AUGUST INTERNATIONAL HINDI ASSOCIATION'S NEWSLETTER
अगस्त 2023, अंक २६ | प्रबंध सम्पादक: संपादक मंडल
|
|
|
|
|
Human Excellence Depends on Culture. The Soul of Culture is Language
भाषा द्वारा संस्कृति का प्रतिपादन
|
|
|
|
|
प्रिय मित्रजनो,
आशा करती हूँ कि आप सभी कुशल-मंगल है। बच्चों के स्कूल प्रारंभ हो गए हैं और बच्चों को हमारी समिति की ओर से अनंत शुभकामनाएँ।
२०२३ जुलाई १४ से लेकर अगस्त २७ तक कवि सम्मेलन में दो कवि और एक कवियित्री अमेरिका पहुँच गए थे, जिनमे सुदीप भोला जी, जबलपुर से हैं: गौरव शर्मा जी, मुंबई से हैं और डॉ. सरिता शर्मा जी, गाजियाबाद से हैं। यह ६ सप्ताह का भ्रमण प्रारंभ हो चुका है। जिसमें अमेरिका वासी सभी कवियों की कविताओं का आनंद ले रहे हैं।
सभी ने अ.हि.स. के द्विवार्षिक २१ वाँ अधिवेशन जुलाई २८/२९ को सम्पन्न हुआ। मैं आप सभी को समिति की ओर से सादर धन्यवाद करती हूँ कि आप सभी आए और आकर बहुमूल्य समय देकर
कार्यक्रम को सफल बनाया। मैं सहृदय राकेश कुमार जी एवं उनकी टीम को सहृदय धन्यवाद करती हूँ। कवि सम्मेलन में ही डॉ. वी. पी. सिंह भी अमेरिका के कवि सम्मेलन में सम्मिलित हुए और उन्होंने केवल अधिवेशन में वीर रस से ओतप्रोत कवितायाएँ सुनाई, जिसे सुनकर लोग वीर रस से सराबोर हो गये। सभी की कविताओं को बहुत सराहा गया।
राकेश कुमार जी ने युवाओं से कार्यक्रम संचालित करवाया। ये सही में प्रशंसनीय कार्य है कि हमारी भावी पीढ़ी को यह अवसर प्रदान दिया गया।
आप सभी से मेरा सविनय निवेदन है कि आप और आर्थिक रूप से सहायता करे। आपके द्वारा की गई आर्थिक सहायता हिंदी के प्रचार-प्रसार में सहायक होगी और आने वाले अधिवेशन और हिंदी के कार्यक्रम को सफल बनाने में पूर्ण योगदान देगी। अंत में मैं समिति, न्यासी समिति और सम्पादकीय समिति और स्वयं सेवक सहित सभी को सहृदय धन्यवाद देती हूँ, जो निर्धारित समय पर “संवाद” और विश्वा को प्रकाशित करने और आप तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं।
आपका अगर कोई प्रश्न हो तो आप सभी ईमेल इस (anitagsinghal@gmail.com) के माध्यम से और इस फोन नम्बर 817-319-2678 पर वार्ता कर सकते हैं।
सादर सहित
अनिता सिंघल
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -अध्यक्षा
(२०२२-२०२३)
***
|
|
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति – हिंदी सीखें
|
|
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की विशेष प्रस्तुति
“हास्य के रंग - गीत-गजल के संग”
अमेरिका के महानगरों में सम्पन्न, 14 जुलाई - 27 अगस्त 2023
सम्पूर्ण सफलता के साथ सम्पन्न
|
|
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की शाखाओं से हास्य कवि सम्मलेन की रिपोर्ट्स
|
|
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- अटलांटा शाखा
द्वारा: संजीव अग्रवाल
|
|
|
|
|
अटलांटा हास्य कवि सम्मलेन में फूटे हँसी के गुब्बारे
हिंदी की प्रसिद्ध कहावतों में से एक है “सितारों का ज़मीन पर उतर आना” पर कभी कभी ये कहावतें आँखों के सामने सच होती नज़र आती है, ऐसा ही कुछ नज़ारा अटलांटा के प्रसिद्ध ग्लोबल मॉल के इम्पैक्ट सेंटर में 4 अगस्त 2023 को अटलांटा हिंदी समिति एवं अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के तत्वाधान में आयोजित हास्य कवि सम्मलेन में देखने को मिला। अटलांटा हिंदी समिति के प्रमुख संजीव अग्रवाल जी की अगवानी में आयोजित इस सफल कार्यक्रम में भारत से आए सुप्रसिद्ध कवि सुदीप भोला, गौरव शर्मा और डॉ. सरिता शर्मा ने अपनी कविताओं से ऐसा समा बाँधा कि पूरा हॉल हँसी के रंगों से सराबोर हो गया। अटलांटा हिंदी समिति,हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए वर्ष प्रतिवर्ष हास्य कवि समेलन का सफल आयोजन करती रही है, और अटलांटा क्षेत्र में मोतियों के रूप में बिखरे हिंदी भाषियों को एक दूसरे से जोड़ते हुए,उन्हें परदेस में भी देश की माटी की खुशबू का अहसास करवाती रही है।
सभागृह में उपस्थित 400 से अधिक श्रोताओं का दिल जीत लेने में मेहमान कवियों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी, मधुर कंठ के स्वामी सुदीप भोला जी ने अपने देशभक्ति गीत “जलाएं एक दिया हम उन वीरों के नाम” से श्रोताओं को अपने साथ गाने पर मजबूर कर दिया और लोगों को भारत और भारत के सैनिकों के त्याग की याद दिला दी, श्रोताओं को ये अहसास हुआ कि भारतीय दुनिया के किसी भी कोने में रहे, भारत प्रेम अपने दिल में हमेशा बसाए रखते हैं।
अपनी चुटीली दो पंक्तियों के लिए मशहूर गौरव शर्मा ने उपस्थित जनों को ठहाके मारकर हंसने की वजह दी, स्वयं को वन लाइनर और ऑब्जरवेशन का कवि कहने वाले कवि ने अपनी हास्य पंक्तियों से इस बात को सिद्ध भी कर दिया कि वो सच में छोटी छोटी बातों में हास्य ढूँढ निकालते हैं, रोजमर्रा की ज़िन्दगी से उत्पन्न होने वाले इसी हास्य की पंक्तियों से उन्होंने श्रोताओं के बीच हँसी के रंग बिखेर दिए।
समर्पण की कविताओं के लिए प्रसिद्ध कवियत्री डॉ. सरिता शर्मा जी ने प्रेम और समर्पण के गीतों से समां बाँध दिया .उनके द्वारा मीरा के प्रेम पर लिखे रसमय गीत ने श्रोताओं को निस्वार्थ प्रेम की दुनिया में पहुँचा दिया और इन्स्टा के इस दौर में मीरा के सात्विक प्रेम के हिंडोले में झूला झुलाया। उनके द्वारा “माँ” विषय पर सुनाई कविता ने हॉल में मौजूद कई आँखों को नम कर दिया।
कार्यक्रम का एकऔर मुख्य आकर्षण रहा बच्चों द्वारा इस कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना, अतिथियों और आमंत्रित जनों को उनके स्थान पर बिठाना हो या भोजन व्यवस्था सँभालना हो ,आयोजन स्थल पर व्यवस्था बनाए रखना हो या पुष्पों द्वारा कवियों का स्वागत करना हो, हर जगह बच्चों और युवाओं का उत्साह देखते ही बनता था, इसी के साथ पिछले कई दिनों से आयोजन के लिए मेहनत करने वाले स्वयंसेवियों का योगदान भी बहुत महत्वपूर्ण रहा।
कार्यक्रम को अपने अनुभव और प्रबंधन कला से सफल बनाने में संजीव अग्रवाल जी और दीप्ति गुप्ता जी की अगवानी में अलोक और शिल्पा अग्रवाल, अमित और रूचि चौरसिया, अशीम, आशीष और पूजा गुप्ता, ब्रिजरानी वर्मा, गौरव और प्रियंका जैन, कनुप्रिया गुप्ता,किरण सज्जन,मनीष और ऋचा सिन्हा,मुस्तफा अजमेरी, पंकज और सरिता शर्मा,प्रेमळ और जीनल शाह,राजेश और मीरा अग्रवाल, राजेश और अनुभा मित्तल, राजीव और विनीता भटनागर, सचिन अग्रवाल,सचिन मंगला, अभिषेक और नेहा गुप्ता, श्री वोहरा,श्वेता दुबे, सिद्धार्थ और सलोनी अग्रवाल,सुमित द्विवेदी,विनय चौधरी,विनीत और नेहा गुप्ता, विशाल और पल्लवी गुप्ता, विशाल शर्मा, प्राची वोरा,करण गर्ग और मुकेश गर्ग ने निस्वार्थ भाव से आयोजन को सफल बनाने के लिए सहयोग किया। इस तरह का उत्साह और आयोजन ये सिद्ध करते हैं की हिंदी के प्रेमी देश से दूर होकर भी लगातार हिंदी से जुड़े हुए हैं और अपनी मातृभाषा के लिए दुनिया के इस कोने में आकर भी एक दूसरे के हाथ से हाथ मिलाकर काम कर रहे हैं।
पिछले कई वर्षों से अटलांटा में होने वाले हास्य कवि सम्मलेन के सुचारू रूप से आयोजन में प्रायोजकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
***
|
|
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- टेनेसी शाखा
द्वारा: पूजा श्रीवास्तव, शाखा अध्यक्षा
|
|
|
|
|
शुक्रवार 14 जुलाई 2023, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की टेनेसी शाखा का वार्षिक हास्य कविसम्मेलन श्री गणेश मंदिर में हुआ।
तीनों अतिथि कवि भारत से आए थे। श्री गौरव शर्मा, श्री सुदीप भोला और डॉ. सरिता शर्मा।
हँसी और तालियों की आवाज़ ने सब कुछ कह दिया। इस कार्यक्रम में लगभग 200 लोगों ने भाग लिया।
हमारे कवियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ-साथ, इस कार्यक्रम में हमारे बच्चों और हाई स्कूल के छात्रों की भागीदारी बड़ी आकर्षण थी। जब बच्चों ने वंदना "हे शारदे माँ" गाई तो हम सभी अपने दिलों में गर्मजोशी महसूस कर रहे थे।
बहनों अभि और अगम्य का सेमी क्लासिकल डांस बहुत खूबसूरत था। फिर हमारी हिंदी समिति के वरिष्ठ सदस्य ने अपने गीत "है प्रीत जहां की रीत सदा" से माहौल तैयार कर दिया। हम सभी ने देश प्रेम से ओतप्रोत उस पल की महसूस किया।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति श्री गणेश मंदिर को उनके सदैव सहयोग के लिए धन्यवाद देना चाहती है। हमारे प्रायोजक - पार्थ रियलिटी, चिरन शर्मा), रवि शेटकर- वरिष्ठ आईएचए सदस्य (पर्सिस बिरयानी), सुशील चंदा - सम्मानित समुदाय सदस्य, रीता शंकर (रियाल्टार), आलोक नंदा (अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के सदस्य), एवीए इंडियन वियर बुटीक अंजलि शर्मा, सूची लंबी है - मैं उन सभी को भी धन्यवाद देना चाहती हूं जो लोग आए, टिकट खरीदे, और उदार हृदय से अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति को दान भी दिया।
मैं अपनी शानदार स्वयंसेवी टीम से कुछ नाम भी लेना चाहती हूं - उमेश खारवाल, ज्योति सिंह, रेखा-दृष्टि मीरपुर, गरिमा गुप्ता, प्रेरणा शर्मा, मुक्ता शर्मा, दीप्ति। मेरी प्यारी और तेज़ उपाध्यक्ष सीमा वर्मा एवं हमारे वरिष्ठ सदस्य।
|
|
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- शार्लेट शाखा
द्वारा: प्रिया भारद्वाज, शाखा अध्यक्षा
|
|
