JULY INTERNATIONAL HINDI ASSOCIATION'S NEWSLETTER
जुलाई 2024, अंक ३७। प्रबंध सम्पादक: श्री आलोक मिश्रा। संपादक: डॉ. शैल जैन
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Human Excellence Depends on Culture. The Soul of Culture is Language
भाषा द्वारा संस्कृति का प्रतिपादन
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति परिवार के सभी सदस्यों एवं पाठकों को,
अमेरिका स्वतंत्रता दिवस, विश्व झंडा दिवस, गुरु पूर्णिमा, सावन, विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस, कारगिल विजय दिवस एवं वैश्विक क्षमा दिवस “Global forgiveness day” की हार्दिक शुभकामनायें प्रेषित करती हूँ।
“अमृत महोत्सव हिन्दी दिवस” अगला अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति का विशाल कार्यक्रम अमृत महोत्सव हिन्दी दिवस का है। इस बार का हिन्दी दिवस हिन्दी के राजभाषा घोषित होने का अमृत वर्ष है इसलिए यह हिन्दी दिवस अनेक दृष्टियों से विशिष्ट है । सितम्बर १४, १९४९ को हिंदी भाषा को संविधान में राज भाषा का दर्जा दिया गया था।
अ.हि.स. के शाखाओं के साथ न्यासियों और अधिकारियों की 16 जुलाई को बैठक हुई थी। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि हम सब मिलकर १४ सितम्बर 20२४ को या उसके आस पास "हिन्दी दिवस की 75वीं वर्षगांठ" मनायेंगें। इस उपलक्ष्य में समिति की शाखायें अपनी गोष्ठियाँ कर योजनाएं बना रहीं हैं ताकि वें अपने शहरों में अलग-अलग तरह के कार्यक्रम कर सकें । हमारे सभी नौ चैप्टर एक बड़ा या छोटा कार्यक्रम अपने शहरों में आयोजित कर रहे हैं। इनके अलावा हमारे आउटरीच राज्यों में शार्लॉट, नार्थ करौलिना भी भव्य रूप में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन कर रही है। कार्यक्रमों की जानकारी के लिये आप अपने राज्यों में पता करें, नीचे फ्लायर में संपर्क के बारे में सूचना है। कोई भी दिक़्क़त हो तो कृपया मुझसे संपर्क करें। अगर आपके राज्य में यह कार्यक्रम नहीं हो रहा है और आप करना चाहते हैं तो कृपया हम से संपर्क करें और हम उसमें आपकी सहायता करने की कोशिश करेंगे।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति का उद्देश्य हिन्दी भाषा और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा, पुनर्जीवित एवं जागरूक करना है। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की शाखायें और आउटरीच, अमेरिका के बहुत शहरों के साथ साथ दूसरे देशों में भी हैं। हमारी शाखाओं एवं आउटरीच शहरों में कार्यक्रम बराबर होते रहते हैं। प्रोग्रामों की रिपोर्ट हमारी समिति की ई- संवाद पत्रिका में प्रकाशित हो रहीं हैं और उम्मीद करती हुँ कि आप उसका भरपूर आनंद ले रहें होंगे। आपके विचारों और सुझाओं का हमेशा स्वागत है।
युवाओं को जोड़ना बहुत ही आवश्यक है। यदि हम चाहतें हैं कि हमारी धरोहर “हिंदी भाषा और संस्कृति” हमारे बच्चों और आने वाली सभी पीढ़ियों में जीवित रहे और पनपती रहे तो हमें अपने परिवार से ही इसकी कोशिशों का प्रारंभ करना होगा। समिति से बालपन से
जोड़ने से बच्चों को एक मंच मिलेगा और वो आगे भी जुड़े रहेंगे।पाठकों से विशेष अनुरोध है कि वे अपने जानने वाले और परिवार के युवकों को समिति से जोड़ें और यदि उनके पास सुझाओ हों कि कैसे युवाओं को हम जोड़ सकते हैं तो आपके विचारों का स्वागत है ।
युवाओं को हिंदी भाषा एवं भारतीय संस्कृति से जोड़ना परिवार से शुरू होता है । बचपन से घर में इंगलिश के साथ एक या दो मातृ भाषा का उपयोग करने से बच्चे सभी भाषाओं को साथ - साथ सीख लेते हैं। उसके बाद यदि उन्हें हिन्दी भाषा एवं संस्कृति से अपने शहरों में उपलब्ध स्कूलों या कैम्प में भेजने का प्रयास करें। अमेरिका के सभी राज्यों के हाई स्कूल में “seal of Biliteracy” उपलब्ध है।आप अपने स्कूल में जानकारी प्राप्त कर सकते है। यदि आप अपने शहर में या स्कूल में कोशिश कर रहे हैं और सफलता नहीं मिल थी है तो आप कृपया हमें संपर्क करें और हम आपकी सहायता करने की पूरी कोशिश करेंगे।
अ.हि.स का ऑनलाइन हिंदी भाषा प्रोग्राम, यह प्रोग्राम स्व-गति से हिंदी भाषा सीखने को विशेष रूप से हमारी अगली पीढ़ियों के लिए डिज़ाइन किया गया है! यह स्व-चालित पाठ्यक्रम आपके बच्चे या किसी अन्य के लिए मज़ेदार, आकर्षक और लचीले तरीके से हिंदी सीखने का एक शानदार अवसर है। पाठ्यक्रम की मुख्य बात ये है कि आपका बच्चा अपनी गति और अपने समय से हिंदी सीख सकता है, जिससे आपके परिवार के कार्यक्रम में फिट होना सुविधाजनक हो जाता है। समिति के सदस्यों के बच्चों के लिये यह प्रोग्राम निःशुल्क उपलब्ध है। कृपया ईस सुविधा का लाभ उठायें और यदि कोई समस्या आये तो हमें संपर्क करें।
