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JANUARY INTERNATIONAL HINDI ASSOCIATION'S NEWSLETTER
जनवरी 2023, अंक २० | प्रबंध सम्पादक: सुशीला मोहनका
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Human Excellence Depends on Culture. The Soul of Culture is Language
भाषा द्वारा संस्कृति का प्रतिपादन
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प्रिय मित्रों ,
आप सभी को नववर्ष की, मकरसंक्रांति की, लोहड़ी की और पोंगल आदि त्यौहारों की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ। यह माह त्योहारों से सराबोर झूम रहा है, और सभी को आनंदित कर रहा है। आज़ादी के अमृत महोत्सव के दौरान इस २६ जनवरी गणतंत्र दिवस की अनंत शुभकामनाएँ प्रेषित करती हूँ और आशा करती हूँ कि ऐसे ही प्रगति के पथ पर भारत अग्रसर होता रहे।
पूरे विश्व में जनवरी माह में १० तारीख़ को ‘विश्व हिंदी दिवस’ मनाया जाता है, आप सभी हिंदी प्रेमियों को हमारी समिति की ओर से ‘विश्व हिंदी दिवस’ की अनंत शुभकामनाएँ। इस वर्ष के प्रारम्भ में अ.हि.स. की स्थानीय समितियों में क़ई बड़े और छोटे कार्यक्रम किए गए हैं।
अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति की नेशविल, टेनेसी शाखा ने ७ जनवरी, २०२३ को ‘विश्व हिंदी दिवस’ मनाया था। अ.हि.स. की इण्डियानापोलिस शाखा में उसी दिन याने १० जनवरी को अति उत्तम आभासी कवि सम्मेलन का आयोजन किया था। इसी प्रकार अ.हि.स. की उत्तरपूर्व, ओहायो शाखा एवं नॉर्थ केरोलाइना शाखा में १५ जनवरी को ‘विश्व हिंदी दिवस’ के अवसर पर बड़ा अच्छा कार्यक्रम किया था। अ.हि.स. की ह्यूस्टन, टेक्सास शाखा में भी धूम-धाम से 'विश्व हिंदी दिवस' मनाया गया। वर्ष के प्रारम्भ में ही अ.हि.स. की स्थानीय समितियों ने वृहत स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किये। बच्चों के लिए हिंदी, चित्रकारी और क्ले वर्कशाप भी आयोजित किये गए। डल्लास, टेक्सास शाखा में ५ फरवरी, २०२३ को आयोजित किया जाएगा। मैं सभी शाखाओं के अध्यक्षों एवं उनके सहयोगियों का सहृदय धन्यवाद करती हूँ, कि उन्होंने बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ 'विश्व हिंदी दिवस' मनाया ।
जागृति, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति की हिन्दी साहित्य-केंद्रित व्याख्यानों की एक शृंखला है जिसकी अगली कड़ी, शनिवार,11 फरवरी 2023, को भारतीय समय से 8:30 बजे शाम को निश्चित की गई है। इस वेबिनार का सीधा प्रसारण फेसबुक एवं यूट्यूब पर किया जाएगा। जागृति शृंखला की इस कड़ी की वक्ता हैं: प्रतिष्ठित हिन्दी आलोचक एवं साहित्यकार, प्रोफेसर के. वनजा. पूर्व विभागाध्यक्षा, हिन्दी विभाग अधिष्ठाता-मानविकी संकाय, कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कोच्ची, केरला। इस व्याख्यान और चर्चा का विषय है: "हिन्दी साहित्य में इकोफेमिनिज्म"। आप सभी से निवेदन है कृपया इस कार्यक्रम को अवश्य देखें।
अ.हि.स. का द्विवार्षिक अधिवेशन २८/२९, जुलाई, २०२३ को होना निश्चित हुआ है। आप सभी को समिति की ओर से आमंत्रित करती हूँ, आप सभी इस अधिवेशन में आकर, अपना समय देकर अपनी भागीदारी निभायें और अधिवेशन को सफल बनाएँ।
२०२२-२०२३ सत्र के न्यासी-समिति, कार्य-समिति, निदेशक मण्डल के अन्य सदस्य एवं शाखा संयोजक सभी अच्छे तरीक़े से अपना-अपना कार्यभार सम्भाल रहे हैं, उन सभी की मैं हृदय से प्रशंसा करती हूँ। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की शाखाओं के सभी अध्यक्षों-अध्यक्षाओं के कार्यों की हृदय से प्रशंसा करती हूँ। अंत में मैं निर्धारित समय पर “संवाद” और “विश्वा” को प्रकाशित करने और आप तक पहुँचाने का कार्य कर रहे सम्पादक एवं सम्पादक मंडल को सहृदय धन्यवाद देती हूँ। मैं २०२३ में भी आपके अमूल्य समय, सहयोग और योगदान की अपेक्षा रखती हूँ।
आप सभी को आने वाले नूतन नववर्ष की शुभकामनाएँ और आप सभी स्वस्थ्य रहे यही कामना ईश्वर से करती हूँ। आपका अगर कोई प्रश्न हो तो आप सभी इस ईमेल (anitasinghal@gmail.com) के माध्यम से हमसे सम्पर्क करें और इस फोन नम्बर पर 817-319-2678 पर वार्ता कर सकते हैं। कृपया Amazon के माध्यम से खरीदी कर के आप हमारा समर्थन अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति करने का कष्ट करें अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति एक ग़ैर लाभकारी संस्था है Amazon के माध्यम से जो भी अपने पसंद का सामान खरीदने पर charitable संस्था के रुप में smile.amezon.com के द्वारा चुनने पर, कोई भी ख़रीदी करता है तो amezon.com अपनी उस आय का ०.५% अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के खाते में स्वतः भेज देती है। इस शुभकार्य के लिये अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति आप सभी के सहयोग के लिए आभारी है।
