JUNE INTERNATIONAL HINDI ASSOCIATION'S NEWSLETTER
जून 2024, अंक ३६ | प्रबंध सम्पादक: संपादक मंडल
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Human Excellence Depends on Culture. The Soul of Culture is Language
भाषा द्वारा संस्कृति का प्रतिपादन
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति परिवार के सभी सदस्यों को
विश्व पर्यावरण दिवस, महाराणा प्रताप जयंती एवं विश्व योग दिवस की हार्दिक शुभकामनायें प्रेषित करती हूँ।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति का उद्देश्य हिन्दी भाषा और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देना, पुनर्जीवित एवं लोगों को जागरूक करना है। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की शाखायें और इसकी पहुँच अमेरिका के बहुत से शहरों के साथ- साथ दूसरे देशों में भी हैं। हमारी शाखाओं एवं इन शहरों में कार्यक्रम बराबर होते रहते हैं।
अप्रैल - मई के बीच हमारी समिति की विशेष सालाना प्रस्तुति “हास्य कवि सम्मेलन” का कार्यक्रम अमेरिका के २३ महानगरों में १२ अप्रैल, २०२४ से २७ मई, २०२४ के बीच आयोजित था। यह कार्यक्रम सभी आयोजित स्थलों पर बहुत ही सफल रहा और दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। प्रोग्रामों की रिपोर्ट हमारी समिति की ई-संवाद पत्रिका में प्रकाशित हुई हैं और जून पत्रिका में भी प्रकाशित है। उम्मीद करती हूँ कि आप उसका भरपूर आनंद ले रहें होंगे। आपके विचारों और सुझावों का हमेशा स्वागत है।
समिति की शाखायें समय समय पर बैठकें करती रहती हैं ताकि वे अपने शहरों में और कार्यक्रम कर सकें। अगला बड़ा कार्यक्रम हिन्दी दिवस का है जो सितम्बर १४ को हर साल भारत और अन्य देशो में मनाया जाता है। १४ सितम्बर, १९४९ को हिंदी भाषा को संविधान में राज भाषा का दर्जा दिया गया था और हमारे लिये यह बहुत ही गर्व की बात है। इस साल १४ सितम्बर को “अमृत महोत्सव हिन्दी दिवस” है और हमारी शाखायें गर्व के साथ इस दिन को मनाने की योजनाओं पर काम कर रही हैं। कार्यक्रमों की जानकारी के लिये आप अपने राज्यों में पता करें और कोई भी दिक़्क़त हो तो मुझसे संपर्क करें। अगर आपके राज्य में यह कार्यक्रम नहीं हो रहा है और आप करना चाहते हैं तो कृपया हम से संपर्क करें । हम इसमें आपकी सहायता करने की कोशिश करेंगे।
युवाओं को जोड़ना बहुत ही आवश्यक है। यदि हम चाहते हैं कि हमारी धरोहर “हिंदी भाषा और संस्कृति” हमारे बच्चों और आने वाली सभी पीढ़ियों में जीवित रहे और पनपती रहे तो हमें अपने परिवारों से ही प्रारंभ करना होगा। बच्चों को समिति से जुड़ने पर एक मंच मिलेगा और वे आगे भी जुड़े रहेंगे। पाठकों से विशेष अनुरोध है कि वे अपने जानने वाले और परिवार के युवकों को समिति से जोड़ें और यदि इस संबंध में आपके पास कोई सुझाव हों तो हमसे साझा करें।
अ.हि.स. की सभी स्थानीय समिति के अध्यक्षों से विशेष आग्रह है कि अपनी-अपनी समितियों में होने वाले कार्यक्रमों की अग्रिम सूचना भेजें ताकि ‘संवाद’ में उन्हें प्रकाशित किया जा सके। साथ ही एक और अनुरोध है कि जब कार्यक्रम हो जाये तो उसकी रिपोर्ट वर्ड एवं पीडीऍफ़ दोनों रूपों में भेजें ताकि ‘संवाद’ में प्रकाशित की जा सके और पाठक उन कार्यक्रमों का आनंद ले सकें। जिन कार्यक्रमों में स्थानीय विविधताओं, भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा को स्थान दिया गया हो, उनका विवरण भी फोटो के साथ भेजिये, हमें उन्हें प्रकाशित करने में ख़ुशी होगी।
आप सभी से विशेष निवेदन है कि ‘संवाद’ का जून २०२४ का अंक अच्छी तरह पढ़कर अपनी पसन्द, नापसंद लिखकर भेजें। आपकी प्रतिक्रिया आने पर सम्पादक-मंडल को अपना कार्य करने में आसानी होगी। अगर कोई किसी विशेष कार्य के लिए अपनी सेवा अर्पित करना चाहते हैं तो निसंकोच हमें बताने का कष्ट करें।
सहयोग की अपेक्षा के साथ
धन्यवाद
शैल जैन
डॉ. शैल जैन
राष्ट्रीय अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति २०२४-२५
ईमेल: president@hindi.org
shailj53@hotmail.com
सम्पर्क: 330-421-7528
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति – हिंदी सीखें
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- उत्तर पूर्व ओहायो शाखा
ग्रीष्मकालीन शिविर, 5 -15 उम्र के बच्चों के लिये
द्वारा: किरण खेतान, उत्तर पूर्व ओहायो शाखा की पूर्व अध्यक्षा
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Hello Friends and Family,
We are very excited to once again bring you Indian Heritage Culture Camp in person this year. Please look at the flyer for the information about the camp. If you are interested in registering your son or daughter for the camp , please open the attachment and click on the registration link and fill up the registration form. I am so excited that many people have already signed up to register their children.
Few seats are still open. I am anxiously waiting to welcome your son or daughter to the camp for a fun filled learning experience. We still have seats available . If you have any questions feel free to call Kiran, Kanika or Shalini.
