JULY INTERNATIONAL HINDI ASSOCIATION'S NEWSLETTER
जुलाई 2026, अंक ६०
प्रबंध सम्पादक: श्री आलोक मिश्र । सम्पादक: डॉ. शैल जैन
Human Excellence Depends on Culture. The Soul of Culture is Language
भाषा द्वारा संस्कृति का प्रतिपादन
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वर्षा ऋतु में हिंदी साहित्य की मधुर फुहार
प्रिय पाठकों,
जुलाई का महीना भारतीय जीवन में एक विशेष स्थान रखता है। वर्षा की पहली फुहार केवल धरती को ही नहीं भिगोती, बल्कि मन, स्मृतियों और संवेदनाओं को भी तरोताज़ा कर देती है। भारतीय संस्कृति में मानसून आशा, नवजीवन और सृजन का प्रतीक माना गया है। यही कारण है कि हिंदी साहित्य में वर्षा ऋतु का अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण चित्रण मिलता है।
महादेवी वर्मा की करुण संवेदनाएँ, सुमित्रानंदन पंत का प्रकृति-प्रेम, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कल्पनाशीलता और हरिवंश राय बच्चन की भावप्रवण अभिव्यक्तियाँ—इन सबमें वर्षा की छवि अलग-अलग रंगों में दिखाई देती है। कभी बादल विरह की वेदना जगाते हैं, तो कभी रिमझिम फुहारें जीवन में उल्लास भर देती हैं। हिंदी कविता ने मानसून को केवल मौसम नहीं, बल्कि मानव भावनाओं के जीवंत उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया है।
विदेशों में रहकर जब हम हिंदी पढ़ते, लिखते और सुनते हैं, तब यह भाषा हमें अपनी मिट्टी की सोंधी खुशबू से जोड़ देती है। वर्षा के गीत, लोककथाएँ, कविताएँ और पारिवारिक परंपराएँ हमारी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का माध्यम बनती हैं। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति का प्रयास भी यही है कि हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति की यह अमूल्य धरोहर नई पीढ़ी तक प्रेमपूर्वक पहुँचे।
जुलाई हमें हिंदी साहित्य के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की भी याद दिलाता है, जिनकी जयंती 31 जुलाई को मनाई जाती है। प्रेमचंद ने अपने उपन्यासों और कहानियों के माध्यम से भारतीय समाज, गाँव, किसान, स्त्री और मानवीय मूल्यों को इतनी सजीवता से चित्रित किया कि हिंदी साहित्य जन-जन की आवाज़ बन गया।
आइए, इस वर्षा ऋतु में हिंदी साहित्य की मधुर फुहारों का आनंद लें और अपनी भाषा तथा संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराएँ। आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा ।
धन्यवाद,
शैल जैन
डॉ. शैल जैन
संवाद संपादक, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति
पूर्व अध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति 2024 -2025
ई मेल shailj53@hotmail.com
सम्पर्क (व्हाट्सएप / मोबाइल ): +1 330-421-7528
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- शाखाओं में कार्यक्रम की तैयारियाँ
'हिंदी दिवस और भारत का स्वतंत्रता दिवस 2026'
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की कई शाखायें हिंदी दिवस (14 सितंबर) और भारत का स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) की तैयारियाँ कर रही हैं।
कार्यक्रमों का विवरण संवाद के आने वाले अंको में प्रकाशित होगा।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- उत्तर पूर्व ओहायो शाखा का सहयोग
इंडियन हेरिटेज कल्चर कैंप, वार्षिक
स्थानीय संस्थाओं के साथ
रिचफील्ड, ओहायो, 6 - 24 जुलाई , 2026 संपन्न
द्वारा : डॉ. शैल जैन, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, उत्तर पूर्व ओहायो शाखा
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इंडियन हेरिटेज कल्चर कैम्प 2026 का सफल आयोजन 6 जुलाई से 24 जुलाई 2026 तक रिचफील्ड, ओहायो में किया गया। इस वर्ष कैम्प में 80 से अधिक बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, उत्तर-पूर्वी ओहायो शाखा ने इस कार्यक्रम में अपनी भागीदारी निभाई।