शुभकामनाएँ सहित
अनिता सिंघल
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी-समिति, अध्यक्षा (२०२२-२३)
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति – हिंदी सीखें
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- आगामी कार्यक्रम
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जागृति वेबिनार : "हिन्दी साहित्य में इकोफेमिनिज्म", 11 फरवरी 2023
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जैसा आप को ज्ञात है, जागृति, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति की हिन्दी-साहित्य-केंद्रित व्याख्यानों की एक शृंखला है जिसकी अगली कड़ी, 11 फरवरी 2023, शनिवार को भारतीय समय से 8:30 बजे शाम को निश्चित की गयी है। इस वेबिनार का सीधा प्रसारण फेसबुक एवं यूट्यूब पर किया जाएगा।
जागृति शृंखला की इस कड़ी की वक्ता हैं: प्रतिष्ठित हिन्दी आलोचक एवं साहित्यकार, प्रोफेसर के. वनजा. पूर्व विभागाध्यक्षा, हिन्दी विभाग अधिष्ठाता-मानविकी संकाय, कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कोच्ची, केरला।
इस व्याख्यान और चर्चा का विषय है: "हिन्दी साहित्य में इकोफेमिनिज्म "।
विद्वान प्रोफेसर के अनुसार पृथ्वी और स्त्री को तथा अन्य उपेक्षित वर्गों को पितृसत्तात्मक पूँजीवादी शोषण से बचाने के लिए प्रकृति के साथ मिलकर जीने की जो नवीन विचारधारा फेमिनिज्म और परिस्थितिवाद दोनों के संयोग से रूपायित हुई उसे इकोफेमिनिज्म कहा जा सकता है। इसके आधार पर हिंदी साहित्य का विवेचन करने की कोशिश है यह।
समिति शनिवार, 11 फरवरी 2023 को इस वेबिनार में आपको सादर आमंत्रित करती है।
सम्मिलित होने के लिए लिंक है:
https://www.facebook.com/events/880625199826458
www.facebook.com/ihaamerica
https://www.youtube.com/watch?v=FxZtm2Pv81A
https://www.youtube.com/watch?v=CD7ESipPbu8
शनिवार, 11 फरवरी 2023; 8:30 बजे शाम भारतीय समय (IST)
USA/Canada: 10:00 AM EST, 9:00 AM CST, 8:00 AM MST, 7:00 AM PST
UK: 4:00 PM, Mainland Europe: 5:00 PM
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आशा है कि आप शनिवार, 11 फरवरी 2023 के वेबिनार में शामिल हो सकेंगे।
यदि आपके कोई प्रश्न या सुझाव हैं तो कृपया जागृति टीम से 317-249-0419 या Jagriti@hindi.org पर संपर्क करें।
अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति और जागृति: अमेरिका स्थित अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (www.hindi.org), हिन्दी भाषा और साहित्य के संरक्षण और प्रचार/प्रसार के लिए प्रतिवद्ध, 1980 में स्थापित, एक वैश्विक हिन्दी संस्थान है। पिछले 41 वर्षों में समिति के प्रयत्न हिंदी शिक्षण, अपनी त्रैमासिक हिंदी पत्रिका "विश्वा" और कवि-सम्मेलनों पर केंद्रित रहे हैं। समिति ने एक डिजिटल मासिक पत्र “संवाद” जून 2021 से प्रकाशन प्रारम्भ किया है। स्वतंत्रता के इस अमृत महोत्सव वर्ष के उपलक्ष में अंतरराष्ट्रीय हिन्दी समिति ने अपने नए प्रयत्न 'जागृति" की शुरुआत की है। "जागृति" हिन्दी साहित्य केंद्रित है; और इसका उद्देश्य हैं हिन्दी के विश्व प्रसिद्ध विद्वानों की वक्तृता और विचार विनिमय द्वारा हिन्दी के विशाल साहित्य भंडार को समझना और नए लेखकों को हिन्दी में साहित्य सृजन के लिए अनुप्रेरित करना।
यदि आप जागृति के इसके पहले के वेबिनार में शामिल नहीं हो पाए, तो आप नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से इसका आनंद ले सकते हैं।
https://www.hindi.org/Jagriti.html
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति – शाखाओं के कार्यक्रम की रिपोर्ट
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति – इंडियाना शाखा
विश्व हिंदी दिवस’ पर सफलतापूर्वक आभासी “कवि सम्मेलन” का आयोजन
द्वारा: डॉ कुमार अभिनव, सचिव - इंडियाना शाखा
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विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति-इंडियाना शाखा ने एक आभाषी कवि सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन 10 जनवरी, 2023 को आयोजित किया। यह कार्यक्रम भारत की स्वतंत्रता के 75वें वर्ष को चिह्नित करने के लिए भी आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम के आयोजन का नेतृत्व अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति-इंडियाना शाखा के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने किया। वे कार्यक्रम के संयोजक और मेजबान भी थे। श्री सोमनाथ घोष, भारत के महावाणिज्यदूत, शिकागो ने मुख्य अतिथि के रूप में इस अवसर की शोभा बढ़ाई और उद्घाटन भाषण