With regards,
Kiran Khaitan, Program Director
Indian Heritage Culture Camp 2023
203 Cheltenham Lane
Munroe Falls, OH 44262
Tel:330-622-1377
e-mail: ihasummercamp@gmail.com
Kanika Goyal, Program Co Director
Tel: 862-754-0670
Shalini Goyal, Program Co Director
Tel: 440-590-5605
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- न्यू जर्सी शाखा में
हास्य कवि सम्मलेन, ५ मई, २०२४
द्वारा: डॉ. बबिता श्रीवास्तव, अध्यक्षा, न्यू जर्सी शाखा
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प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी न्यू जर्सी में 5 मई 2024 को भारत सेवा सदन कैंडल पार्क में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। हिंदुस्तान से आने वाले कवियों में अरुण जेमिनी शंभू शिखर और मुमताज़ नसीम थीं। अरुण जैमिनी और शंभू शिखर ने जहाँ अपनी व्यंगात्मकऔर हास्य रस से दर्शकों को हंसाया वहीं मुमताज़ नसीम ने अपने मधुर गीतों से बहुत ही खूबसूरत समाँ बाँधते हुए दर्शकों का मन मोह लिया I
दर्शकों की संख्या अच्छी खासी थी I आलोक मिश्रा जी, संजय खन्ना जी और कल्पना शुक्ला जी के परिश्रम का ही परिणाम था कि न्यू जर्सी में कवि सम्मेलन बहुत ही सफल रहा I हम आशा करते हैं कि हर वर्ष की भाँति अगले वर्ष भी ऐसे ही कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा और यहाँ पर रह रहे प्रत्येक भारतीय को अमेरिका में रहकर भी भारतवर्ष के कवि सम्मेलन वाली भावनाओं का अहसास कराया जाएगाI इस आयोजन के लिए मैं न्यू जर्सी चैप्टर की ओर से अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति का हृदय से आभार व्यक्त करना करती हूँ और आशा करती हूँ भविष्य में ऐसे ही हिंदी के क्षेत्र में और भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगेI
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- टैनिसी शाखा में
आयोजित वार्षिक हास्य कवि सम्मेलन १२ मई, २०२४
द्वारा: पूजा श्रीवास्तव, अध्यक्षा टैनिसी शाखा
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अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति, टैनिसी द्वारा आयोजित वार्षिक हास्य कवि सम्मेलन इस वर्ष गणेश मंदिर, नैशविल में रविवार, १२ मई २०२४ को गीत, कविता एवं हास्य प्रसंगों के साथ बड़े हर्ष और उल्लास से संपन्न हुआ।
हास्य कवि सम्मेलन इस समिति की एक अद्वितीय प्रस्तुति है, उसकी अपनी एक अभिज्ञा है। यह सम्मेलन प्रति वर्ष अमेरिका के विभिन्न शहरों में आयोजित किया जाता है। इसमें भारत से कवियों को आमंत्रित किया जाता है। ये कवि अपने हास्य व्यंग्यों, कविताओं एवं छंदों के माध्यम से भारत से दूर बैठे हम देशवासियों को अपने हंसी और ठहाकों द्वारा वतन की मिट्टी की सुगंध को हम सबके हृदय में तरो-ताज़ा करके हमें अपने भारत से जोड़ जाते हैं।
इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति द्वारा आमंत्रित कविगण श्री शंभु शिखर जी, श्री अरुन जेमिनी जी एवं कवियित्री मुमताज़ नसीम जी हम सबके बीच उपस्थित हुए थे। ये सभी अपने-अपने क्षेत्र के जाने-माने नाम हैं। मधुबनी, बिहार से आए हास्य रस के कवि श्री शंभु शिखर जी अपनी गेय शैली के लिए प्रसिद्ध हैं। अलीगढ़, उत्तर प्रदेश की शायरा मुमताज़ नसीम जी अपने शब्दों को गीतों के माध्यम से कहने के लिए जानी जाती हैं। हरियाणा से नाता रखने वाले श्री अरुण जेमिनी जी की हास्य व्यंग्यों और चुटकुलों के माध्यम से अपनी बात कहने के लिए एक अलग पहचान है।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की एक सदस्या श्रीमती प्रिया शुक्ला जी ने हिंदी और हिंदी साहित्य के सौंदर्य का वर्णन करते हुए बहुत ही सुंदर स्वरचित रचना प्रस्तुत की। मंच का संचालन श्रीमती प्रीती गज्जर जी, श्रीमती पूजा श्रीवास्तव जी एवं युवा पीढ़ी नें किया था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। तत्पश्चात समिति के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं द्वारा अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया था।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के सदस्यों एवं स्वयंसेवकों के बच्चों एवं महिलाओं ने बढ़ चढ़कर नृत्य एवं गायन में भाग लिया था। तक़रीबन २०० से अधिक लोगों ने इस कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया। मंच की सजावट से लेकर भोजन की व्यवस्था सब कुछ अति सराहनीय थी। समिति के सभी सदस्यों और स्वयंसेवकों ने ह्रदय से अपने दृढ़- संकल्पों और निरंतर प्रयास से इस कार्यक्रम को चार-चाँद लगा दिये।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- उत्तरपूर्व ओहायो शाखा,
द्वारा प्रायोजित, हास्य कवि सम्मेलन ४ मई, २०२४
द्वारा: प्रस्तुति: डॉ. सोमनाथ राय, सचिव, उत्तरपूर्व ओहायो शाखा
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प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति की उत्तरपूर्व ओहायो शाखा ने ३ मई, २०२४, शुक्रवार को नार्थ ऑल्मस्टेड, ओहायो के लोटस वेंक्वेट हॉल में हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इसबार कवि सम्मेलन में भारत से तीन प्रसिद्ध कवियों का पदार्पण हुआ।
श्रीमान अरुण जैमिनी नई दिल्ली के निवासी हैं एवम् हंस राज कॉलेज दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा प्राप्त की हैं। हास्य कविता की दुनिया में अरुणजी का नाम बहुचर्चित है एवम् अपनी अनोखी शैली और धमाकेदार प्रस्तुतीकरण की वजह से देश विदेश में अपार सफलता प्राप्त की हैं। इन्होंने अठारह से भी ज्यादा देशों में कवि सम्मेलन किया है एवम् वर्तमान में कवि सम्मेलन के अध्यक्ष पद पर आसीन हैं।