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति की शार्लेटे, नोर्थ केरोलिना शाखा के तत्वावधान में हास्यकवि सम्मेलन का कार्यक्रम हिंदूसेण्टर शार्लट में १२ अगस्त को दोपहर ३ बजे से लेकर शाम ७:०० बजे तक सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ । बड़ी संख्या में हिंदी प्रेमी लोगों ने अपना अमूल्य समय निकालकर भावी पीढ़ी के भविष्य और हिंदी के प्रचार हेतु सहयोग दिया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि आदरणीय बाल गुप्ता और हेमंत भाई , सुरेंद्र पटेल और निमिष भट्ट द्वारा किया गया। तत्पश्चात् करते है तन मन से वंदन , जन गण मन की भावना के साथ भारतीय राष्ट्र गान, स्थानीय कलाकारों राकेश अरोरा ,प्रणव झा, राकेश सेशन एवं कार्यक्रम की शान बच्चों के द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात रितु मुखर्जी के समूह की बालिकाओं द्वारा शानदार मनमोहक नृत्य प्रस्तुति किया गया।
अगला कार्यक्रम \ चित्रा सिंह और प्रतिभा सिंह के समूह द्वारा गरबा नृत्य प्रस्तुति थी जिसे दर्शकों ने बहुत सराहा। सुदेशना वासु की मनमोहक प्रस्तुति एवं काव्य पाठ में बाल गुप्ता जी की अपनी कविताओं ने सबका मन मोह लिया। अगली प्रस्तुति अंजु अग्रवाल द्वारा छोटी छोटी कवितायें और अन्य बातों में दर्शकों को आनंदित रखा। सुरों का आलाप कर प्रणव झा , राजेश अरोड़ा एवं राकेश सेशन ने मधुर गीत प्रस्तुति दी और कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।
हास्य कवि गौरव शर्मा, सुदीप भोला और सरिता जी के आगमन के साथ ही दर्शकों के इंतज़ार के पल समाप्त हुए और मुख्य कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। इस कार्यक्रम का लुत्फ़ उठाने के लिए बड़ी संख्या में वे लोग पहुंचे जो विदेश में रहने के बाद,आज भी अपने देश और अपनी मातृभाषा हिंदी से प्रेम करते है।
जैसे ही गौरव शर्मा और सुदीप भोला की कविताएँ शुरु हुई , सभा के लोग मंत्रमुग्ध हो गए। इसके पश्चात सुश्रीसरिता शर्मा जी ने अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया और सभागार तालियों से गुंजायमान हो गया। कोई भी कार्यक्रम कर्मठ कार्यकर्ताओं के बिना सफल नहीं हो सकता है। विशेष सहयोग प्रदान कर्ता आलोक, किनशुख,वामशी ,जितेंद्र , सुप्रज्ञ , स्वाति सुरेंद्र, प्रियंका , रजनी , श्वेता ,मधु , सकेब , प्रदीप ,आशीष ,अफ़सान ,साधना , नेहा ,चारु ,प्रत्याशा सभी ने , विशेष सहयोग प्रदान अफ़सान किया .जिसके कारण कार्यक्रम को अपार सफलता प्राप्त हुई , इस कार्यक्रम की सूत्रधार श्रीमती प्रिया भारद्वाज अध्यक्षा अंतरष्ट्रीय हिंदी समिति - नोर्थ केरोलिना ने सभी का धन्यवाद प्रेषित कर कार्यक्रम का समापन किया।
***
|
|
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति का २१ वां द्विवार्षिक अधिवेशन
जुलाई 28-29, 2023 इंडिआना, अमेरिका में
बहुत अच्छी तरह संपन्न ।
|
|
|
|
|
डॉ. राकेश कुमार के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (आईएचए) के इंडियाना चैप्टर ने भारत के महावाणिज्य दूतावास के सहयोग से 28-29 जुलाई 2023 को कार्मेल, इंडियाना, यूएसए में अपना 21वाँ द्विवार्षिक सम्मेलन आयोजित किया। डॉ. कुमार को साथी पदाधिकारियों - उपाध्यक्ष विद्या सिंह; सचिव, डॉ. कुमार अभिनव; और आयोजन समिति के सदस्य, कई स्वयंसेवकों, मुख्य रूप से युवाओं ने भी कार्यक्रम के आयोजन और मेजबानी में मदद की। 2 दिनों तक चले इस सम्मेलन में एक शानदार कार्यक्रम था जो सभी उम्र के उपस्थित लोगों के लिए शैक्षिक और मनोरंजक दोनों था। सम्मेलन का विषय "अगली पीढ़ी के लिए हिंदी शिक्षा" था और इसमें प्रस्तुतकर्ताओं, गणमान्य व्यक्तियों और कवियों के परिचय सहित कई गतिविधियों में सक्रीय युवा भागीदारी शामिल थी।
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में महावाणिज्य दूत सोमनाथ घोष और विशिष्ट अतिथि के रूप में इंडियाना के राज्य सचिव श्री डिएगो मोरालेस ने भाग लिया। सम्मेलन में 350 से अधिक लोग शामिल हुए। सम्मेलन में भारत से पाँच हिन्दी प्रोफेसरों, अमेरिकी विश्वविद्यालयों से सात प्रोफेसरों और संयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से लगभग 40 हिन्दी कार्यकर्ताओं और विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया।
महावाणिज्य दूत ने भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से सम्मेलन में भाग लेने आए प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने दर्शकों को सभी भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की भारत सरकार की नीति और इस संबंध में उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी; स्थानीय स्कूलों और विश्वविद्यालयों में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के अध्ययन की व्यवस्था करने के लिए प्रवासी भारतीयों को विचार दिए; हिंदी आदि सीखने के लिए ऐप्स का विकास। इस सम्मेलन का एक नया आयाम यह था कि मिडिल और हाई स्कूल के छात्रों को अलग-अलग सत्रों के लिए एमसी के रूप में तैयार किया गया था। प्रतिभागियों में विभिन्न अमेरिकी राज्यों के छात्र भी शामिल थे।
सम्मलेन के तीन सत्रों का विस्तृत विवरण अलग अलग नीचे प्रस्तुत है।
|
|
|
|
|
सत्र -1 प्रतिवेदन, शुक्रवार जुलाई 28, 2023
द्वारा: अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति -इंडियाना शाखा
|
|
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (आईएचए) की इंडियाना शाखा और अमेरिका में भारत के महावाणिज्य दूतावास के संयुक्त तत्वावधान में 28-29 जुलाई 2023 को कार्मेल, इंडियाना, अमेरिका में समिति का 21वाँ द्विवार्षिक अधिवेशन इंडियाना शाखा के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार के नेतृत्व में उनकी टीम के साथियों उपाध्यक्ष श्रीमती विद्या सिंह; सचिव, डॉ. कुमार अभिनव आदि आयोजन समिति के सदस्यों, समर्पित स्वयंसेवकों के अथक श्रम और सहयोग से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। दो दिनों तक चले अधिवेशन में हर उम्र और वर्ग के लिए शैक्षिक और मनोरंजक सामग्री और कार्यक्रम उपलब्ध थे।
इस अधिवेशन का मुख्य विषय "अगली पीढ़ी के लिए हिंदी शिक्षा" था और इसमें प्रस्तुतकर्ताओं, गणमान्य व्यक्तियों और कवियों के परिचय सहित कई गतिविधियों में कई युवा शामिल थे। यह अधिवेशन इंडियाना में भारतीय प्रवासियों के लिए एक प्रतिष्ठित कार्यक्रम था - शायद पिछले 15-20 वर्षों में इंडियाना के हिंदू मंदिर के भव्य उद्घाटन के बाद दूसरा। इस कार्यक्रम में अटॉर्नी जनरल (उनके सचिव ने उनकी ओर से भाग लिया और उनकी ओर से समर्थन और मान्यता पत्र पढ़ा) सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। 29 जुलाई 2023 को भव्य कवि सम्मेलन में, गणमान्य व्यक्तियों में राज्य सचिव, शिकागो में भारत के महावाणिज्य दूत, ग्रीनवुड के मेयर और कई अन्य समुदाय के नेता शामिल थे।
अधिवेशन का पहला दिन (सत्र 1) 28 जुलाई 2023 को हॉलिडे इन, कार्मेल में आयोजित किया गया था। "मीट एंड ग्रीट" और पंजीकरण शाम 5:30 बजे शुरू हुआ, जिसके बाद एक शानदार रात्रिभोज हुआ - गुणवत्ता और स्वाद के संबंध में बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। प्रत्येक सहभागी को डोरी के साथ एक नाम टैग और कार्यक्रम के साथ एक कन्वेंशन बैग प्राप्त हुआ। सभी ने नाम टैग, बैग और कार्यक्रम कार्ड की सराहना की।
हमारी अगली पीढ़ी के दो युवा छात्रों रोहिल आनंद (स्नातक) एवं मनसवी अवस्थी (10वीं) ने अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की ओर सभी उपस्थित लोगों का स्वागत किया और अमेरिका और भारत दोनों देशों के राष्ट्रगानों के साथ इस अधिवेशन के आरम्भ के लिए इंडिआना की दो युवा छात्राओं वेदिका शर्मा (9 वीं) एवं त्वरिता शर्मा (5वीं) को आमंत्रित किया जिन्होने ने बहुत ही सुरीले स्वरों में राष्ट्रगानों की प्रस्तुति की। दर्शकों ने हमारे राष्ट्रगानों को साथ साथ गाकर बहुत सम्मान दिया। राष्ट्रगान के बाद हमारे मुख्य अतिथि मेजर शेर बहादुर सिंह ने अधिवेशन स्मारिका का विमोचन श्री आलोक मिश्रा, श्रीमती अनीता सिंघल, श्री संजीव अग्रवाल और डॉ. राकेश कुमार की उपस्थिति में मंच पर आकर किया।
स्मारिका के विमोचन के बाद, विभिन्न बॉलीवुड और शास्त्रीय नृत्यों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हुआ। कलाकारों की कुल संख्या लगभग 40 (सभी युवा) थी। सांस्कृतिक कार्यक्रम के समूह प्रदर्शन में समृद्ध भारतीय विरासत को दर्शाया गया। पहले समूह का नेतृत्व जेनी भूपति के निर्देशन में बॉलीवुड बीट्स ने किया था। यह छोटे बच्चों द्वारा किया गया रोमांचक और शानदार प्रदर्शन था जिसमें 8 नृत्य शामिल थे। समूह का मुख्य आकर्षण बैले अकादमी के हाई स्कूल के छात्रों का मंत्रमुग्ध कर देने वाला प्रदर्शन था। इस प्रदर्शन के लिए प्रशिक्षण के लिए उनके पास केवल 48 घंटे थे और इसमें विभिन्न हिट बॉलीवुड गानों पर नृत्य शामिल था। अगली पंक्ति में पूजा पंड्या की अध्यक्षता वाला बाल्गोक्गलम समूह था। अनिंदिता सेन द्वारा प्रशिक्षित प्रितिका विश्वास द्वारा प्रस्तुत भारतीय शास्त्रीय कथक नृत्य शाम का मुख्य आकर्षण था। सांस्कृतिक कार्यक्रम की एंकरिंग अ.हि.स. नैशविल शाखा की अध्यक्षा श्रीमती पूजा श्रीवास्तव ने बहुत शानदार ढंग से की।