अ.हि.स. की सभी स्थानीय समिति के अध्यक्ष-अध्यक्षाओं से विशेष आग्रह है कि अपनी-अपनी समितियों में होनेवाले कार्यक्रमों की अग्रिम सूचना भेजें ताकि ‘संवाद’ में उन्हें प्रकाशित किया जा सके। साथ ही एक और अनुरोध है कि जब कार्यक्रम हो जाये तो उसकी रिपोर्ट वर्ड एवं पीडीऍफ़ दोनों रूपों में भेजें के साथ ताकि ‘संवाद’ में प्रकाशित की जा सके और पाठक उन कार्यक्रमों का आनंद ले सकें। स्थानीय समिति और साथ ही पाठकों से अनुरोध है कि स्थानीय विविधता “Diversity” कार्यक्रम जिसमें भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा को भी स्थान दिया गया हो, उनका विवरण भी फोटो के साथ भेजिये और हमें उन्हें प्रकाशित करने में ख़ुशी होगी। "प्रविष्टियाँ भेजने वाले रचनाकारों के लिए दिशा-निर्देश" सभी संवाद पत्रिका के अंत में सबों की सुविधा के लिये संलग्न है।
आप सभी से विशेष निवेदन है कि आप अपनी पसन्द, नापसंद लिखकर भेजें। आपकी प्रतिक्रिया आने पर सम्पादक-मंडल को अपना कार्य करने में आसानी होगी। अगर और कोई किसी विशेष कार्य के लिए आप अपनी सेवा अर्पित करना चाहते हैं तो निसंकोच हमें बताने का कष्ट करें।
सहयोग की अपेक्षा के साथ
धन्यवाद
शैल जैन
डॉ. शैल जैन
राष्ट्रीय अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति २०२४-२५
ईमेल: president@hindi.org
shailj53@hotmail.com
सम्पर्क: 330-421-7528
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति – हिंदी सीखें
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- हिंदी दिवस की 75 वीं वर्षगांठ
हिंदी दिवस समारोह, सितम्बर १ - ३०, २०२४
द्वारा: अ. हि. स. के सभी चैप्टर्स और कुछ आउटरीच प्रांत
अपने -अपने शहरों में
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति --इंडिआना शाखा
हिन्दी हिवस की 75वीं वर्षगांठ
भारत की भाषाई विरासत का सम्मान
द्वारा: डॉ. राकेश कुमार, इंडिआना
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अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति-इंडियाना शाखा 14 सितंबर, 2024 को हिन्दी दिवस की 75वीं वर्षगांठ (अमृत काल हिन्दी दिवस ) के भव्य आयोजन की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है। यह ऐतिहासिक अवसर न केवल अगली पीढ़ी के लिए हिन्दी भाषा की सुंदरता, विरासत और सांस्कृतिक महत्व को समझने और सम्मान करने का उत्सव है, बल्कि उनकी पहचान, विरासत और एकता भी है। अगली पीढ़ी के लिए, यह समय अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और अतीत और भविष्य के बीच एक सेतु के रूप में हिन्दी की समृद्धि की सराहना करने का एक मूल्यवान अवसर दर्शाता है।
यह अमृत काल हिन्दी दिवस आयोजन एक उद्घाटन समारोह के साथ शुरू होगा जिसमें भाषाविज्ञान और भारतीय संस्कृति के क्षेत्र में एक प्रमुख व्यक्ति मुख्य भाषण देंगे। समारोह में प्रतिष्ठित हस्तियों और सरकारी अधिकारियों के विशेष संदेश भी शामिल होंगे। पारंपरिक संगीत, नृत्य और शिकागो के मंडी थिएटर द्वारा प्रस्तुत एक हिन्दी नाटक के माध्यम से हिन्दी की विविधता और सुंदरता को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक प्रदर्शनों की एक श्रृंखला में उपस्थित लोगों का मनोरंजन किया जाएगा। ये सभी प्रदर्शन विभिन्न कला रूपों में हिन्दी के प्रभाव को उजागर करेंगे।
इस कार्यक्रम के साहित्यिक खंड में कविता पाठ, कहानी सुनाना और प्रसिद्ध हिन्दी लेखकों और कवियों के साथ चर्चा शामिल है। छात्रों के लिए एक कला प्रतियोगिता आयोजित की गयी है जिसमे विजेताओं को पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा तथा उन स्थानीय व्यक्तियों/छात्रों को भी सम्मानित किया जायेगा जिन्होंने हिन्दी के प्रचार और संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
इस 75वें हिन्दी दिवस समारोह में इंडियाना/स्थानीय सरकारी अधिकारियों, सांस्कृतिक राजदूतों और भाषाई संस्थानों के प्रतिनिधियों सहित सम्मानित अतिथियों की उपस्थिति होगी। उनकी भागीदारी भारत के बहुसांस्कृतिक समाज में एक एकीकृत शक्ति के रूप में हिन्दी के महत्व को रेखांकित करेगी। समावेशिता की भावना में, इस कार्यक्रम में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है और सभी उपस्थित लोगों को मानार्थ नाश्ता और दोपहर का भोजन प्रदान किया जाएगा।
आयोजन के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया https://iha Indiana.org/ पर जाएँ या ईमेल के माध्यम से संपर्क करें: iha Indiana@gmail.com
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"इंडियन हेरिटेज कल्चरल कैंप" -- उत्तर पूर्व ओहायो में
5 -15 उम्र के बच्चों के लिये
जुलाई 8 से 26 , 2024 तक संपन्न
किरण खेतान, प्रोग्राम डायरेक्टर एवं अ.हि.स. उत्तर पूर्व ओहायो
शाखा की पूर्व अध्यक्षा