तीन सप्ताह के इस कैम्प में बच्चों ने हिंदी भाषा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, योग, नृत्य, संगीत, भारतीय पारिवारिक मूल्यों तथा पारंपरिक भारतीय खेलों का आनंद लिया। प्रतिदिन स्वादिष्ट भारतीय भोजन की भी व्यवस्था की गई, जिसका बच्चों ने भरपूर आनंद उठाया।
कैम्प के दौरान एक विशेष सांस्कृतिक संध्या का आयोजन एक्रोन विश्वविद्यालय में किया गया, जिसमें बच्चों ने अपने सीखे हुए गीत, नृत्य एवं अन्य प्रस्तुतियाँ अभिभावकों, मित्रों तथा समुदाय के सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम के पश्चात भारतीय रात्रिभोज का आयोजन भी हुआ।
कैम्प के अंतर्गत एक आनंददायक मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने स्वयं खाद्य पदार्थों एवं हस्तशिल्प की छोटी-छोटी दुकानें लगाईं। स्वयंसेवकों एवं अभिभावकों की सहभागिता से यह आयोजन अत्यंत सफल एवं आकर्षक रहा।
समापन दिवस पर पुरस्कार एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा समर्पित स्वयंसेवकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
संपर्क टीम 2026 -2027
छात्रों की waiting list, volunteers और teachers अगले साल के लिए -
Mr. Lalit Sangtani, Admin/ Operations: 419-829-0223
e-mail: ihasummercamp@gmail.com
Mrs. Kiran Khaitan, Program Director: 330-622-1377
Mrs. Kanika Agarwalla, Co-Director: 862-754-0670
Mrs. Shalini Goyal, Co-Director: 440-590-5605
Join Our WhatsApp Group
Camp Website
कैम्प की कुछ झलकियाँ प्रस्तुत हैं। विस्तृत रिपोर्ट एवं अधिक चित्र अगले अंक में प्रकाशित किए जाएंगे।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति – इंडियाना शाखा रिपोर्ट
"स्वस्थ आयु के लिए योग" विषय के साथ
इंडियाना में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन
द्वारा: डॉ. राकेश कुमार, इंडियाना शाखा के पूर्व अध्यक्ष
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विश्वभर में मनाए जाने वाले 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति – इंडियाना शाखा तथा इंटरफेथ ने भारत के महावाणिज्य दूतावास, शिकागो के सहयोग से संयुक्त रूप से एक भव्य एवं प्रेरणादायी योग समारोह का आयोजन किया। यह आयोजन रविवार, 21 जून 2026 को कॉक्सहॉल गार्डन्स, चिल्ड्रन्स पवेलियन (वेस्ट साइड), कार्मेल, इंडियाना में किया गया।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति – इंडियाना शाखा के डॉ. राकेश कुमार तथा इंटरफेथ के डॉ. महेश गोयल के नेतृत्व में आयोजित यह कार्यक्रम इस वर्ष की वैश्विक थीम "स्वस्थ आयु के लिए योग" पर आधारित था। प्रातः 8:00 बजे से 11:00 बजे तक चले इस आयोजन में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर योग के माध्यम से स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवन का संदेश आत्मसात किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ योग के महत्व एवं उसके वैज्ञानिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक लाभों पर विशेषज्ञों के प्रेरणादायी विचारों के साथ हुआ। इसके पश्चात प्रतिभागियों के लिए सामूहिक योगाभ्यास का आयोजन किया गया। योग सत्रों का समन्वयन डॉ. महेश गोयल ने किया, जबकि सुष्मिता जी, प्राजक्ता जी, प्रशांत जी, श्रीमाला जी, शुभा जी तथा मिथुन जी ने प्रशिक्षक के रूप में विभिन्न योगाभ्यासों का कुशलतापूर्वक संचालन किया। कार्यक्रम को तीन चरणों में विभाजित किया गया, जिनमें योग का परिचय एवं मूलभूत आसनों का अभ्यास, मध्यवर्ती स्तर का योगाभ्यास तथा प्राणायाम एवं ध्यान का विशेष सत्र सम्मिलित था।
प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को योग एवं ध्यान को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रेरित करते हुए स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। समुदाय की ओर से इस आयोजन को अत्यंत उत्साहजनक प्रतिसाद प्राप्त हुआ। लगभग 70 -75 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम की सबसे उल्लेखनीय विशेषता युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही, जिसने यह सिद्ध किया कि नई पीढ़ी में योग, स्वास्थ्य एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता निरंतर बढ़ रही है। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ योगाभ्यास किया और इस सामुदायिक आयोजन की मुक्त कंठ से सराहना की।