श्रीमान शम्भु शिखर हास्य और व्यंग्य जगत का बहुचर्चित नाम है। शम्भु शिखरजी बिहार के मधुबनी जिले से हैं एवम् वर्तमान दिल्ली के निवासी हैं। इन्होंने पोलिटिकल साइंस में दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातोकोत्तर स्तर की शिक्षा प्राप्त की है। इन्होंने हिन्दी साहित्य के जगत में दो दशकों से कवि सम्मेलनों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं एवम् साधारण, सहज और सरल भाषा की अभिव्यक्ति इनकी अनोखी पहचान है। इन्होंने इक्कीस से भी ज्यादा देशों में कवि सम्मेलनों में भाग लिया है। इनका ऐसा विश्वास है कि, दूसरों पर नहीं ख़ुद पर किया गया हास्य ही श्रेष्ठ हास्य होता है ।
श्रीमती मुमताज़ नसीम उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ शहर से ताल्लुक़ रखती हैं। इन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से उर्दू में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। इन्होंने काव्य मंचों और मुशायरों में अपने गीत गजलों के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनायी हैं। मुमताज़जी की आकर्षक प्रस्तुति पूरी महफ़िल को अपनी सुरीली आवाज़ और आकर्षक अंदाज से बांध देती है।
संध्याकालीन भोजन के पश्चात कार्यक्रम साढ़े छः बजे प्रारंभ हुआ। अ. हि. स. के राष्ट्रीय अध्यक्षा, डॉ. शैल जैन एवम् अन्य गण्य मान्य लोगों के द्वारा दीप-प्रज्वलन किया गया। दीप-प्रज्वलन के बाद तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूँज उठा।
इसके बाद अ. हि. स. उत्तर पूर्वी ओहायो शाख़ा के अध्यक्ष श्रीमान अश्वनी भारद्वाज ने सबका स्वागत किया। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष अ. हि. स. की केंद्रीय समिति की ओर से आयोजित किया जाता है। समिति का लक्ष्य हिन्दी भाषा एवम् भारतीय संस्कृति का संरक्षण, प्रचार और संवर्धन करना है। आज का यह कार्यक्रम इस लक्ष्य की पूर्ति में सहायक है ।
इसके बाद श्रीमान अश्वनी भारद्वाज जी ने एक एक कवि को बारी बारी से मंच पर आमंत्रित किया और उनका परिचय करवाने के लिए समिति के जिम्मेदार तीन सदस्यों को मंच बुलाया।
सबसे पहले श्रीमती मुमताज़ नसीम जी को तालियों की गड़गड़ाहट के साथ मंच पर बुलाया गया एवम् श्रीमान अनुराग गुप्ता जी ने उनका परिचय करवाया। इसके बाद श्रीमान शम्भु शिखर जी को तालियों की गड़गड़ाहट के साथ मंच पर बुलाया गया एवम् डॉ. सोमनाथ राय ने उनका परिचय करवाया। अंत में श्रीमान अरुण जैमिनी जी को तालियों की गड़गड़ाहट के साथ मंच पर बुलाया गया एवम् श्रीमती वंदना भारद्वाज ने उनका परिचय करवाया।
इसके बाद श्रीमान अश्वनी भारद्वाज जी ने अ. हि. स. के राष्ट्रीय अध्यक्षा डॉ. शैल जैन जी को मंच पर बुलाया, जिन्होंने सभा को संबोधित किया एवम् ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को अ. हि. स. से जुड़ने एवम् सहयोग करने का अनुरोध किया। इसके बाद श्रीमान अश्वनी भारद्वाज जी ने श्रीमती प्रेरणा खेमका को मंच पर बुलाया एवम् प्रेरणा जी ने श्रोता गणों को संबोधित करते हुए अ. हि. स. का आजीवन सदस्यता लेने के लिए अनुरोध किया और लगभग दस लोग इसके लिए राजी हो गये।
तत्पश्चात् श्रीमान अश्वनी भारद्वाज जी ने मंच-संचालन के लिए श्रीमान अरुण जैमिनी जी को तालियों की गड़गड़ाहट के साथ माईक सौंप दिया। श्रीमान अरुण जैमिनी जी ने श्रोता गणों को संबोधित किया एवम् कार्यक्रम की शुरुआत श्रीमान शम्भु शिखर जी से करवाई। शम्भु शिखर जी ने अपने हास्य एवम् व्यंग्य कविताओं के माध्यम से लोगों का दिल बहलाया। तत्पश्चात् श्रीमती मुमताज़ नसीम ने माईक सँभाला। उन्होंने अपने कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से किया और अपनी सुरीली आवाज़ से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। तत्पश्चात् श्रीमान अरुण जैमिनी जी ने माईक सँभाला एवम् अपनी हरियाणवी अंदाज़ से हास्य रस के कविताओं से लोगों का दिल जीत लिया।
इस प्रकार यह हास्य ब्यंग कविताओं का कार्यक्रम दो घंटे से भी ज़्यादा देर तक चला एवम् ढाई सौ से तीन सौ दर्शकों ने इसका भरपूर आनंद लिया। तत्पश्चात् अ हि. स. उत्तर पूर्व ओहायो शाखा के उपाध्यक्ष डॉ. राकेश रंजन ने सभी कवियों को, कार्यकारिणी समिति के सदस्यों को, सभी स्वयंसेवकों को, टीवी एशिया के महेश जी को और दर्शकों को धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के अंत में लोगों ने कवियों के साथ फोटो भी खिंचवाए।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -उत्तर पूर्व ओहायो शाखा
कवि सम्मलेन २०२४ के बाद बैठक और आगामी कार्यक्रमों पर विचार
जून ७ , २०२४
द्वारा: अश्विनी भरद्वाज , उत्तर पूर्व ओहायो शाखा के अध्यक्ष
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कवि सम्मेलन की सफलता के बाद अ.हि.स. की उत्तर पूर्व शाखा ने अपनी कार्यकारिणी समिति एवं स्वयंसेवकों के लिये सराहना रात्रिभोज एवं बैठक रक्खी । ये कार्यक्रम समिति की पूर्व अध्यक्षा श्रीमती किरण खेतान के निवास स्थान पर हुआ। मीटिंग में कवि सम्मेलन के बारे में सबों के विचारों को जाना गया ताकि आगे और भी अच्छा प्रोग्राम हो सके ।आगे के सभी कार्यक्रमों पर विस्तृत विचार विमर्श भी किये गये। प्रोग्रामों की सूची जिनपर बातें हुई उनकी सूची संलग्न है।
1.इंडियन हेरिटेज कल्चर कैंप "Indian Culture Heritage Camp"- 8 जुलाई, 2024 से तीन सप्ताह के लिए , रिचफील्ड, ऑहियो में।
2. FICA आनंद मेला- 17 अगस्त को।
3. इंडिया फेस्ट - स्वतंत्रता दिवस परेड में भागीदारी - 18 अगस्त, 2024 (रविवार)।