द्वारा :डॉ. शैल जैन
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जुलाई 8 से 26, 2024 ग्रीष्मकालीन शिविर, 5 -15 उम्र के बच्चों के लिये उत्तर पूर्व ओहायो में बहुत अच्छी तरह संपन्न हुआ।
ये प्रोग्राम रिचफील्ड ऑहियो में हुआ। कैंप डायरेक्टर श्रीमती किरण खेतान ने ये प्रोग्राम अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के उत्तर पूर्व ओहायो शाखा एवं चिमनय मिशन, क्लीवलैंड की भागीदारी में किया।
कुछ फोटो संलंग है। मैं प्रोग्राम में कुछ दिन स्वयं सेविका थी । सबसे बड़ी बात ये थी कि जब भी मैं वहां थी मैंने सभी बच्चों को उत्साहित, खुश और सक्रिय देखा। रिसाइटल प्रस्तुति, प्रोग्राम के अंत में बिलकुल अद्भुत था । विस्तृत समाचार अगले महीने में।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- वाशिंगटन डीसी शाखा
द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन की एक शाम
17 मई, 2024
द्वारा:जफर इकबाल, पीएच.डी., हेर्नडॉन, वर्जिनिया
हिंदी अनुवाद : सुशील कुमार
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अ.हि.स.) डी. सी, शाखा द्वारा आयोजित कार्यक्रम बहुत अच्छा रहा। समाज, राजनीति और संस्कृति पर गहन टिप्पणियाँ की गईं। हास्य ने एक बार फिर सच्चाई को उजागर करने और चर्चाओं को बढ़ावा देने की अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।
1980 में वर्जीनिया के रोज़लिन में स्थापित, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति ने हिंदी संस्कृति और साहित्य को बढ़ावा दिया है ।अटल बिहारी वाजपेयी, काका हाथरसी, डॉ. ब्रजेंद्र अवस्थी, डॉ. गोपाल दास 'नीरज' और डॉ. सोम ठाकुर जैसे कवियों के साथ पूरे अमेरिका में कवि-सम्मेलन (कविता संगोष्ठी) आयोजित किए गयें हैं।
17 मई, 2024 को फॉल्स चर्च, वर्जीनिया में नवीनतम कार्यक्रम में शामिल हुए।
अरुण जेमिनी, जो अपनी हास्य और व्यंग्यपूर्ण कविताओं और "द कपिल शर्मा शो" जैसे टीवी शो के लिए जाने जाते हैं।"द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज" के स्टैंड-अप कॉमेडियन शंभू शिखर ने मजाकिया राजनीतिक और सामाजिक टिप्पणी की। मुमताज नसीम ने अपनी भावपूर्ण कविता से दर्शकों का मन मोह लिया।
डॉ. नरेंद्र टंडन ने कवियों का परिचय कराया और अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, डी.सी. चैप्टर के अध्यक्ष श्री प्रताप सिंह ने समारोह के संचालक की भूमिका निभाई। सुश्री नेहा सिंह (सांस्कृतिक सचिव), श्री रवीश कुमार और श्री राजीव आहूजा सहित दूतावास के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
प्रायोजकों में एनसीएआईए, जीआईए, एआईएम और जीओपीआईओ-मेट्रो डी.सी. शामिल थे। डॉ. ए. अब्दुल्ला, डॉ. हरिहर सिंह, डॉ. रेणुका मिश्रा, डॉ. सुमन जैसे विशिष्ट अतिथि। ताहूरा कवाजा, डॉ. जफर इकबाल, श्री कलीम कवाजा, श्री सुनील सिंह, श्री त्रिभुवन सिंह और सुश्री नुजैरा आजम, साथ ही मुख्य प्रायोजक डॉ. विवेक वैद ने भी शाम का आनंद लिया।
डॉ. सुरेश के. गुप्ता और सुश्री वंदना सिंह (युवा कवित्री पुत्री श्री प्रताप सिंह) का विशेष आभार प्रकट करते हैं।
ज़फ़र इक़बाल, पीएच.डी.
1509 कोट रिज रोड
हेरंडन, वीए 20170
240-328-0162; raabta.india@gmail.com
तीन समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्ट
प्रिय मित्रो
मुझे आपके साथ तीन समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के लिंक साझा करते हुए प्रसन्नता हो रही है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के व्यंग्य और कविता की शाम को उजागर किया गया है। इसके अतिरिक्त, मैंने कार्यक्रम से तस्वीरों के साथ प्रस्तुत मूल रिपोर्ट संलग्न की है।
सादर
जफर इकबाल
1)https://www.americanbazaaronline.com/2024/05/20/international-hindi-association-hosts-an-evening-of-satire-and-poetry-456789/
International Hindi Association hosts an evening of satire and poetry
Desi poets deliver a captivating blend of insightful humor and artistic expression at Falls Church, Virginia event
2) Published in The American Bazar, May 20, 2024.
https://theindianeye.com/2024/05/23/international-hindi-association-presents-an-enchanting-evening-of-humor-and-satire/
International Hindi Association presents an enchanting evening of humor and satire
3)Published in The Indian Eye May 23, 2024
https://www.newindiaabroad.com/news/international-hindi-association-hosts-poetry-symposium-in-virginia
International Hindi Association hosts poetry symposium in Virginia
The poets tackled contemporary issues with their distinctive mix of humor and critique.