दिया जिसने सभी प्रतिभागियों और दर्शकों को प्रेरित किया और उन्हें गर्व से भर दिया। उन्होंने माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का एक संदेश भी पढ़ा, जिसमें ‘विश्व हिंदी दिवस’ मनाने के लिए आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों की प्रशंसा की गई थी। इस संदेश ने हमारी संस्कृति और पहचान को परिभाषित करने में हमारी राष्ट्रभाषा के महत्व पर भी जोर दिया। श्री सोमनाथ घोष ने यह भी घोषणा की कि अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति-इंडियाना शाखा 28-30 जुलाई, 2023 को इंडियानापोलिस में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के द्विवाषिक अधिवेशन की मेजबानी करेगा। श्री सोमनाथ घोष ने मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम में हमारे निमंत्रण को स्वीकार किया है।
डॉ राकेश कुमार ने प्रत्येक कवि का व्यक्तिगत रूप से सुंदर दोहों के साथ परिचय और स्वागत किया, जिसने कार्यक्रम के प्रवाह को अच्छी तरह से बनाए रखने में मदद की और दर्शकों को भी बाँधे रखा। शुरू से अंत तक अधिकांश दर्शक रुके रहे – दर्शकों की संख्या लगभग 100 थी। कार्यक्रम को अब तक फेसबुक पर 500 बार देखा है (इसे यूट्यूब पर भी पोस्ट किया गया है)।
सभी कवि अमेरिका के ही थे, सभी ने 2-3 कविताएँ पढ़ी। प्रतिभागियों के नाम ऊपर इवेंट पोस्टर में दिए गए हैं। सभी कवि अपने पेशेवर करियर में अग्रणी हैं और शौक के तौर पर कविता लिखते हैं। उनकी कविताओं को सुनकर लगता है कि वे पेशेवर और सुस्थापित कवियों से कम नहीं हैं। कविताओं में शामिल विषयों में देशभक्ति, जीवन यात्रा, कोरोना, पति-पत्नी के संबंध, घर-घर, सोशल मीडिया, प्रेम की अभिव्यक्ति आदि विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है। हिंदी की सुंदरता और हमारी भारतीय संस्कृति और विरासत की समृद्धि सभी कविताओं में सामान्य विषय था। सारी कविताएँ दिल के तार खींच कर हमें भावुक कर गईं।
डॉ. श्वेता सिन्हा ने हमें भारत और हमारी संस्कृति के बारे में गर्व और देशभक्ति से भर दिया। संजीव श्रीवास्तव जी ने "जीवन" को संतुष्ट करने के लिए जीवन की यात्रा और कार्यों और व्यवहारों का सुंदर वर्णन किया। डॉ. निशा पंड्या ने हिंदी का गुणगान किया और फिर कोरोना पर अपनी "हास्य-कविता" से हास्य और "कजरा मोहब्बत वाला" की धुन पर आधारित! हम जिस दुख से गुजरे थे, उस पर सभी ने हँसने का भरपूर आनंद लिया। प्रिया भारद्वाज जी ने पति-पत्नी के संबंधों के सदाबहार मज़ेदार विषय से हमारा मनोरंजन किया। बेचारे पति को अपनी पत्नी को बैगन कहने के लिए करेले के पकौड़े खाकर, अपने आप को संतुष्ट करना पड़ा। पूजा श्रीवास्तव जी ने दो सुंदर कविताएँ पढ़ीं – ‘एक घर को घर कैसे बनाया जाए’ और ‘दूसरी मौसम’ और मौसम के माध्यम से मानवीय भावनाओं का वर्णन। नरेंद्र सिंह जी ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन संचार के प्रभाव और खतरों पर गजलें और कविताएँ
पढ़ीं और इसकी तुलना बीते युग से की जब "घड़ी किसी-किसी के पास थी पर वक्त सबके पास था" राघवेंद्र भदौरिया जी ने “श्रृंगार रस” पर दो कविताएँ प्रस्तुत कीं। पहले 'चाँद से गुजारिश' जो "साजन" से उसकी 'सजनी' तक थी और फिर "साजन के रंग" जो सजनी से साजन तक थी। "चाँद से गुजारिश" को राघवेंद्र जी ने अपनी पत्नी के लिए उनकी 25वीं शादी की सालगिरह पर लिखा था और उन्होंने हमें बताया कि उन्हें इसके लिए बहुत सारे ब्राउनी पॉइंट मिले हैं, जिनका उपयोग वह अभी भी कठिनाई के "क्षणों" के दौरान कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, एक बेहद सफल आयोजन जिसे कार्यक्रम के दौरान और बाद में दर्शकों से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति-इंडियाना शाखा ने भारत के महावाणिज्यदूत, शिकागो, सभी प्रतिभागियों और सभी दर्शकों को धन्यवाद ज्ञापन किया।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति – इंडियाना शाखा
“भारतीय वाणिज्य दूतावास और सामुदायिक नेताओं के साथ मिलन-गोष्टी”
द्वारा: डॉ. राकेश कुमार, अध्यक्ष - इंडियाना शाखा
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अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति -इंडियाना ने 8 जनवरी, 2023 को एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन और मेजबानी की जिसमें भारत के उप महावाणिज्यदूत (शिकागो), श्री टी.डी., भूटिया, कौंसल, श्री रंजीत सिंह (भारत के महावाणिज्य दूतावास, शिकागो), ग्रीनवुड मेयर, मार्क डब्ल्यू मायर्स, इंडियाना के प्रमुख सामुदायिक नेता (एचटीसीआई, आईएआई, टीएआई, टीएससीआई, बीएपीएस और केएआई के नेता) और अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति -इंडियाना के सलाहकार और हितैषी शामिल थे।