4. एक विश्व दिवस "One World Day" - 25 अगस्त @ सुबह 11:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक। 78वें वार्षिक एक विश्व दिवस पर दुनिया का अन्वेषण करें। इस दिन नए अमेरिकी नागरिकों के लिए एक प्राकृतिकरण समारोह, झंडों की परेड, और हमारे सभी सांस्कृतिक उद्यानों में जातीय भोजन, संगीत और नृत्य की सुविधा होती है - जो क्लीवलैंड के बेहतरीन और सबसे उत्सवपूर्ण कार्यक्रमों में से एक है।
5. इंडिया फेस्ट - 14 सितंबर (शनिवार) को 15वां वार्षिक आईएफयूएसए का जश्न।
6. वार्षिक हिंदी दिवस - 22 सितंबर (रविवार दोपहर) को अपनी शाखा द्वारा।
7. FICA दिवाली 19 अक्टूबर 2024 को शाम 6 बजे ला विला सेंटर में
8. भारत उत्सव - 26 अक्टूबर, 2024 रोशनी का त्योहार - दिवाली मेला
9. विश्व हिंदी दिवस: 12 जनवरी, 2025 (रविवार)
10. एशियाई विरासत दिवस – वर्ष 2025 के लिए
11. अन्य भारतीय समुदायों, जैसे मराठा मंडल, तेलुगु एसोसिएशन, बंगाली एसोसिएशन, आदि से जुड़ें। हम विभिन्न सहयोगी सामुदायिक कार्यक्रमों में आईएचए का प्रतिनिधित्व करने के लिए उत्साही व्यक्तियों की भी तलाश करते हैं। आपकी भागीदारी हमारी उपस्थिति को मजबूत करेगी और समुदाय के भीतर मजबूत संबंधों को बढ़ावा देगी।
समिति के लोगों ने आपनी पूरी कोशिश, ज़्यादातर प्रोग्रामों को करने का निश्चय किया । जल्द होने वाले कार्यक्रमों पर आगे विस्तृत विचार जल्द ही करने का निश्चय लिया ।
रात्रिभोज और सबों से मिलने का आनंद ले सभी प्रसन्न हो लौटे।
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अंतराष्ट्रीय हिन्दी समिति - नैशविल, टैनिसी शाखा द्वारा
शाखा में होने वाले आगामी कार्यक्रमों की सूचि और बैठक
प्रतिवेदन: पूजा श्रीवास्तव, अध्यक्षा टैनिसी शाखा
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"कवि सम्मेलन की सफलता के पश्चात समिति के सभी सदस्यों एवं कार्यकर्ताओं की एक बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सम्मेलन में हुई त्रुटियों एवं लोगों द्वारा आए सकारात्मक एवं नकारात्मक सुझावों की समीक्षा एवं भविष्य में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना था। सभी कार्यकर्ताओं की उनके द्वारा किए गए कार्यों के लिए व्यक्तिगत रूप से सराहना की गई। हँसी ठहाकों एवं अपनत्व की भावना के साथ इस बैठक का समापन हुआ।"
अ.हि.स. - टेनेसी चैप्टर आने वाले भविष्य में 3 बड़े इवेंट करने की योजना की सूचि:
*वार्षिक पिकनिक - 22 जून
*हिंदी दिवस - 14 सितंबर
*सदस्य पर्व- प्रस्तावित - दिसंबर के पहले सप्ताह
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अंतराष्ट्रीय हिन्दी समिति - नैशविल, टैनिसी शाखा द्वारा
शाखा के आगामी कार्यक्रमों पर समिति बैठक और वैलेंटाइन दिवस उत्सव
फ़रवरी २०२४
प्रतिवेदन: श्री स्वपन धैर्यवान द्वारा- कुछ झलकियाँ
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- हयूस्टन शाखा समिति की बैठक आगे के प्रोग्रामों पर विचार विमर्श एवं वैलेंटाइन दिवस उत्सव मनाने के लिए फ़रवरी २०२४ को हुई ।
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नॉर्थ ऑल्मस्टेड स्कूल “North Olmstead Schools, Ohio”
"अन्तर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन २०२४”
विविधता प्रोग्राम "Diversity Event"
प्रस्तुति: डॉ. सोमनाथ राय, फ़ाईका के कार्यकारी सदस्य
एवं अ.हि.स.उत्तरपूर्व शाखा के सचिव
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मई २४, २०२४, शुक्रवार को नॉर्थ ऑल्मस्टेड उच्च विद्यालय ने अपना वार्षिक अन्तर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जो शाम ६:०० बजे से ९:०० बजे तक चला।कुल मिलाकर ३३ देशों ने इसमें भाग लिया जिनमे अमेरिका, अल्बेनिया, आर्मेनिया, बोस्निया, चीन, डोमिनिकन रिपब्लिक , मिस्र, फ्रांस, घाना, ग्वाटेमाला, ग्रीस, जर्मनी, हंगेरी, भारत, ईराक, जमाइका, जापान, आयरलैंड, इटली, जॉर्डन, लेबनान, मेक्सिको, फिलिस्तीन, पोयर्टो रिको, रोमानिया, सर्बिया, सेनेगल, सोमालिया, सीरिया, सऊदी अरब, स्वीडन, तुर्किये एवम् यूक्रेन आते हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ नॉर्थ ऑल्मस्टेड के मेयर, श्रीमती निकोल डेली जोन्स, की उपस्थिति में अमेरिकन राष्ट्रीय गान के साथ हुआ। उसके बाद कार्यक्रम में भाग लेने वाले विभिन्न देशों के लोकप्रिय नृत्यों का प्रदर्शन उच्च विद्यालय के फुटबॉल फील्ड में हुआ।
भारतीय समुदाय की तरफ से फ़ाईका (फेडरेशन ऑफ़ इंडिया कम्युनिटी एसोसिएशन ) ने इस अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक समारोह में भाग लिया। फ़ाईका की ओर से बच्चों ने भारतीय सामूहिक नृत्यों का प्रस्तुतिकरण किया एवम् अपने मंडप से निःशुल्क भोजन सामग्री का वितरण किया। निःशुल्क भोजन सामग्री की आपूर्ति तीन स्थानीय भारतीय रेस्टोरेंट ने की थी जिनके नाम है खाओ माचा, सैफरन पैच एवम् अन्नपूर्णा।भारत नाट्यम प्रस्तुत करनेवाले बच्चों के नाम तानवी, मलंकार, श्रीविद्या रेगडमिल्ली, वंशिका, माइनेनी, प्राण्हिता पिल्लरी सेटी, मनस्वी गलगली एवम् श्रियानी टैलपरेडी हैं। दूसरा नृत्य था भांगड़ा जिसे बहुत ही दमदार तरीक़े से दो जुड़वां बच्चे मेहर एवं नींव जैन ने प्रस्तुत किया। इस समारोह में क़रीब ५०० लोगों ने भाग लिया।
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अपनी कलम से
विश्व पर्यावरण दिवस, जून ५, २०२४
द्वारा: डॉ. शैल जैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति
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5जून, 2024 को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। यह दिवस प्रकृति के प्रति प्रेम व लोगों को जागरूक करने के लिए पूरे विश्व में मनाया जाता है। विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 1973 से संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा शुरू किया गया और अभी करीब 100 से अधिक देशों में मनाया जाता है। प्रकृति के प्रति सकारात्मक विचारों को लेकर लोगों को जागरूक किया जाता है। स्कूल, कॉलेज व अन्य स्थानों पर लेख, भाषण, कला प्रतियोगिता, बैनर प्रदर्शन,संगोष्ठी, पेड़ रोपण कार्य इत्यादि होते हैं। ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते प्रदूषण के कारण इसकी ज़रूरत पूरे विश्व में है और सभी को लगातार प्रयास करना ज़रूरी है।
प्रतिवर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की एक ख़ास थीम होती है। २०२३ में प्लास्टिक प्रदूषण के समाधान पर आधारित थी। इस साल २०२४ का थीम “land restoration, Decertification and drought resilience” with the slogan, “Our Land, Our future” पर आधारित है।
हम सभी नागरिकों को पर्यावरण को शुद्ध करने के लिये अपना अपना सहयोग देना चाहिये, जैसे कि हर साल कम से कम एक पेड़ रोपित करें, नदी तालाब इत्यादि जगहों को दूषित ना करें, प्लास्टिक का ज़्यादा प्रयोग ना करे। प्लास्टिक थैलों की जगह कपड़े के थैले का प्रयोग करें, पानी को ज़रूरत के हिसाब से प्रयोग करें, पेड़ कम काटें, पशु पक्षी पर दयावान रहें इत्यादि।
पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना है तो हमें पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली अपनानी ही होगी।
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विश्व पर्यावरण दिवस, २०२४
स्व० सुशीला मोहनका जी की पून्य स्मृति में पेड़ो का आरोपण
21 वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन झारखण्ड प्रदेश, भारत
29-30 मार्च 2024
द्वारा: श्रीमती नीरा बथवाल,राष्ट्रीय अध्यक्षा,
अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन, भारत
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अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन, भारत का 21 वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन 29-30 मार्च को झारखण्ड प्रदेश के पारसनाथ में, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती नीरा बथवाल जी द्वारा किया गया। स्व० सुशीला मोहनका जी सम्मलेन की संस्थापक थीं और आज समिति में 230,000 से ज्यादा सदस्य हैं। अमेरिका आने के बाद उन्होंने अंतराष्ट्रीय हिन्दी समिति में स्थानीय एवं राष्ट्रिय दोनों स्तर पर 35 -40 वर्षों तक एक सक्रीय भूमिका निभाई।
30 मार्च , 2024 को स्व० सुशीला मोहनका जी की पून्य स्मृति में 100 से ज्यादा पेड़ पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षा मीना गुप्ता, तत्काल राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती नीरा बथवाल एंव अन्य बहनों के कर कमलो द्वारा लगाये गये। ये बगीचा स्व० सुशीला मोहनका जी की याद में समर्पित किया गया।
यह चिरकाल तक स्वर्गीय सुशीला मोहनका जी की याद दिलाती रहेगी और उनकी याद में सभी पेड़ -लहलहाते हुए फल और फूल देकर सबको तरोताजा करते रहेंगे।
बाद में बगान को और विस्तृत करने के लिये मारवाड़ी महिला समिति गिरिडीह शाखा द्वारा 57 कलमी फलों के वृक्ष पारसनाथ शिखरजी के सुशीला जी मोहनका स्मृति उद्यान में लगाने के लिये भेजे गये । फलदार वृक्षों को पारसनाथ गाड़ी से भेजा गया।
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विश्व पर्यावरण दिवस, २०२४
"गुरुचरण ग्रीन रिवोल्यूशन, पेड़ रोपण कार्य"
द्वारा श्रीमती शशि मोदी,अहमदाबाद, भारत
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द्वारा - श्रीमती शशि मोदी
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श्रीमती शशि मोदी,अहमदाबाद, भारत की निवासी हैं। पर्यावरण की रक्षा हेतु पेड़ लगाना, समाज को पर्यावरण के संरक्षण का महत्व बताना और उन्हें सजग करना। हिंदी भाषा के प्रति प्रेम एवं हिंदी भाषा की लेखिका एवं कवित्री भी हैं।
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गुरुचरण ग्रीन रिवोल्यूशन, अहमदाबाद, भारत :का उद्देश्य पर्यावरण की सुरक्षा और स्वयं अपने को देव ऋण से मुक्त करने का प्रयास है। इसी सोच को साकार रूप देते हुए वृक्षारोपण का कार्य शुरू हुआ।
अपने आस पड़ोस से शुरू होकर पूरे शहर और फिर शहर से बाहर गाँवों में वृक्षारोपण के कार्य से लोगों को जोड़ना, बच्चों, सीनियर सिटीजन, गाँव के रहवासियों को पेड़ों की सुरक्षा और उसके द्वारा पर्यावरण की सुरक्षा का महत्व समझाने और सिखाने का कार्य हमारी संस्था ने पूरे उत्साह के साथ किया।
हमारी संस्था स्वदेशी और लुप्त हो रहे पेड़ जैसे बरगद, पीपल नीम अशोक चंदन इत्यादि और वन्य पशु पक्षियों के लिए फलों के पेड़ जैसे जामुन चीकू अमरूद इत्यादि अधिक से अधिक मात्रा में लगाने और उनका संरक्षण करने के लिए प्रतिबद्ध है। अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की मदद से हम दूर दराज के इलाकों में भी कार्य करने में सक्षम हैं।
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अपनी कहानियाँ
"चरखों की पंचायत"
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द्वारा - डॉ. उमेश प्रताप वत्स
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डॉ. उमेश प्रताप वत्स यमुनानगर, हरियाणा के निवासी हैं। लेखक के साथ-साथ एक अच्छे खिलाड़ी भी हैं। 2004 में अखिल भारतीय कुश्ती प्रतियोगिता में 63 किलो भार वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्णपदक प्राप्त कर चुके हैं। इनको बाँसुरी वादन का भी शौक है।
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चरखों की पंचायत
चल मेरे चरखे चकर-चूँ, गेल दहेज मै आया था क्यूँ।
या फिर....
