विकसित “बेसिक हिंदी” एक निःशुल्क, तकनीकी रूप से समृद्ध, संवादात्मक ऑनलाइन पाठ्यपुस्तक है, जो छात्रों को भाषा, संप्रेषण और संस्कृति में दक्ष बनाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
यह पुस्तक द्वितीय भाषा अधिगम के नवीनतम सिद्धांतों पर आधारित है और विभिन्न शिक्षण शैलियों को समर्थन देती है। इसमें H5P जैसे उपकरणों का उपयोग कर गेम-जैसी गतिविधियाँ जोड़ी गई हैं, जो शिक्षण को रोचक और प्रभावी बनाती हैं।
इस सत्र ने हिंदुस्तानी भाषा शिक्षार्थियों की जरूरतों को स्पष्ट किया औरOER के महत्व को उजागर किया। विशेषज्ञों ने सहयोग और शोध को बढ़ानेकी सिफारिश की, जिससे भाषा शिक्षण अधिक समावेशी और प्रभावी बनसके।
OER को अपनाने से भाषा सीखने वालों को न केवल उनकी सांस्कृतिकविरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा, बल्कि यह उन्हें अधिक सुलभ औरव्यावहारिक तरीके से सीखने में मदद करेगा।
उनकी निशुल्क पुस्तक basic Hindi मिशिगन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित का लिंक —
https://openbooks.lib.msu.edu/basichindi/
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डॉ. आस्था नवल ( वर्जीनिया )
विषय : हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति: शिक्षक की भूमिका;
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आस्था नवल, जो पिछले सात वर्षों से लेखन कार्य कर रही हैं, ने इस सत्र में हिंदी साहित्य एवं भारतीय संस्कृति पर विचार व्यक्त किए। उनकी पहली पुस्तक “आस्था की डायरी”और “लड़की आज भी” ने साहित्य जगत में उनकी पहचान बनाई है। एक जानी मानी कवि है. उन केअनेक काव्य ग्रन्थ, कहानी, लघु कथा और ‘आस्था की डायरी “ नाम का यूट्यूब चैनल है।आस्था जी का विषय दर्शकों में बहुत लोकप्रिय रहा। लोगो ने प्रश्न किये एवं अपने विचार सांझे किये।
आस्था जी ने अपने विषय का विश्लेषण - सुनने वालों के सामने प्रशनो केमाध्यम से किया। जिज्ञासा, प्रेरणा, प्रोत्साहन, उत्तेजना, उद्धरण, व्यक्तिगत अनुभव आदि सब तरह के भाव, वाद और संवाद आस्था जी नेअपनी प्रस्तुति में श्रोतागण के समस्त रख दिए। उनका मत है की बहतीनदी के सामान भाषा का रूप सदा बदलता है.बुद्धिमान व्यक्ति देश काल और स्तिथि के साथ भाषा के बदलते स्वरुप को स्वीकार करते है. संस्कृतिऔर भाषा एक दुसरे के पूरक है. धार्मिक ग्रन्थ और इतिहास की पुस्तक भीदेश, काल और समाज के साथ अपना रंग बदलती है।
इस सत्र में हिंदी साहित्य और संस्कृति के आदर्श एवं नियमों पर चर्चा हुई। प्रस्तुतकर्ता ने बताया कि प्रत्येक प्रदेश अपनी अलग संस्कृति लेकर आता है, और हिंदी साहित्य सभी के हित के लिए कार्य करता है। हिंदी साहित्य अत्यंत व्यापक है, जिसमें अनेक विधाएँ समाहित हैं।
सत्र की मुख्य बातें:
1. हिंदी साहित्य एवं संस्कृति का प्रभाव– साहित्य सभी को जोड़ता है, और इसके माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं। हिंदी साहित्य, भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं का चित्रण करता है। इसमें हमारे धार्मिक विश्वास, सामाजिक संरचना, परिवार व्यवस्था, और पारंपरिक मूल्यों का प्रतिबिंब दिखाई देता है। साहित्य, संस्कृति को संरक्षित करने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम करता है। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखता है साहित्य ने हमें अपनी संस्कृति की विविधता और सुंदरता को महसूस करने में मदद की है। इसने हमें अपनी संस्कृति के प्रति गर्व और सम्मान की भावना पैदा की है।साहित्य और संस्कृति के अध्ययन से हम समाज के विभिन्न पहलुओं को समझते हैं और उनके विकास में सहायक होते हैं।