यह मिलन-गोष्ठी गोस्थियो विद्या सिंह (उपाध्यक्ष, अ. हि. स. इंडियाना शाखा) एवं डॉ. देवव्रत सिंह के निवास स्थान पर ग्रीनवुड, इंडियाना में हुई। डॉ. देवव्रत सिंह ने सभी मेहमानों का स्वागत किया और उसके बाद डॉ. राकेश कुमार (अध्यक्ष, अ. हि. स. इंडियाना शाखा) ने सभी का अभिवादन करते हुए समिति के इतिहास और लक्ष्यों के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने अगली पीढ़ी के लिए हिंदी शिक्षा को बढ़ाने पर जोर दिया और सभी समुदाय के नेताओं और वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों से समिति के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायता और अ. हि. स. के आगामी अधिवेशन को सफल बनाने का अनुरोध किया।
मार्क डब्ल्यू मायर्स ने अपने वक्तव्य में भारतीय समुदाय की सराहना की और धन्यवाद दिया। भारत के उप महावाणिज्यदूत (शिकागो), श्री टी.डी., भूटिया, और कौंसल, श्री रंजीत सिंह ने समुदाय का स्वागत करते हुए हिन्दी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
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अपनी कलम से
“कोरोना के शहीद सैन्य शहीदों से कम नहीं आँके जा सकते”
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द्वारा - डॉ. उमेश प्रताप वत्स
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डॉ. उमेश प्रताप वत्स यमुनानगर, हरियाणा के निवासी हैं। लेखक के साथ-साथ एक अच्छे खिलाड़ी भी हैं। 2004 में अखिल भारतीय कुश्ती प्रतियोगिता में 63 किलो भार वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्णपदक प्राप्त कर चुके हैं। इनको बाँसुरी वादन का भी शौक है।
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कोरोना के शहीद सैन्य शहीदों से कम नहीं आँके जा सकते
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एक बार फिर कोरोना ने विश्वपटल पर अपनी भयावह दस्तक दी है। चीन के गर्भ से निकले कोरोना ने पिछले दो वर्षों में सबकुछ तहस-नहस करके रख दिया है। लगभग दो वर्षों के बाद जब पूरा विश्व एक बार फिर से संभलने का प्रयास कर ही रहा था तो चीन के उसी गर्भ से इस भयंकर वायरस कोरोना ने फिर से डराना शुरु कर दिया है। कोरोना वायरस से चीन में हाहाकार मचा है। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ 20 दिन में 25 करोड़ लोग कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। रेडियो फ्री एशिया ने सोशल मीडिया पर चल रहे दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि महीने के पहले सप्ताह में 'जीरो-कोविड पॉलिसी' में छूट देने के बाद हालात भयावह हुए हैं और सिर्फ 20 दिन में ही पूरे चीन में करीब 25 करोड़ लोग कोविड-19 से प्रभावित हो गए हैं।
कोरोना वायरस विश्वमारी की शुरुआत एक नए किस्म के कोरोनवायरस के संक्रमण के रूप में मध्य चीन के वुहान शहर में 2019 के मध्य दिसंबर में हुई। बहुत से लोगों को बिना किसी कारण निमोनिया होने लगा। 23 जनवरी 2020 को वुहान को अलग रखा गया था। वायरस के प्रसार को रोकने के लिए 23 जनवरी 2020 को वुहान से बाहर और अन्दर आने-जाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। उड़ानें, ट्रेनें, सार्वजनिक बसें, मेट्रो प्रणाली और लंबी दूरी के ट्रेनों को अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिए गया। बड़े पैमाने पर एकत्रीकरण और समूह में पर्यटन को भी निलंबित कर दिया गया था।
14 मार्च 2020 तक दुनिया में इससे 5,800 मौतें हो चुकी थी। यह वायरस पूरे चीन में एक आदमी से दूसरे आदमी में संक्रमित होता गया। 20 मार्च 2020 तक थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, जापान, ताइवान, मकाऊ, हांगकांग, संयुक्त राज्य अमेरिका, सिंगापुर, वियतनाम, भारत, ईरान, इराक, इटली, कतर, दुबई, कुवैत आदि 160 देशों में कोरोना पुष्टि के मामले तेजी से सामने आते रहे।
23 जनवरी 2020 को, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने के विरुध्द निर्णय लिया।
11 मार्च, 2020 को, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे एक महामारी के रूप में मान्यता दी।
11 अप्रैल 2020 तक 210 से अधिक देशों और क्षेत्रों में कोविड के लगभग 1,741,621 मामलों की पुष्टि हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 106,670 मौतें हुई थी।
कोरोना वायरस के लक्षणों में साँस की तकलीफ या साँस लेने में कठिनाई का अनुभव सामने आने लगा था। नए कोरोनो वायरस संक्रमण के लक्षणों की गंभीरता व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होती है, कुछ हल्के होते हैं, कुछ गंभीर होते हैं और यहाँ तक कि मृत्यु भी हो सकती है। इस बीमारी को हमारे डॉक्टरों के पैनल ने गहराई से समझने का प्रयास किया था।