युवाओं के नृत्यों के बाद, हमारे युवा संचालको, आद्या अरोरा (10वीं) एवं अनविता राजूपत (8वीं), ने दो माध्यमिक विद्यालय के छात्रों (वेदिका एवं त्वरिता शर्मा) को हिंदी में कविता पाठ के लिए आमंत्रित किया जिन्होंने बहुत ही सुन्दर और लय में कविता सुनाई जिसका दर्शको ने जोर दार तालियों से स्वागत किया । इसके बाद, आद्या एवं अनविता ने भारत से आयी सुश्री ममता अहार का मंत्रमुग्ध कर देने वाला एक पात्र संगीतमय नाट्य के लिए आमंत्रित किया। सुश्री ममता जी भारत से 30 घंटे की कठिन यात्रा के बाद कार्यक्रम स्थल पर पहुँची थीं। ममता अहार को "द्रौपदी" के प्रदर्शन के लिए स्टैंडिंग ओवेशन मिला।
संगीतमय नाट्य के बाद दस मिनट्स का चाय विराम दिया गया। चाय विराम के बाद, डॉ. राकेश कुमार ने स्वर्गीय सुशला मोहनाका जी, जो तीन दशकों से अधिक समय से अ.हि.स. से जुड़ी थीं, के प्रति समिति की ओर से श्रद्धांजलि व्यक्ति की और उनकी उपलब्धियों पर संक्षेप में प्रकाश डाला। तद्पश्चात उनकी बेटियों, डॉ. शैल जैन और श्रीमती किरण खेतान को उनके बारे में कुछ शब्द कहने के लिए आमंत्रित किया। श्रीमती किरण खेतान ने उन्हें समर्पित एक कविता सुनाई।
‘सत्र-1’ का समापन संगीतमय "गुलदस्ता" के साथ हुआ - गणेश बडवे (गायक, ग़ज़ल गायक) और डॉ. कुमार अभिनव (हवाई गिटारवादक) द्वारा एक घण्टे की संगीतमय संध्या। मधुर स्वर के धनी गणेश बडवे और डॉ. कुमार अभिनव ने' एकल प्रदर्शन और छह गायन-गिटार युगल प्रस्तुत किए जो पहली बार प्रस्तुत किए जा रहे थे। दोनों को बॉलीवुड के लोकप्रिय क्लासिक्स, जगजीत-चित्रा सिंह और तलत अजीज के प्रदर्शन के लिए स्टैंडिंग ओवेशन मिला। पूरी शाम बहुत कुशलता से चली, हर चीज़ समय पर शुरू और ख़त्म हुई। 28 जुलाई को सत्र 1 में लगभग 250 लोगों ने भाग लिया।
(सत्र-1 की झलकियाँ, शुक्रवार, 28 जुलाई, 2023 शाम 5:30 बजे से रात 11 बजे)
|
|
|
|
|
सत्र - 2 प्रतिवेदन, शनिवार जुलाई 29, 2023
द्वारा: डॉ. शैल जैन, आगामी अध्यक्षा, अ.हि.स,
एवं श्रीमती रेणु चड्ढा, भूतपूर्व अध्यक्षा अ.हि.स उत्तरपूर्व ओहायो शाखा
|
|
|
|
|
संपूर्ण अधिवेशन का आयोजन अ.हि.स के इंडियाना शाखा के अध्यक्ष श्री राकेश कुमार और उनकी टीम के अथक परिश्रम के कारण हुआ। सारी व्यवस्थायें एवं कार्यक्रम बहुत अच्छे थे। स्थानीय और बाहर से आये श्रोतागण, सभी खुश नज़र आ रहे थे। जुलाई २९ सुबह का कार्यक्रम हॉलिडे इन, कारमेल, इंडियाना में सुबह ९ बजे से शाम ४ बजे तक था।
हॉल के बाहर रजिस्ट्रेशन डेस्क पर स्वयं सेवक अपने कार्य में लगे थे। उनके बग़ल में स्वर्गीय सुशीला मोहनका जी की फोटो एवं एक फोल्डर उनकी जीवन के उद्देश्यों और उपलब्धियों का था। वे अ.हि.स. के साथ १९९० से जुड़ी थीं और भूतपूर्व अध्यक्षा एवं जनवरी २०१७ से जीवन के अंत तक प्रबन्ध संपादक भी थीं। जून २९, २०२३ में सुशीला जी के स्वर्गवास, ने पूरे अ.हि.स के साथियों और समाज के लोगों को स्तब्ध कर दिया। हिन्दी भाषा एवं भारतीय संस्कृति के लिये उनका योगदान, अंतिम सांस तक कर्तव्यरत रहना और समाज में सबों से प्रेमभाव, एक उदाहरण है।
|
|
|
|
|
|
|
रजिस्ट्रेशन डेस्क पर स्वयं सेवक
स्वर्गीय श्रीमती सुशीला मोहनका >>>
सितम्बर 28,1933 - जून 29, 2023
|
|
|
|
|
|
|
|
हॉल का माहौल भी बहुत अच्छा था। श्रोताओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुये गोल टेबलों के चारों तरफ़ कुर्सियाँ लगी थीं ताकि आराम से नोट लिया जा सके। सत्रों का मूल विषय “अगली पीढ़ी के लिये हिन्दी शिक्षा” पर आधारित था। स्थानीय, अमेरिका के विभिन्न राज्यों, भारत, मैक्सिको और पाकिस्तान से दर्शक शामिल थे। प्रमुख हिंदी भाषा शिक्षाविदों और भाषा सिखाने में सक्षम लोगों की प्रस्तुतियाँ शामिल थीं।
अ.हि.स के अध्यक्ष न्यासी मंडल: श्री आलोक मिश्रा (NH); अ.हि.स की अध्यक्षा: श्रीमती अनिता सिंघल(TX); अ.हि.स की निर्वाचित अध्यक्षा: डॉ. शैल जैन(OH); भूतपूर्व अध्यक्ष: १.मेजर शेर बहादुर(NY); २.स्वप्न धर्यवान(TX); ३. अजय चड्डा (NE OH); भूतपूर्व शाखा अध्यक्षा: रेणु चड्ढा (NE OH); शाखा अध्यक्षा /अध्यक्ष १.किरण खेतान(NE OH); २.पूजा श्रीवास्तव(TN) ३. राकेश कुमार(IN); ४.संजीव अग्रवाल(GA); निदेशक : इंद्रजीत शर्मा(NY); सीमा वर्मा (TN)।
एक अद्भुत प्रयास इस सम्मेलन में युवाओं को शामिल करना था। मास्टर सेरेमोनी का रोल युवा लोगों ने किया। इसमें मिडल और हाई स्कूल के विद्यार्थी एवं अलग-अलग राज्यों से विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी भी शामिल थे।
युवा स्वंसेवक
|
|
|
|
|
अ.हि.स -इंडियाना शाखा निम्नलिखित विशिष्ट अतिथियों को अगली पीढ़ियों के लिए हिंदी शिक्षा से संबंधित विभिन्न विषयों पर उनकी प्रस्तुतियों और चर्चाओं के लिए और हमारी अगली पीढ़ी के युवाओं को इस सत्र में भाग लेने के लिए धन्यवाद देता है। सत्र के वक्ताओं एवं युवा MC’s का संचित विवरण नीचे है:
विशिष्ट अतिथि प्रस्तुतकर्ता
1 प्रो मिथिलेश मिश्रा, वरिष्ठ व्याख्याता; इलिनोइस-अर्बाना शैंपेन विश्वविद्यालय (यूआईयूसी) के हिंदी और उर्दू के निदेशक और भाषा समन्वयक।
2 प्रो सैयद एख्तेयार अली, दक्षिण एशियाई भाषा कार्यक्रम के निदेशक, मिशिगन विश्वविद्यालय, एन आर्बर।
3 आईएचए के पूर्व अध्यक्ष श्री अजय चड्डा ने नई तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके स्व-गति से ऑनलाइन हिंदी सीखने पर एक प्रस्तुति दी।
4 डॉ. फ़ैज़ा सलीम, लाहौर विश्वविद्यालय में पूर्व उर्दू प्रशिक्षक और वर्तमान में विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय में दक्षिण एशिया ग्रीष्मकालीन भाषा संस्थान से जुड़े हुए हैं।
5 डॉ. रश्मी शर्मा, विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय में हिंदी व्याख्याता।
6 श्री अवतंस कुमार, स्तंभकार और जेएनयू और यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस-अर्बाना शैंपेन (यूआईयूसी) में पूर्व प्रोफेसर।
7 डॉ. महेश गुप्ता, हिंदी भाषा शिक्षक, इंडियानापोलिस, इंडियाना।
8 श्री राकेश मल्होत्रा, शिकागो हिन्दी समन्वय समिति के संयोजक।
9 डॉ. राजगोपला, बिजनेस के प्रतिष्ठित प्रोफेसर और राष्ट्रीय शोधकर्ता, ईजीएडीई बिजनेस स्कूल, टेक्नोलोजिको डी मॉन्टेरी, मैक्सिको सिटी।
10 डॉ. अंजना सिंह सेंगर, नोएडा, उत्तर प्रदेश, भारत की एक प्रतिष्ठित हिंदी साहित्यकार और शिक्षाविद्।
11 डॉ. उषा किरण, व्याख्याता, दिल्ली शिक्षा विभाग, बाबा रामदेव सर्वोदय विद्यालय, नई दिल्ली, भारत से संबद्ध।
12 श्रीमती भारती मिश्रा, प्रिंसिपल, महात्मा गांधी सरकारी स्कूल, शिश्यूं, सीकर, राजस्थान, भारत।
सत्र का आरम्भ डॉ. मिथिलेश मिश्र ने किया। उनको मंच पर आमंत्रित किया अरूणभ सिन्हा ने जो मेडिकल कॉलेज में पहले साल के छात्र हैं।
व्याख्यान का शीर्षक था “अमेरिकी डायस्पोरा में हिंदी के रखाव के मुद्दे”। उन्होंने बताया कि आज का युग द्विभाषिक है और इंगलिश के साथ दूसरी भाषा सीखने से बहुत तरह के उपयोग प्राप्त होते हैं। दूसरे देशों के लोगों से कम्युनिकेशन और समझ के साथ साथ दूसरे देशों में काम मिलने में भी बहुत सहायता मिलती है। अमेरिका के २३ राज्यों के विश्वविद्यालयों में हिन्दी भाषा की शिक्षा उपलब्ध है लेकिन बाक़ी राज्यों में हमारी कोशिशों की जरूरत है। उन्होंने दर्शकों को प्रोत्साहित किया। स्कूलों में हिंदी दूसरी भाषा के रूप में लाने के लिये और सबों को अपनी सहायता देने का वादा भी किया।बच्चों को सरल भाषा में गाने के साथ हिन्दी सिखाने का ऐप बनाने के लिये आमंत्रित किया और उसमें उन्होंने अपने सहयोग की चर्चा भी की।
अगले कार्यक्रम में तीन प्रोफेसरों के विचारों का आदान-प्रदान था। इन्हें अनीश गुप्ता १०वी कक्षा के विद्यार्थी ने आमंत्रित किया।
डॉ. इख़्तयार अली ने “हिन्दी या मातृभाषा बोलने में बच्चों एवं माता-पिता की बातचीत का महत्व” के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किये। उन्होंने माता-पिता से अनुरोध किया कि वो घर पे बच्चों से अपनी मातृ भाषा या हिन्दी में बात करें। भाषा एवं संस्कृति के संबंध को क़ायम रक्खें। दर्शकों से साझा किया कि हिन्दी सीखने के लिये बहुत तरह के छात्रवृत्ति/ अनुदान मिलते हैं, विश्वविद्यालयों में। उन्होँने अपने सहयोग के लिये दर्शकों को भी अवगत कराया।
डॉ. रश्मि शर्मा का शीर्षक था “हिंदी सिखाने में दादा-दादी, नाना-नानी की भूमिका”। उन्होंने बहुत ही सरल भाषा में उदाहरणों के साथ अपनी बातों को बताया। बुजुर्गों से सुनी कहानियाँ दिलचस्प होती हैं और वे भारतीय स्मृद्ध संस्कृति के बारे में बच्चों को अवगत भी कराती हैं।
श्री अवतन्स कुमार का शीर्षक था “ घरेलू शिक्षा को हिन्दी में सुधृढ़ करना, सामाजिक सहयोग के साथ”। उन्होंने अपनी बातों को दर्शकों को बताया और साथ में एक छात्र का वीडियो दिखाया। माता पिता या घर के बुजुर्ग जो दूसरे देशों में रहते हैं उनसे उनका विशेष अनुरोध था की वे बच्चों से अपनी मातृ भाषा, या हिन्दी में बात करें। बच्चे २-३ भाषा बिलकुल आराम से समझ लेते हैं और सीख लेते हैं।
