FEBRUARY NTERNATIONAL HINDI ASSOCIATION'S NEWSLETTER
फ़रवरी 2025, अंक ४३ । प्रबंध सम्पादक: श्री आलोक मिश्र। सम्पादक: डॉ. शैल जैन
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Human Excellence Depends on Culture. The Soul of Culture is Language
भाषा द्वारा संस्कृति का प्रतिपादन
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति परिवार के सभी सदस्यों एवं संवाद के पाठकों का अभिनंदन।
महा शिवरात्रि, बसंत पंचमी, महाकुंभ और मार्टिन लूथर किंग दिवस की शुभकामनाएँ ।
अ.हि.स. का द्विवार्षिक कॉन्वेंशन - समिति का द्विवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन नार्थ ईस्ट ओहियो के रिचफील्ड शहर में मई २ से ३ को आयोजित है । कृपया ये दिन आप अपने कैलेंडर में चिह्नित कर लें। कन्वेंशन का मूल विषय है “नव पीढ़ी, डिजिटल युग में हिंदी और भारतीय संस्कृति”। विस्तृत समाचार नीचे संलग्न है। पंजीकरण खुला है QR कोड स्कैन आपको पंजीकरण साइट पर ले जाएगा। आप सबों से अनुरोध है कि आप अपना सहयोग दें। कृपया कार्यक्रम में आकर इसे सफल बनायें ।
विश्व हिंदी दिवस 2025 के अवसर पर, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति ने भारतीय दूतावास, वाशिंगटन डीसी के सहयोग से अमेरिका में एक राष्ट्रीय हिंदी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया था। परिणाम विश्व हिंदी दिवस जनवरी १०, २०२५ को घोषित किया गया ।मान्यता समारोह भारतीय दूतावास, वाशिंगटन डीसी के प्रांगण में जनवरी १४ को था । विस्तृत समाचार जनवरी अंक संवाद पत्रिका में प्रकाशित किया गया ।यह प्रतियोगिता हमारी समिति और पूरे हिंदी प्रेमी समुदाय के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है। मैं सभी प्रतिभागियों, उनके अभिभावकों और इस पहल का समर्थन करने वाले सभी लोगों का हार्दिक धन्यवाद करती हूँ, जिन्होंने हमारी युवा पीढ़ी के बीच हिंदी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने में सहयोग दिया ।
हमारी समिति की तरफ़ से अमेरिका के हाई स्कूल में हिन्दी भाषा में seal of biliteracy की उपलब्धि पर काम हो रहें हैं । सबसे पहले नार्थ ईस्ट ओहियो शाखा ने अपने स्थानीय संडे स्कूल के साथ कोलाबेरेशन किया है । एक्रोन संडे स्कूल ने सील ऑफ़ बाईलिट्रेसी के लिये, आधिकारिक तौर पर सितम्बर २०२४ से classes शुरू की है । बाद में विकास देख कर अन्य शाखाओं में सूचना विस्तृत करने का विचार है। यदि आपके बच्चे सक्षम हों और कोई भी हमारे मेम्बर या पाठक अपने बच्चों के लिये उनके स्कूल में seal of biliteracy की उपलब्धि के लिये जानकारी चाहते हैं तो मुझसे या किरण खेतान ( ३३०-६२२-१३७७ ) से संपर्क कर सकते हैं ।
द्विवार्षिक अधिवेशन, हिंदी भाषण प्रतियोगिता, seal of biliteracy पर काम और अपने सभी कार्यक्रमों में युवाओं को जोड़ने का प्रयास हमारी समिति से किया जा रहा है। युवाओं को जोड़ना बहुत ही आवश्यक है। यदि हम चाहतें हैं कि हमारी धरोहर “हिंदी भाषा और संस्कृति” हमारे बच्चों और आने वाली सभी पीढ़ियों में जीवित रहे और पनपती रहे तो हमें अपने परिवार से ही इसकी कोशिशों का प्रारंभ करना होगा। समिति से बालपन से जोड़ने से बच्चों को एक मंच मिलेगा और वो आगे भी जुड़े रहेंगे। पाठकों से विशेष अनुरोध है कि वे अपने जानने वाले और परिवार के युवकों को समिति से जोड़ें और यदि उनके पास सुझाव हो कि कैसे युवाओं को हम जोड़ सकते हैं तो आपके विचारों का स्वागत है।
अमेरिका में हिंदी और भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने और युवा पीढ़ी के बीच इसे प्रचलित करने के हमारे उद्देश्य को जारी रखने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम विविधता को समझें और उसे अपनाएँ। हमें स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले युवा विद्यार्थियों को आकर्षित करने की कोशिश करनी चाहिए। यह प्रयास केवल भारतीय युवाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अन्य समुदायों के लोगों को भी हमारी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों के बारे में जानकारी देकर उन्हें जोड़ने की आवश्यकता है।
हमारा उद्देश्य न केवल अपनी विरासत को संरक्षित करना है बल्कि अन्य संस्कृतियों और परंपराओं का भी सम्मान करना है। हमें स्कूलों और कॉलेजों में आयोजित विश्व स्तरीय आयोजनों में भाग लेना चाहिए और वहाँ अपनी संस्कृति और भाषा की उपस्थिति को दिखाना चाहिए। यह न केवल हमारी संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाएगा, बल्कि अन्य समुदायों के लोगों के साथ एक सार्थक संवाद को भी बढ़ावा देगा।
मुझे विश्वास है कि आप सभी हमारे इस लक्ष्य को साकार करने के लिए सक्रिय रूप से योगदान देंगे। आइए, हम सभी मिलकर हिंदी और भारतीय संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लें और युवाओं को साथ ले आगे बढ़े ।
समिति के कोई विशेष कार्य करने के लिए यदि आप अपनी सेवा अर्पित करना चाहते हैं तो निसंकोच हमें बताने का कष्ट करें। आपके विचारों और सुझाओं का हमेशा स्वागत है।
धन्यवाद,
शैल जैन
डॉ. शैल जैन
राष्ट्रीय अध्यक्षा, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (2024-25)
ईमेल: president@hindi.org | shailj53@hotmail.com
सम्पर्क: +1 330-421-7528
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- आगामी कार्यक्रम
२२ वाँ द्विवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन २०२५
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति का २२ वाँ द्विवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन
दिन -मई २ (शुक्रवार) एवं ३ (शनिवार ), २०२५
स्थान - रिचफील्ड, ओहायो
आतिथ्य – अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की उत्तरपूर्व ओहायो शाखा
अधिवेशन का मूल विषय – 'नई पीढ़ी, डिजिटल युग में हिंदी और संस्कृति'
Theme -'New Generation, Hindi and Culture in the Digital age'
पंजीकरण खुला है QR कोड स्कैन आपको पंजीकरण साइट पर ले जाएगा। Registration is open QR Code scan will take you to Registration Site,
नोट - अधिवेशन में सारी गतिविधियाँ मूल विषय के लक्ष्य की पूरक रहेंगी ।