विश्व भर में यदि किसी देश ने सुव्यवस्थित योजना बनाकर कोरोना को मात देने में सफलता प्राप्त की तो वह हमारा भारत देश था। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वायरस से बचने के उपायो में 22 -मार्च के दिन संकल्प और संयम के रूप में जनता कर्फ्यू की अपील देशवासियों से की। थाली बजवाकर जन जागरण किया। मैडिकल सुविधाओं एवं खाद्यान्न की पूर्ण व्यवस्था की गई। कोरोना के कारण घरों में कैद एक भी प्रभावित नागरिक को भूख से नहीं मरने दिया गया जिसमें सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ ही सेवा भारती, आर्ट्स ऑफ लिविंग आदि अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा।
एक ओर जहाँ जनता ने बहुत अधिक सावधानी बरती जो स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा सलाह के अनुसार आचरण किया तो वहीं दूसरी ओर कुछ देश विरोधी संगठनों, विपक्ष के नेताओं ने नकारात्मक माहौल भी बनाने का कुत्सित प्रयास किया। दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाक़े के मरक़ज़ में हुए तबलीग़ी जमात के कार्यक्रम ने इस माहामारी को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी, इंडोनेशिया और मलेशिया सहित कई देशों के दो सौ से अधिक प्रतिनिधियों ने 1 से 15 मार्च तक हज़रत निज़ामुद्दीन में तबलीग़ी जमात में लोगों ने भाग लिया जिससे कोरोना फैलने का खतरा बढ़ गया था। तब भारत के केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने निजामुद्दीन के तबलीग़ी जमात मरकज़ मामले पर कहा था कि उन्होंने एक अक्षम्य 'तालिबानी' अपराध किया है। अस्पताल में नर्सों के सामने ही कपड़े उतारने के कारण छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। ऑक्सीजन सैंलेडर की कमी को पैनिक बनाया गया था। कुछ नकारात्मक उदाहरण छोड़ दें तो सारे देश ने मिलकर इस महामारी को हराया था।
कोरोना के संकट ने हमें समाज के कुछ गुमनाम सिपाहियों और योद्धाओं से भी रूबरू कराया था। ये योद्धा मरीजों की सेवा में दिन-रात लगे रहे। कहते हैं कि संकट की घड़ी में जो काम आए वही सच्चा मित्र है, लेकिन कोरोना जैसी महामारी के बीच जो अपनी परवाह किए बगैर मरीजों की सेवा कर रहा है वह किसी सिपाही से कम नहीं है। इनका समर्पण भाव सराहनीय है।
‘सेवा भारती’ के बैनर तले देश भर में 2.1 लाख स्वयंसेवक काम में लगे हुए थे। सेवा भारती ने 1200 संस्थानों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि देश भर में कोई भी क्षेत्र इस महामारी के समय छूट न जाए। करीब 26 लाख लोगों तक उनकी सीधी पहुँच थी, जिन्हें संस्था द्वारा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा था। इसी तरह पूरे देश में योजना बनाकर कार्य किया गया।
संगठन ने हर राज्य के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराए थे। अगर कोई व्यक्ति संकट में है या किसी तरह की परेशानी में फँस गया है तो वह इन नंबरों पर कॉल कर मदद माँग सकता था। रेलवे स्टेशनों और बस स्टॉप में फँसे लोगों को सेवा भारती के कार्यकर्ताओं द्वारा बचाया जा रहा था। दिल्ली में, संगठन एक दिन में 10000 से अधिक भोजन पैकेट वितरित कर रहा था। "आरएसएस कार्यकर्ताओं ने उन लोगों का विवरण एकत्र किया है जिन्हें शहर में भोजन की आवश्यकता है।" लगभग 5,000 कैडर रोजाना 75,000 दिल्लीवासियों को खाना खिला रहे थे।
इसी तरह कुबेर कौशल गौड़ एक साल में 20 हजार से अधिक लोगों के सैंपल ले चुके थे। सैंपल जुटाने के अलावा अस्पताल की लैब को भी संभालते रहे। खास बात है कि दिन-रात इतने लोगों के सैंपल लेने के बावजूद वह कोरोना की चपेट में नहीं आए थे। लोगों ने शवों को श्मशान तक पहुँचाने हेतु निःशुल्क गाड़ीयाँ उपलब्ध कराई। जब परिवार के लोग संस्कार करने से भी डर रहे थे तो ये कोरोना योद्धा अपनी जान की चिंता न करते हुए अजनबियों का अंतिम संस्कार कर रहे थे।
कोरोना कहर में मीडिया की भी अतुलनीय भूमिका रही है। जनमानस को जागरूक करना, स्थितियों से समय-समय पर अवगत कराना, सावधानी के नियमों को भी सबको समझाया।
सही गलत का मंथन कर सहज बनाकर प्रस्तुत करना, सामाजिक संगठनों को जरूरतमंदो तक पहुँचाने का कार्य, समाज की सृजनात्मकता को बढ़ाकर, कोरोना कहर की एक-एक कड़ी को सुलझाने का कार्य किया तथा कोरोना योद्धाओं को जनता के सामने लाकर सुरक्षात्मक विश्वास जगाने के साथ मानवता की राह में समाजसेवकों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य भी मीडिया के द्वारा किया गया।
कोरोना ने दिल्ली पुलिस, मुंबई पुलिस व देश के अन्य हजारों सुरक्षाकर्मियों को भी सेवा करते हुए अपनी चपेट में ले लिया था। निश्चित ही कोरोना वायरस के प्रकोप की स्थिति को हल्के में नहीं लिया जा सकता है।
कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद से, स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों ने न केवल रोगियों को ठीक करने और उनके जीवन को बचाने की संतुष्टि का अनुभव किया। कई डॉक्टरों ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राणों की आहुति भी दी।
हर दिन, निस्वार्थ योद्धा अपने परिवारों और प्रियजनों से खुद को अलगकर स्वास्थ्य देखभाल सेटिंग्स में अपना सब कुछ दे रहे थे। ये योद्धा मानवता की सुरक्षा और कल्याण के लिए जो बलिदान दे रहे थे, वह अमूल्य व अतुलनीय है। दुनिया भर के कुछ साहसी और प्रेरक डॉक्टरों के वीरतापूर्ण प्रयासों को भी हम भूला नहीं सकते।
जाति-पंथ से ऊपर उठ कर जिन कोरोना के अनुकरणीय, साहसी, वीर योद्धाओं ने आम जन को बचाने हेतु अपने प्राण उत्सर्ग किये हैं वे देश की सीमाओं पर लड़ने वाले जवानों से किंचित भी कम नहीं है। वे सदैव स्मरणीय है। सम्मानीय हैं। पूजनीय हैं।
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डॉ प्रकाश चंद पेशे से मेडिकल डॉक्टर हैं। भारत से आने के बाद जब उन्हें लगा कि हिंदी के लिए समय निकलना सम्भव है तब वे अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति से जुड़े और सपरिवार हिंदी के प्रचार-प्रसार में लग गये। अभी अ.हि.स. की उत्तरपूर्व ओहायो शाखा में उपाध्यक्ष हैं।
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आज़ादी का अमृत महोत्सव
आज़ादी का अमृत महोत्सव
देश को 75 वर्ष पूर्व राजनैतिक स्वातंत्र्य प्राप्त हुआ,
पर क्या हम आज़ाद हो पाये हैं?
तब हम बाह्य शासक के गुलाम थे,
अब अपनी ही मन:स्थिति के गुलाम हैं।
तब अंग्रेजी हुकूमत के पराधीन थे,
अब स्वदेशी लालफीता शाही के अधीन हैं।
क्या हम आज़ाद हो पाये हैं?
गरीबी, रोग, अशिक्षा, जाति की जंजीरों में हम सांस लेते हैं,
भ्रष्टाचार, बलात्कार, दुराचार के वातावरण में हम जीते हैं।
सियासत के लम्बे-चौड़े वादे तो सुनते आये हैं,
पर क्या गरीबों के दुःख-दर्द भी सुने जाते हैं।
क्या हम आज़ाद हो पाये हैं?
महामारी की विभीषिका ने,
जब लाखों परिवारों को तोड़ा था,
तब आत्मनिर्भरता की सच्चाई सामने आई थी।
उस क्रूर संकट ने हमारी
स्वावलंबन की आत्ममुग्ध अकड़ तोड़ी थी।
क्या हम आज़ाद हो पाये हैं?
आज़ादी के अमृत महोत्सव में
जरुरी है कि हम एक दूसरे से प्यार करें,
ऊँच-नीच, रंग-भेद, वर्ग-जाति के
विष वमन बंद करें।
समाज में हर मज़हब और हर इंसान के लिए स्थान हो,
सब सहज, आश्वस्त हों
सब का सम्मान हो
अमृत सबको जीवन देता है
सब सचेत-सप्राण हों
अमृत महोत्सव में सबको
अमरत्व का भान हो।
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“सजल- मनुहार की बातें करो”
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द्वारा - श्री यशपाल शर्मा
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श्री यशपाल शर्मा 'यशस्वी', चित्तौड़गढ़, राजस्थान से हैं। गीत, कविता, छंद, सजल, दोहा, लघुकथा, बालगीत आदि पर लिखते हैं। ‘नीड़ से बिछड़े परिंदे’ नामक सजल सग्रंह - 2022 में प्रकाशित हुआ है।
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सजल- मनुहार की बातें करो
द्वार पर खुशियाँ खड़ी सत्कार की बातें करो।
व्यर्थ झगड़े छोड़ सारे प्यार की बातें करो।।
स्वार्थ ने संसार सारा संकुचित अपना किया।
लोकहित की सोच रख विस्तार की बातें करो।।
नागफनियों की चुभन सहनीय अब लगती नहीं।
केतकी कुमुदनी कमल कचनार की बातें करो।।
रूठना अधिकार भी है रूप भी श्रृंगार का।
ठानती हठ मानिनी मनुहार की बातें करो।।
भूख, बीमारी, गरीबी, दर्द, डर इस पार है।
मन बहल जाए जरा उस पार की बातें करो।।
तार दिल के छू न पाए तो वृथा संगीत है।
नेह से नम हो नयन झंकार की बातें करो।।
गीत सुनना चाहते सब ही बहारों के यहाँ।
तुम 'यशस्वी' मत हृदय के थार की बातें करो।।
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द्वारा - डॉ. उमेश प्रताप वत्स
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डॉ. उमेश प्रताप वत्स लेखक के साथ-साथ एक अच्छे खिलाड़ी भी हैं। 2004 में अखिल भारतीय कुश्ती प्रतियोगिता में 63 किलो भार वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्णपदक प्राप्त कर चुके हैं। इनको बाँसुरी वादन का भी शौक है। ये यमुनानगर, हरियाणा के निवासी हैं। इस कविता में इन्होंने अंग्रेजी वर्ष पर अपनी भावनाओं को सरल, सहज अभिव्यक्ति दी है। ~*~*~*~*~*~*~*~
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अंग्रेजी वर्ष
अपना नहीं यह नया वर्ष, जरा इस पर कुछ विचार करो
ठंड में दुबक रहे वन-उपवन, ना इसका तुम प्रचार करो
एक जनवरी नया वर्ष जो, मस्ती से लोग मनाते हैं
अपने आप को सभ्यता का, ध्वजवाहक कहलाते हैं
कभी विचार तो करना था, कैसे क्योंकर ये नया वर्ष?