यह आयोजन अपने उद्देश्य, "स्वस्थ आयु के लिए योग", को सार्थक रूप से साकार करने में पूर्णतः सफल रहा। कार्यक्रम के उपरांत प्रतिभागी योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने तथा स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित होकर लौटे। इस आयोजन ने ग्रेटर इंडियानापोलिस क्षेत्र में योग, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन तथा सजग जीवनशैली (माइंडफुलनेस) के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति – इंडियाना शाखा एवं इंटरफेथ भारत के महावाणिज्य दूतावास, शिकागो के प्रति उनके उदार वित्तीय सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं। साथ ही, हिंदू स्वयंसेवक संघ (एचएसएस), योग कुलम्, द आर्ट ऑफ लिविंग, ईशा फाउंडेशन तथा एचबीसीए का विशेष धन्यवाद, जिनके सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी स्वयंसेवकों के समर्पण, परिश्रम एवं सेवा-भाव के बिना इस कार्यक्रम की सफलता संभव नहीं थी। संस्था उनके प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करती है। अंत में, 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को सफल, प्रेरणादायी एवं अविस्मरणीय बनाने वाले सभी प्रतिभागियों का भी हार्दिक अभिनंदन एवं धन्यवाद।
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अंतराष्ट्रीय हिन्दी समिति - उत्तर पूर्व ओहायो शाखा रिपोर्ट
क्लीवलैंड में १२ वें अंतराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य समारोह
प्रस्तुति : डॉ. सोमनाथ राय , उपाध्यक्ष, अ. हि. स. उत्तर पूर्व ओहायो शाखा
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“स्वस्थ रहने के लिए योग” विषय के साथ १२ वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति - उत्तर पूर्व ओहायो शाखा एवं फाईका ( फेडरैशन ऑफ इंडिया कम्यूनिटी एसोसिएशन ) ने क्लीवलैंड के वडतल धाम स्वामी नारायण मंदिर परिसर मे संयुक्त रूप से रविवार, २६ जून, २०२६ को एक भव्य योग समारोह का आयोजन किया l यह कार्यक्रम प्रात: ८:३० बजे से ११:०० बजे तक चला एवं इसमें विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर योग के माध्यम से स्वस्थ एवं संतुलित जीवन शैली अनुशारण करने का संकल्प लिया l अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति की ओर से डॉ. राकेश रंजन, डॉ. सोमनाथ राय एवं श्रीमती स्मिता राव ने नेतृत्व संभाला तथा फाइका की ओर से श्रीमान शेखर गोनोर, श्रीमान दीपक साहू एवं श्रीमती दीपा राव ने नेतृत्व संभाला l
इस कार्यक्रम में समुदाय की ओर से लगभग ८० - ९० प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और इनमें से अधिकतर युवाओं की भागीदारी रही l कार्यक्रम की शुरुआत योग के महत्व एवं इसके मानसिक, वैज्ञानिक तथा आध्यात्मिक लाभों के बारे मे बताने के साथ हुआ l तत्पश्चात प्रतिभागियों के लिए सामूहिक योगाभ्यास का आयोजन किया गया, जिसका श्रीमान संतोष खण्डेलवाल ने कुशलता पूर्वक संचालन किया l योगाभ्यास को तीन चरणों मे विभाजित किया गया, जिनमे से पहला चरण में मूलभूत आसनों का अभ्यास किया गया, दूसरे चरण में विभिन्न प्रकार के योगाभ्यास का सामूहिक अभ्यास किया गया एवं तीसरे चरण मे प्राणायाम एवं ध्यान का विशेष सत्र सम्मिलित था, जिसे श्रीमान विजय कुमार, श्रीमान राजन कुमार एवं डॉ. दीपाली कुमार ने संचालित किया l योग प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को योग को नियमित रूप से अभ्यास करने तथा इसे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रेरित किया l