Mon, 20, May 2024
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English Report --
Chapter Washington DC Report Kavi Sammelan 24 International Hindi Association hosts an evening of satire and poetry
Subject: International Hindi Association hosts an evening of satire and poetry
Dear Friends,
I am pleased to share with you links to reports published in three newspapers, highlighting the International Hindi Association's evening of satire and poetry. Additionally, I have attached the original report that I submitted, along with photographs from the event.
Best regards,
Zafar Iqbal
https://www.americanbazaaronline.com/2024/05/20/international-hindi-association-hosts-an-evening-of-satire-and-poetry-456789/
International Hindi Association hosts an evening of satire and poetry
Desi poets deliver a captivating blend of insightful humor and artistic expression at Falls Church, Virginia event
Published in The American Bazar, May 20, 2024.
https://theindianeye.com/2024/05/23/international-hindi-association-presents-an-enchanting-evening-of-humor-and-satire/
International Hindi Association presents an enchanting evening of humor and satire
Published in The Indian Eye May 23, 2024
https://www.newindiaabroad.com/news/international-hindi-association-hosts-poetry-symposium-in-virginia
International Hindi Association hosts poetry symposium in Virginia
The poets tackled contemporary issues with their distinctive mix of humor and critique.
Mon, 20, May 2024
Original report I submitted to them:
Highlights from the International Hindi Association's Evening of Satire and Poetry
Zafar Iqbal, Ph.D.
It was a genuine delight to participate in an evening filled with insightful commentary on society, politics, and culture. The event underscored the remarkable ability of comedy to uncover truths and initiate significant discussions. Organized by the International Hindi Association (IHA), this dynamic gathering showcased a diverse lineup of satirists, poets, and stand-up comedians who tackled contemporary issues with their distinctive mix of humor and critique.
Founded in 1980 in Roselyn, Virginia, USA, the IHA was established with the noble aim of safeguarding and celebrating the rich tapestry of Hindi culture and literature. Over the years, it has evolved into a dynamic and well-respected cultural institution, consistently bringing together eminent Hindi poets from India to orchestrate vibrant Kavi-Sammelans (poetry symposiums) across the United States. The IHA's stages have been graced by luminaries such as the esteemed Atal Bihari Vajpayee, Kaka Hathrasi, Dr. Brajendra Awasthi, Dr. Gopal Das ‘Neeraj,’ and the prolific Dr. Som Thakur, who, through their verses, illuminate audiences and enrich the cultural landscape with their creativity and insight.
The latest program, held on Friday, May 17, 2024, at a hotel in Falls Church, Virginia, continued this tradition of excellence. Three satirists and poets delivered a captivating blend of insightful humor and artistic expression, making for an unforgettable evening that highlighted the enduring relevance and impact of Hindi literature and comedy in today's world.
Arun Gemini kicked off the program with a captivating blend of humorous and satirical poetry and jokes, immediately engaging the audience. Hailing from Haryana, India, Arun Gemini is a multifaceted personality acclaimed as a writer, poet, satirist, and TV presenter. He has been honored with prestigious awards, including the Kaka Hathrasi Award from the Hindi Academy, Government of Delhi, and the Haryana Gaurav Samman from the Haryana Sahitya Akademi, Government of Haryana. Among his notable literary works are "Filhaal Itna Hi Hai," "Khoon Bolta Hai," and "Hasya Vyangya Ki Shikhar Kavitaaye." Arun Gemini is a distinguished member of the Kavi Sammelans, where his contributions are highly esteemed. In the realm of television, Arun Gemini has left an indelible mark both as a host and a participant. He has led various shows, including "Dharti Ka Aanchal" on Doordarshan, "Darasal" on Zee TV, "Taal Betal" on DD Metro, and "Yahi Hai Politics" on Zee India. Additionally, he has made memorable appearances on popular programs such as "Wah! Wah! Kya Baat Hai!" and "The Kapil Sharma Show
Shambhu Shikhar embarked on his career as a stand-up comedian on "Wah! Wah! Kya Baat Hai!," before gaining further recognition on StarPlus's "The Great Indian Laughter Challenge." Beyond comedy, Shikhar is a prolific writer, having penned numerous novels and poetry collections. His recent novel, "Organic Love II," published by Harf Publication, adds to his repertoire, joining earlier works like "Silwaton Ki Mehak" and "Sanyasi Yoddha." His flawless delivery of satirical jokes encompassing politics and social aspects of life, including making fun of his Bihari origin, provided laughter and entertainment to the audience as he recited his long poem, “Chini Ko Jama Karke Phir Se Ganna Bana Dun.” Currently, he is engrossed in crafting his forthcoming book, "Chini Ko Jama Karke Fir Se Ganna Bana Du," promising yet another insightful and entertaining addition to his literary legacy. Shambhu Shikhar's influence extends beyond borders, with his participation in Kavi Sammelans at iconic venues such as the Red Fort and various cities across India, North America, and the UAE.
Kavyitri Mumtaz Naseem is celebrated for her exceptional voice and captivating performances, mesmerizing audiences with her evocative poetry. Her writing style, marked by simplicity yet profound depth, resonates across generations, evoking powerful emotions in readers. Naseem's recitations at Kavi Sammelans are renowned for their energy and impact. With a diverse repertoire that includes geet, ghazals, and nazms, she ignites immense enthusiasm among listeners, earning thunderous applause and heartfelt appreciation. Having graced over a thousand such gatherings, her influence transcends borders, attracting invitations from Dubai, Qatar, Pakistan, Oman, the UAE, and other countries. Her talent is effortlessly reflected in her performances, captivating the ears and minds of her audience with every verse. Her poetry carries a deep emotional resonance, leaving a lasting impression on all who hear it.