अगला शीर्षक था “अ.हि.स के द्वारा हिन्दी सीखने का कार्यक्रम, तकनीकी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से"। अ.हि.स. के ऑनलाइन हिन्दी प्रोग्राम के बारे में श्री अजय चड्ढा ने बताया। अ.हि.स का ये प्रोग्राम स्व-गति, स्व-शिक्षा और लचीला शिक्षा का कार्यक्रम है। उन्होंने बताया कि यह पाठ्यक्रम दूसरी पीढ़ी, यहीं पैदा हुए और यहीं अमरीका में पढ़ रहे बच्चों द्वारा बनाया गया है। बच्चों की मानसिकता और उनमें सीखने का जुनून विकसित करने का ध्यान रखा गया है। हर पाठ्यक्रम के बाद प्रश्नोत्तरों द्वारा छात्रों के सीख की जाँच की जाती है। ध्वनि टाइपिंग जैसे मनोरंजक सुविधाओं से बच्चों में भाषा में रूचि पैदा करने का प्रयास किया गया है। महीने में एक बार छात्र और शिक्षक अपने प्रश्नो के लिए ऑनलाइन मिलते है। अ.हि.स के आजीवन सदस्यों के परिवार के बच्चों के लिये ये पाठ्यक्रम निःशुल्क है। अपने प्रश्नो के लिए सभी info@hindi.org या अजय चड्डा जी को संपर्क कर सकते हैं। अ.हि.स के तकनीकी सलाहकार श्री अंकित जी ने बताया की हिंदी भाषा के विकास के लिए तकनीकी तरीको पर भी काफी प्रयास जारी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैट ग्रुप (chat gpt) और गूगल (google) पर हिंदी को शामिल करने के लिए कड़ी मेहनत भी हो रही है। डॉ. मिथिलेश मिस्र ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हिन्दी के बारे में दर्शकों को अवगत कराया।
आन्या श्रीवास्तव (१०वीं कक्षा की विद्यार्थी) ने डॉ. फ़ैज़ा सलीम को आमंत्रित किया। उनका शीर्षक था “मातृ भाषा को सीखने का साधारण अनुदेश”। डॉ. सलीम ने बहुत ही आकर्षक विधि से अपनी बातों की प्रस्तुति कर दर्शकों को प्रभावित कर दिया। मातृ भाषा में जो प्यार भरे शब्दों से बच्चों को संबोधित करते हैं जैसे “मेरे लल्ला, मेरे चंदा, मेरा लाल” इत्यादि कोई भी दूसरी भाषा में सही अनुवादित नहीं हो सकता है और उस प्रभाव को नहीं लाया जा सकता है।
उसके बाद लंच का ब्रेक हो गया। भोजन के साथ-साथ श्रोता गण काफ़ी बात हिन्दी शिक्षा और भारतीय संस्कृति के लिये कर रहे थे और अपने छेत्र में क्या कर रहे हैं, क्या हो रहा है, कैसे उसे ऊपर की तरफ़ ले जा सकेंगे इत्यादि विषयों पर वार्तालाप हो रहे थे।
लंच के बाद की शुरुवात डॉ. महेश गुप्ता ने की और उन्हें मंच पर आमंत्रित किया अनुषा सिन्हा जो इंडियाना यूनिवर्सिटी में सीनियर विद्यार्थी हैं। डॉ. गुप्ता का शीर्षक था “हिन्दी भाषा शिक्षा इंडियाना राज्य में; भाषा संस्कृति और परम्परा”। महेश जी ने दृढ़ता से अपनी बात रखी और बताया कि भाषा का मानसिक और तंत्रिका संबंधी स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ता है। भाषा व्यक्तित्व के विकास में सहायक होती है। बच्चे हिंदी भाषा सीखने में रूचि नहीं दिखाते क्यूँकि हिंदी को पढ़ाने के लिए नीरस तरीके अपनाये जाते है। हमें कुछ ऐसे तरीकों से शिक्षण करना होगा कि उनकी भाषा में रुचि और जिज्ञासा पैदा हो। उन्होंने एक नये तरीक़े से अपनी बातों को रक्खा और संस्कृति का अर्थ भी समझाया।
उसके बाद ‘विदग्ध वनदेवी’ (खण्ड काव्य) डॉ. अंजना सिंह सेंगर द्वारा लिखी पुस्तक का विमोचन अ.हि.स के लोगों के द्वारा किया गया। डॉ. अंजना सिंह सेंगर ने अपनी किताब के मुख्य उद्देश्यों की चर्चा की ।
श्रीमती पूजा श्रीवास्तव जो टेनेसी शाखा की अध्यक्षा हैं, उन्होंने अपने योगदान के विषय में बताया जिससे बच्चों के भाषा-ज्ञान को दूसरे ही पटल पर पहुँचाया गया है। पूजा जी ने अपनी सहायक टीम के साथ मिलकर 'गाथा' नाम की एक app तैयार की है जहाँ १ से भी अधिक लघु कथाएं उपलब्ध है। भाषा के उत्तार चढ़ाव को मध्ये नज़र रखते हुए, युवा वर्ग के दिल में उतारी जा सकती है: www.gathaonline.com पर उपलब्ध है। इस पटल के विस्तार के लिए और भी लघु कथाएं जोड़ने की कोशिश, अन्य भाषाओं जैसे की: बंगाली और मराठी भाषा की कहानियों को भी डालने का प्रयत्न जारी है।
युवा स्वयं सेविका अनुषा सिन्हा (स्नातक छात्रा) ने अगले प्रस्तुतिकर्ता श्री राकेश मल्होत्रा को आमंत्रित किया। शीर्षक था “मिडवेस्ट अमेरिकी स्कूलों में हिन्दी भाषा शिक्षण का परिचय, चुनौतियाँ, अवसर और सम्भावनायें”। डॉ. मेहरोत्रा का कहना था की हमें हनुमान बनकर अशोक वाटिका में हिंदी की पत्रिका पहुँचानी है। औपचारिक शिक्षा को किस तरह स्कूल मे लाया जाये ताकि स्कूलों में बच्चे पाठयक़्रम के अंतर्गत हिंदी सीख सके। हमारा उद्देश्य युवाओं में महादेवी वर्मा और प्रेमचंद को पैदा करना होना चाहिए।
अगले व्याख्याता डॉ. राजगोपाल को नौवीं कक्षा के छात्र शौर्य सिंह ने आमंत्रित किया। डॉ. राजगोपाल के व्यख्यान का शीर्षक था “ पीढ़ी दर पीढ़ी हिन्दी को अपनाने में सामाजिक - मनोवैज्ञानिक कारण”। उन्होंने इस कठिन शीर्षक को बहुत ही सरलता से दर्शकों को बताया। शौर्य सिंह ने तीन भारत से आये अतिथियों को मंच पर एक-एक करके आमंत्रित किया। डॉ. अंजना सेंगर, शीर्षक “विभिन्न संदर्भों में मानक हिन्दी को जारी रखने की चुनौतियाँ”, डॉ. उषा किरण, शीर्षक “भारतीय युवाओं के व्यक्तित्व विकास में हिन्दी, परिवार और मित्र” एवं श्रीमती भारती मिश्रा शीर्षक “स्कूलों में भाषा शिक्षण की प्रकृति”। तीनों प्रवक्ताओं ने विभिन्न उदाहरणों के साथ अपनी बातों को व्यक्त किया और श्रोता गणों को प्रभावित किया।
कार्यक्रम के अंतिम प्रोग्राम में पैनल चर्चा थी। युवा स्वयं सेविका अन्वेषा मिश्रा (दसवीं कक्षा की छात्रा) ने सबों को आमंत्रित किया। भाग लेने वाले थे डॉ. महेश गोयल, डॉ. मीनू गोयल , डॉ. अनिल बाजपेयी एवं डॉ. सरिता बाजपेयी । शीर्षक था “हिन्दी शिक्षा नई दिशा और सभी प्रस्तुतियों के मुख्य बिन्दुओं का सारांश”। चारों ने अच्छी तरह सुबह के पुरे सत्रों का सारांश देते हूये अपने भी विचार रखे। उन्होंने दर्शकों से हिन्दी भाषा को बढ़ावा देने का काम करते रहने का संकल्प लेने का अनुरोध किया और दर्शकों ने उनका अनुरोध स्वीकार किया। कार्यक्रम के अंत तक सभी श्रोतागण सजग और जुड़े हुए थे।
***
( सत्र-2 की झलकियाँ, शनिवार, 29 जुलाई, 2023 (सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे )
|
|
|
|
|
सत्र -3 प्रतिवेदन, शनिवार जुलाई 29, 2023
द्वारा: अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति - इंडियाना शाखा
|
|
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (आईएचए) की इंडियाना शाखा और अमेरिका में भारत के महावाणिज्य दूतावास के संयुक्त तत्वावधान में 28-29 जुलाई 2023 को कार्मेल, इंडियाना, यूएसए में समिति का 21वाँ द्विवार्षिक अधिवेशन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। दो दिनों तक चले अधिवेशन में हर उम्र और वर्ग के लिए शैक्षिक और मनोरंजक सामग्री और कार्यक्रम उपलब्ध थे। अधिवेशन का मुख्य विषय था "अगली पीढ़ी के लिए हिंदी शिक्षा" । इस सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में महावाणिज्य दूत सोमनाथ घोष और विशिष्ट अतिथि के रूप में इंडियाना के राज्य सचिव श्री डिएगो मोरालेस ने भाग लिया। सम्मेलन में भारत से पाँच हिन्दी प्रोफेसरों, अमेरिकी विश्वविद्यालयों से सात प्रोफेसरों और संयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न राज्यों से लगभग 40 हिन्दी कार्यकर्ताओं और विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया।
अधिवेशन का अंतिम "सत्र 3" 29 जुलाई को शाम 5:30 बजे से रात्रि 11 बजे तक चला जिसमें 350 से अधिक लोग शामिल हुए। सत्र की शुरुआत भव्य रात्रिभोज के साथ हुई। उसके बाद गणमान्य व्यक्तियों और हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए महत्वपूर्ण कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति ने निम्नलिखित लोगों को विभिन्न श्रेणियों में अपने द्विवार्षिक सम्मान प्रदान किए ।
हिन्दी आजीवन उपलब्धि सम्मान
1 श्री शेर बहादुर सिंह
2 डॉ. नन्द लाल सिंह
3 श्रीमती सुशीला मोहनका
हिन्दी साहित्य सेवा सम्मान
1 श्री सुरेंद्र नाथ तिवारी
2 श्री रमेश जोशी
हिन्दी आभासी शिक्षण सम्मान
1 श्री अजय चड्डा
हिन्दी सेवा सम्मान
1 डॉ.सतीश मिश्रा
2 श्री इंद्रजीत शर्मा
3 डॉ. मिथिलेश मिश्र
4 श्री संजीव अग्रवाल
हिन्दी प्रचार प्रसार सम्मान
1 श्री सोमनाथ घोष
2 श्री रंजीत सिंह
हिन्दी सहयोग सम्मान
1 श्री पंकज कुमार
2 श्री अंकित श्रीवास्तव
3 श्री स्वपन धैर्यवान
4 श्री हरिहर सिंह
5 श्री अखिलेन्द्र कुमार
उत्कृष्टता पुरस्कार
1 डॉ. राकेश कुमार
(अंतिम पुरस्कार एक आश्चर्यजनक "उत्कृष्टता पुरस्कार" था जो इस सफल कार्यक्रम आयोजन के शलाका-पुरुष डॉ. राकेश कुमार को दिया गया। यह पुरस्कार समिति की इंडियाना शाखा की ओर से अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति की अध्यक्षा अनीता सिंघल द्वारा प्रदान किया गया।)
हिन्दी सेवियों के सम्मान के बाद कवि सम्मेलन के लिए सज्जित मंच पर अनीशा आनंद (मेडिकल स्कूल के दूसरे वर्ष की छात्रा) ने सभी अथितियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए सत्र-३ के कार्यक्रम का विवरण दिया। तद्पश्चात, मीका गोयल (स्नातक छात्रा) ने कार्मेल शहर के मेयर श्री रिचर्ड ब्रेन्नार्ड के प्रतिनिधि श्रीमती सूए फिन्कम को आमंत्रित किया जिन्होंने मंच पर आकर मेयर द्वारा घोषित "हिंदी सप्ताह" उद्घोषणा को पढ़ा और डॉ. राकेश कुमार को इसका प्रमाणपत्र दस्तावेज सौंपा। इसके बाद मीका गोयल ने ग्रीनवुड शहर के मेयर श्री मार्क मायर्स को आमंत्रित किया और श्रीमती विद्या सिंह ने पुष्पगुच्छ से उनका स्वागत किया। श्री मार्क मायर्स ने अपनी शुभकामना सन्देश देते हुए अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति को हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए धन्यवाद दिया और इसे आगे ले जाने में अपने समर्थन का आश्वासन भी दिया।