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नई पीढ़ी के बहुप्रतिष्ठित हास्य कवि तथा व्यंगकार अभिनव शुक्ल हिन्दी काव्य मंचों पर अपने गुदगुदाते घनाक्षरी छंदों के लिए पहचाने जाते हैं। अपने आसपास घटने वाली घटनाओं से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर बड़ी बेबाकी से कसे उनके व्यंग बाण किसी पत्थर का भी दिल आर पार करने की क्षमता रखते हैं। अभिनव की रचनायें देश-विदेश की अनेक पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। अनेक अवसरों पर रेडियो और टेलीविज़न पर उनका काव्य पाठ प्रसारित हो चुका है। हिन्दी कविता के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम कवितांजलि में भी अभिनव के संचालन को श्रोताओं नें पसंद किया है। अभिनव बैंगलोर से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र 'दक्षिण भारत' के नियमित व्यंग स्तंभकार भी रहे हैं। वे ई-विश्वा (अमेरिका), हिन्दी चेतना (कनाडा), कवितांजलि (बैंगलोर) समेत अनेक पत्रिकाओं के संपादक मंडल में रह चुके हैं। हिन्दी ब्लाग जगत में 'निनाद गाथा' नमक चिट्ठे पर फरवरी २००६ से नियमित लेखन करने वाले अभिनव को अखिल भारतीय साहित्य सम्मेलन (२००१) गाज़ियाबाद में 'काव्यश्री' की उपाधि से भी सम्मानित किया जा चुका है। सन २००५ में अभिनव नें प्रख्यात गीतकार सोम ठाकुर और वरिष्ठ कवि उदय प्रताप सिंह के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के १४ नगरों में हुए कवि सम्मेलनों में अपनी चुटीली कविताओं तथा प्रबुद्ध संचालन प्रतिभा से हजारों प्रवासी साहित्य प्रेमियों को चमत्कृत किया था। अभिनव आजकल सैन एन्टोनिओ नगरी में रहते हैं तथा अपनी कविताओं की सुगंध सारे संसार में बसे भारतीयों के हृदय हृदय में बिखेर रहे हैं। पेशे से अभिनव एक सॉफ्टवेर इंजीनियर हैं|
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लखनऊ के अखिल भारतीय कविता पीठ से ‘महादेवी वर्मा’ सम्मान से सम्मानित अर्चना पांडा बे-एरिया अमेरिका की एक सुविख्यात कवयित्री हैं। श्रृंगार रस में माहिर अर्चना अपनी मधुर वाणी और प्रेम गीतों के लिए प्रख्यात हैं। यह देश-विदेश के कई कवि सम्मेलनों मे भाग ले चुकी हैं और मंच पर गोपाल दास नीरज, मुन्नवर राना, कुँवर बैचेन, और कुमार विश्वास जैसे नामी कवियों के साथ अपनी कविताओं का प्रस्तुतिकरण कर चुकी हैं। अर्चना इन्टरनेट के ज़रिये बहुत प्रसिद्ध हैं। आपकी कविताओं के विडियो को यू-ट्यूब पर दस लाख से अधिक लोगों ने देखा और सराहा है। विश्व हिन्दी सम्मलेन २००७ न्यूयार्क में विमोचित ‘सृजनी’ तथा ‘काव्य-अर्चना’ नामक सीडी, और पुस्तकों में ‘तुम्हारी अर्चना’ और ‘सृजनी’ आपके प्रकाशित रचना संकलन हैं। शीघ्र ही इनकी एक और पुस्तक प्रकाशित होने जा रही है। कविता के साथ इनकी गहरी रूचि गायन, वादन, नृत्य, एवं साहित्य में भी है | अर्चना ने कई प्रसिद्ध आयोजनों का संचालन भी किया है | आजकल आप रेडियो ज़िन्दगी 1550 एएम् पर हर रविवार को काव्य कार्यक्रम ‘मैं शायर तो नहीं’ का आयोजन और प्रसारण करती हैं तथा बे-एरिया के कई सामाजिक संस्थानों में हिन्दी पढाती हैं। पेशे से अर्चना एक सॉफ्टवेर इंजीनियर हैं|
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कोलकाता में जन्मे और पले-बढ़े इन्द्र अवस्थी ने हिंदी साहित्य में अपना विशेष स्थान बनाया है। एन आई टी प्रयागराज से कंप्यूटर साइंस में स्नातक, इन्द्र 1995 में अपने परिवार के साथ पोर्टलैंड आ गए। उनके पिता, अरुण प्रकाश अवस्थी, जो कोलकाता के एक प्रसिद्ध कवि और लेखक थे, ने उनके साहित्यिक प्रयासों को बहुत प्रभावित किया। इन्द्र हिंदी संगम, पोर्टलैंड के संस्थापक सदस्य हैं, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में हिंदी भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। उनकी हास्य लेखनी और व्यंग्य को कविता में पिरोने की क्षमता ने उनकी रचनाओं को व्यापक रूप दिया, जिसे खूब सराहना मिली। कविता के अलावा, इन्द्र नाटकों और स्क्रिप्ट लेखन और निर्देशन में भी माहिर हैं, जो अक्सर सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश डालते हैं। हिंदी साहित्य के प्रति इन्द्र की प्रतिबद्धता परामर्श, साहित्यिक कार्यक्रमों के आयोजन और हिंदी प्रेमियों के लिए एक समुदाय बनाने तक विस्तारित है। उनके प्रयासों ने उन्हें विभिन्न साहित्यिक समाजों और सांस्कृतिक संगठनों से मान्यता दिलाई है। इन्द्र अवस्थी की यात्रा साहित्य की शक्ति और सांस्कृतिक संरक्षण के महत्व का प्रमाण है। अपनी कविता, हास्य लेखन और साहित्यिक समुदाय में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से, उन्होंने हिंदी भाषा और संस्कृति के प्रसार पर एक स्थायी प्रभाव डाला है, चाहे भारत में हो या विदेश में। उनकी कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो शब्दों की शक्ति के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखना चाहते हैं।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- शाखाओं के आगामी कार्यक्रम
टेनेसी शाखा
फ़रवरी, २०२५
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ह्यूस्टन शाखा
मार्च, २०२५
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- टेनेसी शाखा रिपोर्ट
एक विशेष कार्यक्रम युवाओं को किस्से-कहानियों द्वारा हिंदी ज्ञान
विश्व हिंदी दिवस: कथा ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन, २०२४
द्वारा : सीमा वर्मा, शाखा अध्यक्षा
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विश्व हिंदी दिवस की सार्थकता को और बढ़ाने के लिए, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की टेनेसी शाखा ने इस वर्ष 6 जनवरी, 2024 को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। समिति की महिला सदस्यों, जो माँ भी हैं, ने अपनी मातृभाषा के महत्व को बच्चों तक पहुँचाने के लिए एक अनूठा प्रयास किया।
समिति की दो सदस्यों, दीप्ति अग्रवाल और पूजा अजमेरा ने बच्चों को हिंदी भाषा से परिचित कराने के लिए किस्से-कहानियों की शक्ति का उपयोग करने का विचार प्रस्तुत किया। उन्होंने "कथा ज्ञान प्रतियोगिता" की अवधारणा को सामने रखा, जिसके माध्यम से बच्चों को पंचतंत्र जैसे ज्ञानवर्धक ग्रंथों की कहानियों को समझने का अवसर मिला।
इस प्रतियोगिता को दो आयु वर्गों में विभाजित किया गया था: 9 से 15 वर्ष और 5 से 8 वर्ष। लगभग 20 बच्चों ने ब्रेंटवुड के एक सार्वजनिक पुस्तकालय में आयोजित इस प्रतियोगिता में भाग लिया। प्रतियोगिता में तीन राउंड थे, जिनमें से पहला राउंड शब्दों के सही अर्थों को समझने पर केंद्रित था।
इस कार्यक्रम के माध्यम से, बच्चों ने न केवल हिंदी भाषा के महत्व को समझा, बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर से भी जुड़े। यह प्रयास मातृभाषा को बढ़ावा देने और अगली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस प्रतियोगिता को दो आयु वर्गों में विभाजित किया गया था: 9 से 15 वर्ष और 5 से 8 वर्ष। लगभग 20 बच्चों ने ब्रेंटवुड के एक सार्वजनिक पुस्तकालय में आयोजित इस प्रतियोगिता में भाग लिया। प्रतियोगिता में तीन राउंड थे:
- पहला राउंड: शब्दों के सही अर्थों को समझना और उनका जवाब देना।
- दूसरा राउंड: कहानी के विभिन्न पात्रों में से किसी एक का वर्णन करना।
- तीसरा राउंड: कहानी को संक्षेप में बताना, अपनी पसंद का एक अलग अंत बताना और किसी एक पात्र का चित्र बनाना।
सभी बच्चों को पाँच कहानियों के ऑडियो लिंक पहले ही भेज दिए गए थे ताकि वे अच्छी तरह से तैयारी कर सकें। कथा ज्ञान प्रतियोगिता के लिए कोई टिकट नहीं रखी गई थी और लगभग 65 लोग इसे देखने के लिए उपस्थित थे। समिति के तीन वरिष्ठ सदस्य, डॉक्टर रीता मिश्रा, श्रीमती सपना त्रिपाठी और श्रीमती (नाम नहीं दिया गया) इस प्रतियोगिता के न्यायाधीश बने।
यह प्रतियोगिता अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के सदस्यों की उम्मीदों से कहीं अधिक रोमांचक साबित हुई क्योंकि यह एक अद्वितीय सोच थी। सभी माताओं की उम्मीदों से बढ़कर, बच्चों ने प्रतियोगिता में उत्साहित होकर पूरी तैयारी के साथ, एक दूसरे को बराबर टक्कर दी थी। यह देखकर बच्चों के माता-पिता भी बहुत आनंदित हुए कि उनके बच्चे हिंदी भाषा में रुचि ले रहे हैं और नए-नए शब्दों का अर्थ सीख रहे हैं। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और दोनों वर्ग के विजेताओं को गोल्ड, सिल्वर और ब्रोंज पदक दिए गए। ऐसी प्रायोगिक शिक्षा जो हमारे बच्चों को अपनी मातृभाषा से मिलवा दे, कम देखने को मिलती है।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति - इंडियाना शाखा सदस्य रिपोर्ट
‘साहित्य संवाद, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत में’
'प्रवासी हिंदी साहित्य: चुनौतियाँ एवं नई राहें'
दिनांक: जनवरी २०, २०२५
द्वारा : डॉ राकेश कुमार, शाखा पूर्व अध्यक्ष
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दिनांक 01/20/2025 को (ZEE NEWS )जी इंडिया न्यूज़ मीडिया हाउस, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत में सायं 5:00 बजे साहित्य संवाद का आयोजन किया गया। इस संवाद का विषय था - 'प्रवासी हिंदी साहित्य: चुनौतियाँ एवं नई राहें'।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जयपुर (भारत) से सुप्रसिद्ध कथाकार, आलोचक तथा फिल्म लेखक डॉ. संदीप अवस्थी जी ने की। मुख्य वक्ता के रूप में नॉटिंघम (इंग्लैंड) से प्रतिष्ठित कवयित्री और कथाकार श्रीमती जय वर्मा जी, विशिष्ट वक्ता के रूप में अंतरष्ट्रीय हिंदी समिति, इंडियाना के उपाध्यक्ष श्री आदित्य शाही, तथा आजमगढ़ से डॉ. प्रवेश कुमार सिंह उपस्थित थे।
कार्यक्रम में विद्वानों ने प्रवासी हिंदी साहित्य के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में गहन विश्लेषण किया और इसकी चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। डॉ. संदीप अवस्थी जी ने संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में रह रहे लेखकों और कवियों के विशेष योगदान का विशष उल्लेख किया| श्रीमती जय वर्मा जी ने इंग्लॅण्ड में आने वाले चुनौतियों और वह पैर कैसे हिंदी का प्रचार प्रसार पैर भी चर्चा की | उन्होंने प्रवासी हिंदी साहित्य के उज्जवल भविष्य की आशा व्यक्त करते हुए इसके महत्व को रेखांकित किया। आदित्य शाही जी ने अमेरिका में अंतरास्ट्रीय हिंदी समिति के द्वारा किये जा रहे प्रयासों से भी सबको अवगत कराया| कार्यकम का समापन जय वर्मा जी के कविता “ये रिश्ते” से हुआ|
साहित्य संवाद का कुशल संचालन युवा कवयित्री एवं कथाकार डॉ. प्रतिभा सिंह द्वारा किया गया। । कार्यक्रम ने साहित्यिक संवाद के क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार किया।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति - नार्थ ईस्ट ओहायो शाखा रिपोर्ट
'विश्व हिंदी दिवस', नार्थ ईस्ट ओहायो शाखा द्वारा
दिनांक: जनवरी १२, २०२५
द्वारा : अनुराग गुप्ता, अ.हि.स. के जीवन सदस्य और सक्रिय सदस्य
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विश्व हिंदी दिवस, नार्थ ईस्ट ओहायो शाखा द्वारा शिव विष्णु मंदिर में जनवरी १२, २०२५ को आयोजित किया गया ।
छन्द, कविता, दोहे, गीत, भजन, नृत्य, शेर, शायरी और अनेक भावों के
अंतस से ऐसे सजा हिन्दी दिवस,
जैसे पूर्णिमा का मिलन अमावस ।
काशी में गंगा सजी, प्रयाग में महाकुंभ सजे,
अप्रवासी हिन्द के हम, हिंदी रग रग में बहे ।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और श्रीमती योजना शर्मा की मधुर सरस्वती वंदना से हुआ। दीप प्रज्वलन में शामिल थे श्री अश्विनी भारद्वाज, नॉर्थ ईस्ट ओहियो के शाखा अध्यक्ष; श्रीमती विम्मी जैन, स्थानीय शाखा की सक्रिय सदस्या; श्रीमती प्रेम करवा, स्थानीय समुदाय की सक्रिय सदस्या; डॉ. प्रहलाद अग्रवाल, स्थानीय शाखा के सक्रिय सदस्य; डॉ. शैल जैन, राष्ट्रीय अध्यक्षा अ.हि.स.; डॉ. शोभा खंडेलवाल, अ.हि.स. की सक्रिय सहयोजक, स्थापना के समय से; श्रीमनहर सिंह, मंदिर के प्रतिनिधि।
इसके बाद नन्ही सी तुलसी और राजविका ने माँ के गीत ‘तू कितनी अच्छी है, तू कितनी प्यारी है, मेरी माँ’ से समस्त लोगों की उपस्थिति को भावुक कर दिया। रूबी जी ने ‘तुमको देखा तो ये ख्याल आया, जिंदगी धूप, तुम घना साया’ अपनी मखमली आवाज़ में गाकर माहौल ग़ज़ल-रोमानी कर दिया। स्मिता जी ने हिंदी गीत पर मनमोहक कत्थक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को स्पंदित कर दिया।
इसके पश्चात महक ने अपने नाना अशोक जी की कविता ‘दिल में है भारत’ सुनाकर भारत की यादों को सभी के दिलों में जीवित कर दिया । फलक ने अपनी स्वरचित कविता ‘हम हैं भारत के लोग’ से सुनिश्चित किया कि नई पीढ़ी इस हिंदी के फलक को और विस्तार देगी। विभा जी की कर्णप्रिय आवाज़ में भजन ‘ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियाँ’ सुनकर लगा कि मंदिर का सभागार प्रभु राम के बचपन का पालना बन गया हो, और हम उनकी अटखेलियाँ देख रहे हों।
बाल कलाकार निखिल, अव्यान, शिवांग और आयांश ने ‘आ चल के तुझे मैं ले के चलूँ’ गाकर हम सबको ‘वसुधैव कुटुंबकम्’, प्रेम और सामाजिक सद्भावना का संदेश दिया! अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति की अध्यक्ष महोदया डॉ. शैल जी ने समिति के गत वर्ष के योगदान के बारे में बताया और लोगों से हिंदी के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने को कहा। अनुराग और विम्मी जी ने हिंदी प्रश्नोत्तरी के अंतर्गत श्रोतागणों से प्रश्न पूछे और विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। हिंदी की शिक्षिका और कवयित्री ममता जी की स्वरचित कविता ‘बस यहीं समझते हैं’ ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया और भारत में गृहस्थी और मित्र के दैनिक दिनचर्या के स्वरूप को जीवंत किया!