ठाले री सखी पीढ़ा बतलावैंगे, सूत कातन नै चरखा चलावैंगे।
इस तरह के लोकगीत चरखों पर सूत कातते हुए हमारे घर की तरह ही गाँव के उन सब घरों में सामूहिक रुप से गूँजते रहते थे जहाँ घर के आँगन बड़े-बड़े होते थे या फिर आँगन में छायादार बकैण आदि के पेड़ हुआ करते थे।
मुझे याद है जब हमारे घर में ही पाँच चरखे हुआ करते थे। एक दादी का, एक माँ का, एक ताई का तो एक भाभी का और एक मेरी बड़ी बहन चलाती थी। फिर पड़ोस की चाची, ताई और लड़कियाँ भी दोपहर के खाने के बाद घर का चूल्हा-चौका निपटाकर अपने-अपने चरखे सिर पर उठाए हमारे घर आकर दलान में इकट्ठी हो जाती थी। चरखे सिर पर रखे होते हुए भी उनकी बातें चलती रहती थी । फिर जब वे चरखे नीचे रखकर अपने-अपने पीढ़े पर बैठ जाती तो माँ सबको पानी-वानी पिलाती और फिर शुरु हो जाती चरखों की चकर-चूँ, चकर-चूँ। इधर चरखे का पहिया चलता उधर बिना किसी झिझक , रोक-टोक के सबकी जुबान चलती। जब बातें करते हुए बहुत देर हो जाती तो किसी भी बात पर खिलखिलाकर हंसने लगती।
दोपहर की धूप कम होने के बाद सारी पड़ोसने हमारे बड़े से आंगन में बकैण के नीचे छाया में चरखा रखकर अपनी पहले से ही निश्चित की गई जगह पर कब्जा करके बैठ जाती। एक ओर चरखें चकर-चूँ , चकर-चूँ करते तो इनकी चकर चूँ के साथ-साथ सभी महिलाएँ मिलकर लोकगीत की मधुर लय से सारे आँगन में मधुरता का रस सा घोल देती और जब एक के बाद एक गीत गाते-गाते थक जाती तो फिर शुरु हो जाती थी चरखों की पंचायत, जिसमें गाँवभर की खट्टी-मीठी, अच्छी-बुरी और राजी-खुशी सभी प्रकार की बातें चलती। कुछ महिलाएँ बोलने में बहुत वाकपटु थी तो कुछ हगूंरे देने में ही उस्ताद। उनकी आवाज बाहर गली से गुजरते लोंगो तक भी यह संदेश पहुँचा देती कि पटवारी के घर में चरखों की पंचायत शुरु हो गई है।
अक्सर गाँव में सभी घरों में रिवाज सा था कि बच्चों को नाश्ता-पानी करवाकर पाठशाला भेज दिया जाता और फिर दोपहर का खाना तैयार कर सबको परोसा जाता, खाना खाकर घर के आदमी तो बैठक या चौपाल में चले जाते और औरतें घर का सारा चुल्हे-चौके का काम निपटाकर कल वाली बात को पूरा करने के लिए आतुर हो चरखों की पंचायत का बेसब्री से इन्तजार करती।
चरखे को समाज में सम्मानित स्थान दिलाने वाले महात्मा गाँधी ने भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन यह चरखा हिन्दुस्थान के गाँव-गाँव में महिलाओं की पंचायत के लिए सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरेगा। यह पंचायत लोकगीतों के माध्यम से मनोरंजन और सामूहिक चर्चा के माध्यम से ज्ञान का बहुत बड़ा भंडार भी थी। यह भी कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि कई बार इन्हीं चरखों की पंचायत में भविष्य गढ़ने का सकारात्मक मार्ग भी निकलकर आता था।
चरखों की यह पंचायत मात्र सूत कातने तक सीमिन न होकर आर्थिक स्वालंबन का माध्यम भी थी। हर बधुवार सभी महिलाएँ सप्ताह भर का सूत इकट्ठा कर एक साथ खादी आश्रम जाती और बदले में या तो घर के लिए खेस, तौलिये आदि ले आती या फिर जवान होती बिटिया अथवा पोती के लिए दरी, चादर बिस्तर आदि लेकर आती ताकि थोड़ा-थोड़ा सामान एकत्रित कर धीरे-धीरे आने वाले समय में विवाह में लड़की को देने के लिए कुछ प्रबंध भी हो जाए और परिवार के मुखिया कहे जाने वाले पुरुषों पर अधिक भार भी न पड़े। खादी आश्रम वाले साबुन, तेल आदि घर के लिए जो कुछ भी जरूरत का सामान रखते वो भी सूत के बदले आसानी से मिल जाता। जो महिलाएँ लगातार सूत कातकर घर का सभी आवश्यक सामान जुटा लेती वे अपनी जमापूँजी वाली कॉपी में सूत के बदले मिलने वाले पैसे जुड़वा लेती थी अर्थात् आदमी जो पैसे कमाता उससे अलग भी ये महिलाएँ घर की अर्थव्यवस्था को सँभालने के लिए घर के काम-काज के साथ-साथ अतिरिक्त श्रम करती थी।
अभी पिछले साल की ही तो बात है रामशरण चाचा केहरी जमींदार के खेतों के पास जंगल में ईंधन के लिए सूखी लकड़ियाँ लेने गए तो सहसा ही एक काले नाग ने ऐसा डंक मारा कि कुछ ही देर में रामशरण चाचा का पूरा शरीर नीला पड़ गया। चीखने-चिल्लाने पर जब खेत में काम कर रहे कुछ ग्रामवासी दौड़कर आए तो तब तक चाचा की जीवन लीला ही समाप्त हो गई थी। पीछे घर में तीन बच्चों के साथ चंपा चाची विधवा बेसहारा होकर रोटी के लिए भी मोहताज हो गयी।
एक दिन चाची हमारे घर आकर माँ के सामने अपने दुःखड़े सुनाती-सुनाती फफक-फफक कर रो पड़ी कि जब बिल्लू का बापू जमींदार के यहाँ काम करता था तो खाने को अनाज के दाने मिल जाते थे तथा तीज-त्यौहार पर कुछ कपड़े-लत्ते भी मिल जाया करते थे। अब तो उनके साथ-साथ सब कुछ उजड़ गया जीने का कोई सहारा न रहा। बहन जी दुःख अपनी जगह और पेट अपनी जगह। भूखे पेट को तो रोटी चाहिए चाहे दुःख हो या सुख। ऐसे में मैं जब अपने बच्चों को भूखा बिलखते देख अपने कलेजे पर पत्थर रखकर अपने आदमी की जगह काम करने के लिए जमींदार के पास गई तो मेरी लाचारी देख मेरी व मेरे बच्चों की भूख की परवाह किये बिना वह अपनी भूख मुझ बेसहारा से मिटाना चाहता है। बहन मैं क्या करुँ और कहाँ जाऊँ ? कैसे चलाऊँ घर का सब खर्च? कैसे अपने बच्चों का पेट भरू।
माँ ने कहा देख चंपा बहन मेरे होते हुए तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो। माँ भीतर गई और अपना चरखा उठाकर लाई और बोली, आज के बाद यह चरखा तुम्हारा है और बहन तुम सूत कातकर अपने घर का खर्च चलाओ, अपने बच्चों का पेट भी भरो। माँ एक बोहिये में रुई भी लेकर आयी और कहा आज से ही तुम चरखा कातना शुरु कर दो। चंपा चाची का गला रुँध गया। शुक्रिया कहने के लिए उसके मुख से बोल ही नहीं निकल पा रहे थे। वह माँ के चरणों में बैठ गई और कृतज्ञता भरी दृष्टि से माँ को निहारने लगी।
चंपा - लेकिन...