2. श्रुति परंपरा– प्राचीन काल में कहानियाँ मौखिक रूप से प्रेषित होती थीं, जो आज भी समाज में विद्यमान हैं। "श्रुति" शब्द का अर्थ है "सुना गया" या "जो सुना जाता है"।श्रुति परंपरा के अनुसार ज्ञान या वेदों की शिक्षाएँ जो मौखिक रूप से पीढ़ी दर पीढ़ी सिखाई जाती हैं, यानी सुनाया और सुना जाता है। यह मौखिक परंपरा है जो वेदों और वैदिक मंत्रोच्चार को संरक्षित करती है।
3. शिक्षकों की भूमिका– "गुरु गोविंद दोऊ खड़े..." इस कहावत का उल्लेख करते हुए हिंदी साहित्य में शिक्षकों की अहम भूमिका पर चर्चा हुई। हिंदी साहित्य कई राज्यों में सहज रूप से समझा जा सकता है।शिक्षक छात्रों को हिंदी साहित्य के विभिन्न रूपों, जैसे कि कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास, निबंध आदि से परिचित कराते हैं और उन्हें इनकी विशेषताओं और साहित्यिक महत्व को समझने में मदद करते हैं।
4. संगीत और साहित्य का संबंध – साहित्य एवं संगीत का गहरा नाता है, जिससे ज्ञान एवं भावनाओं का समुचित संचार होता है। संगीत, एक कला रूप होने के साथ-साथ, साहित्य का एक रूप भी है, क्योंकि इसकी प्रस्तुति और प्रदर्शन में मौखिक शब्द शामिल होते हैं।संगीत में, साहित्य की रचनाएँ, जैसे कि कविताएँ या गीतों के बोल, संगीत का हिस्सा हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, कई लोकप्रिय गाने कविताओं या कहानियों से प्रेरित होते हैं।
5. शिक्षक की भूमिका - शिक्षकों का कार्य केवल पाठ्यक्रम पढ़ाना नहीं, बल्कि छोटे-छोटे पहलुओं द्वारा जीवन को संवर्धित करना भी होता है।छोटी-छोटी कहानियाँ, दोहे, और मुहावरे विद्यार्थियों को सीखने एवं सोचने की नई दिशा दे सकते हैं। साहित्य सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन का प्रतिबिंब है।
इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा के प्रसार को बढ़ावा देना था। हिंदी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व भी करती है। विदेशी भूमि में हिंदी साहित्य और भाषा को जीवंत बनाए रखना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने मूल से जुड़ी रह सकें। इस सत्र के माध्यम से हिंदी साहित्य और शिक्षक की भूमिका को अधिक स्पष्ट रूप से समझने का प्रयास किया गया।यह सत्र अत्यंत संवादात्मक रहा, जिसमें प्रस्तुतकर्ता ने अपने बचपन की कहानियाँ साझा करते हुए विषय को रोचक बनाया। हिंदी साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने में शिक्षकों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है, इस पर गहन चर्चा हुई।सभा मैं बैठे हुए श्रोताओं ने अपने अपने सवालों से चर्चा को और रोचक बना दिया।इस सत्र ने हिंदी साहित्य एवं संस्कृति की महत्ता को उजागर किया। शिक्षकों को न केवल साहित्य सिखाने बल्कि इसे जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा देनी चाहिए। हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा और विविधता इसके व्यापक प्रभाव को दर्शाती है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव संभव हो सकते हैं।
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साधना कुमार (कनेक्टिकट)
विषय: अपनी पहचान और द्विभाषिकता की मुहर का सम्मान ;
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साधना कुमार हिंदी भाषा के शिक्षण में सफल शिक्षक है. वह एक उच्चशिक्षा में ' शोध करता' के रूप में भी सुविख्यात है। उनका हिंदी भाषा की शिक्षा से गहरा सम्बन्ध है और वह १९९८ से इस कार्य में जुड़ी हुई है। साधना जी IHA के कन्वेंशन में व्यक्तिगत रूप में नहीं आने के कारण ज़ूम(zoom ) द्वारा स्क्रीन पे प्रकट हुई। उन्होंने अपनी बात बहुत ही स्पष्ट शब्दों में और प्रासंगिक उदाहरणों से समझायी।