हिंदी समिति, उत्तर-पूर्वी क्लीवलैंड शाखा के अध्यक्ष अश्विनी जी ने हिंदी की महत्ता पर प्रकाश डाला और सबको संबोधित किया! युवा गायक प्रत्युष जी के गाए गीत ‘हम तो हैं परदेस में’ ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और उनकी करतल ध्वनियों से भरपूर प्रेम लुटाया। इसके बाद क्लीवलैंड के आकर्षक शायर ‘नदीम’ जी ने अपनी लघु शायरी, शेर और अदाओं से लोगों को अंत तक अपलक बाँधे रखा! अखिलेश जी, माइकल जी और पंकज जी के ‘बॉलीवुड धमाका’ ने गर्मजोशी से भरे माहौल में वाद्य यंत्रों के साथ धमाका किया और ‘भारत का रहने वाला हूँ’ से बताया भी भारत ने इस विश्व को क्या कुछ नहीं दिया!
हिंदी समिति के उपाध्यक्ष राकेश जी और सुधा जी की जुगलबंदी और अजय जी की गर्मजोशी ने स्वागत पटल पर लोगों का स्वागत किया और नए सदस्यों का पंजीकरण करने में और प्रश्नों के निराकरण में सहयोग दिया।
हिंदी समिति के सचिव सोमनाथ जी ने अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ धन्यवाद ज्ञापन दिया। हिंदी दिवस हो और सुरुचिपूर्ण भोज की बात न हो, यह असंभव है। हिंदी समिति की परंपरा के अनुसार स्वादिष्ट रात्रि भोजन का प्रबंध भी था और खाद्य समिति के प्रमुख किरण जी, रेणु जी, नीलू जी, चंदर जी, निशा जी, मनीषा जी, अंकित जी, और प्रेमा जी के सहयोग से संपन्न हुआ। अन्नपूर्णा भोजनालय का सहयोग प्रशंसनीय है।
शोभा जी ने कार्यक्रम के अंतराल में ज्ञानवर्धक बातें कीं और द्विवार्षिक अधिवेशन का आगामी कार्यक्रम साझा किया, जिन्हें फिर राकेश जी और गार्गी जी ने और आगे बढ़ाया। चाय की चुस्कियाँ और छोटे बच्चों की सिसकियाँ ध्यान आकर्षण का केंद्र रहीं! छोटे बच्चों की भारत के राष्ट्रगान और अमेरिका के राष्ट्रगीत की प्रस्तुति के साथ हिंदी की संध्या ने विदा ली और गपशप की प्राचीन भारतीय परंपरा को गति दी। प्रकाश जी, विम्मी जी, रवि जी और रीता जी को हिंदी दिवस के मंच को अलंकृत करने के लिए विशेष धन्यवाद।
हिन्दी दिवस की शाम मनोरंजन से भरपूर और आनंद से पूर्ण रही। सैंकड़ों हिंदी प्रेमियों को एक साथ अमेरिका में देखना अत्यंत सुखद अनुभूति होती है, ये एक मधुर स्मृतियों का सुखद हिन्दी दिवस रहा जो विम्मी जी और अनुराग के संचालन और औपचारिक समापन के बाद भी अनौपचारिक रूप से संचालित होता रहा। आनंदमय हिन्दी दिवस के आयोजन के लिए क्लीवलैंड की त्रिवेणी किरण जी, शोभा जी और डॉ शैल जी को बधाई और सस्नेह साभार ।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति - ह्यूस्टन शाखा रिपोर्ट
‘विश्व हिंदी दिवस ह्यूस्टन कांसुलेट के प्रांगण में’
दिनांक: जनवरी १०, २०२५
द्वारा : स्वप्न धैर्यवान, ह्यूस्टन शाखा पूर्व अध्यक्ष और अ.हि.स. के वर्तमान न्यासी समिति के सदस्य
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विश्व हिंदी दिवस पर ह्यूस्टन कांसुलेट और अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति ने मिलकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया । 10 जनवरी, शुक्रवार को ह्यूस्टन कांसुलेट कार्यालय में विश्व हिंदी दिवस 2025 का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शोभा कार्यवाहक कौंसुल जनरल प्रशांत सोना और उप कौंसुल अंजू मलिक ने बढ़ाई। कार्यक्रम के सूत्रधार अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति से स्वप्न धैर्यवान थे।
इस अनोखे आयोजन में भारत के संविधान की 75वीं वर्षगांठ को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। प्रस्तुति में संविधान की प्रस्तावना को हिंदी सहित 9 अन्य भारतीय भाषाओं - तमिल, मराठी, पंजाबी, बंगाली, तेलुगु, कोंकणी, उर्दू, गुजराती, और संस्कृत - में पढ़ा गया। इसे सभी उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
मौसम ख़राब होने के बावजूद, 70 से अधिक हिंदी प्रेमियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। इसके बाद, अटल बिहारी वाजपेयी जी की 100वीं जयंती को समर्पित कार्यक्रम में उनकी दो कविताओं का भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण संजय सोहनी और स्वप्न धैर्यवान द्वारा किया गया।
यह आयोजन ह्यूस्टन कांसुलेट और अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (ह्यूस्टन चैप्टर) के संयुक्त प्रयास से संपन्न हुआ। हिंदी भाषा की समृद्धि, समावेशिता और जीवंतता का जश्न मनाने के लिए यह एक यादगार शाम रही।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति - इंडियाना शाखा रिपोर्ट
विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर एक विशेष चर्चा वेबिनार
जनवरी १०, २०२५
द्वारा : विद्या सिंह, शाखा अध्यक्षा
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विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय हिन्दी समिति-इंडियाना ने एक विशेष चर्चा वेबिनार आयोजित किया, जिसमें प्रोफेसर मिथिलेश मिश्र ने "वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिन्दी की अर्थव्यवस्था" जैसे अत्यंत रोचक और समसामयिक विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम का आयोजन पूर्व अं. हिं. स. -इंडियाना अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार के नेतृत्व में हुआ। वे इस कार्यक्रम के संयोजक और आतिथेय भी थे। उन्होंने मुख्य अतिथि, भारतीय कॉन्सुल जनरल, शिकागो के श्री सोमनाथ घोष का स्वागत किया और उन्हें उद्घाटन भाषण के लिए आमंत्रित किया।
श्री सोमनाथ घोष ने सभी को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं, डॉ. राकेश कुमार और अं. हिं. स. -इंडियाना टीम को हिन्दी और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए धन्यवाद दिया और प्रोफेसर मिथिलेश मिश्र का स्वागत किया। उन्होंने हमारी राजभाषा के महत्व और इसे हमारी संस्कृति और पहचान का अभिन्न अंग बताया। भारतीय मूल के लोगों के लिए, जो अमेरिका या अन्य देशों में रहते हैं, उन्होंने मातृभाषा और स्थानीय भाषा दोनों में दक्षता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यूरोपीय संघ का उदाहरण दिया, जहां MEPs (यूरोपीय संसद के सदस्य) आधिकारिक भाषा के रूप में अंग्रेजी का उपयोग करते हैं लेकिन अपनी भाषाओं को भी बढ़ावा देते हैं।
डॉ. राकेश कुमार ने इसके बाद प्रोफेसर मिथिलेश मिश्र का परिचय दिया और उनका स्वागत किया, जो दरभंगा, बिहार, भारत से वेबिनार में शामिल हुए थे। प्रो. मिश्र ने बताया कि उनका प्रस्तुतीकरण हिन्दी में होगा, लेकिन स्लाइड्स अंग्रेजी में रहेंगी। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी का प्रभाव उन पर उनके नाना के माध्यम से पड़ा, जबकि उनके पिता ने उन्हें हिन्दी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने बचपन का एक उदाहरण दिया, जब उन्हें नेतरहाट स्कूल में 17 विषय हिंदी में पढ़ाए गए।