माँ बोली-देख चंपा, परेशान होने की जरूरत नहीं जब तुम अपना चरखा बनवा लोगी तो मेरा चरखा वापिस कर देना। कहती हुई माँ चंपा चाची के लिए एक थाली में खाना लेकर आई बच्चों के लिए भी एक डिब्बे में पैक कर दिया।
पति तो नहीं रहा किन्तु चरखे के कारण चंपा चाची को एक नया सहारा मिल गया था। वह इज्जत से दो रोटी खाने के और दो पैसे बचाने के सपने देखने लगी और एक उम्मीद के साथ अपने घर चली गई। दोपहर बाद सबके साथ चंपा चाची ने भी हमारे आँगन में ही चरखा चलाना शुरु कर दिया और सूत कातने के साथ-साथ कुछ दिनों में ही सबके साथ बोलने बतलाने से उसका दुःख भी हल्का हो गया और सारा सूत लेकर जब वह खादी आश्रम गई तो उसे सूत के अच्छे-खासे दाम भी मिल गए, जिससे वह घर की जरुरतों का सामान खरीद लाई फिर कुछ ही दिनों बाद सूत कातने से इकट्ठे हुये पैसों से वह बढ़ई के पास जाकर एक चरखा भी बनवाकर लाई।
चंपा - ले बहन! तेरा यह चरखा और यह रुई। बुरे वक्त में थारी मदद से मैं अपने पैरों पर खड़ा हो पाई हूँ । भगवान थारे दूध-पूत फलावैं। थारे घर में भूले से भी कभी दुःख की परछाई न पड़े। यह कहते हुए चंपा चाची की आखें भर आयी। माँ को अपना चरखा वापिस लेने से अधिक खुशी इस बात की हो रही थी कि कुछ ही दिनों में चंपा चाची ने इतनी मेहनत से सूत काता कि घर का खर्च चलाने के साथ-साथ अपने लिए एक नया चरखा भी बनवा लिया। पति के जाने के बाद जो दुःखों का पहाड़ उस पर टूट पड़ा था अब सबके साथ बैठकर, सूत कातने के साथ-साथ कुछ गाकर कुछ सुनकर, राजी-खुशी बतलाकर वह अपने दुःख से भी ऊभर रही थी। माँ ने उसे गले से लगा लिया।
नया चरखा आने से चंपा चाची अब अपने घर में भी सूत कातने लगी और फिर दोपहर बाद हमारे घर आकर भी सबके साथ हँसती-बोलती और तेजी से सूत कातती। चंपा चाची ने अब अपने बच्चों को भी पाठशाला भेजना शुरु कर दिया और घर का गुजारा भी ठीक-ठाक होने लगा। महिलाओं की इस पंचायत में चरखा चलाते-चलाते चंपा चाची अब हर विषय पर खुलकर राय-मशविरा देने लगी और कभी-कभी हँसने वाले वाक्याशों पर वह खुलकर हँस पड़ती। माँ यह सब देखकर अन्दर ही अन्दर खुश होती रहती। अब समय की गति एवं चरखे की इस पंचायत ने चंपा चाची के विधवा होने के घाव पर मरहम लगा दिया था।
इस पंचायत में पड़ोस की कुछ कम पढ़ी-लिखी वे लड़कियाँ भी आने लगी जो गाँव के विद्यालय की पढ़ाई पूरी कर आगे की पढ़ाई के लिए गाँव से बाहर नहीं भेजी गई थी अथवा जिन्हें किसी कारणवश पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। इन पढ़ी-लिखी लड़कियों के कारण महिलाओं की इस पंचायत में बहस के लिए कुछ नए विषय भी जुड़ने लगे। बस फिर तो कई बार एक ओर अँगूठा टेक अनपढ़ ठेठ महिलाएं हो जाती और दूसरी ओर कुछ पढ़ी-लिखी अल्पज्ञ महिलाओं का समूह बन जाता और बहुत रोचक बहस होने लगती। कई बार शिक्षित युवतियां बाजी मार जाती और कई बार अनुभव की धूप सेंक चुकी महिलाएँ उन्हें रास्ता बताती। जाति-पाति तथा ऊँच-नीच के सारे बंधन तोड़कर चरखे की पंचायत में शामिल होकर छोटी-बड़ी, शिक्षित-अनपढ़ सब अपने तनाव से मुक्ति पाती और हँसती-बोलती चहकती सारे वातावरण को सुखद बनाती।
किन्तु आज ना चरखे रहे ना पंचायत और ना ही सार्थक, समृद्ध, परंपरागत विषयों पर बात करने के लिए किसी के पास समय रहा।
मुझे पुरानी फिल्म का वो गीत याद आ जाता है -
किधर जा रहे हो....