अब अमेरिका के ५० प्रांतों में सील ऑफ़ बिलेटरसी ( Seal of Biliteracy ) हाई स्कूल के विद्यार्थी अगर चाहें तो ले सकते है। यह सील लेने केलिए क्या करना है, कैसे करना है और इस के क्या लाभ है - आर्थिक, आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक। सब ही श्रोता ने साधना जीके अनुभव और ज्ञान का लाभ उठाया।
साधना जी ने हिंदी में “सील ऑफ बाइलिटरेसी” (Seal of Biliteracy) प्राप्त करने की जानकारी दी। संचिप्त में—
1)अंग्रेज़ी में दक्षता दिखाएँ
राज्य परीक्षा, SAT, ACT आदि के माध्यम से।
2) हिंदी में दक्षता दिखाएँ- किसी मान्यताप्राप्त हिंदी दक्षता परीक्षा को पास करके।
स्वीकृत हिंदी दक्षता परीक्षाएँ:
AAPPL (ACTFL)
STAMP4S (Avant Assessment)
OPI / OPIc (ACTFL मौखिक दक्षता साक्षात्कार)
AP Hindi (यदि आपके स्कूल में उपलब्ध है)
अपने स्कूल से समय पर पूछें कि क्या हिंदी परीक्षा की सुविधा उपलब्ध है। आवेदन करने के लिए चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका (Step-by-Step Guide)
चरण 1: जाँचें कि क्या आपके राज्य में सील ऑफ बाइलिटरेसी उपलब्ध है।
चरण 2: पुष्टि करें कि हिंदी एक मान्य भाषा के रूप में स्वीकृत है।
चरण 3: अपने स्कूल काउंसलर से बात करें।
चरण 4: हिंदी दक्षता परीक्षा के लिए पंजीकरण करें।
चरण 5: स्नातक (Graduation) से पहले सभी मूल्यांकन (Assessments) पूरे करें, 11वीं वर्ग ज़्यादा अच्छा है।
Useful Links & Resources
National Seal of Biliteracy Website
Avant Assessment - STAMP Tests for Hindi
ACTFL Language Testing (AAPPL, OPI)
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अर्चना पांडा ( सन फ़्रांसिस्को)
विषय: आइए नई तकनीकों और मौज-मस्ती के साथ हिंदी सीखें ;
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अर्चना पांडा भारत से इंजीनियरिंग एवं एम् .बी.ए कर के अमेरिका आयीं थीं | अर्चना जी बे एरिया के कई सामाजिक संस्थानों में हिन्दी पढाती हैं | अमेरिका में हिन्दी के प्रचार में उन्होंने बहुत सराहनीय योगदान दिया है |उनकी कवितासंग्रह “ सृजनी” का विमोचन विश्व हिन्दी सम्मेलन 2007 में न्यूयॉर्क मेंहुआ।
शैक्षिक सत्र के दौरान आप का विषय “ आइये सीखें हिन्दी नई तकनीक और नए अंदाज़ के साथ” आपने बताया कि किस तरह मनोरंजन ही मनोरंजन में हिंदी सीखी जा सकती है। कुछ गानों के उदाहरणों से उन्होंने प्रस्तुत किया सरल शब्दों का उपयोग कर हिंदी कैसे सीखी जा सकती है। साथ ही बताया हिंदी सीखे ईडीयूटीएआईएनएमएनटी (Edutainment) के माध्यम से।Edutainment= शिक्षा (Education) + मनोरंजन (Entertainment)
यह ऐसे सामग्री या अनुभवों को दर्शाता है जिन्हें इस प्रकार तैयार किया गया है कि वे शिक्षा देते हुए मनोरंजन भी करें — जैसे शैक्षिक टेलीविज़न कार्यक्रम, बच्चों के लिए लर्निंग ऐप्स, इंटरैक्टिव खेलों के साथ म्यूज़ियम प्रदर्शनी इत्यादि अपने विचारों के साथ कविताओं को जोड़ कर लोगों को बहुत ही आनंदित भी किया।
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डॉ. राकेश कुमार ( इंडियाना)
विषय: "कृत्रिमबुद्धिमत्ता की क्रांति: संयुक्त राज्य अमेरिका में हिंदी शिक्षा का रूपांतरण"