प्रो. मिश्र ने उल्लेख किया कि अर्थशास्त्र जीवन के हर पहलू और हर स्तर, व्यक्तिगत, व्यापार, सरकार और पूरे राष्ट्रों, में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी बहुभाषिकता की सदी है। जब दुनिया आपस में जुड़ रही है और लोग अपने जन्मस्थान से शिक्षा या पेशे के लिए अन्य देशों में जा रहे हैं, तब मातृभाषा और स्थानीय भाषा में दक्षता सफलता और पेशेवर संतुष्टि के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत, जो अब विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, उसकी राजभाषा हिन्दी को भी नई पहचान मिल रही है। हालांकि, इसे शीर्ष 5 भाषाओं में स्थान दिलाने के लिए और प्रयास करने होंगे। अंग्रेजी पहले स्थान पर है, उसके बाद मंदारिन, फ्रेंच, जर्मन और स्पेनिश का स्थान है। उन्होंने पेरिस हवाई अड्डे का उदाहरण दिया, जहां संकेत बोर्ड फ्रेंच, अंग्रेजी और मंदारिन में होते हैं, जो फ्रांस, यूरोप और दुनिया की अर्थव्यवस्था में अंग्रेजी और मंदारिन के महत्व को दर्शाता है।
प्रो. मिश्र ने हाल के शोध आंकड़े साझा किए, जिनसे पता चला कि 75% उपभोक्ता अपने स्थानीय भाषा में विज्ञापन और उत्पाद जानकारी देखना पसंद करते हैं। यह दर्शाता है कि भारत और विशेष रूप से हिन्दी पट्टी राज्यों में हिंदी में उत्पादों का प्रचार एक लाभदायक प्रयास होगा, साथ ही उन देशों में भी जहां भारतीय प्रवासियों की बड़ी संख्या है। भारत में ही हिन्दी पट्टी राज्यों का योगदान जीडीपी का लगभग 47% है। इन राज्यों में हिन्दी का उपयोग सभी स्तरों और क्षेत्रों, जैसे बैंकों और डाकघरों में व्यापक रूप से होता है। प्रो. मिश्रा ने एयरटेल तकनीशियन का एक उदाहरण दिया, जिसने अपनी सेवाओं को अंजाम देने में हिन्दी शब्दावली का उपयोग किया।
ऐतिहासिक रूप से, ब्रिटिश शासन के दौरान भारत कच्चे माल का आपूर्तिकर्ता और ब्रिटेन में निर्मित वस्तुओं का बाजार था। लेकिन डिजिटल प्रौद्योगिकी के कारण, भारत ने पिछले 20 वर्षों में कई प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने हिन्दी को वैश्विक आर्थिक भाषा के रूप में विकसित करने की सलाह देते हुए कहा कि अंग्रेजी का पूरी तरह त्याग न करें और न ही इसका अत्यधिक उपयोग करें। यह धारणा भी त्यागने की आवश्यकता है कि अंग्रेजी के बिना कोई समृद्धि संभव नहीं है।
भारत ग्लोबलाइजेशन इंडेक्स में शीर्ष 50 देशों से बाहर है, जो इसे सुधार और शीर्ष 50 में स्थान पाने का अवसर प्रदान करता है। पावर लैंग्वेज इंडेक्स में हिन्दी 10वें स्थान पर है, जबकि अंग्रेजी शीर्ष पर है। अनुमान है कि 2050 तक हिन्दी 9वें स्थान पर आ जाएगी। हालांकि, यदि वर्तमान प्रयास जारी रहते हैं, तो यह शीर्ष 5 भाषाओं में शामिल हो सकती है।
भारतीय प्रवासियों के लिए हिन्दी में दक्षता के फायदे दिन-ब-दिन बढ़ रहे हैं, खासकर जब पश्चिमी कंपनियां भारत में विस्तार कर रही हैं और भारतीय कंपनियां अमेरिका और यूरोप में। प्रो. मिश्र के अनुसार, दुनिया तीन स्तंभों, कानून, व्यापार और राजनीति, पर चलती है, और उच्च स्तर की सफलता के लिए स्थानीय भाषा में दक्षता अनिवार्य है।
कुल मिलाकर, यह एक अत्यंत सफल आयोजन रहा, जिसे दर्शकों से कार्यक्रम के दौरान और बाद में शानदार प्रतिक्रिया मिली। यह वेबिनार अब तक यूट्यूब पर लगभग 200 और फेसबुक पर 500 से अधिक बार देखा जा चुका है। अं. हिं. स. -इंडियाना की ओर से डॉ. राकेश कुमार ने भारतीय कॉन्सुल जनरल, शिकागो, प्रो. मिश्रा और सभी दर्शकों का धन्यवाद किया।
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अपनी कहानियाँ
"पिता के नाम एक पुत्र का पत्र"
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द्वारा - श्री सुशांत सुप्रिय
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श्री सुशांत सुप्रिय हिंदी के प्रतिष्ठित कथाकार, कवि तथा साहित्यिक अनुवादक हैं । इनके नौ कथा-संग्रह, पाँच काव्य-संग्रह तथा विश्व की अनूदित कहानियों के नौ संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं । इनकी कहानियाँ और कविताएँ पुरस्कृत हैं और कई राज्यों के स्कूल-कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में बच्चों को पढ़ाई जाती हैं । कई भाषाओं में अनूदित इनकी रचनाओं पर कई विश्वविद्यालयों में शोधार्थी शोध-कार्य कर रहे हैं । हिंदी के अलावा अंग्रेज़ी व पंजाबी में भी लेखन व रचनाओं का प्रकाशन । साहित्य व संगीत के प्रति जुनून हैं ।
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पूज्य पिताजी, सादर प्रणाम।
आपका चालीसवाँ जन्मदिन मुबारक हो! आपका बधाई-पत्र पाकर मन आनंदित हो गया। आपके अक्षर आज भी वैसे ही सुंदर और स्पष्ट हैं, जैसे पहले हुआ करते थे। इतने वर्षों में आपकी लिखावट में रत्ती भर भी बदलाव नहीं आया है।
आपके द्वारा लिखे गए हर पत्र को मैंने आज तक संभाल कर रखा है - अपने ख़ज़ाने में। ये चिट्ठियाँ मेरे लिए अनमोल धरोहर हैं, मेरी विरासत हैं। जीवन की आपाधापी और मुश्किलों के बीच जब मैं कभी अकेला या कमज़ोर महसूस करता हूँ, तो आपकी इन्हीं चिट्ठियों को पढ़कर मुझे ढाढ़स मिलता है, एक नई ऊर्जा का संचार होता है।
पिताजी, जीवन के इस मोड़ पर आकर पीछे मुड़कर देखना कितना सुखद अनुभव है। आज मैं आपसे कुछ बातें करना चाहता हूँ, कुछ ऐसी बातें जो शायद पहले कभी नहीं कह पाया। कुछ ऐसे भाव हैं जिन्हें आज मैं आपके साथ बाँटना चाहता हूँ। पिताजी, मुझे हमेशा इस बात का गर्व रहा है कि आप जैसे पिता मुझे मिले।
मेरे बचपन के दिनों में आपने मुझे मजबूत जड़े दीं, और जब मैं बड़ा हुआ तो आपने मुझे पंख दिए। आपने मुझे अपने सपनों को अपनी आँखों से देखने के लिए प्रेरित किया, न कि दूसरों की आँखों से। जब मैं अपनी पहचान की तलाश में निकला, तो आपने मुझे उम्मीद का दामन थमाया। जब मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ा, तो आपने मेरा उत्साह बढ़ाया। आपने मुझे अपने दिल की आवाज़ सुनना सिखाया। हर सुबह आपने मुझे मुस्कुराने की एक वजह दी, और मेरी हर शाम को खुशियों से भर दिया। आपने मुझे सिखाया कि मुश्किलों के बावजूद यह दुनिया रहने के लिए एक खूबसूरत जगह है।