Dr. Narendra Tandon introduced the poets, while Mr. Pratap Singh, president of the IHA DC Chapter, served as the master of ceremonies with light-hearted introductions. The Embassy of India was represented by Ms. Neha Singh, First Secretary (Culture and Education), Mr. Ravish Kumar, Second Secretary (Press, Information and Culture), and Mr. Rajiv Ahuja, Attache. The event was sponsored by the National Council of Associations in America (NCAIA), GIA, Association of Indian Muslims (AIM), The Global Organization of People of Indian Origin (GOPIO)-Metro DC, Dr. Vivek Vaid, Dr. Suresh Gupta, and Mr. Maninder Singh. Many distinguished personalities from the Metro Washington area enjoyed this memorable evening, including Dr. A. Abdullah, Dr. Harihar Singh, Dr. Renuka Misra, Dr. Suman Vardhan, Dr. Tahoora Kawaja, Dr. Zafar Iqbal, Mr. Kaleem Kawaja, Mr. Sunil Singh, Mr. Tribhuvan Singh, and Ms. Nuzaira Azam.
The author is thankful to Dr. Suresh K. Gupta and Ms. Vandana Singh for their input.
Zafar Iqbal, Ph.D.
1509 Coat Ridge Road
Herndon, VA 20170
240-328-0162; raabta.india@gmail.com
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अपनी कहानियाँ
"अनूदित जर्मन"
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<<< लेखक: फ़्रैंज़ काफ़्का
अनुवादित- द्वारा: सुशांत सुप्रिय
सुशांत सुप्रिय सरकारी संस्थान, नई दिल्ली में अधिकारी हैं और इंदिरापुरम्, ग़ाज़ियाबाद में रहते हैं ।
ये हिंदी के प्रतिष्ठित कथाकार , कवि तथा साहित्यिक अनुवादक है । इनके नौ कथा-संग्रह ,चार काव्य-संग्रह तथा विश्व की अनूदित कहानियों के नौ संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं ।
इनकी कहानियाँ और कविताएँ कई राज्यों के स्कूल-कॉलेजों में बच्चों को पढ़ाई जाती हैं।
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अनूदित जर्मन
व्यापार है ही बुरी चीज़। मुझे ही लीजिए। दफ़्तर के काम से जब थोड़ी देर के लिए भी मुझे छुट्टी मिलती है तो मैं अपने नमूनों की पेटी उठाकर खुद ही अपने ग्राहकों से मिलने चल देता हूँ। बहुत दिनों से मेरी इच्छा एन. के पास जाने की थी। कभी एन. के साथ मेरा काफ़ी अच्छा कारोबार चल रहा था , लेकिन पिछले कुछ सालों से यह ठप्प पड़ा हुआ था। क्यों ? यह तो मुझे भी नहीं पता। ऐसी बात तो कभी बिना सचमुच के किसी कारण के भी घट सकती है। आजकल समय ही ऐसा है कि किसी का महज़ एक शब्द भी सारे मामले को उलट-पलट कर रख सकता है जबकि एक ही शब्द सब कुछ ठीक-ठाक भी कर सकता है। दरअसल एन. के साथ कारोबार करना बड़ा नाज़ुक मामला है।
वह एक बूढ़ा आदमी है और बुढ़ापे के कारण काफ़ी अशक्त भी हो गया है, फिर भी वह अपने कारोबारी मामलों को अपने ही हाथ में रखना पसंद करता है। अपने ऑफ़िस में तो वह आपको शायद ही कभी मिले और उससे मिलने के लिए उसके घर जाना एक ऐसा काम है जिसे कोई भी भला आदमी टालना ही पसंद करेगा। फिर भी कल शाम छह बजे मैं उसके घर के लिए निकल ही पड़ा। यह किसी से मिलने के लिए जाने का समय तो नहीं था पर मेरा वहाँ जाना कारोबारी कारण से था , कोई सामाजिक सद्भाव नहीं। सौभाग्य से एन. घर पर ही था।
अभी वह अपनी पत्नी के साथ सैर करके लौटा था। नौकर ने बताया कि साहब इस समय अपने बेटे के सोने के कमरे में हैं। बेटा बीमार था। नौकर ने मुझसे वहीं जाने का आग्रह किया। पहले तो मैं थोड़ा हिचका। फिर सोचा कि क्यों न इस अप्रिय मुलाक़ात को जल्दी निपटा दिया जाए। इसलिए मैं उसी हालत में, यानी ओवरकोट और टोपी पहने, हाथ में नमूनों की पेटी लिए एक अँधेरे कमरे को पार करके एक नीम अँधेरे कमरे में दाख़िल हुआ, जहाँ तीन-चार लोग पहले से ही मौजूद थे।
मेरी पहली नज़र जिस व्यक्ति पर पड़ी वह एक एजेंट था , जिसे मैं अच्छी तरह जानता था। एक तरह से वह मेरा कारोबारी प्रतिद्वंदी था। मुझे लगा , वह मुझसे पहले ही बाज़ी मार ले गया। वह आराम से बीमार के बिस्तर के पास ही बैठा था , जैसे वह कोई डॉक्टर हो। अपने ओवरकोट के बटन खोले बैठा वह निर्लज्ज-सा लग रहा था। बीमार आदमी भी शायद अपने विचारों में खोया हुआलग रहा था। उसके गाल बुखार से तप रहे प्रतीत हो रहे थे। वह बीच-बीच में उस आगंतुक की ओर भी देख लेता था। एन. का बेटा छोटी उम्र का नहीं था। वह लगभग मेरी ही उम्र का