जंगल ठिठुर रहे सब ओर, प्राणी में भी कहाँ है हर्ष?
फिर यूरोप के पदचिन्हों पर चलकर, क्यूँ हम इसे मनाएँगे
अपना पवित्र संवत छोड़कर, क्यूँ इसकी बीन बजायेंगे
कुछ भी तो अनुकूल नहीं है, भेड़ चाल में ढोते आये
अपनी भावी पीढ़ी के लिए, बीज ये कैसे बोते आये
चलो करें मिलकर संकल्प यह, अपना संवत्सर मनाएँगे
उसी पवित्र प्रतिप्रदा को सब, गीत खुशी के गायेंगे
चहुँ ओर चिड़ियाँ चहकेंगी, यौवनता फिर महकायेंगी
नित-नव कोंपल के श्रृंगार से, प्रकृति सभी को भायेगी
अलसाया सा पुष्प खिलेगा, हँसना हमें सिखायेगा
हरा-भरा जंगल भी हमको, नव संवत का परिचय करायेगा
कृष लतायें खिलकर बोलेंगी, फसलें भी लहरायेंगी,
अंग्रेजी वर्ष और संवत का अंतर, प्रकृति हमें समझायेगी
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“अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति एवं सभी हिंदी प्रेमियों की ओर से
भावभीनी श्रद्धांजलि”
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डॉ. नरसिंह देव
(जनवरी 2, 1936-जनवरी13, 2023)
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डॉ० नर्सिंग देव गोयल का जन्म १९३६ में बिहार, भारत में हुआ। उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से फ़िज़िक्स एवं इंडियन इंस्टिट्यूट ओफ़ साइंस बैंगलोर से इंजीनियरिंग, की डिग्री प्राप्त की। तत्पश्चात एम०एस० की डिग्री ‘कल्टेक पैसडीना’ एवं पी० एच० डी० १९६५ में अमेरिका ’नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी’ से प्राप्त की। नासा में जेट प्रोपलसन लैब डिज़ाइन किया। अपने देश भारत आये और ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ओफ़ टेक्नॉलोजी’, कानपुर (IITK) में १९७१-१९७७ तक प्रोफ़ेसर और कम्प्यूटर शाखा के प्रमुख का पद सम्भाला। उसी समय उन्होंने अपनी अभूतपूर्व किताब ग्राफ़ थ्योरी और उसका प्रयोग कम्प्यूटर साइंस में बताया। कम्प्यूटर एम० एस० प्रोग्राम IITK में शुरू करने
में योगदान दिया।
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१९७७ में वे अमेरिका वापस आये और ‘वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी’ में प्रोफ़ेसर और कम्प्यूटर शाखा के चेयरमैन का पद सम्भाला । १९८६ में उन्होंने ‘यूनिवर्सिटी ओफ़ सेंट्रल फ़्लोरिडा’ में सबसे ऊँचे पद “Millican Endowed Chair Professor” कम्प्यूटर साइंस में पद ग्रहण किया और २०१७ में वे रिटायर हुए।
प्रोफ़ेसर नरसिंह देव गोयल ने ग्राफ़ थ्योरी, पैरेलल कम्प्यूटिंग और बायोइंफ़ोरमेटिक में अपना बहुत योगदान दिया। विसिटिंग प्रोफ़ेसर का पद कई यूनिवर्सिटी और देशों में निभाया जैसे अमेरिका, भारत, ब्राज़ील, टोकियो, ऑस्ट्रेलिया इत्यादि। उन्होंने कम्प्यूटर के बारे में विशेष जानकारी के लिए चार किताबें लिखीं जो विभिन्न भाषाओं में अनुवादित भी हुईं जैसे रशियन, पोलिस और जापानी। २०० से ज़्यादा रिसर्च पेपर पब्लिश किये।
इन सभी कामों के साथ वे भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा से भी बहुत लगाव रखते थे। वे अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के दो सत्रों तक निदेशक मंडल के सदस्य रहे। उन्हें पूरे अ.हि.स. परिवार की ओर से शत-शत नमन।
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“अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति एवं सभी हिंदी प्रेमियों की ओर से
भावभीनी श्रधांजलि”
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श्रीमती हीराबेन मोदी
(जून 18, 1923 - दिसंबर 30, 2022)
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पूज्यनीय माता जी हीरा बा को शत-शत नमन, विगत ३० दिसम्बर को उनका तपस्वी जीवन पूर्ण हो गया और वे ब्रह्मलीन हो गईं। उन्हें हम सभी की ओर से बहुत-बहुत प्रणाम जिन्होंने वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जैसे पुत्र को जन्म दे के भारत को नई दिशा दी तथा सारे संसार में भारत का नाम ऊँचा किया।