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डॉ. राकेश कुमार ( इंडियाना) से आये थे। ये अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के इंडियाना शाखा के पूर्व और प्रथम अध्यक्ष हैं। हिंदी के प्रचार - प्रसार में इनका काफी योगदान रहा है। राकेश कुमार जी ने अपना मत स्पष्ट शब्दों में प्रस्तुत किया - आने वाले समय में हिंदी भाषा को टेक्नोलॉजी से अलग नहीं कर सकते ! हिंदी भाषाका प्रयोग, व्यवहारिक जीवन में उसका स्थान और आने वाली पीढ़ी कोसीखने में टेक्नोलॉजी का सहारा लेना अनिवार्य हैं।
इस शीर्षक के अंतर्गत यह दर्शाया गया कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) हिंदी भाषाकी शिक्षण और अधिगम प्रक्रिया को पूरे देश में बदल रही है। जैसे-जैसेभारतीय प्रवासी समुदाय का विस्तार हो रहा है और गैर-मातृभाषी लोगों मेंसांस्कृतिक रुचि बढ़ रही है, वैसे-वैसे शिक्षा में AI का एकीकरण शिक्षकों औरछात्रों दोनों के लिए नए अवसर खोल रहा है। प्रस्तुति की शुरुआत हिंदी कीवैश्विक पहचान के बढ़ते महत्व पर बल देते हुए हुई, विशेष रूप से संयुक्तराज्य अमेरिका में, जहाँ अब यह केवल घरेलू या विरासत भाषाई संदर्भों तकसीमित नहीं है। आज अधिक से अधिक स्कूल और विश्वविद्यालय अपने भाषापाठ्यक्रमों में हिंदी को शामिल कर रहे हैं, जिससे प्रभावशाली और आकर्षकशिक्षण विधियों की मांग पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। AI इस क्षेत्र मेंसक्रिय रूप से कदम रख रहा है, जो व्यक्तिगत शिक्षण, कक्षा प्रबंधन को सरलबनाने और वैश्विक स्तर पर भाषा अधिगम में जुड़ाव को सक्षम करने वाले कई उपकरण प्रदान कर रहा है।
प्रस्तुति के सबसे प्रभावशाली पहलुओं में से एक था नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) का उपयोग, जो भाषा अधिग्रहण में सहायक है। यह तकनीक वाक्यसंरचना का विश्लेषण करने, व्याकरण सुधारने, चैटबॉट्स के माध्यम सेवास्तविक समय में संवाद स्थापित करने और शब्दावली निर्माण में मदद करतीहै। इन टूल्स के माध्यम से छात्र सहज और प्रतिक्रियाशील तरीकों से भाषा से जुड़ते हैं, जिससे पारंपरिक कक्षा से बाहर भी एक प्रकार का इमर्सिव वातावरण निर्मित होता है। AI की व्यक्तिगत शिक्षण की क्षमता भी एक प्रमुख आकर्षण रही।
डीप लर्निंग एल्गोरिदम के माध्यम से ये प्लेटफॉर्म छात्रों की प्रगति को ट्रैककर पाठ योजनाओं को अनुकूलित कर सकते हैं। छात्रों को गेमिफाइड कंटेंट, कस्टम अभ्यास सेट और एक ऐसा वातावरण प्राप्त होता है जो गलतियों से सीखने को प्रोत्साहित करता है। इससे न केवल शिक्षा अधिक प्रभावशाली बनती है, बल्कि विभिन्न प्रकार के शिक्षण शैलियों और गति के अनुसार भी अनुकूल हो जाती है। प्रस्तुति में ऐसे कई AI टूल्स और ऐप्स का प्रदर्शन किया गया जो हिंदी सीखने को सभी के लिए सुलभ बनाते हैं। एक लाइव डेमो के माध्यम से यह दिखाया गया कि बिल्ट-इन अनुवाद क्षमताओं के साथ द्विभाषी पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन कैसे बनाया जा सकता है। AI के माध्यम से मूल्यांकनविधियों के विकास पर भी प्रकाश डाला गया। स्वचालित ग्रेडिंग, व्यक्तिगत फीडबैक, और प्रदर्शन विश्लेषण के माध्यम से मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और निष्पक्ष बनाया जा रहा है। इससे शिक्षक छात्रों को मार्गदर्शन देने में अधिकसमय दे सकते हैं और प्रशासनिक कार्यों में कम उलझते हैं, जिससे शिक्षा कीगुणवत्ता में समग्र रूप से सुधार होता है।