होगा। उसकी छोटी-सी दाढ़ी बीमारी के कारण छितरायी हुई थी।
बूढ़ा एन. लम्बा-तगड़ा आदमी था। उसके कंधे काफ़ी चौड़े थे। पर यह देखकर मुझे हैरानी हुई कि वह अब दुबला हो गया था। उसकी कमर भी झुक गयी थी। वह अशक्त हो गया था। उसने अभी तक अपना कोट नहीं उतारा था। वह अपने बेटे के कान में कुछ फुसफुसा रहा था। उसकी पत्नी छोटे क़द की दुबली और फुर्तीली महिला थी। ऊँचाई में काफ़ी फ़र्क़ होने के बावजूद वह अपने पति के कोट को उतारने में उसकी मदद करने लगी। हालाँकि शुरू में उसे
दिक़्क़त हो रही थी , किंतु आख़िरकार वह इसमें सफल हो गयी। लेकिन असल दिक़्क़त तो एन. के अधैर्य के कारण थी। कोट अभी पूरा उतरा भी नहीं था कि वह अपने हाथों से आरामकुर्सी के हत्थे टटोलने लगा था। उसकी पत्नी ने कोट उतारते ही आरामकुर्सी जल्दी से उसके पास सरका दी और खुद उसका कोट उठा कर रखने चली गई। कोट उठाए हुए वह खुद उसके बीच में लगभग ढँक-सी गई थी।
*आख़िरकार मुझे लगा कि वह समय आ गया है या यूँ कहूँ कि अपने-आप तो वह समय आता नहीं। मैंने सोचा कि जो कुछ करना है , मुझे जल्दी ही कर लेना चाहिए। मुझे लग रहा था कि कारोबारी बातचीत के लिए समय धीरे-धीरे प्रतिकूल होता जा रहा है। उस एजेंट के लक्षण तो मुझे ऐसे दिख रहे थे जैसे वह वहीं जमा रहना चाहता हो। यह मेरे हित में नहीं था , हालाँकि मैं वहाँ उसकी उपस्थिति को ज़रा भी अहमियत नहीं देना चाहता था। इसलिए मैंने बिना किसी भूमिका के झटपट अपने धंधे की बात शुरू कर दी , बावजूद इसके कि इस समय एन. अपने बीमार बेटे से बात करना चाह रहा था। दुर्भाग्य से यह मेरी आदत हो गई थी कि जब मैं अपनी असली बात पर आता हूँ -- जो कि आम तौर पर जल्दी ही होता है और इस मामले में तो समय और भी कम लगा -- तो मैं बात करते-करते खड़ा हो जाता हूँ और चहलक़दमी करने लगता हूँ।
किसी दफ़्तर में तो यह हरकत बड़े ही स्वाभाविक तरह से हो सकती है , पर यहाँ बड़ा अटपटा लग रहा था। फिर भी मैं खुद को रोक नहीं पाया। इसका एक कारण और भी था। सिगरेट की बड़ी तलब लग रही थी। ठीक है , हर आदमी की कुछ बुरी आदतें होती ही हैं। दूसरी ओर , उस एजेंट की हालत देखकर मुझे बहुत राहत मिल रही थी। वह उद्विग्न लग रहा था। वह अचानक घुटने पर रखी अपनी टोपी उठा कर झटके से अपने सिर पर रख लेता था और फिर वहाँ उसे ऊपर-नीचे करता रहता। फिर अचानक उसे लगता कि उससे कोई ग़लती हो गई है। तब वह उस टोपी को अपने सिर से उतार कर वापस अपने घुटने पर रख देता। हर एक-आध मिनट में वह इन्हीं हरकतों को दोहराता जा रहा था। मुझे तो इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ रहा था , क्योंकि मैं तो चहलक़दमी करता हुआ अपने प्रस्तावों में पूरी तरह से खोया हुआ था और उसे अनदेखा कर रहा था , लेकिन उसकी ये हरकतें अन्य लोगों को ज़रूर आपे से बाहर कर रही होंगी।
दरअसल मैं जब अपनी बात में पूरा रम जाता हूँ तो ऐसी हरकतों की ही क्या, किसी भी बात की परवाह नहीं करता। जो कुछ हो रहा होता है , उसे मैं देखता तो हूँ पर उस ओर तब तक कोई ध्यान नहीं देता, जब तक कि मैं अपनी बात पूरी न कर लूँ , या जब तक कोई दूसरा व्यक्ति किसी तरह की आपत्ति प्रकट न करे। इसलिए मैं सब कुछ देख रहा था। मसलन एन. मेरी बात की ओर ज़रा भी ध्यान नहीं दे रहा था। कुर्सी के हत्थे को पकड़े वह बिना मेरी ओर देखे बेचैनी से कसमसाया। वह कहीं शून्य में टकटकी लगाए देख रहा था , जैसे कुछ ढूँढ़ रहा हो। उसके चेहरे को देखकर कोई भी समझ सकता था कि मेरे कहे हुए शब्दों से या सही कहें तो मेरी उपस्थिति से भी वह पूरी तरह अनभिज्ञ लग रहा था। उसकी और उसके बीमार बेटे की हालत मेरे लिए शुभ लक्षण नहीं थे , फिर भी मैंने स्थिति को क़ाबू में रख कर अपनी बात कहनी जारी रखी , जैसे मुझे विश्वास हो कि अपनी बात कह कर मैं सारा मामला फिर से ठीक कर लूँगा।