श्री मार्क मायर्स के स्वागत के बाद, अनीशा आनंद ने मुख्य अतिथि के रूप में महावाणिज्य दूत सोमनाथ घोष को आमंत्रित किया और डॉ. कुमार अभिनव ने पुष्पगुच्छ से उनका मंच पर अभिनंदन किया। महावाणिज्य दूत ने भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न राज्यों से सम्मेलन में भाग लेने आए प्रतिभागियों/छात्रों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की भारत सरकार की नीति और इस संबंध में उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी । स्थानीय स्कूलों और विश्वविद्यालयों में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के अध्ययन की व्यवस्था करने के लिए प्रवासी भारतीयों को प्रेरित किया । हिंदी सीखने के लिए विशिष्ट ऐप्स के विकास पर भी चर्चा की गई । इस अधिवेशन का एक विशिष्ट आयाम था- मिडिल स्कूल, हाई स्कूल एवं स्नातक के छात्रों को अलग-अलग सत्रों के संचालन के लिए तैयार करना जो बहुत ही सार्थक सिद्ध हुआ। सभी उपस्थित लोगो ने इस बात को बहुत ही सराहा कि अधिवेशन का संचालन युवाओं द्वारा हुआ। महावाणिज्य दूत सोमनाथ घोष के वक्तव्य के बाद, श्रीमती विद्या सिंह ने उन्हें प्रशंसा पत्र पट्टिका भेंट की ।
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए, मीका गोयल ने मंच पर इंडियाना के राज्य सचिव श्री डिएगो मोरालेस को आमंत्रित किया जिनका स्वागत पुष्पगुच्छ से अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की ओर से डॉ. राकेश कुमार ने किया। इंडियाना के राज्य सचिव श्री डिएगो मोरालेस ने निमंत्रण के लिए अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की इंडियाना शाखा को धन्यवाद दिया और उल्लेख किया कि हिंदी समुदाय इंडियाना राज्य का एक अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने डॉ. कुमार को उनके नेतृत्व, प्रतिबद्धता और सच्चे जुनून के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि जब हम मिलकर काम करते हैं तो हमारा राज्य और हमारा समुदाय मजबूत होता है। उन्होंने अगली पीढ़ी की सफलता की अपनी कहानी पर प्रकाश डाला और हर पृष्ठभूमि के युवाओं को उनके उत्कृष्टता के लिए प्रयास एवं प्रोत्साहित करने के हर अवसर का स्वागत किया क्योंकि वह वास्तव में अमेरिकी सपने को जीने में विश्वास करते हैं। श्री मोरालेस ने कहा कि आप हिंदी समुदाय की चुनौतियों और विजय को स्वीकार करके हमेशा प्रेरणा बने रहेंगे। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की ओर से डॉ. राकेश कुमार ने राज्य सचिव श्री डिएगो मोरालेस को प्रशंसा पत्र पट्टिका से सम्मनित किया।
उपरोक्त औपचारिकताओं के बाद, कौस्तुभ तिवारी (11 वीं कक्षा का छात्र) एवं रीतिका भदौरिया (प्रथम वर्ष मेडिकल स्कूल की छात्रा) ने अगले कार्यक्रम का संचालन किया। कौस्तुभ एवं रीतिका ने मिलकर भारत से पधारीं डॉ. अनुराधा दुबे की प्रतिभा का वर्णन करते हुए उन्हें कत्थक नृत्य के लिए आमत्रित किया। डॉ. अनुराधा दुबे का नृत्य बहुत ही मनमोहक रहा जिसको दर्शको ने बहुत सराहा। नृत्य के बाद डॉ. देवव्रत सिंह एवं श्रीमती विद्या सिंह ने उन्हें प्रसंशा पत्र से सम्मानित किया।
इस नृत्य के बाद 5 मिनट्स का विराम कविसम्मेलन की तैयारी की लिए हुआ, परन्तु इस विराम में प्रोजेक्टर स्क्रीन पर सभी प्रायोजकों एवं दाताओं के विज्ञापन चित्रों को दिखाया गया और डॉ. राकेश कुमार ने अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, विशेषकर इंडियाना शाखा के और सभी प्रायोजकों एवं दाताओं को उनके समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए ह्रदय से धन्यवाद दिया।
सुन्दर कत्थक नृत्य के बाद अब अवसर आ गया अधिवेशन के प्रतीक्षित कार्यक्रम "भव्य कवि-सम्मेलन" का। इस कवि सम्मेलन में भारत से आये चार बड़े ही प्रतिभाशाली और वरिष्ठ कवियों ने भाग लिया, और मंच संचालन हमारी अगली पीढ़ी के दो युवा छात्राओं भावी सारदा (मेडिकल स्कूल के दूसरे वर्ष की छात्रा) एवं कामना गुप्ता (मेडिकल स्कूल के चौथे वर्ष की छात्रा) ने किया।
कामना गुप्ता ने सर्वप्रथम डॉ. सरिता शर्मा जी का परिचय देते हुए उन्हें मंच पर आमंत्रित किया और श्री इंदरजीत शर्मा ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट करके उनका स्वागत किया। तद्पश्चात कामना गुप्ता ने डॉ. (कर्नल) वी पी सिंह को उनका परिचय बताते हुए आमंत्रित किया और श्रीमती अनीता सिंघल ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट करके उनका अभिनन्दन किया।
भावी सारदा ने हास्य और व्यंग्य के कवि सुदीप भोला का परिचय देते हुए आमंत्रित किया और श्री संजीव अग्रवाल उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट करके उनका स्वागत किया। अंत में भावी सारदा ने एक और हास्य और व्यंग्य की गहरी समझ रखने वाले श्री गौरव शर्मा को आमंत्रित किया और डॉ. राकेश कुमार ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट करके उनका अभिवादन किया ।
कवियों के स्वागत के बाद, भव्य कवि सम्मेलन की शुरुआत डॉ. सरिता शर्मा ने सभी कवियों का परिचय देने और कुछ प्रेरणादायक शब्दों और दिल को छू लेने वाली हास्य कविताओं के साथ की। श्री गौरव शर्मा जिन्होंने अपने वन लाइनर्स से दर्शकों को हँसने पर मजबूर कर दिया। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि वह भारत के सबसे महान "लाफ्टर चैलेंज" शो के विजेता रहे हैं और एक लोकप्रिय कलाकार रहे हैं। श्री सुदीप भोला ने हमें देशभक्ति से जुड़ी मनोरंजक और भावनात्मक कविताएँ सुनायीं। उसके बाद डॉ. सरिता शर्मा द्वारा अपनी कविताओं को सुंदर गायन शैली में व्यक्त करना दर्शकों के दिल और दिमाग को आनंदित कर देने वाला था। अंत में कर्नल वी.पी. सिंह ने कारगिल युद्ध की अपनी कहानियों से हम सभी को हँसाया और रुलाया, जहाँ उन्होंने सेना में एक डॉक्टर के रूप में काम किया था । कुल मिलाकर, दो दिवसीय कार्यक्रम मेजबानों, आगंतुकों और इंडियाना के भारतीय प्रवासियों के साथ पूरी तरह से व्यस्त, मनोरंजन और ऊर्जावान होने के साथ एक शानदार सफलता थी।
( सत्र-3 की झलकियाँ, शनिवार, 29 जुलाई, 2023 ( शाम 5:30 बजे से रात 11 बजे )
|
|
|
|
|
सभी सत्रों के प्रस्तुतियों के मुख्य बिंदुओं का सारांश दिया गया है। यदि कोई भो अपनी प्रतिक्रियाओं को साझा करना चाहें तो नीचे दिये संपादक मंडल से या सीधे मुझसे संपर्क करें।
डॉ. राकेश कुमार
Dr. Rakesh Kumar
संयोजक, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति का 21वाँ द्विवार्षिक अधिवेशन
Convener, International Hindi Association’s 21st Biennial Convention
अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति -इंडियाना शाखा, यूएसए
President, International Hindi Association-Indiana Chapter,
Email/ईमेल: ihaindiana@gmail.com
Phone/WhatsApp: +317-249-0419
Web: http://ihaindiana.org; http://www.hindi.org
***.
|
|
|
|
|
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति – शाखाओं के कार्यक्रमों की रिपोर्ट
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति - उत्तरपूर्व ओहायो शाखा
भारत के 77वें स्वतंत्रता दिवस पर शामिल
द्वारा - डॉ. शैल जैन, उत्तरपूर्व ओहायो शाखा
|
|
|
|
|
13 अगस्त, 2023 को ब्रॉडव्यू हाइट्स ओहायो में भारत का 77वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए अ.हि.स. की उत्तरपूर्व ओहायो शाखा अन्य २०-२५ नार्थईस्ट ओहायो दक्षिण एशियाई समुदायों के साथ शामिल हुए। इस कार्यक्रम की व्यवस्था इंडिया फेस्टिवल यूएसए (IF USA) द्वारा की गई थी और उसमें सिटी ब्रॉडव्यू हाइट्स ओहायो का पूर्ण समर्थन और सहयोग भी था।
आयोजन बहुत शानदार था। भारत की पीढ़ियों और विभीन्न राज्यों की संस्कृतियों को जोड़कर विविधता और समावेशन का एक अद्भुत उत्सव था। भोजन के स्टाल भी लगे थे और दर्शकगण भोजन का आनंद उठा रहे थे।
सभी समूहों के सदस्यों ने पंक्तिबद्ध होकर भारत और अमेरिका के झंडो के साथ परेड किया। स्टेज़ पर ब्रॉडव्यू हाईट्स के सिटी मेयर, इंडिया फेस्टिवल यूएसए (IF USA) एवं सभी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। इसके बाद आईएफ यूएसए (IF USA) से श्री भरत भाई और ब्रॉडव्यू हाइट्स के सिटी मेयर, श्री सैमुअल जे अलाई ने भाषण दिया और दर्शकों का स्वागत किया। भाग लेने वाले प्रत्येक समूह के प्रतिनिधियों को अपने समुदाय के बारे में 2-3 मिनट में बताने का मौक़ा मिला। उसके उपरांत मनोरंजन का प्रोग्राम था। विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम थे और प्रतिभागी सभी उम्र के थे। छोटे बच्चों को हिंदी संगीत गाते, नृत्य करते और वाद्ययंत्र बजाते देखना दर्शकों को बहुत अच्छा लग रहा था।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में 65 से अधिक प्रतिभागी थे। पूरे कार्यक्रम में 1000 से अधिक लोग शामिल हुए।भारतीय संस्कृति और स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन बहुत ही अद्भुद और प्रसंसनीय रहा।
***
.