बचपन में आपने मुझे छोटी-छोटी खुशियाँ दीं। मुझे याद है वो दिन जब मैं हलवाई की दुकान पर गरम-गरम जलेबियाँ और समोसे खा रहा था। रविवार को रामबाग़ में गुब्बारे उड़ा रहा था, झूलों पर झूल रहा था, तितलियाँ पकड़ रहा था, इंद्रधनुष देखकर किलकारियाँ मार रहा था। चिड़ियाघर में जानवरों को देखकर चहक रहा था, पतंगें उड़ा रहा था, कंचे खेल रहा था, जुगनुओं के पीछे भाग रहा था, कबूतरों को दाना डाल रहा था, हर फूल और कली को प्यार से सहला रहा था। कुत्ते-बिल्लियों के बच्चों को पुचकार रहा था, और उन सब पलों में आप मेरे साथ थे - एक दोस्त, एक साथी, एक राज़दार बनकर। रोज़ सुबह कैंपस में सैर करना, छुट्टी के दिन बागवानी करना, आपके साथ मिलकर आलू, गोभी, गाजर, मूली, टमाटर और हरी मिर्च उगाते हुए मैं भी साथ-साथ बड़ा हो रहा था।
पिताजी, आपका पोता अब बड़ा हो गया है। कल वह आपसे आपके 'ई-मेल अकाउंट' के बारे में पूछ रहा था। वह अपने दादाजी से इंटरनेट पर 'चैट' करना चाहता है। जब मैंने उसे बताया कि दादाजी के पास कंप्यूटर नहीं है, तो वह उदास हो गया।
पिताजी, मैं चाहता हूँ कि मैं अपने बेटे को भी वो छोटी-छोटी खुशियाँ दूँ जो मैंने आपसे पाई हैं। वह दस साल का हो गया है, पर उसने आज तक पतंग नहीं उड़ाई। गिल्ली-डंडा नहीं खेला, कंचे नहीं खेले। वह आम या जामुन के पेड़ पर नहीं चढ़ा। मैं चाहता हूँ कि वह इन सब चीजों का भी मज़ा ले, उसका बचपन अधूरा न रहे। पर वह नई 'जेनरेशन' का लड़का है, जिसे कारें भी 'सेक्सी' लगती हैं। वह कंप्यूटर और मोबाइल फ़ोन पर 'वीडियो गेम्स' खेलता है। वह केबल टी.वी. के असंख्य चैनल देखकर बड़ी हो रही पीढ़ी का लड़का है। 'पोगो' और 'कार्टून चैनल' उसके 'फ़ेवरिट' चैनल हैं। उसे 'मैकडोनल्ड' और 'पिज़्ज़ा हट' के बर्गर, फिंगर चिप्स और चीज़-टोमैटो पिज़्ज़ा अच्छे लगते हैं। उसे हिंदी में एक से सौ तक की गिनती 'डिफिकल्ट' लगती है, और वह उनासी और नवासी में 'कन्फ्यूज' हो जाता है। वह 'इम्पोर्टेड' चीजों और 'फौरन ब्रांड्स' का दीवाना है।
पिताजी, याद है एक बार छुट्टियों में आप मुझे गाँव में दादाजी के पास छोड़ गए थे क्योंकि मुझे दादाजी बहुत अच्छे लगते थे। मैं उनके साथ गाँव के पास बहती नदी में मछलियाँ पकड़ने जाता था। अक्सर उन्हें जलतरंग बजाते हुए सुनता था। जलतरंग बजाता उनका वह मुस्कुराता चेहरा मुझे आज भी याद है।
पापा, जलतरंग को इंग्लिश में क्या कहते हैं?
पत्र पढ़कर बगल में बैठा बेटा मुझसे पूछ रहा है।
वह टी.वी. पर चल रहा भारत-पाक वन-डे क्रिकेट मैच देख रहा है। सचिन तेंदुलकर ने शोएब अख्तर के बाउंसर पर थर्ड-मैन बाउंड्री के ऊपर से छक्का दे मारा है। बेटा खुशी से झूमते हुए मुझसे पूछ रहा है - पापा, आप क्रिकेट खेलते थे? नहीं बेटा, मैं पतंगें उड़ाता था। कंचे खेलता था। गिल्ली-डंडा खेलता था। गाँव के पास बहती नदी में चपटे पत्थर से 'छिछली' खेलता था - मैं कहता हूँ। पापा, गाँव कैसा होता है? गिल्ली-डंडा को इंग्लिश में क्या कहते हैं? 'छिछली' इंग्लिश में क्या होती है - बेटा पूछ रहा है।
पिताजी, मुझे बेटे के बहुत सारे सवालों के जवाब देने हैं, इंग्लिश में।
सहवाग ने सकलैन मुश्ताक की गेंद पर छक्का जड़ दिया है। बेटा खुशी से उछलता हुआ पूछ रहा है - पापा, आप क्रिकेट क्यों नहीं खेलते थे?
यादों की गली में एक लड़का कटी हुई पतंगें लूट रहा है। उसके एक हाथ में एक लंबी-सी टहनी है, और दूसरे हाथ में कुछ लूटी हुई पतंगें। उसके हाथ-पैर धूल से सने हैं पिताजी, पर उसके चेहरे पर विजेता की मुस्कान है। उसकी पीठ जानी-पहचानी-सी लग रही है। एक और कटी हुई पतंग लूटता हुआ वह आँखों से ओझल हो गया है।
एक बार गाँव के पास बहती नदी में मछलियाँ पकड़ते हुए मैंने दादाजी से पूछा था - दादाजी, आपने कभी भूत देखा है?
दादाजी मेरे सवाल पर मुस्कुरा दिए थे।
दादाजी, आप भूतों से डरते हैं? मैंने फिर पूछा था।
भूतों से नहीं, बुरे लोगों से डरना चाहिए। दादाजी ने कहा था।
पर मेरा दोस्त कहता है, भूत खतरनाक होते हैं। मैंने शंका प्रकट की थी।
बुरे लोग भूतों से ज़्यादा खतरनाक होते हैं। दादाजी ने मेरे कंधे पर हाथ रखकर कहा था।
दादाजी, बुरे लोग क्या करते हैं? मैंने जिज्ञासा प्रकट की थी।
बुरे लोग पेड़ काट देते हैं। जंगल उजाड़ देते हैं। नदी-नाले गंदे कर देते हैं। इंसानों और पशु-पक्षियों को मार डालते हैं। कहते-कहते दादाजी का चेहरा गंभीर हो गया था।
दादाजी, मैं बड़ा होकर सभी बुरे लोगों को मार डालूँगा। मैंने गुस्से से भर कर कहा था। मुझसे दादाजी का गंभीर चेहरा देखा नहीं गया था। दादाजी तो मुस्कुराते हुए ही अच्छे लगते थे।
बुरे लोगों को नहीं, बुराई को मारना, बेटा। मेरी बात सुनकर दादाजी मेरी पीठ थपथपा कर मुस्कुरा दिए थे।
बेटा, दूध पी लो। हार्लिक्स मिला दिया है। आपकी बहू रसोई में से आवाज़ लगा रही है।
मौन, ब्रेक के बाद। क्रिकेट मैच देखने में व्यस्त बेटा जवाब दे रहा है। नाउ वी टेक अ शॉर्ट ब्रेक। स्टार स्पोर्ट पर एक मशहूर कमेंट्रेटर बोल रहा है। अब कोका कोला पीती कुछ अधनंगी लड़कियाँ बेशर्मी से कूल्हे मटका रही हैं। क्या ज़माना आ गया है।
पिताजी, इच्छा तो थी कि एक बार बेटे को भी उसके परदादा के गाँव लेकर जाता। कहता - देख, यहाँ तेरे पापा के दादाजी रहते थे। उसे गाँव के खेत-खलिहान दिखाता। भूसे के ढेर दिखाता। गाँव के पास बहती नदी में वह भी मछलियाँ पकड़ता। वह भी गाँव के आम, अमरूद, जामुन और इमली के पेड़ों पर चढ़कर उनके फल खाता। बेटे को गाँव की बोली सिखाता। उसे गाँव के बड़े-बूढ़ों से मिलवाता। उसे गाँव के मंदिर में ले जाता। वह भी गाँव के कुएँ पर नहाता। पर अब न गाँव रहा, न दादाजी।
पिताजी, अच्छा हुआ दादाजी पहले चले गए। उन्होंने गाँव के पास बहती नदी पर बाँध बनने के बाद गाँव को जलमग्न होते नहीं देखा। उन्होंने नदी के उस पार उगे घने जंगल को कटते हुए नहीं देखा। उन्होंने अच्छे लोगों के वेश में बुरे लोगों को नहीं देखा। अच्छा हुआ दादाजी पहले चले गए। वे यह सब नहीं देख पाते। पिताजी, इस बार छुट्टियों में मैं आपके पोते को आपसे मिलाने लाऊँगा। मैं चाहता हूँ कि वह भी अपने दादाजी के पास रहे।
उसे बताइएगा कि ऐसा करना बेवक़ूफ़ होने की निशानी नहीं है, बल्कि अपनी निगाहों में गिरने से बचना है। उसे अंतरात्मा की आवाज़ सुनना सिखाइएगा। उसे बताइएगा कि किसी चीज़ का सिर्फ विदेशी या 'इम्पोर्टेड' होना ही उसके अच्छा होने की निशानी नहीं है। वह आपकी बातें ज़रूर समझ जाएगा।
आपकी बहू खाना खाने के लिए आवाज़ दे रही है। बैंगन का भरता और अरहर की दाल बनी है। आप होते तो कहते - वाह, क्या खाना है! आपको ये दोनों चीज़ें कितनी अच्छी लगती हैं। आप साथ होते हैं तो लगता है जैसे सिर पर किसी बड़े-बुजुर्ग का साया है।
आपको याद करता,
आपका बेटा प्रशांत।
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अपनी कहानियाँ
"जवानी के दिन..."