युवाओं ने इस कार्यक्रम में बहुत ही उत्साह के साथ बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया, जिससे यह सिद्ध होता है की नई पीढ़ी में योग, मानसिक स्वास्थ्य एवं भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ रही है l कार्यक्रम के समापन के बाद प्रतिभागी योग को नियमित रूप से अभ्यास करने एवं इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने तथा संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रतिबद्ध हुए l यह कार्यक्रम अपने उद्देश्य, “स्वस्थ आयु के लिए योग” को सार्थक रूप से साकार करने मे सफल रहा l कार्यक्रम के अंत में वडतल धाम स्वामीनारायण मंदिर के प्रबंधन समिति की ओर से सभी प्रतिभागियों के लिए जलपान का प्रबंध किया गया l इस कायक्रम को सफल बनाने में हिन्दू स्वयंसेवक संघ (एच एच एस ), दी आर्ट ऑफ लिविंग एवं ईशा फाउंडेशन के सदस्यों का भी सक्रिय सहयोग रहा l
अंत में, १२ वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह को सफल एवं अविस्मरणीय बनाने के लिए, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति - उत्तर पूर्व ओहायो शाखा, फाईका, सभी स्वयंसेवकों, प्रतिभागियों एवं वडतल धाम स्वामीनारायण मंदिर प्रवंधन समिति का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं l
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अपनी कलम से
‘अपने विचारों को कैसे स्वीकार करवाएँ’
द्वारा: राजेंद्र भाटिया, भारत
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राजेंद्र भाटिया, आयु 76 वर्ष, जयपुर (राजस्थान) भारत के निवासी हैं। आप पेशे से इंजीनियर रहे हैं तथा हिंदी कविता और साहित्य में विशेष रुचि रखते हैं। आपने भारत के एक प्रतिष्ठित पीएसयू (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम) में लंबे समय तक सेवाएँ प्रदान कीं और एक वरिष्ठ पद से सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति के पश्चात भी आप साहित्य, सामाजिक विषयों तथा सकारात्मक जीवन मूल्यों के प्रचार-प्रसार में सक्रिय रुचि रखते हैं। हिंदी कविता, चिंतन और अनुभवों के माध्यम से समाज में प्रेरणादायक संदेश देने का प्रयास करते रहते हैं।
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अच्छे विचार होना एक बड़ी बात है, लेकिन केवल अच्छा विचार होना ही पर्याप्त नहीं है। वास्तविक सफलता इस बात में है कि आप अपने विचारों को दूसरों से कैसे स्वीकार करवाते हैं। अनेक उत्कृष्ट विचार केवल इसलिए असफल हो जाते हैं क्योंकि उन्हें प्रस्तुत करने का तरीका उचित नहीं होता।
मानव स्वभाव का एक मूलभूत सत्य यह है कि प्रत्येक व्यक्ति में स्वाभिमान (अहं) होता है। हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी राय का सम्मान किया जाए, उसे महत्व दिया जाए और उसकी बात सुनी जाए। जब किसी व्यक्ति के इस स्वाभिमान को संतुष्टि मिलती है, तब वह दूसरों के विचारों को भी खुले मन से स्वीकार करने के लिए तैयार हो जाता है। इसके विपरीत, यदि उसे यह महसूस हो कि उस पर कोई विचार थोपा जा रहा है या उसकी उपेक्षा की जा रही है, तो वह प्रायः सबसे अच्छे सुझाव को भी अस्वीकार कर देता है।
इसी मानवीय मनोविज्ञान को समझना अपने विचारों को सफलतापूर्वक स्वीकार करवाने की सबसे बड़ी कुंजी है।
यदि आपको लगता है कि सामने वाला व्यक्ति आपके सुझाव से तुरंत सहमत नहीं होगा, तो अपने विचार को सीधे प्रस्तुत करने के बजाय पहले उसकी मनःस्थिति को समझने का प्रयास करें। समस्या को उसके सामने रखें और उससे पूछें कि उसके अनुसार इसका समाधान क्या हो सकता है। यदि चर्चा के दौरान वह स्वयं उसी निष्कर्ष पर पहुँच जाए जो पहले से आपके मन में था, तो समझिए कि आपका आधा काम वहीं पूरा हो गया।
ऐसी स्थिति में जब आप उसी विचार का समर्थन करेंगे, तो उसे यह नहीं लगेगा कि यह केवल आपका सुझाव है, बल्कि वह उसे अपना भी विचार मानेगा। परिणामस्वरूप उसके स्वीकार होने की संभावना बहुत बढ़ जाएगी।