|
|
|
|
|
|
|
<<<<<
श्री सैमुअल जे अलाई,
|
|
ब्रॉडव्यू हाइट्स के सिटी मेयर, श्री सैमुअल जे अलाई, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति उत्तरपूर्व ओहायो शाखा के सदस्यों के साथ।
|
|
|
|
|
|
|
|
|
शाखा-अध्यक्ष, दर्शकों को अपनी संस्था के बारे में बताते हुए।
|
|
|
|
|
|
अपनी कलम से
"नेताजी बनाम पार्टी के अनुशासित सिपाही"
|
|
|
|
|
|
|
द्वारा - श्री अनिल गुप्ता
|
|
श्री अनिल गुप्ता उज्जैन, मध्य प्रदेश से हैं| इन्होने एमएससी, एलएलबी एवं एम.जे.एम.सी. की शिक्षा पूरी की है । कविता, व्यंग्य, गज़ल लिखने में इन्हें विशेष रूचि है।
|
|
|
|
|
नेताजी बनाम पार्टी के अनुशासित सिपाही
नेताजी कोर कमेटी की मीटिंग से अभी अभी घर लौटे है तेज गति से आती हुई कार को देखते ही उनके समर्थक जिंदाबाद के नारे लगाते हुए हवेली की ओर बढ़ने लगे, "पोर्च में प्रवेश करते ही नारों का सैलाब आ गया" हर कोई अपनी माला नेताजी के गले मे डालने के लिए उत्सुक नजर आ रहा था "एकाएक इतनी भीड़ देखकर वे अवाक रह गए! इतनी गुलाल तो पिछले कारपोरेशन के चुनाव में भी नही उड़ी थी जब वे अकेले के दम पर पार्टी के उम्मीदवारों को जिता कर लाए थे। "समर्थकों का इतना बड़ा हुजूम देखकर उनके दिमाग की सारी बत्ती एक साथ जल उठी", हमारा नेता कैसा हो राम खिलावन जैसा हो , ऐसा लग रहा था मानो वे मीटिंग से नही चुनाव का टिकिट लेकर लोटे हैं यदि उन्हें डायबिटीज नही होती तो , लोग आज उनका मुँह मिठाई से भर देते ,स्वागत सत्कार के बाद उनके सारे समर्थक क्षेत्र से इस बार उनके चुनाव लड़ने की गुहार के साथ वापस लौट चुके थे।
वे पिछले तीन दशक से पार्टी के निष्ठावान सेवक की तरह कार्य कर रहे थे, जब जहाँ जैसी भी जरूरत हो वे आदेश पाते ही चल देते, "कितनी बार तो ऐसा भी हुआ कि आदेश बाद में आया मगर वे पहले ही चल दिए"। वे प्रत्येक चुनाव क्षेत्र में महीनों घूम घूम कर पार्टी के लिए कार्य करते , पता नही क्या जादू था "उनके पहुँचते ही विरोध के सारे स्वर बर्फ की तरह ठंडे हो जाते" इसीलिए पार्टी में उनका दबदबा बढ़ता जा रहा था उन्हें याद है पिछले चुनाव में भी पार्टी की जीत के बाद हुई मीटिंग में हाईकमान ने उनका हार से सम्मान कर "उन्हें पार्टी का अनुशासित सिपाही कहा था " और तब उन्होंने भी गदगद होकर हाईकमान की चरण वंदना की थी वह तस्वीर आज भी उनकी बैठक की शोभा बढ़ा रही है। इस वाकिये की चर्चा लंबे समय तक पार्टी में चलती रही क्योंकि ऐसे गौरवशाली क्षण कम ही देखने को मिलते हैं। सबसे निपटकर वे कमरे में दाखिल हुए, थकान उनकी चाल में साफ नजर आ रही थी दीवान पर लेटते ही हरिया आ गया ,,लाइए सरकार में मालिश कर देता हूँ उनके हाँ कहने से पहले ही वह मालिश में मशगूल हो गया ।
सुना है सरकार ई बार आप चुनाव लड़ने वाले हैं , नही तुमसे किसने कहा , दालान में जुटी भीड़ से तो यही आवाज आ रही थी ,"नही नही अभी ऐसा कुछ नही है" मगर सरकार आप हर बार दौड़धूप कर किसी को भी जीता देते हो और वे चुनाव जितने के बाद इतने बड़े नेता हो जाते हैं कि आपकी बात पर भी कान नही धरते, हवेली में आना ही छोड़ देते हैं।
इस बार क्षेत्र के विकास के लिए आपको ही चुनाव लड़ना चाहिए ताकि हमारे गाँव में भी विकास की गंगा बहे, रेल ,मोटर और हवाई जहाज गाँव मे दौड़ने लगे। हरिया भले ही गाँव के विकास को लेकर बहुत दूर तक निकल गया हो मगर उन्हें याद है पिछले चुनाव में भी कन्हैया ने कुछ लोगो के बहकावे में आकर, हाईकमान के मना करने के बावजूद चुनाव का पर्चा भर दिया "उसकी जमानत और घर दोनों जब्त हो गए " नही, नही, वे पार्टी के अनुशासित सिपाही है इसलिए इस उम्र में क्या वे किसी भी उम्र में हाईकमान के खिलाफ नही जा सकते , हरिया नही जानता तो क्या, उन्हें अपनी सीमा का अच्छे से ज्ञान है ,वे चुनाव हरगिज नही लड़ेंगे।
***
|
|
|
|
|
|
|
द्वारा -श्री अनुराग गुप्ता
|
|
श्री अनुराग गुप्ता भरतपुर, राजस्थान से हैं। इन्होने जयपुर से इंजीनियरिंग की पढाई की। २०१६ में कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका आये। अभी क्लीवलैंड, ओहायो में कार्यरत हैं। कविता लिखना इन्हें प्रिय है, नृत्य का भी शौक रखते हैं।
|
|
|
|
|
१.आज का दिन मेरे लिये बहुत ख़ास, माँ का जन्मदिन जो है इस ग्रीष्म मास,
आज का दिन मेरे लिये बहुत ख़ास, माँ का जन्मदिन जो है इस ग्रीष्म मास,
आस करुँ, हर जन्म मैं रहूँ उनके ही पास, दिल में बसे राधे और कृष्ण भरा रास !
वो मेरी दिवाली, रिक्तता की पूर्णता, अंधकार में रौशनी, और शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा,
खुशहाली सी रुदाली सी, रूप की चांदनी, महाकाली भी और कृष्ण पक्ष की अरुणिमा,
वो मेरी आस्था का पर्व, करुणा का महापर्व, और भक्ति के आँसुओं का झरना,
मेरे बचपन का पालना, मेरा आगे पीछे फिरना और माँ कहते कभी ना थकना,
वो मेरी होली, घर की रंगोली में घुली ठिठोली सी, सृष्टि का स्वर्ग और स्वर्ग का पर्याय,
मधुरिमा भोली, मिश्री सी बोली, मेरी माँ धैर्य समर्पण और सन्मार्ग का अध्याय,
वो मेरी किस्मत और हिम्मत, सनातन रामायण गीता भी और ज्ञान, वात्सल्य भरा स्नेही स्पर्श,
शिव की पार्वती, कर्म तर्क शास्त्रसम्मत, सरस्वती रुपी माँ को सादर चरण स्पर्श,
आज का दिन मेरे लिये बहुत ख़ास, माँ का जन्मदिन जो है इस ग्रीष्म मास,
आस करुँ, हर जन्म मैं रहूं उनके ही पास, दिल में बसे राधे और कृष्ण भरा रास,
तू अहोई, तू सावित्री, तू शीतलता, तू आशीर्वाद और चार धाम भी,
तेरे घर के बनाये खाने की तुरपाई से मैं, अपनी भूख सिलता हूँ,
घर का बरगद, पीपल आँगन की तुलसी पलाश, रिश्ते नाते और,
तेरे संस्कार कहते हैँ कि मैं माँ, बिलकुल तेरे जैसा दिखता हूँ,
सबरी, मीरा सीता दुर्गा मैंने नहीं देखीं पर तूने उन जैसा मेरे मन में आकार लिया,
अपने ही लोग कितना भी प्यार करे पर तूने मुझे 9 महीने ज्यादा प्यार किया,
अहिल्या, जीजाबाई, अरुंधति, दमयंती, और अनुसुइया के इतिहास को लेके जब तू
मेरे दिल में बहती है,
मेरे सारे रिश्तो का संगम बन, यक्ष जैसे प्रश्नो का उत्तर दे गंगा सी पावन बहती है!
तू मेरा अनमोल खज़ाना, पवित्र भावना, दिल में सद्भावना, शक्ति की उपासना,
तेरे जन्मदिन पे बस यही प्रार्थना, हो तेरी पूरी सारी कामना, ऐसी मेरी शुभकामना,
आज का दिन मेरे लिये बहुत ख़ास, मेरी माँ का जन्मदिन जो है इस ग्रीष्म मास,
आस करुँ, हर जन्म मैं रहूँ तेरे ही पास, दिल में बसे राधे और कृष्ण भरा रास !!
२. हिंद से मैं और हिंदी से हिंदुस्तान !!
चल लिख दूँ तुझे अनुरागी स्याही से,
हिंद से मैं और हिंदी से हिंदुस्तान !!
सारी भाषाओं का एक ही प्रयाग,
और अनुराग भरा उन्मादी राग,
जैसे फूलों और भंवरों से लिपटा पराग,
सूरज की रोशनी सा बहता ये चराग,
अंधकार को चीरके आसमां में करता सुराग !
लेकिन मुझे नहीं किसी से भी विराग!
चल लिख दूँ तुझे अनुरागी स्याही से,
हिंद से मैं और हिंदी से हिंदुस्तान !!
***
|
|
|
|
|
|
|
द्वारा - डॉ. सुरेंद्र नेवटिया
|
|
डॉ. सुरेंद्र नेवटिया, न्यू यॉर्क से हैं| ये पेशे से मेडिकल डॉक्टर है। ३ दशक पूर्व भारत से आये थे। सेवा निवृत होने के बाद पुनः कलम उठाई है और अपनी भावनाओं को अपनी भाषा में कागज पर लिपि बद्ध किया है। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के आजीवन सदस्य हैं।
|
|
|
|
|
|
|
|
|
इंतज़ार करते करते परछाईयाँ लंबी हो गई।
पत्तियाँ बग़ावत कर गई और पेड़ तन्हाई में खड़े रहे।
ठंडी हवा बहती रही, पहाड़ बर्फ की चादर में सिमटे रहे।
कौन उन्हें समझाए की बहार के मौसम का अब हमें इंतज़ार है।
***
|
|
|
|
|
2. “काव्य और कवि”
नहीं नहीं मैं कवि नहीं,
बस एक इस विधा का सेवक हूँ।
बचपन से चाह लगी थी लिखने की,
उसी धारणा को इन पंक्तियों से अर्चना किए जाता हूँ।
कई शाम निकल जाती बिना लिखे और जल जाती बत्तियाँ,
शब्द कभी मिल जाते चिंगारी की तरहां,
भर देती ख़ाली पंक्तियाँ।
कहानी कभी अपनी कहता हूँ और कभी बैगानो की,
ख़ुशियों के जलसे निकले है कई बार और कभी गाथा जीवन के पीड़ा की।
शब्द इनमें मेरी ख़ुशियाँ और उदासी की परछाईयां है,
इन पंक्तियों से सच्चाइयाँ उभर लाता हूँ।
अच्छा लगता है मुझे जब जीवन के सन्नाटे में कुछ नई आवाज़ दे जाता हूँ,
अन्दर की भावनाओं को एक आशा दिये जाता हूँ।
***
|
|
|
|
|
अपनी कहानियाँ
“लट्टू की माँ”
|
|
|
|
|
 |
| |
|
|
|
 |
| |
|
द्वारा - श्री मनीष कुमार सिंह
|
| |
|
श्री मनीष कुमार सिंह गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश से हैं। करीब डेढ़ सौ कहानियॉं और दो दर्जन लघुकथाऍं लिखी हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं यथा-हंस, नया ज्ञानोदय, कथादेश, कथाक्रम, समकालीन भारतीय साहित्य, पाखी, भाषा, पुस्तक वार्ता, दैनिक भास्कर, नयी दुनिया, नवनीत, शुभ तारिका, अक्षरपर्व, अक्षरा, लमही, परिकथा, शब्दयोग, साक्षात्कार इत्यादि में कहानियॉं और लघुकथाऍं प्रकाशित।
|
| |
|
|
|
|
लट्टू की माँ
बच्चों से बचपन छीना जा सकता है पर बचपना नहीं। जामुन के पेड़ के नीचे बनी झुग्गी के बाहर तीन बच्चे पकड़ा-पकड़ी खेल रहे थे। पंक्षियों की तरह चहचहाकर नाचते हुए बोल रहे थे। तोता-मैना जामुन गिरा दे। लेकिन जामुन भला ऐसे कैसे गिर जाएगा। पहले के गिरे हुए जामुन बीने जा चुके थे। सबसे छोटा तीन साल का था। दो लड़कियाँ क्रमश: सात और दस की होगीं। उनका कलरव सुनकर पास में चूल्हा जलाती माँ मुस्कराने लगी। पानी की बालटी पर एक कौआ आकर बैठ गया। कई रोज से सूखे पड़े सरकारी नल से बूँद-बूँद पानी ऑंसू की तरह टपक रहा था। पीने और खाना पकाने के लिए सुबह-शाम पानी चाहिए। कौआ को उड़ाने की बजाय आटे की एक लोई फेंक कर माँ बगल की झाड़ी में फैलाए कपड़े उठाने के लिए आवाज देने लगी। बड़ी लड़की उसकी बात सुनकर कपड़े उठाने लगी। नाम कुछ और था लेकिन टोले-मुहल्ले में लट्टू की माँ के नाम से जानी जाती थी। लट्टू यानि उसका छोटा बेटा।
झुग्गियों का एक झुण्ड़ खाली प्लॉटों में अवस्थित था। आसपास अज्ञातकुलशील पेड़-पौधों और झाडि़यों का झुरपुट बन गया था। दिन भर बच्चे इनके बीच खेलते और कुछ खाने की चीज ढूँढ़ते। कुदरत की हर चीज को स्त्रीलिंग या पुलिंग में नहीं बॉंटा जा सकता है। कुछ वनस्पतियॉं, खटमिट्टे फल और झरबेरियॉं बालरूप होते हैं। निम्मी जरा लंबी थी। टहनियों पर लगे फल को उचककर या कंटीली झाड़ी में एकाध खरोंच पाकर भी आधे पके अज्ञात गोत्र का फल तोड़कर वह भाई-बहन में बॉंटने लगी। खुले आसमान के नीचे बच्चों ने अपना खजाना सजाया था। चमकीले पत्थर, चिड़ियों के पंख, कंचे वगैरह पेड़ के नीचे गड़ढे में रखे हुए थे। यह मुक्ताकामी संग्रहालय तीनों की साझी संपत्ति थी। उस रोज झुग्गी से जोर-जोर से लड़ाई-झगड़े की आवाज आती रही। आज फिर उसका मर्द शराब पीकर लड़ रहा था। पति लड़ाई में अक्सर हाथ उठा देता। लट्टू की माँ अच्छी कद-काठी की स्त्री थी। शराबी कमजोर होता है लेकिन फिर भी मर्द का हाथ है। जिन घरों में वह काम करती थी उसके बांशिंदों ने उसे कभी-कभार चोटिल देखकर हाल-चाल पूछा़। वह कड़े दिल की थी। यह बताने में कभी गुरेज नहीं किया कि ये चोट पति के द्धारा पहुँचाए गए हैं लेकिन आँखों से ऑंसू या जबान पर दर्द जैसी कोई बात नहीं छलकी। औरतों ने भी कहानी में ज्यादा मजा न मिलने पर मामले की बारीकी में घुसना ठीक नहीं समझा।
‘’भाभीजी अगले महीने से पगार बढ़ा देना। मेरा मर्द कहता है कि इतने पैसे में काम करने से अच्छा है कि तू घर बैठकर चूल्हा-चौका सँभाल। मैं कामकाज करने के लिए काफी हूँ।’’ बाद में यह भेद खुला कि इस वक्तव्य के पीछे मर्द का पुरुषार्थ नहीं बल्कि पति का उसके चाल-चलन पर शक बोल रहा है। फ्लैट में रहने वाली स्त्रियों ने लट्टू की माँ के भीरूपन की समवेत स्वर में निंदा की।
दो घरों से काम छोड़ने की वजह छह महीने के भीतर पगार बढ़ाने की अनुचित माँग थी।
बर्तन धोते हुए उसे रसोई में मुँह चलाते देखकर घर की मालकिन ने पूछा,’’क्या बात है?’’