तकनीकी नवाचार के अलावा, हिंदी सीखने का सांस्कृतिक पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण बना हुआ है। AI की सहायता से अब शैक्षिक सामग्री में कहानियाँ, कविताएँ और त्योहार जैसी सांस्कृतिक रूप से समृद्ध सामग्री को भी जोड़ा जा रहा है, विशेष रूप से प्रवासी छात्रों के लिए। ये डिजिटल संसाधन भौगोलिकदूरी के प्रभाव को कम करते हैं और भाषा तथा उसकी विरासत से एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करते हैं। हालांकि इन प्रगतियों के बावजूद, प्रस्तुति में चुनौतियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया गया। डिजिटल पहुंच, एल्गोरिदमिक पक्षपात, डेटा सुरक्षा, और तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता जैसी चिंताओं को स्वीकार किया गया। वक्ता ने आग्रह किया कि AI का प्रयोग सतर्कता और नैतिकता के साथ होना चाहिए, जिसमें समावेशिता, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता दी जाए। भविष्य की ओर देखते हुए, AI को वर्चुअल रियलिटी जैसी इमर्सिव तकनीकों के साथ जोड़ने की संभावनाओं का भी अन्वेषण किया गया, जिससे छात्रों को संस्कृति-संपन्न आभासी वातावरण में हिंदी सीखने का अनुभव मिल सके। इस प्रकार की पहलों की सफलता शिक्षकों, तकनीकी विशेषज्ञों, संस्थानों और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग पर निर्भर करेगी।
अंत में सत्र एक आशावादी दृष्टिकोण के साथ समाप्त हुआ: यदि सावधानीपूर्वक और सोच-समझकर उपयोग किया जाए, तो AI हिंदी भाषा को वैश्विक स्तर पर संरक्षित और प्रचारित करने में एक शक्तिशाली सहयोगी बन सकता है। शिक्षकों को सहयोग प्रदान कर, सामग्री को समृद्ध बनाकर और छात्रों को सशक्त बनाकर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षण की मानवीय भावना को प्रतिस्थापित नहीं कर रही, बल्कि उसे सुदृढ़ कर रही है। जैसे-जैसे भाषा, संस्कृति और तकनीक का संगम और सशक्त होता जा रहा है, संयुक्त राज्य अमेरिका में हिंदी शिक्षा एक नए युग में प्रवेश कर रही है, जहाँ पहुंच, सहभागिता और नवाचार के नए द्वार खुल रहे हैं। प्रस्तुति के दौरान श्रोताओं की भागीदारी अत्यंत उत्साहजनक रही, और उन्होंने अनेक जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे जो उनकी गहरी रुचि को दर्शाते थे।
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निष्कर्ष (Conclusion)
सब ही प्रस्तुत कर्ताओं का अटूट विश्वास है की हमें आशावादी और आने वाले समय के लिए सजग के साथ उत्सुक होना चाहिए। गुरु और शिक्षक आधुनिक टेक्नोलॉजी का सदुपयोग और नई प्रणाली को स्वीकार ने की क्षमता और उत्साह होना आवश्यक है। प्रस्तुत कर्तायों ने सब उपस्थित श्रोता को अनेक उपयोगात्मक और व्यावहारिक जीवन के लिए टिपण्णी दीं। दर्शक पुरे समय प्रस्तुति कर्ताओं के साथ जुड़े थे।
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कवितायेँ / गजल
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- २२ वाँ द्विवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन २०२५
कवियों ने अधिवेशन में भाग लिया - उनके विचारों की अभिव्यक्ति
कविता या अपनी कलम के माध्यम से
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कोलकाता में जन्मे और पले-बढ़े इन्द्र अवस्थी ने हिंदी साहित्य में अपना विशेष स्थान बनाया है। एन आई टी प्रयागराज से कंप्यूटर साइंस में स्नातक, इन्द्र 1995 में अपने परिवार के साथ पोर्टलैंड आ गए। उनके पिता, अरुण प्रकाश अवस्थी, जो कोलकाता के एक प्रसिद्ध कवि और लेखक थे, ने उनके साहित्यिक प्रयासों को बहुत प्रभावित किया। इन्द्र हिंदी संगम, पोर्टलैंड के संस्थापक सदस्य हैं, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में हिंदी भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।