मान लीजिए कि आप किसी कार्यालयीन कार्य से दौरे (टूर) पर जाना चाहते हैं और उसके लिए अपने अधिकारी की स्वीकृति आवश्यक है। यदि आप सीधे जाकर कहेंगे कि मुझे टूर पर भेज दीजिए, तो संभव है कि वे तुरंत सहमत न हों। लेकिन यदि किसी अनौपचारिक बातचीत के दौरान आप संबंधित समस्या का उल्लेख करें और कहें कि इस विषय का समाधान स्थल पर जाकर ही हो सकता है, तो संभव है कि अधिकारी स्वयं कह दें, "यदि आवश्यकता हो तो आप ही चले जाइए।" जब यह सुझाव स्वयं उनके मुख से निकल आता है, तब बाद में आपका औपचारिक प्रस्ताव स्वीकृत होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।
यह सिद्धांत केवल कार्यालय तक ही सीमित नहीं है। परिवार, व्यापार, नेतृत्व, मित्रता और सामाजिक जीवन—लगभग हर क्षेत्र में यह समान रूप से लागू होता है। लोग आदेश सुनना कम पसंद करते हैं, लेकिन निर्णय की प्रक्रिया में अपनी भागीदारी अवश्य पसंद करते हैं। प्रसिद्ध लेखक डेल कार्नेगी ने कहा है—
"दूसरे व्यक्ति को यह अनुभव होने दीजिए कि विचार उसी का है।" यही सफल संवाद और प्रभावशाली नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण रहस्य है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि अपने विचारों को स्वीकार करवाने की कला केवल तर्क देने की कला नहीं है, बल्कि मानव स्वभाव को समझने की कला है। जब आप सामने वाले के सम्मान का ध्यान रखते हैं, उसे सोचने का अवसर देते हैं और उसे निर्णय का सहभागी बनाते हैं, तब आपके विचारों के स्वीकार होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
वास्तव में, सफल वही नहीं होता जिसके पास अच्छे विचार हों, बल्कि वह होता है जो अपने विचारों को दूसरों के मन तक पहुँचाने और उन्हें सहर्ष स्वीकार करवाने की कला जानता हो।
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अपनी कवितायेँ
"तीन कविताएँ/ ग़ज़ल "
द्वारा: नरेंद्र सिंह, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, उत्तर पूर्व ओहायो शाखा
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नरेंद्र सिंह, का जन्म सोनीपत, हरियाणा में हुआ, आई.टी. उद्योग से जुड़े हैं और वर्तमान में अपने परिवार के साथ क्लीवलैंड, ओहायो (अमेरिका) में निवास करते हैं। उन्हें प्रारंभिक दिनों से ही ग़ज़लों एवं हिन्दी और उर्दू शायरी में गहरी रुचि रही है। उन्होंने समय-समय पर ग़ज़लें लिखी हैं, जिनमें से कुछ भारत के समाचारपत्रों, पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं, और एक पुस्तक में भी शामिल हैं जिसमें सात प्रवासी भारतीय (NRI) कवियों तथा कुछ चयनित भारतीय कवियों की रचनाएँ प्रकाशित की गईं। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के आजीवन सदस्य तथा उत्तर पूर्व ओहायो शाखा के सक्रिय सदस्य हैं।
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१ ) बात करते करते
बात करते करते अक्सर बात छूट जाती है
सुनता रहूँ तो ठीक सुना दूँ तो रूठ जाती है
ये सोच कर खींचे आते है सिरे से बंधे लोग
रिश्तों की डोरी ज़्यादा खिंची तो टूट जाती है
आख़िरी साँस तक पकड़े रखते हैं इसकी डोर
ज़िंदगी आख़िर तो हम सब से ही छूट जाती है
काम दफ़्तर का पर ज़िंदगी तेरे नाम करता हूँ
तेरे सूकून की जुस्तजू जाने जाँ मुझे लूट जाती
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२ ) ग़ज़लों की चाहत
मेरी ग़ज़लों ने भी चाहत के ख़्वाब देखें हैं
कभीं यहाँ इस शहर ने भी ग़ुलाब देखें हैं
हो इंसानियत की पहचान ये हुनर आये कैसे
चेहरों पर बच्चों ने जाने कितने नक़ाब देखे हैं
कुछ सोचा समझा और जाने दिया हर सवाल
तालुक़ तोड़ जाएँ ज़नाब ऐसे भी जवाब देखें हैं
वो आदमी अब ख़्वाब देखने से भी डरता है
जिस बच्चे की हसरतों ने भी हिजाब देखें हैं
पकड़ के रखना भइया ये रिश्ता मज़बूती से
बहन भाई के रिश्तों ने बहुतेरे हिसाब देखें हैं
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३ ) दोस्त और नजरिया
जो तुमको दिखता हो वही मैं भी देखूँ ?
जैसा तुम सोचते हो वैसा मैं भी सौचूँ ?
दोस्त मैं भी नज़रिया रखता हूँ ख़ुद का
इंसान हूँ सोचता हूँ कैसे बन जाऊँ गोंचू?