‘’मेमसाहब मुझे सुपारी का शौक है। इससे पहले भी लोगों ने पूछा है। हम तो मॅुंह खोलकर भी दिखा देते हैं। कहीं कोई यह न सोचे कि रसोई में कुछ चुराकर खा रही है।’’
‘’तू अपना मिजाज बदल। लोग तुझसे परेशान हो गए हैं।’’ एक नरमदिल महिला ने उसे एक बार सत्परामर्श दिया।
दो दिन बाद संभ्रांत स्त्री को अपनी कामवाली का असली रंग मालूम हुआ। ‘’भाभीजी मेरा मर्द कहता है कि आपके मर्द मुझ पर गलत नजर रखते हैं। मुझसे आपके घर का काम छोड़ने को कह रहा है।’’
इस प्रकार के वचन सुनकर उस भली औरत को गश आ गया। तनिक प्रकृतिस्थ होकर बोली,’’तेरा मर्द पागल तो नहीं है?’’
‘’भाभीजी वो गलत बोलता है लेकिन है तो आखिर मेरा मर्द। उसे नाराज करके कहाँ जाऊँगी। इसलिए आपके यहाँ काम नहीं कर सकती।’’अनपढ़ औरत से क्या बहस करना।
एक दिन अशुभ समाचार आया। लट्टू की माँ का पति शराब के नशे में धुत मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे-बैठे सड़क पर लुढ़क गया। पीछे से आने वाली गाड़ी ने उसे रौंद डाला। घटनास्थल पर ही मौत हो गयी। लोगों ने अनुमान लगाया कि वह अपने नशेड़ी साथी के साथ पीकर लौट रहा होगा।
अक्लमंद स्त्री ने जिद्द करके उसका बीमा कर रखा था। कुछ दिनों की दौड़-धूप के बाद पैसा मिल गया। पति के व्यसनी होने के कारण मालमत्ता नदारद था। घूँघट काढ़ने की कोशिश करो तो पीठ दिखने लगेगी। मध्यमवर्ग के संभ्रात लोगों में अल्पकाल के लिए उसके प्रति सहानुभूति की लहर व्याप्त हुई। बेचारी कैसे घर-परिवार चलाएगी? पति-पत्नी में से किसी के न रहने पर परिवार टूटी गाड़ी जैसा हो जाता है। जिन्दगी चलती नहीं बस घिसटती है। पढ़े-लिखे समाज में अकेली माँ या अकेले पिता को घर चलाने में नानी याद आ जाता है।
वह नरमदिल महिला के घर गयी। ‘’अरी अब क्या लेने आयी है?’’ पहले मन किया कि दरवाजे से लौटा दे लेकिन फिर इंसानियत के वास्ते अंदर बुलाया। आखिर पढ़े-लिखे होने का कुछ तो फर्क पड़ता है। रोने-धोने लगी तो उसने उसे कुछ पैसे पकड़ाए। ‘’नहीं भाभीजी ये नहीं ले पाऊँगी।’’ शायद बस इंसानी हमदर्दी की तलाश में आयी थी। अंत में जिद्द करके उसने लट्टू की माँ को बच्चों का वास्ता देकर खाने की कुछ चीजें दी।
मेन मार्केट में लट्टू की माँ ने फल-सब्जी का ठेला लगाना शुरु कर दिया। आज के जमाने में भी औरतों में कस्बाई दया-धर्म मौजूद है। फ्लैट में रहने से क्या हुआ? एकाध परिचित महिलाओं ने पूछा। अरी तू यहाँ...! ‘’मेमसाहब बर्तन-पोछा से अच्छा अपना काम है। इसमें अपनी मर्जी चलती है।’’ आगे बढ़ गयी महिलाओं को उसकी हँसी सुनायी दी। ‘’बाजार में काम करने पर चर्बी ज्यादा गलती है। घर के काम में वो बात नहीं।’’
आज के बाद कोई इसे अपने यहाँ काम पर नहीं रखेगा। वह लाख कहेगी तो भी नहीं।
घर लौटने पर दोनों बेटियों ने रुआंसी होकर यह बताया कि लट्टू एक बड़ी गाड़ी के नीचे आते-आते बचा। आसपास के राहगीरों की सॉंस धक से रह गयी। वह अपनी रुलाई रोककर सोचने लगी कि बच्चों की हिफाजत ज्यादा जरुरी है या उनकी खातिर रोटी का बन्दोबस्त।
शाम को खाने की तैयारी करते वक्त चूल्हे में आग पकड़ नहीं पा रही थी। बुझे चूल्हे में बार-बार फूँक मारने से ऑंखें कड़वे धुँए से गीली हो गयीं। अधजली लकड़ियों से निकलते धुँए जैसी मरणासन्न इच्छाओं के पूरा होने की संभावना न होने पर भी उम्मीद कौन छोड़ता है। वह लगातार कोशिश कर रही थी। पीछे कोई आकर कब खड़ा हो गया उसे पता नहीं चला। कुछ दूर पर झुग्गी डालकर रहने वाला देवर था। उसका वर्तुलाकार मुख स्थूल उदर व बृहदाकार कटि से मेल खा रहा था। ‘’चल छोड़ दे ये झंझट। मेरे पास गैस स्टोव है। आगे से खाना उसपर पकाना।’’
उसे संकुचाई देखकर वह आगे बोला,’’मिलजुल कर रहेंगे तो बच्चों की देखभाल हो जाएगी।’’
गैस स्टोव जलाकर वह जल्दी-जल्दी रोटी सेंकने लगी। देवर यह देखकर हँसने लगा, ’'इतनी जल्दी किस बात की है?’’
‘’वो बच्चों को भूख लगी है।’’
देवर ने जैसे उसकी बात सुनी नहीं। ‘’कुछ काम मंद ऑंच पर ही होते हैं। जल्दबाजी करने से जायका खराब हो जाता है।’’
नादान से नादान मुर्गा भी भरी दोपहर में बॉंग नहीं देता है। वह सब समझ रही थी लेकिन मरती क्या न करती।
अगले दिन देवर ने लट्टू को गोद में उठाकर कहा,’’बिल्कुल भईया से शक्ल मिलती है।’’ बिस्कुट का पैकेट देकर बोला, ‘’सब मिलकर खाना।’’ वह बस इतने पर खुश हो गयी।
‘’आज खाना मिलकर खाएगें।‘’ देवर जरा इधर-उधर नजर दौड़ाकर बिना किसी को संबोधित किए बोला। यह सुनकर पुलक कर स्टोव जलाने चली गयी। जब स्टोव पर पलक झपकते नीली ऑंच आयी तो फूलती हुई रोटी मानो हँस रही थी। हाथ के थपेड़े से आटे की लोई को रोटी का आकार देकर वह तवे पर डालती जाती। आज जमीन पर दरी बिछाकर बच्चों को खिलाते हुए वह बार-बार उन्हें और खाने को कह रही थी। ‘’तूने फिर आधी रोटी छोड़ दी? चल निम्मी तू थोड़ी सी दाल और ले। कल कढ़ी बनाऊँगी फिर देखना बिना पूछे कितनी रोटी खाएगी।’’
निम्मी अपनी छोटी बहन झुप्पा की ओर इशारा करके बोली,’’माँ यह कह रही है कि मुझे खाने के लिए परांठा चाहिए।’’ झुप्पा माँ की ओर टुकुर-टुकुर देखकर मुस्कराने का प्रयास कर रही थी।
‘’चल किसी दिन बना दूँगी।’’ उसने वादा किया लेकिन तारिख नहीं बतायी। जितना बड़ा हवनकुण्ड़ होगा समिधा उतनी लगेगी।
देवर ने टोका, ’’तुम भी खाओ। बिना भरपेट खाए कैसे काम करोगी?’’ वह खाने के साथ लगातार उसे निरख भी रहा था।
झुम्पा झुग्गी के अंदर से गत्ते का एक पुराना डिब्बा गाड़ी बनाती हुई खींचकर लायी। डिब्बे से चूहे के नवजात शिशु बाहर जा गिरे। धूप में असहाय पड़े उन जीवों को देखकर तार पर सतर्क बैठे कागों की लार टपकने लगी। निम्मी फुर्ती से उसके हाथ से गत्ते का डिब्बा लेकर उसमें नन्हें चूहों को रखने लगी। ‘’चल छोड़। डिब्बे को अंदर रख दे।’’
बात झुग्गियों से ही फैली। इसका अपने देवर से संबंध है। इस औरत ने अच्छी माया जोड़ी है। देवर देह और माया दोनों हथियाना चाहता है। यह औरत भी कौन सी दूध की धुली है। पहल उसी ने की होगी। जाने दो। पराये मामले में हम क्यों पड़े। हर कोई ऑफ दी रिकार्ड अत्यंत गंभीर होकर निहायत अगंभीर गुफ्तगू में लगा हुआ था। हालॉंकि अभी भी ज्यादातर लोगों की सहानुभूति उसके साथ भी लेकिन कॉलोनी के कतिपय जानकार के विचार नितांत अलग थे। ऊपरी मंजिल पर रहने वाले नीचे सड़क पर खड़े ठेले वाले से थैला लटकाकर सब्जी ले रहे थे। रस्सी खींचते समय वे पतंग की डोर लपेटते हुए प्रतीत हो रहे थे। सामने रहने वाले सज्जन से नयनाचार होने पर सामयिक विषयों पर संवाद प्रारंभ हुआ। यह सर्वसम्मति बनी कि हिंसा मृगया की शिकार स्वयं एक धुरंधर खिलाड़ी बन गयी है।
‘’दुनिया-समाज जाने कहाँ से कहाँ पहुँच गयी है।’’ देवर के स्वर में हमदर्दी के साथ आश्चर्यजनक रूप से सामान्यत: मध्यमवर्ग में पाए जाने वाले बौद्धिकता का पुट भी था। ‘’भईया बड़े अच्छे थे लेकिन मुर्दा चाहे जितना भी अच्छा रहा हो लेकिन सामने खड़ा जिन्दा ज्यादा बड़ा होता है।’’ स्वयं पर पड़ती उसकी निगाहें देखकर लट्टू की माँ को अपने पति की नजरें याद आ गयीं। बरबस उसकी पलकें झुक गयीं। देवर उसकी झुकी निगाहों को अर्धस्वीकृति मान रहा था।
देवर का इन दिनों यह बारंबार बोलना उसे कानों में मधुर घंटियों सदृश्य लग रहा था। ‘’तू मुझे पराया मत समझ। बच्चों की फ्रिक तूझ अकेले को थोड़े न करनी है।’’ लट्टू की माँ के मन से एक बड़ा बोझ उतर गया। काया सुख का जीवन में अपना महत्व होता है। इस सुख की दिशा में जाने वाले अश्व समवेग पाकर आवेग में बदल जाते हैं। देवर की हर हरकत के पीछे उसकी स्वीकृति थी। तीन महीने कैसे बीत गए यह पता ही नहीं लगा। वह रोज मन लगाकर उसकी पसंद का खाना बनाती। वह मुर्गा-मछली और अण्डा लाता। साथ में शराब की बोतल भी होती। ‘’अरे पीने में कोई बुराई नहीं है। भईया को बेहिसाब पीने की आदत थी इसलिए चले गए। जो आदमी बिना खाए पीएगा वह ज्यादा नहीं जी सकता।’’