मैंने एन. के सामने एक लाभकारी प्रस्ताव रखा , हालाँकि बिना माँगे ही जिस तरह की रियायतें देने की बात मैंने कह दी थी , उसने खुद मुझे ही चौंकादिया। इस बात से मुझे बड़ा संतोष मिला कि मेरे प्रस्ताव ने उस एजेंट को चक्कर में डाल दिया था। उस पर एक सरसरी निगाह डालते हुए मैंने देखा कि अपनी टोपी को जहाँ-का-तहाँ छोड़कर अब उसने अपने दोनो हाथ अपनी छाती पर बाँध लिएथे। मुझे यह स्वीकार करने में हिचक हो रही है कि मेरे इस कृत्य का उद्देश्य उसे धक्का पहुँचाना भी था। अपनी इस जीत के उत्साह में मैं काफ़ी देर तक अपनी बात कहता रहा , लेकिन तभी उसके बेटे ने , जिसे मैं अपनी इस योजना में फ़ालतू चीज़ समझे बैठा था , बिस्तर से उठ कर काँपते हाथों से मुझे धक्का दे दिया। हो सकता है वह कुछ कहना चाहता हो या किसी बात की ओर संकेत करना चाहता हो , लेकिन उसमें इसकी ताकत न हो। पहले तो मुझे लगा जैसे उसका दिमाग़ घूम गया हो ,पर जब मैंने बूढ़े एन. पर एक उबाऊ नज़र डाली तो सारी बात मेरी समझ में आ गई।
एन. की खुली हुई आँखें भावशून्य और सूजी हुई थीं। लग रहा था जैसे उसे बहुत कमज़ोरी महसूस हो रही हो। वह काँप रहा था और उसका शरीर आगे की ओर झुका जा रहा था , जैसे कोई उसके कंधों को ठोक रहा हो। उसका निचला होठ या यूँ कहें कि निचला जबड़ा लटक गया था और वहाँ से झाग-सा बाहर आ रहा था। वह बड़ी मुश्किल से साँस ले पा रहा था। फिर अचानक जैसे उसे सारे कष्ट से मुक्ति मिल गयी हो, उसने कुर्सी पर पीठ टिका कर आँखें बंद कर लीं। दर्द का एक गहरा अहसास उसके चेहरे पर से गुज़रा और लगा जैसे सब कुछ ख़त्म हो गया हो। मैं झटके से उसकी ओर गया और उसकी बेजान कलाई थाम ली। वह इतना ठंडा था कि एक बार तो ठंड की एक लहर मेरे पूरे शरीर में दौड़ गई। नब्ज़ थम गयी थी यानी सब ख़त्म हो गया था। कुछ भी हो, वह बहुत बूढ़ा हो गया था। काश हम सबको भी ऐसी मौत नसीब होती। लेकिन अब मैं क्या करूँ ? मैंने मदद के लिए आसपास देखा।
उसके बेटे ने चादर सिर तक ओढ़ ली थी और उसकी सिसकियों की आवाज़ मैं साफ़ सुन रहा था। वह एजेंट तो किसी मछली की तरह ठंडा लग रहा था। वह एन. से दो क़दम दूर अपनी कुर्सी पर अचल बैठा था और लग रहा था कि वह कुछ नहीं कर पाएगा। इसलिए मैं ही वह एकमात्र व्यक्ति था, जो कुछ कर सकता था। बड़ा कठिन काम था उसकी पत्नी को उसकी मौत की ख़बर देना , और वह भी इस तरह कि वह उसे सहन कर सके। बगल के कमरे से मुझे उसकी पदचाप सुनाई देने लगी थी।
*वह अभी तक बाहर वाले कपड़ों में ही थी। उन्हें बदलने का उसे अभी तक समय ही नहीं मिला था। वह अपने पति को पहनाने के लिए आग के सामने गरम करके घर के कपड़े लायी थी। हमें स्थिर बैठे देख उसने मुस्कराते और अपनी गर्दन हिलाते हुए कहा , " वे सो गए हैं।" अपने अपरिमित निर्दोष विश्वास के साथ उसने अपने पति की वही कलाई पकड़ी जो कुछ देर पहले मैंने पकड़ी थी और बड़े प्रमुदित मन से उस पर एक चुम्बन अंकित कर दिया। हम तीनो आश्चर्य से देखते ही रह गए कि एन. हिला और उसने जम्हाई ली। पत्नी ने उसे घर की क़मीज़ पहनाई और इतनी लम्बी सैर के लिए, जिसने उसे थका दिया था, उलाहना देने लगी। वह उस उलाहने को खीझ और व्यंग्य के भाव से सुनता रहा और जवाब में उसने कहा कि वह उकताने लगा था और उसी वजह से उसे नींद आ गई थी। और फिर कुछ देर आराम करने के लिए उसे बीमार के बिस्तर पर ही लेटा दिया गया। सिर के नीचे रखने के सिए उसकी पत्नी जल्दी से दो तकिये ले आई और बीमार के पायताने की ओर रख दिए। अपने कमरे में उसे इसलिए जाने नहीं दिया गया , क्योंकि वहाँ जाने के लिए एक ख़ाली कमरे से गुज़रना पड़ता था और उसमें उसे ठंड लग सकती थी।
जो कुछ पहले घटा था , अब उसमें मुझे कोई विचित्रता नहीं लग रही थी। फिर एन. ने शाम का अख़बार माँगा और बिना अपने मेहमानों की ओर ज़रा भी ध्यान दिए अख़बार खोल लिया। वह ध्यान से अख़बार नहीं पढ़ रहा था। यूँ ही सरसरी तौर पर इधर-उधर निगाह डाल रहा था। उसने हमारे प्रस्तावों पर कुछ अप्रिय टिप्पणियाँ भी कीं। दरअसल उसने अपने हाथ को बड़े तिरस्कारपूर्ण ढंग से हिलाते हुए जिस तरह की तीखी टिप्पणियाँ की थीं उसमें इस बात की ओर स्पष्ट संकेत था कि कारोबार करने के हमारे तरीक़ों ने उसके मुँह का स्वाद ख़राब कर दिया है।
यह सब सुनकर उस एजेंट ने भी एक- अप्रिय टिप्पणियाँ कर ही दीं। बेशक , जो कुछ घटा था, उसकी क्षतिपूर्ति का यह सबसे घटिया तरीका था। जल्दी ही मैंने उनसे विदा ले ली। मैं उस एजेंट का आभारी था, क्योंकि यदि वह न होता तो मुझे वहाँ से खिसकने का इतना अच्छा मौक़ा न मिल पाता।