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हमारे लिए तो सारा अनुभव ही अविस्मरणीय था - हमेशा ऐसा लगता रहा जैसे किसी पारिवारिक उत्सव में बड़े भाई बहन के ऊपर सारी जिम्मेदारियों को छोड़कर, छोटों को धूम मचाने की आज़ादी मिल जाती है और उनकी हिम्मत को आप मुस्करा कर कभी साथ में ख़ुद बैठ कर बढ़ावा देते रहे , जबकि इस पूरे आयोजन में कितनी व्यवस्था रखनी पड़ती है और कितनी बातों पर दृष्टि -
मेरी नज़र तो आपके इलेक्ट्रॉनिक फोटो एल्बम और आपके घर की तस्वीरों से जैसे हट ही नहीं रही थी - आपसे और आनंद जी से बातें होंगी। आनंद खंडेलवाल जी की जो सामाजिक और राजनैतिक चेतना पर जो पैनी दृष्टि है , वह भी अद्भुत है -उनसे और भी बातें होंगी समय समय पर।
हमारे लिए तो यह बिल्कुल फ़ैमिली क्रूज हो गया - बल्कि रास्ते में पराठों के साथ भिंडी और आलू के साथ आपलोगो का स्नेह मन को भी तृप्त करता रहा।
अभिनव , अर्चना , आस्था - कमाल की बात है तीनों के नाम A से शुरू होते हैं - तुम तीनों की प्रतिभा, हास्यबोध और स्पष्ट वैचारिक धरातल की निश्छलता - यह सब गंभीरता और ऊँचाई दोनों का अद्भुत समन्वय है - आजकल के सोशल मीडिया के मुखौटों से जो मन में विरक्ति आती है उससे आगे बढ़कर एक विश्वास और बल्कि आत्मविश्वास जगता है इस तरह से मिलना जुलना - आशा है भविष्य में फिर साथ होंगे और सारी नींद घर में पूरी करके आयेंगे जिससे हमारी महफ़िल ना भंग हो पाये।
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आस्था नवल का जन्म दिल्ली के साहित्यिक परिवार में हुआ। पिताः डॉ॰ हरीश नवल और माता डॉ॰ स्नेह सुधा से बचपन से ही लेखन कला को विरासत में पाया। हिन्दी में स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधि ग्रहण की। उन्नीस वर्ष की आयु में उनकी प्रथम पुस्तक ‘आस्था की डायरी’और दूसरी पुस्तक ‘लड़की आज भी’ (प्रथम काव्य संकलन) २००६ में। साहित्य अमृत, विश्वा, गर्भनाल, हिन्दी जगत, गगनाँचल जैसी प्रख्यात पत्र पत्रिकाओं में कविता और लेख द्वारा उनका निरंतर योगदान रहता है। २०२१में हिन्दी दिवस के अवसर पर विश्व हिन्दी साहित्य परिषद द्वारा आस्था नवल को हिन्दी प्रज्ञा सम्मान से सम्मानित किया गया।
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क्लीवलैंड से वापसी पर
क्लीवलैंड से वापसी पर
एक ऐसाी आत्मीयता जो अब सहज नहीं मिलती
एक ऐसा आराम जो आत्मा को तृप्त करता हो
एक ऐसी बहन और मौसी
जो किताबों में क़ैद हो चुकीं हैं कबसे
वे सब एक साथ मिल गए मुझे
लगा किसी सुखद कहानी की पात्र बन गई हूँ
जहाँ क़िस्सों की गरमी
अपनों की नरमी है
अंतहीन संवाद और बच्चों सी मस्ती है
एक नटखट सा भाई है
एक गम्भीर से मंद मंद मुस्काते भईया हैं
प्यार से निहारते तस्वीरों से झाँकते बड़े बुजुर्ग भी
आस पास हैं
ऐसा दुलार जिसकी अब कल्पना भी नहीं करते
इतने सहज
इतने आत्मीय
ऐसे बेनाम पर भावों से भरे रिश्ते
आज मैं बना आई हूँ
डेढ़ दिन में
जीवन भर के लिए मीठी याद
मैं बटोर लाई हूँ
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गोलेन्द्र पटेल कविता, नवगीत, कहानी, निबंध, नाटक, उपन्यास व आलोचना लिखने में रूचि रखते हैं। इन्होने बी.ए. (हिंदी प्रतिष्ठा) व एम.ए., बी.एच.यू., हिन्दी से नेट की शिक्षा ली हैं। इन्हें कई सम्मान एवं पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं।
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1.प्रकृति जनपक्षरता की कृति है
जंगल से गुज़रते हुए प्रकृति के दर्द को सुनना
मानवीय गंध का गीत चुनना है
नदी-सागर-पहाड़ के पास है सूर्योदय का संगीत
और सूर्यास्त का गीत भी
सौंदर्य के साधक!