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द्वारा - सुश्री जयश्री बिर्मी
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जयश्री बिर्मी, अहमदाबाद, भारत से हैं। ये एक निवृत्त शिक्षिका हैं और ७२ साल की उम्र होने के बावजूद अपनी हिंदी कहानियाँ लिखने में रूचि को सक्रिय रख रहीं हैं।
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आज संतोष बड़ी खुश थी, बेटे की शादी कर, चाँद सी दुल्हन घर में आई थी। जब वह उमेद से शादी कर के इसी घर में आई थी, तब सास, चाची सास, दादी सास, मामी सास के साथ और भी कई रिश्तेदार घर में मौजूद थे। उसके ससुर ने पूरे गाँव को न्योता दिया था, मुँह दिखाई के दिन। खाने में कोई ऐसी चीज़ की कमी न थी, जो उन दिनों मशहूर हुआ करती थी, वह सभी बानगी मौजूद थी। सास-ससुर दोनों उमेद की घर गृहस्थी सही चले, यही प्रार्थना करते थे। बहू को भी गहनों-कपड़ों से लाद दिया था। सब मेहमान चले गए तो वह सास-ससुर और पति उमेद संग रहने लगी। उमेद तो जैसे दीवाना बना हुआ था संतोष का, मौका मिलते ही उसे बाहों में भर प्यार जताता रहता था। सास-ससुर भी जानते हुए भी अनदेखा कर लिया करते थे, जब कभी मर्यादा का उल्लंघन हुआ करता था।
कुछ ही महीने हुए तो वह गर्भवती हो गई थी, तो घर में तो जैसे उत्सव मनाया जा रहा था। ससुर जी उसकी मनपसंद मिठाइयों के रोज़-रोज़ डिब्बे लाया करते थे, सास भी बड़े लाड़ से खिलाया करती थी, और उमेद की खुशी का तो कोई ठिकाना नहीं था। प्यार से गले लगाते हुए भी उसको कोई तकलीफ न हो, ऐसी एहतियात रखता था। जब उसके बेटे मरूत का जन्म हुआ तो खुशी से नाच उठा था। संतोष को याद नहीं था कि उसकी उमेद के साथ कभी बोलाचाली तो ठीक, मतभेद भी न हुआ था। मरूत जब दो साल का था, एक दिन खेत से मजदूर दौड़ता हुआ आया और उमेद को साँप ने काट लिया था बताते हुए गाँव के सपेरों की बस्ती की ओर दौड़ गया था। वह नन्हे मरूत को गोद में उठाए खेत की ओर दौड़ी थी, उसके पीछे सास-ससुर दौड़े चले आ रहे थे।
किन्तु सपेरे ने उसे मृत घोषित कर दिया था। पूरा शरीर नीला पड़ गया था, फिर भी बैलगाड़ी में डालकर पास के अस्पताल में ले गए, किन्तु उनका भी वही जवाब था। महीनों घर पर मातम छाया रहा, किसी को भी खाने-पीने का होश न था, बस जिंदगी गुजर रही थी। सारे मेहमान चले गए थे, किन्तु संतोष की माँ जो पीछे रुक गई थी, उसने सबको समझाया कि अब मारूत की खातिर सबको जीना होगा, अगर ऐसे ही सब कुछ रहा तो बच्चे पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। सबने ये बात सुनी और सबको यह बात सही लगी, तो मारूत के लालन-पालन में तीनों व्यस्त हो गए। उन्हें मारूत में उमेद ही नज़र आने लगा था।
देखते-देखते मारूत जवान हो गया। उसी दौरान उसके ससुर का निधन हुआ और कुछ महीनों बाद सास भी चल बसीं। बेटे के साथ वह अकेली ही रह गई । बेटा भी तो उमेद की प्रतिकृति था, वही लंबा कद, चौड़ा सीना, गोरा रंग, पूरा बाप पर गया था। चाँद सी दुल्हन, विशनी को पाकर वह भी बड़ी खुश थी। मारूत उमेद के जैसे ही विशनी के आगे-पीछे घूमता था, एक मौका नहीं चूकता था उसे गले से लगाकर अपने में समा लेने का। पुराना घर था, दोनों को उसने अपना कमरा दिया था। वह नीचे अपने सास-ससुर के कमरे में रहने लगी थी। ऊपर से दोनों की मस्ती की आवाजें उसे अपने अतीत में खींच ले जाती थीं, अधूरी हसरतें उसके सामने मुँह उठाए खड़ी हो जाती थीं। क्या करे, बहू-बेटे को मना थोड़ी कर सकती थी, वे दोनों तो प्रेम-समंदर में गोते लगाते जवानी व्यतीत कर रहे थे।
अब पैंतालीस वर्षीय संतोष की आरज़ू फिर से जागने लगी थी। इतने लंबे वैधव्य में कभी उसे ऐसे ख़याल नहीं आए थे, दिल जवानी के दिनों में वापस लौटना चाहता था।
दो रातों से वह सोई न थी। सुबह उसने अपनी ननद को बुला भेजा और शाम तक तो वह आ ही गई। दोनों में बड़ा प्यार था; थी तो उसकी चचेरी ननद, किन्तु सगी से भी कुछ ज्यादा लगती थी। दूसरे दिन जब बहू ऊपर गई तो संतोष ने अपने मन की बात कह डाली, तो वह भी चिंतित हो बैठी। तब संतोष ने कहा, “दीदी, मैं दोनों को अलग मकान ले के दे रही हूँ। मारूत मानेगा नहीं, किन्तु ये काम आपने ही करना है।” जब अलग रहने की बात हुई तो मारूत के साथ-साथ विशनी ने भी उग्र विरोध किया, किन्तु फूफी और माँ के सामने दोनों की एक न चली। विशनी खूब रोई, बोली कि उसने संतोष को अपनी माँ से भी अधिक प्यार किया और सम्मान भी दिया, फिर क्यों अलग? अगर संतोष चाहती होगी कि वह ज्यादा काम करे, तो वह सब कुछ संभाल लेगी, किन्तु यहाँ तो प्रश्न ही कुछ और था।
गाँव में भी बातें होने लगीं कि सब दिखावा ही था, बहू-सास की प्यार की बातों का। कुछ तो होगा दोनों के बीच, सास-बहू में अनबन होगी... और एक घर से दो घर बन ही गए।
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बाल विभाग (किड्स कार्नर )
कवितायेँ / गजल
बालविहार विद्यालय (VHPA), जर्मनटाउन, मैरीलैंड
विद्यार्थियों की कवितायेँ (भाग-1)
द्वारा- मनीष थोरी, शिक्षक एवं प्रबंधक, बालविहार हिंदी और संस्कृति कक्षा
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द्वारा - मनीष थोरी, शिक्षक एवं प्रबंधक
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श्री मनीष थोरी, बालविहार हिंदी और संस्कृति कक्षा के शिक्षक एवं प्रबंधक हैं। एक दशक से भी ज़्यादा समय से जर्मनटाउन, मैरीलैंड में हिंदी भाषा और हिंदू संस्कृति की कक्षाएं समुदाय में सांस्कृतिक समृद्धि और शिक्षा की आधारशिला रही हैं। ये कक्षाएं पीढ़ियों के बीच एक महत्वपूर्ण पुल का काम करती हैं, जो छात्रों को हिंदू सांस्कृतिक परंपराओं से गहराई से जुड़ते हुए हिंदी भाषा सीखने का अवसर भी प्रदान करती है।
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बालविहार विद्यालय, जर्मनटाउन, मैरीलैंड
विद्यार्थियों की कवितायेँ (भाग-1)
१ - नया भारत
द्वारा- आद्यांश सचान, पांचवीं कक्षा
पहन मुकुट हिमालय का गंगा की कल-कल से खिलता,