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“संवाद” की कार्यकारिणी समिति
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प्रबंद्ध संपादक – सुशीला मोहनका, OH, sushilam33@hotmail.com
सहसंपादक – अलका खंडेलवाल, OH, alkakhandelwal62@gmail.com
डिज़ाइनर – डॉ. शैल जैन, OH, shailj53@hotmail.com
तकनीकी सलाहकार – मनीष जैन, OH, maniff@gmail.com
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सुशीला मोहनका
(प्रबंध सम्पादक)
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नए वर्ष, मकर संक्रांति, लोहरी, पोंगल, बिहू, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती, बसंत पंचमी एवं गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें प्रेषित करती हूँ।
आशा करती हूँ कि अभी Covid-19 की ओमिक्रोन (Omicron) के प्रकोप से अपना एवं अपने परिवार का सावधानी पूर्वक पूरा ध्यान रख रहे होंगे। यह बहुत आवश्यक है कि आप सरकार के बनाये स्वास्थ्य नियम का पूरी तरह से पालन करें, मास्क लगायें, छ: फिट की दूरी रखें और वैक्सीन अवश्य लगवायें एवं स्वस्थ्य रहें।
युवा-वर्ग के लिए विशेष सूचना- ‘जागृति’ के नाम से एक श्रृंखला बसंत पंचमी से प्रारम्भ की गयी है ‘जागृति’ के माध्यम से हिन्दी प्रेमियों को हिन्दी भाषा के इतिहास की सही जानकारी प्राप्त होगी। जागृति’ की तेरहवीं कड़ी शनिवार, ११ फ़रवरी, २०२३ को दिन में १०:०० बजे (EST) से अमेरिका में और १४ जनवरी, २०२३ को शाम ८.३० बजे से भारत में प्रारम्भ होगी। सभी से नम्र निवेदन है कि इस कार्यक्रम को देखिये, सुनिये और गुनिये तभी “जागृति” में काम करने वाले स्वयंसेवकों की कठिन मेहनत सफल हो पायेगी।
जनवरी, २०२२ से मासिक ‘संवाद’ में बालकों और युवा वर्ग को भी जगह देने का प्रावधान किया गया है – बच्चों के द्वारा, बच्चों के लिये और बच्चों के शुभचिंतकों की कलम से लिखी रचनाओं को भी इसमें स्थान दिया जा रहा है। सभी पाठकों से निवेदन है कि इस दिशा में लेखन कार्य प्रारम्भ करें, अपनी रचनायें भेजें तथा औरों से भी भिजवायें।
शाखा अध्यक्ष-अध्यक्षाओं: १० जनवरी, २०२३ को सारे विश्व में ‘विश्व हिंदी दिवस’ मनाया गया है, आशा करती हूँ कि अ.हि.स. की कई स्थानीय समितियों ने ‘विश्व हिंदी दिवस’ मनाया होगा।अगर आपकी समिति ने कार्यक्रम किया है और उसकी रिपोर्ट भेज दी है तो बधाई और भेज रहे हैं तो मेरी अग्रिम बधाई स्वीकार करें। किसी विशेष कारणवश नही भेज पाए है तो जल्दी से जल्दी भेजने का कष्ट करें।
आपसे एक विशेष निवेदन है कि आप अपनी-अपनी समितियों में होनेवाले कार्यक्रमों की अग्रिम सूचना भेजें ताकि ‘संवाद’ में उन्हें समय से प्रकाशित किया जा सके। जिन स्थानीय समितियों ने अग्रिम सूचना भेजी है उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद। साथ ही एक और अनुरोध है कि जब कार्यक्रम हो जाये तो उसकी रिपोर्ट वर्ड एवं पीडीऍफ़ दोनों रूपों में भेजे तथा कार्यक्रम की फोटो भी शीर्षक के साथ भेजने का कष्ट करें ताकि ‘संवाद’ में प्रकाशित की जा सके।
‘संवाद’ दिसम्बर २०२२ का अंक पढ़कर जिन्होंने प्रतिक्रया भेजी हैं उनको धन्यवाद। आप सभी से विशेष अनुरोध है कि ‘संवाद’ का जनवरी २०२३ का अंक भी अच्छी तरह पढ़कर अपनी पसन्द, नापसंद लिखकर भेजें। आपकी प्रतिक्रिया आने से सम्पादक-मंडल को अपना कार्य करने में आसानी होगी। अगर और कोई किसी विशेष कार्य के लिए अपनी सेवा अर्पित करना चाहते हैं तो निसंकोच हमें बताने का कष्ट करें।
सहयोग की अपेक्षा के साथ,
सुशीला मोहनका
sushilam33@hotmail.com
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रचनाओं में व्यक्त विचार लेखकों के अपने हैं। उनका अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की रीति - नीति से कोई संबंध नहीं है।
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