फूल के माथे से फूटा श्रम-संस्कृति का स्वर
मनुष्यता की मिट्टी में अँखुआया नया रव है
जिससे आत्मा की ज्योति ने पूछा कि
साहित्य में सामाजिक सत्य राजनीतिक झूठ से क्यों टकराता है?
अनुभव का अवलोकन कब किया जाता है?
क्या कला का लक्ष्य मनुष्य की चित्तवृत्ति है?
क्या अँधेरा उजाले को रचता है?
क्या अनुभूति के बगैर अभिव्यक्ति संभव है?
अनुभूति भाषा में विचारों की अभिव्यक्ति की पहली शर्त है
क्योंकि उसके केंद्र में स्याह संवेदना है
विज्ञान की बहस में
हृदय और मन के बीच यात्रा करती हुई बुद्धि
उदात्त चेतना है, जिसका कहना है—
“जो काव्य पाठक को मुक्त न करे,
वह बेकार है।”
दर्शन जीवन की लय में घुल गया है
सृजनात्मकता का समय के शब्दों से क्या सरोकार है?
क्या जनपक्षरता की कृति समानांतर सरकार है?
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2.जंगल में जन्मदिन
हम हैं नयी सदी के रचनाकार
हमारा जन्मदिन
ज़मीन पर नहीं,
आसमान में, करियाती गंधाती नदी में,
जल रहे जंगल में,
हमारे कद से छोटे पहाड़ पर
मनाया जाए
ताकि हम प्रकृति-प्रिय
पाठकों की पुतलियों में रहें
भले ही, असल जिंदगी में
रहें या न रहें
रचना में रहना है रहनुमा की तरह
उदार!
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कवितायेँ / गजल
आपरेशन सिन्दूर - चार दिन चार छंद
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अभिनव शुक्ला वर्तमान में अपने परिवार के साथ सैन एंटोनियो, टेक्सास में रहते हैं। पिलानी से सॉफ्टवेयर सिस्टम्स में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है। लोकप्रिय कवि तथा व्यंगकार अभिनव शुक्ल हिन्दी काव्य मंचों पर अपने गुदगुदाते घनाक्षरी छंदों और विनम्र तथा मनमोहक प्रस्तुतियों के लिए पहचाने जाते हैं। अपने आसपास की सामान्य घटनाओं से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों तक पर बड़ी सहजता और बेबाकी से कसे उनके व्यंग्य-बाण, श्रोताओं के दिलों को छू लेते हैं और हर चेहरे पर मुस्कान ले आते हैं। अभिनव की रचनाएँ सौ से अधिक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। उनके कविता-पाठ का प्रसारण अनेक रेडियो और टीवी चैनलों पर हो चुका है, और उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के रिकॉर्ड बना चुके हैं।
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आपरेशन सिन्दूर - चार दिन चार छंद
मज़हब पूछ कर आग बरसाने वालों,
शौर्य देख के घमंड चूर चूर हो गया।
चीन-अमरीका-तुर्क कोई न किसी का सगा,
आशा है हर एक भ्रम दूर दूर हो गया।
सोफिया की व्योमिका की, बात सुनें बिटिया की,
पाप का घड़ा हुज़ूर, भरपूर हो गया।
प्रीत वाली रीत संग, भरा था जो लाल रंग,
बन के सिन्दूर वही मशहूर हो गया।
महाराज विक्रम का नाम बतलाता हमें,
न्याय का सदैव अधिपत्य होना चाहिए।
कपटी कुटिल छली असुरों का विष दल,
इनका दलन अब नित्य होना चाहिए।
खैबर, बलूच, सिंधु की करुण है पुकार,
खंड खंड कर कृत कृत्य होना चाहिए।
सज्जनों को यज्ञ निर्विघ्न पूर्ण करने को,
दुर्जनों का राम नाम सत्य होना चाहिए।
नई तकनीक वाला नए युग का है युद्ध,
नई चाल चल नए रंग भी दिखायेगा।
पश्चिम जो दे रहा है दुष्ट पाक को उधार,
हथियारों का भी इंतज़ाम करवाएगा।
गूगल का सीईओ न माईक्रो सॉफ्ट वाला,
अजयपाल ट्रम्प न पटेल काम आएगा।
खेत की कटाई हेतु स्वयं भिड़ना पड़ेगा,
बाहर से आके कोई हाथ न बंटाएगा।