*बाहर निकलते हुए बरामदे में मुझे श्रीमती एन. मिल गईं। उनकी करुण मूर्ति को देखकर मैंने कहा कि उन्हें देखकर मुझे अपनी माँ की याद आ गई। उन्हें चुप देखकर मैंने आगे कहा , " लोग जो भी कहें, पर वह चमत्कार कर सकती थीं। जिन चीज़ों को हम तोड़-फोड़ देते, वह उन्हें फिर से ठीक कर देतीं। जब मैं बच्चा था, तभी उनकी मृत्यु हो गई थी। " मैंने यह बात बड़े धीरे-धीरे और सुस्पष्ट ढंग से कही। मेरा ख़्याल था कि वह वृद्धा ज़रा ऊँचा सुनती है, पर वह तो बिल्कुल भी नहीं सुन पाती थी, क्योंकि मेरी बात को बिना समझे उसने पूछा था , "मेरे पति आपके प्रस्ताव पर क्या कह रहे हैं ? " विदाई के दो चार शब्दों के बीच मुझे यह भी लगा कि वह मुझे एजेंट समझ रही है, अन्यथा वह अधिक विनयी होती।फिर मैं सीढ़ियाँ उतर गया। उतरना चढ़ने से ज़्यादा थका देने वाला साबित हुआ , हालाँकि चढ़ना भी कोई आसान काम नहीं था। ओह , कितनी ही कारोबारी मुलाक़ातें ऐसी होती हैं जिनका कोई परिणाम नहीं निकलता है , पर इसके लिए हाथ पर हाथ धरे भी तो नहीं बैठा जा सकता और मुलाक़ातें करते रहना पड़ता है।
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"मिलती है मंजिल उन्ही को "
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द्वारा - सुनीता निमिष सिंह
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सुनीता निमिष सिंह उदयपुर, राजस्थान, भारत से हैं। इनकी आल इंडिया रेडियो एवम 92.7 बिग एफ एम के कार्यक्रम मे भागीदारी रहती है। अंतराष्ट्रीय मानवधिकार एवम सामाजिक न्याय संगठन (Human Rights and Social Justice Organization) मे उदयपुर इकाई की अध्यक्ष हैं। राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से "ज़िंदगी के रंग" पुस्तक प्रकाशित हुई है। ये दो वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुकी हैंl
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मिलती है मंजिल उन्ही को
मिलती है मंजिल उन्ही को
मिलती है मंजिल उन्ही को
जिनके हौसले बुलंद होते हैं
तपकर जो निखरते हैं परिश्रम में
अपने मुकदर को भी खींच लाते हैं
वाजूद है कुछ ऐसा
गर मारे हाथ ज़मी पर तो नीर बहा लाते हैं
नीयत मे शुमार नेकी ऐसी
कि पत्थर भी पिघल जाते हैं
आसान है ज़मी से आसमाँ का सफर इनका
क्योकि दामन मे दुआओं का सैलाब पाते
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“दो कवितायेँ ”
"पेड़ पर पृथ्वी एवं प्यास"
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द्वारा : श्री गोलेन्द्र पटेल
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श्री गोलेन्द्र पटेल जी पूर्व शिक्षार्थी, हिन्दी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से हैं। इन्हें कविता, नवगीत, कहानी, निबंध, नाटक, उपन्यास व आलोचना में रूचि है।
इन्होनें अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठियों में कविता पाठ भी किया है। इन्हें कई सम्मानों से भी सम्मानित किया गया है। इनकी कविता एवं आलेख प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रमुखता से प्रकाशित एवं दर्जन भर से ऊपर संपादित पुस्तकों में प्रकाशित हैं।
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१ पेड़ पर पृथ्वी
पेड़ पर पृथ्वी
पंक्षियों को पता है
'पेड़ पर पृथ्वी है'
पर परछाँई में पशुओं को स्वीकार नहीं है
कि उनकी आँखों में नदी है
जिनकी पीठ पर पीड़ा
लदी है
डैना कटने का डर है
पैना पकड़ी है मृत्यु की मैना
'देह में दर्द का घर है'
इलाज के लिये
जंगल के पास पहुँची जो डगर है
उस पर कोई शेर नहीं,
शहर है
जिससे गाँव ने कहा कि प्रकृति को दुहना
त्रासदी ही नहीं
इक्कीसवीं सदी की बदी है
जो मेरे ही नहीं
तुम्हारे भी हृदय की हदी है
हाँ, वही हदीस
जो अकाल गाता है।
२ प्यास
प्यास
उठो! जागो!
देखो!
यह नयी सुबह है
आँखों की
प्यास बुझाने वाली
धूप
खिली है
फुनगियों पर
हवा में तैरती हुई
गंध
अचानक कह रही है
कि रंग नहीं
वह है फूलों की पहचान
लेकिन भौंरों को
बस
रस से मतलब है
साँसों की राह में प्रतिरोध
दर्ज कर रही है
उनके स्पर्श की स्मृति
कितनी सुंदर है
यह प्रकृति!
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