सभ्यता और संस्कृति का अनुपम खजाना यहाँ मिलता ||
अनगिनत भाषाओ और त्यौहारो का ये देश,
भारत है इसका नाम ये सब देशों मे है विशेष ||
ना शीश कभी झुकने दे इसके इतिहास का मान रखे,
मातृभूमि है सबसे ऊपर हर पल इसका ध्यान रखे ||
एकता का प्रण लेकर नव भारत का निर्माण किया,
रहे तिरंगा हरदम ऊँचा हमने मिलकर ऐसा काम किया ||
हर रिश्ता अनमोल जहाँ पर हर बधन एक उत्सव हो,
ऐसे अपने पन का स्वाद और कहाँ पर संम्भव हो ||
वीर शहीदो का ये भारत क्यों ना इसका अभिमान हो,
आजादी है उनकी देन उन बालिदानो का मान हो ||
हर किसी के दिल मे अब यही अफसाना है,
चलो फिर आज मिलकर नया भारत बनाना है ||
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२ - मातृभाषा हिन्दी
द्वारा - अनाया शर्मा, सातवीं कक्षा
भारत माँ की शान है हिंदी
हम सब का अभिमान है हिंदी ||
जन जन की भाषा है हिंदी,
भारत की आशा है हिंद ||
बच्चों का पहला शब्द है हिंदी
माँ के प्रेम की छाया है हिंदी ||
हिंदुस्तान की गौरव गाथा है हिंदी,
एकता की अनोखी परंपरा है हिंदी ||
हिंदुस्तान की आवाज है हिंदी,
हर दिल की धड़कन है हिंदी ||
सरल शब्दों में कहा जाए तो,
जीवन की परिभाषा है हिंदी||
हिंदुस्तान की शान है हिंदी,
हर भारतीय का सम्मान है हिंदी ||
जय हिंद, जय भारत
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मार्टिन लूथर किंग जूनियर दिवस समारोह – क्लीवलैंड, ओहायो
महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर
समान विचारधारा और मिशन
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मार्टिन लूथर किंग जूनियर
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महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर: समान विचारधारा और मिशन
महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर दोनों ही अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों में विश्वास रखते थे। गांधी जी ने स्वतंत्रता संग्राम में अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व किया, वहीं डॉ. किंग ने अमेरिका में नागरिक अधिकारों की लड़ाई को गांधी के सिद्धांतों से प्रेरित होकर आगे बढ़ाया। दोनों नेताओं का लक्ष्य समानता, सामाजिक न्याय और शांति के माध्यम से दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाना था। उनके विचार और आंदोलन आज भी प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
मार्टिन लूथर किंग जूनियर दिवस समारोह – 20 जनवरी 2025, क्लीवलैंड, ओहायो :
मार्टिन लूथर किंग जूनियर दिवस पर क्लीवलैंड में कई कार्यक्रम आयोजित किए गये, जिनमें कला, संगीत, इतिहास, और सामुदायिक सेवा से जुड़े आयोजन शामिल थे । यह दिन डॉ. किंग के मानवाधिकारों, समानता, और अहिंसा के संदेश को याद करने और आगे बढ़ाने के लिए समर्पित है।
प्रमुख कार्यक्रम:
• क्लीवलैंड म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट – 20 जनवरी 2025 (सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक)
• क्लीवलैंड म्यूज़ियम ऑफ़ नेचुरल हिस्ट्री – 20 जनवरी 2025 (सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक)
• द क्लीवलैंड ऑर्केस्ट्रा – सांस्कृतिक एवं संगीतमय श्रद्धांजलि
• ब्लैक हिस्ट्री मंथ ध्वजारोहण समारोह -- क्लीवलैंड में 55वें वार्षिक ब्लैक हिस्ट्री मंथ ध्वजारोहण समारोह के तहत 1 फरवरी 2025 को सिटी हॉल में विशेष आयोजन किया गया । यह समारोह अफ्रीकी-अमेरिकी इतिहास और संस्कृति के महत्व को रेखांकित करता है और विविधता व समावेशिता के मूल्यों को बढ़ावा देता है।
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पाठकों की अपनी हिंदी में लिखी कहानियाँ, लेख, कवितायें इत्यादि का
ई -संवाद पत्रिका में प्रकाशन के लिये स्वागत है।
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"प्रविष्टियाँ भेजने वाले रचनाकारों के लिए दिशा-निर्देश"
1.रचनाओं में एक पक्षीय, कट्टरतावादी, अवैज्ञानिक, सांप्रदायिक, रंग- नस्लभेदी, अतार्किक
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति
हिंदी लेखन के लिए स्वयंसेवकों की आवश्यकता
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के विभिन्न प्रकाशनों के लिए हम हिंदी (और अंग्रेजी दोनों) में लेखन सेवाओं के लिए समर्पित स्वयंसेवकों की तलाश कर रहे हैं जो आकर्षक और सूचनात्मक लेख, कार्यक्रम सारांश और प्रचार सामग्री आदि तैयार करने में हमारी मदद कर सकें।
यह आपके लेखन कौशल को प्रदर्शित करने, हमारी समृद्ध संस्कृति को दर्शाने और हिंदी साहित्य के प्रति जुनून रखने वाले समान विचारधारा वाले व्यक्तियों से जुड़ने का एक अच्छा अवसर है। यदि आपको लेखन का शौक है और आप इस उद्देश्य के लिए अपना समय और प्रतिभा योगदान करने में रुचि रखते हैं, तो कृपया हमसे alok.iha@gmail.com पर ईमेल द्वारा संपर्क करें। साथ मिलकर, हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने और संरक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
प्रबंध सम्पादक: श्री आलोक मिश्र
alok.iha@gmail.com
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“संवाद” की कार्यकारिणी समिति
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प्रबंद्ध संपादक – श्री आलोक मिश्र, NH, alok.iha@gmail.com
संपादक -- डॉ. शैल जैन, OH, shailj53@hotmail.com
सहसंपादक – अलका खंडेलवाल, OH, alkakhandelwal62@gmail.com
डिज़ाइनर – डॉ. शैल जैन, OH, shailj53@hotmail.com
तकनीकी सलाहकार – मनीष जैन, OH, maniff@gmail.com
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रचनाओं में व्यक्त विचार लेखकों के अपने हैं। उनका अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की रीति - नीति से कोई संबंध नहीं है।
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Management Team
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