चरखे की पंचायत के बहाने युवतियाँ खुलकर अपने मन की बात रख देती जिससे वे एक-दूसरे के साथ अधिकाधिक निकट आ जाती और इसी निकटता के कारण पढ़ाई छोड़ चुकी लड़कियों का दर्द भी बाहर निकलकर आने लगता। चरखा चलाते-चलाते बहस होने लगती कि लड़कियों को पढ़ाई के लिए आगे भेजना चाहिए या नहीं। लगातार पाँच दिन चली बहस के बाद एकाएक माँ ने कहा कि देखो बहनों ऊषा को तो लोक लिहाज के दबाव में मैंने भी आठवीं दर्जे की पढ़ाई करवा कर स्कूल छुड़वा दिया था किन्तु रेखा को तो मैं बड़े स्कूल की पढ़ाई जरुर करवाऊँगी।
जब लड़के पढ़ सकते हैं तो लड़कियाँ क्यों न पढ़ें। माँ की बात सुनकर पंचायत में एकदम सन्नाटा छा गया। एक-दो ने तो माँ की बात के पक्ष में अपनी बात रखी किंतु अधिकतर विपक्ष में ही बोलने वाली थी। कइयों ने कहा कि पढ़ाई तो ठीक है किन्तु लड़कों के साथ पढ़ने भेजना मर्यादा की बात नहीं है। कइयों ने कहा कि हमारे घरवाले तो यह सनुते ही हमें जान से मार देंगे। दिन बीतते गए पंचायत नियमित चलती रही।
कुछ दिन बाद जब बापू जी फौज से एक महीने की छुट्टी में घर आए तो माँ ने रेखा की बड़े स्कूल में पढ़ाई के लिए बात की। उसका दाखिला पास के गाँव में बड़े स्कूल में करवा दिया गया। गाँव में चर्चा हुई, औरतों में कानाफूसी चली, चरखों की पंचायत में बहस का विषय रेखा का बड़े स्कूल में दाखिला बना। कोई कह रहा था कि रेखा की माँ ने बहुत हौंसला करके हम सबके लिए भी रास्ता खोल दिया है और कोई कह रहा था कि गाँव की परंपराओं को तोड़कर पटवारन ने ठीक नहीं किया । लड़कियों को तो शादी के बाद चुल्हा चौका ही करना कौन-सा पढ़-लिखकर ये अफसर बन जायेंगी।
किंतु माँ के इस कदम से कई महिलाओं के सपनों को भी पंख लग गए और धीरे-धीरे एक-एक करके कई महिलाओं ने अपनी लाडली को आगे की पढ़ाई के लिए बड़े स्कूल में दाखिल करवाने हेतु गाँव से बाहर भेजना स्वीकार किया। कुछ समय बाद गाँव की लड़कियाँ इकट्ठी होकर पढ़ने के लिए बड़े स्कूल जाने लगी। चंपा चाची के तीनों बच्चें भी स्कूल जाने लगे। बीच वाली लड़की तो बड़े स्कूल में पढ़कर अध्यापिका बन गई और पड़ोस के ही एक गाँव के छोटे स्कूल में बच्चों को पढ़ाने लगी। गाँव के कई बच्चें निकट-दूर नौकरियों पर जाने लगे । कई युवतियाँ डाकखाने , ऑफिस तथा बिजली विभाग में नौकरी करने लगी। गाँव में एक अलग सा बदलाव आ गया और चरखों की पंचायत सुनहरे भविष्य गढ़ने के लिए निरंतर यूँही घंटों चकर-चूँ , चकर-चूँ करती हुई चलती रही।
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"प्यार का संगम है, दो दिलो का बंधन है"
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नवीन अग्रवाल दिल्ली, भारत से 23 साल की उम्र में अमेरिका आ गये थे। इनहोंने अपनी पहली आधिकारिक कविता शुरुआती कोविड समय के दौरान लिखी थी, और अब यह एक जुनून बन गई है। इन्हें लेखन की प्रेरणा आस-पास के लोगों (अजनबियों सहित) से मिलती है, जो विभिन्न संस्कृतियों और वाइब्स वाले स्थानों की यात्रा करते हैं, और कभी-कभी रातों में विचार करते हुए मिलती है। इन्हें यात्रा करना, खाना पकाने, परिवार के साथ बोर्ड गेम खेलने में समय बिताना अच्छा लगता है। ये अमेरिका, इंडिआना पोलिस में रहते है और अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के आजीवन सदस्य भी हैं।
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प्यार का संगम है, दो दिलो का बंधन है
प्यार का संगम है, दो दिलो का बंधन है।
जीवन की यही रीत ही, भा जाये वही मनमीत है ।।
मिल जाये संगदिल कहीं, तो बाँध लो ऐसे।
पानी जैसे मिट्टी मे,माँ का प्यार जैसे चिट्ठी मे।
महक अगरबत्ती की, रूई जैसे दीये मे।
ध्वनि जैसे शंख की, उड़ान जैसे पंख की।
घुँगरू जैसे थिरकन में, राग जैसे धड़कन में।
साँस जैसे तन मे, आत्मा जैसे मन मे।।
जुड़ गये दूजे से ऐसे।
जैसे फूल माला मे, बच्चे जैसे पाठशाला मे।
सन्नाटा जैसे रातों का, न खत्म होना कभी तेरी बातों का।
वो तेरे चेहरे का तेवर, वो आँखों की भाषा।
मासूमियत जैसे बच्चे की, या दिल की जैसे अभी और हो अभिलाषा।।
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बाल विभाग (किड्स कार्नर )
“अपनी कविताएँ / ग़जल”
"बचपन"
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द्वारा : श्री गिरेन्द्र सिंह भदौरिया
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श्री गिरेन्द्र सिंह भदौरिया "प्राण" का जन्म इटावा जिले के एक ग्राम में एक साधारण परिवार में हुआ। आपने हिन्दी, अँग्रेजी व संस्कृत तीनों में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की। इन्दौर में 37वर्षों तक शिक्षक रह कर 2019 में सेवा निवृत्त हुए हैं। आपकी रचनाओं में भाषा का सरस प्रवाह एवं काव्य के तत्त्वों के साथ काव्य सौन्दर्य के दर्शन होते हैं। हिन्दी के उत्थान में आपकी सेवा निरन्तर चल रही है।
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बचपन
नभ निरभ्र नीलाभ और वह धरती की हरियाली।
बिछे बिछौने सुन्दरता के गाँव गाँव खुशहाली।।
जाति पाँति के भेद भाव से दूर हृदय के सच्चे।
भौंरा डोर लगाकर फिरकी नचा रहे कुछ बच्चे।।
कुश्ती कुलू कबड्डी कंचे हुच्च हुर्र हुदराना।
हुलगडरा सँग गिल्ली डण्डा तड़ीगड्ड हंफियाना।।
देखो तो` खिलखिली जीत की जादू का कौतूहल।
कहीं हार की ठिठक जीत की ठसक कहीं पर चलचल।।
इस उचंग की जंग दंग करती मृदंग सी भारी।
क्या उमंग में अंग रंग क्या हर दबंगता हारी।।
दो रुपए में कुड़कुड़िया बाँसुरी जलेबी फिरकी।
गटापार्चे वाला चश्मा मेले के मंज़र की।।
माँ के पास खड़े रहकर साहस का अडिग खजाना।
बात बात पर धमकी देना क्षण क्षण में सकुचाना।।
उपले उपटी दागदार कितनी सुन्दर दीवारें।
उन पर बैठा काग सुन रहा बालसुलभ किलकारें।।
बहुत दिनों के बाद याद आ रही यार छुटपन की।
घूम रही है घटी हुई हर घटना उस बचपन की।।
वह गेंहूँ का खेत और उस घने विटप की छाया।
उस पर मीठा आम राम की कैसी अद्भुत माया।।
देख देख यह चित्र सुहाना चित्र उभर आया है।
लगता है मेरा भी बचपन पुनः लौट आया है।।
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पाठकों की अपनी हिंदी में लिखी कहानियाँ, लेख, कवितायें इत्यादि का
ई -संवाद पत्रिका में प्रकाशन के लिये स्वागत है।
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"प्रविष्टियाँ भेजने वाले रचनाकारों के लिए दिशा-निर्देश"
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