घर के पड़ोस में हो ज़हरीला नाग यदि,
फन भी उठाएगा, डसेगा, इतराएगा।
आप भले सत्तरह बार दें खदेड़ उसे,
दुष्ट है, वो बार-बार लौट कर आएगा।
उसको तो जीतना है सिर्फ एक बार,
साम दाम दंड भेद सब आज़मायेगा।
धर्म युद्ध है यह, इसे नीति न तोलियेगा,
शास्त्र को भी अंततः शस्त्र ही बचाएगा।
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पाठकों की अपनी हिंदी में लिखी कहानियाँ, लेख, कवितायें इत्यादि का
ई -संवाद पत्रिका में प्रकाशन के लिये स्वागत है।
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"प्रविष्टियाँ भेजने वाले रचनाकारों के लिए दिशा-निर्देश"
1. रचनाओं में एक पक्षीय, कट्टरतावादी, अवैज्ञानिक, सांप्रदायिक, रंग- नस्लभेदी, अतार्किक
अन्धविश्वासी, अफवाही और प्रचारात्मक सामग्री से परहेज करें। सर्वसमावेशी और वैश्विक
मानवीय दृष्टि अपनाएँ।
2. रचना एरियल यूनीकोड MS या मंगल फॉण्ट में भेजें।
3. अपने बायोडाटा को word और pdf document में भेजें। अपने बायो डेटा में डाक का पता, ईमेल, फोन नंबर ज़रूर भेजें। हाँ, ये सूचनायें हमारी जानकारी के लिए ये आवश्यक हैं। ये समाचार पत्रिका में नहीं छापी जायेगी।
4. अपनी पासपोर्ट साइज़ तस्वीर अलग स्पष्ट पृष्ठभूमि में भेजें।
5. हम केवल उन रचनाओं को प्रकाशित करने की प्रक्रिया करते हैं जो केवल अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति को भेजी जाती हैं। रचना के साथ अप्रकाशित और मौलिक होने का प्रमाणपत्र भी संलग्न करें।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति
हिंदी लेखन के लिए स्वयंसेवकों की आवश्यकता
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के विभिन्न प्रकाशनों के लिए हम हिंदी (और अंग्रेजी दोनों) में लेखन सेवाओं के लिए समर्पित स्वयंसेवकों की तलाश कर रहे हैं जो आकर्षक और सूचनात्मक लेख, कार्यक्रम सारांश और प्रचार सामग्री आदि तैयार करने में हमारी मदद कर सकें।
यह आपके लेखन कौशल को प्रदर्शित करने, हमारी समृद्ध संस्कृति को दर्शाने और हिंदी साहित्य के प्रति जुनून रखने वाले समान विचारधारा वाले व्यक्तियों से जुड़ने का एक अच्छा अवसर है। यदि आपको लेखन का शौक है और आप इस उद्देश्य के लिए अपना समय और प्रतिभा योगदान करने में रुचि रखते हैं, तो कृपया हमसे alok.iha@gmail.com पर ईमेल द्वारा संपर्क करें। साथ मिलकर, हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने और संरक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
प्रबंध सम्पादक: श्री आलोक मिश्र
alok.iha@gmail.com
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“संवाद” की कार्यकारिणी समिति
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प्रबंद्ध संपादक – श्री आलोक मिश्र, NH, alok.iha@gmail.com
संपादक -- डॉ. शैल जैन, OH, shailj53@hotmail.com
सहसंपादक – अलका खंडेलवाल, OH, alkakhandelwal62@gmail.com
डिज़ाइनर – डॉ. शैल जैन, OH, shailj53@hotmail.com
तकनीकी सलाहकार – मनीष जैन, OH, maniff@gmail.com
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रचनाओं में व्यक्त विचार लेखकों के अपने हैं। उनका अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की रीति - नीति से कोई संबंध नहीं है।
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Management Team
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