दोस्त तुम बेशक सच्चे राष्ट्र भक्त हो
धर्म रक्षक हो ग़ैर मज़हबों पे सख़्त हो
अलग विचार तुम्हारे लिए टकराव हैं
अलग प्रान्त अलग भाषा अलगाव है
मेरे लिए ये सब अलग रंगों के नजरिये
अलग रंगों के इर्द गिर्द लकीरें क्यूँ खेंचूँ?
जैसा तुम सोचो बोलो वैसा क्यूँ सोचूँ?
तुम्हारे लिए धार्मिक आस्था ख़तरे में है
मेरे लिए वैशुधव कुटुम्बकम ख़तरे में है
तुम भी अगर बन गए कट्टर सनातनी तो
सर्वे भवन्तु सुखिना: सर्वे संतु खतरे में है
आँख बंद कर के ईश्वर ध्यान सही है
मानवता खतरे में डाले वो इंसान नहीं है
अपने अंतर्मन को इतने ज़हर से कैसे सींचूँ?
जैसा तुम सोचो बोलो वैसा ही कैसे सोचूँ
दोस्त मैं भी नज़रिया रखता हूँ ख़ुद का
इंसान हूँ सोचता हूँ कैसे बन जाऊँ गोंचू?
जैसा तुम सोचते हो वैसा ही कैसे सोचूँ?
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति से भावभीनी श्रद्धांजलि
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स्वर-साम्राज्ञी
स्वर्गीय सुमन कल्याणपुर
(1937–2026)
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स्वर-साम्राज्ञी सुमन कल्याणपुर जी का 89 वर्ष की आयु में निधन भारतीय संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। मधुर, शास्त्रीयता से परिपूर्ण और भावपूर्ण गायन के कारण उन्होंने हिंदी तथा अनेक भारतीय भाषाओं में हजारों गीतों को अपनी अमिट पहचान दी। उनके अंतिम संस्कार का राजकीय सम्मान के साथ संपन्न होना उनके असाधारण संगीत योगदान का सम्मान है। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति परिवार उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है तथा ईश्वर से उनकी पुण्यात्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता है।
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संवाद के सभी अंक, जून २०२१ से आरम्भ करके अभी तक
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के साइट पर ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
All the Samwad editions, starting from June 2021 till current - are available online now.
https://hindi.org/samwad
द्वारा : डॉ. शैल जैन, ई-संवाद संपादक, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति
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पाठकों की अपनी हिंदी में लिखी कहानियाँ, लेख, कवितायें इत्यादि का
ई - संवाद पत्रिका में प्रकाशन के लिये स्वागत है।
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"प्रविष्टियाँ भेजने वाले रचनाकारों के लिए दिशा-निर्देश"
1. रचनाओं में एक पक्षीय, कट्टरतावादी, अवैज्ञानिक, सांप्रदायिक, रंग- नस्लभेदी, अतार्किक
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति
हिंदी लेखन के लिए स्वयंसेवकों की आवश्यकता
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के विभिन्न प्रकाशनों के लिए हम हिंदी (और अंग्रेजी दोनों) में लेखन सेवाओं के लिए समर्पित स्वयंसेवकों की तलाश कर रहे हैं जो आकर्षक और सूचनात्मक लेख, कार्यक्रम सारांश और प्रचार सामग्री आदि तैयार करने में हमारी मदद कर सकें।
यह आपके लेखन कौशल को प्रदर्शित करने, हमारी समृद्ध संस्कृति को दर्शाने और हिंदी साहित्य के प्रति जुनून रखने वाले समान विचारधारा वाले व्यक्तियों से जुड़ने का एक अच्छा अवसर है। यदि आपको लेखन का शौक है और आप इस उद्देश्य के लिए अपना समय और प्रतिभा योगदान करने में रुचि रखते हैं, तो कृपया हमसे alok.iha@gmail.com पर ईमेल द्वारा संपर्क करें। साथ मिलकर, हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने और संरक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
प्रबंध सम्पादक: श्री आलोक मिश्र
alok.iha@gmail.com
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“संवाद” की कार्यकारिणी समिति
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प्रबंद्ध संपादक – श्री आलोक मिश्र, NH, alok.iha@gmail.com
संपादक -- डॉ. शैल जैन, OH, shailj53@hotmail.com
सहसंपादक – अलका खंडेलवाल, OH, alkakhandelwal62@gmail.com
डिज़ाइनर – डॉ. शैल जैन, OH, shailj53@hotmail.com
तकनीकी सलाहकार – मनीष जैन, OH, maniff@gmail.com
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रचनाओं में व्यक्त विचार लेखकों के अपने हैं। उनका अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की रीति - नीति से कोई संबंध नहीं है।
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