मृत पति का इस प्रकार जिक्र करना उसे अच्छा नहीं लगा। वह उठने लगी। ‘’बैठो जरा। कौन सी भैंस बिना दूहे खड़ी है।’’ परिहास की मुद्रा में बैठे देवर को उसके साहचर्य में लुफ्त आ रहा था।‘’ मसालेदार जर्दे का भरपूर प्रयोग करके वह मदिरापान की गंध को दबाने का प्रयत्न करता। वह उसकी इतनी सी शराफत से कृतज्ञता से झुक जाती। वह टी.वी. धारावाहिकों में दिखने वाले देवी-देवताओं जैसा हमेशा मुस्कराता रहता।
‘’तू पुरानी बातें छोड़। रोज दस रुपए की चायपत्ती और एकाध किलो आटा लेने की आदत अब रहने दे। एक बार में महीने भर का सामान रख ले।’’ देवर की ये बातें आश्वस्तकारी लगीं। नून-तेल, लकड़ी की मुहावरेदार पंक्ति संपूर्ण गृहस्थी के प्रबंधकीय चिंताओं को समेटी हुई थी।
बरसात आने पर हमेशा की तरह झुग्गी की छत टपकने लगी। वह आदत के मुताबिक बालटी रखने लगी। ‘’ऐसे नहीं चलेगा,’’ देवर यह देखकर बोला।
‘’छानी के पानी से दाल अच्छी बनती है। हमारे गॉंव में बर्तन-घड़े सब बारिश के पानी से भरे जाते हैं। खपरैल से चुआ पानी बड़े काम का है।‘’ वह चहकी।
‘’छोड़ वो सब चीजें। यह शहर है। यहाँ यह पानी गंदगी मानी जाती है।’’
अगले दिन छत की मरम्मत हो गयी। देवर को लग रहा था कि इधर-उधर की बातें इतनी लंबी हो गई हैं कि मूल विषय भूसे के ढ़ेर में अनाज के दाने की तरह खो गया है।
‘’झुग्गी में अब काफी जगह हो गयी है। बच्चे बड़े हो गए हैं। उनके लिए अलग बिस्तर डाल दे।’’ देवर की आँखों में रक्तिम आभा थी। वह जल में मनोनुकूल आहार पाने की आकांक्षा से प्रेरित मगरवत विचरण कर रहा था। "लट्टू अकेले में रात को जग जाता है। उसे साथ सुलाना पड़ेगा।" वह बोली। बीच में लट्टू को सोया देखकर देवर छिपकली की कटी पूँछ की तरह छटपटा रहा था।
‘’हम दोनों शादी कर ले तो अच्छा होगा। ऐसे कब तक चलेगा?’’ एक रोज वह बोल पड़ी।
‘’अरे यह सब बड़े घरों के चोंचले हैं!’’ वह रुक्षता से बोला। प्रेमी होना पति होने से अधिक सुविधाजनक था।
बीमा की रकम हाथ आने पर देवर ने हँसकर कहा,’’इसमें कुछ मेरा भी हिस्सा है कि नहीं।’’ वह हँसकर टाल गयी। ‘’आज काम पर जाने का मन नहीं है।‘’ वह झुग्गी में पूरे दिन पसरा रहा। बच्चों को बात-बात पर झिड़का। झुग्गी के अंदर पड़े खाट और अलमुनियम के बर्तनों को ऐसे घूर रहा था जैसे कोई सेठ अपनी जायदाद बिना वसीयत लिखे दिवंगत हो गया हैं।
अब उसने घर-गृहस्थी में कोई योगदान देना बंद कर दिया। लट्टू की माँ गृहस्थिन से पुन: कामकाजी औरत हो गयी।
‘’क्या बात है आजकल काम पर नहीं जा रहे हो? वह बोली।
दारु की बदबू का भभका उठा। ‘’अपनी मर्जी से काम करने वालों में हूँ। ठेकेदार से मेरी नहीं पटती है।’’ अपने पति के शराबी होने पर भी उसे इतना डर कभी नहीं लगा था।
‘’लेकिन रोजी के लिए कुछ तो करना पड़ेगा।’’
‘’तू भी काम कर सकती है। तेरे पिल्लों को खिलाने-जिलाने का ठेका मेरा नहीं है। इन्हें बड़े घरों जैसा तीन टाइम खाना खिलाना जरुरी नहीं है।’’ हाथ में पावरोटी का सिका टुकड़ा लिए बच्चे ठगे से खड़े रह गए। देवर के मॅुंह से शराब की दुर्गंन्ध के साथ दिमाग से शातिर चाल झलक रही थी। इतने महीनों में पहली बार उसके अंदर देवर के प्रति घृणा जैसा कोई भाव जगा।
‘’तेरे वादे का क्या हुआ?’’
यह सुनकर देवर ने अपने नजरें उसपर ऐसी डाली मानो साँप ने फन उठाया हो। ‘’जो औरत अपने मरे हुए मर्द को दो दिन में भूला दे वह किसी की क्या होगी?’’ उसने स्पष्ट कर दिया कि वह उतना ही सामंतवादी सोच का है जितना मर्द को होना चाहिए। बौद्धिकता काम निकालने का जरिया है। बोझा ढ़ोने की चीज नहीं। उस दिन दोनों में जमकर झगड़ा हुआ। हाथापाई तक हुई। डरे-सहमे बच्चे दूर से देख रहे थे। ‘’बदनाम ऐसा करुँगा कि तू मुहल्ला छोड़कर चली जाएगी।’’ देवर ने धमकी दी। उसकी ऑंखें हत्यारे के चाकू की मानिंद चमक रही थी। काम तरंगित रुधिर प्रवाह से वशीभूत मधुकंठी पक्षी जैसी वाणी बोलने वाले अब कर्कश निनाद करने लगा।
‘’अरे जा-जा बदनामी की धौंस औरत को क्यों दिखाता है? तेरे पास इज्जत नहीं है क्या? नहीं है तो इसमें मेरा क्या कसूर।’’ झगड़े की पराकाष्ठा में उभय पक्ष मरने-मारने में उतारू होते हैं। महाभट्ट की भॉंति उनके शीशविहीन कबन्ध भी मैदान छोड़ने को राजी नहीं होते हैं। लट्टू की माँ को प्रतीत हो रहा था कि इस असमान युद्ध में कभी उसका शीशविहीन कबन्ध जूझ रहा है तो कभी बर्बरिक की भॉंति कबन्ध विहीन शीश निरुपाय होते हुए भी शत्रु को ललकार रहा है।
‘’हमने तूझे सत्तू माँगने पर मोतीचूर दिया है। पर तू एहसानफरामोश निकली।’’ देवर एकत्रित लोगों को सुनाने की खातिर पंचम सुर में बोला।
‘’तेरी हकीकत मालूम है। जा किसी और को सुनाना। मेरे बच्चों की तरफ बुरी नजर डाली तो दुनिया में शोर मचा दूँगी।’’
वह हँसने लगा। ‘’अरी बावरी हमने साबुत सुपारी को दॉंतों से तोड़ दिया है। क्या बताशा खाने में कोई दिक्कत आएगी?’’
लट्टू की माँ ने सॉंसों के सिलसिलेवार होने तक इंतजार किए बगैर आगे बोलना चाहा लेकिन कंठ और जुबान ने हाथ खड़े कर दिए।
आखिर वह क्यों मान गयी? उसे प्यार और प्रपंच के बीच भेद क्यों नहीं दिखा? बिना भावना के संबंध में घर बुढि़या के दॉंतों की तरह हिलता है। यह बात समझने में देरी क्यों लगी?
दूसरे की घर की लड़ाई को अगल-बगल वाले उसी कौतुक से निहार रहे थे जैसे मुर्गो की जंग देखी जाती है।
उसे निगलने के लिए धरती क्यों फटेगी? आखिर धरती के पेट में उसके जिंदा रहने से कौन सा दर्द हो रहा है। सारी शर्म अकेले खुद क्यों झेलेगी? देवर विषहीन सर्प की भॉंति मात्र कुवाच्य बोलकर फुँफकार सकता है लेकिन कोई क्षति नहीं पहुँचा पाएगा।
देवर के जाने के बाद बच्चे छिपी हुई बिल्लियों की तरह बाहर निकले।
वह अपनी दी हुई हर चीज ले गया। जर्जर दीवाल पर टॅगे खूँटे को उखाड़ने में पूरी दीवाल बीमार शरीर की भॉंति कॉंप गयी। लट्टू की माँ यह देखकर विद्रूपता से हँस पड़ी। वह अक्सर दरवाजा खुला छोड़कर काम पर निकल जाती थी। इस झुग्गी में अगर गलती से डाकू आ गए तो क्या पाएगें। हाँ शगुन की खातिर रुपया-दो रुपया माँग कर जरुर ले जाएगें। लेकिन वह इस तरह लूटेगी इसका गुमान नहीं था। देह राग के ऊपर हृदय राग का वर्चस्व शायद नहीं होता है। मृतक का दाह संस्कार होता है लेकिन जिन्दा लोग इंसानियत को अस्थिविसर्जन तक कर देते हैं। प्याज जितनी मर्जी छीलो लेकिन कोई दाना हाथ नहीं आएगा। सच बात है कि लालच पानी में बहता कम्बल जैसा है। उसे पकड़ने पानी में उतरने वाले को पता चलेगा कि कम्बल के बदले रीछ पानी में है। वह रीछ से चाहे जितनी भी पिंड़ छुड़ाना चाहे लेकिन रीछ बिना उसकी बोटी खाए छोड़ने वाला नहीं है। घरेलू झगड़े उसके लिए कोई नयी बात नहीं थे। दिवंगत पति लगभग रोज मारपीट करता था लेकिन इस घटना ने जैसे भेड़िये के दांत और नाखून के खरोंच उसके मन में लगा दिया।
उस दिन चूल्हा नहीं जला। दूसरे दिन सुबह निम्मी ने कच्चा-पक्का जैसा भी बन पड़ा लाकर माँ और भाई-बहन को परोसा। ऐसा नहीं कि लड़की ने पहले घर का काम नहीं किया था पर आज लट्टू की माँ की ऑंखें भर आयीं। वह बिछौने पर मुड़ी-तुड़ी लेटी रही। ‘’जा तुम सब खाओ। मुझे भूख नहीं है।‘’
‘’जरा सा खाने में क्या हो जाएगा माई।’’ बेटी मनुहार करने लगी। हृदय कामना रहित हो सकता है। मस्तिष्क का विचार-शून्य होना संभव है पर उदर में क्षुधा की आग न भड़के यह कैसे मुमकिन है।
‘’तूने खाया?’’
निम्मी ने पेट फुलाकर डकार ली। ‘’मैंने खा लिया।’’ लट्टू की माँ इस डकार का अभिप्राय समझ गयी कि यह सच्चाई छिपाने का उपक्रम है। छोटे भाई-बहन को खिलाते हुए वह अपना हिस्सा भी खिला गयी। ‘’चले मेरे साथ बैठ।’’ उसने प्यार से डॉंटा। मुश्किल से दोनों को दो-दो कौर मिले। दोनों का प्रयास था कि दूसरे को ज्यादा ग्रास खिला दें। इस चेष्टा में माँ-बेटी का झगड़ा हुआ।
मेहनतकशों की औलाद घर-बाहर का काम सीखती है। किताब-कॉपी इसमें बाधक हैं अत: उन्हें आरम्भ से ही बहिष्कृत किया जाता है। हालॉंकि निम्मी एकाध साल स्कूल गयी थी। मिड डे मील का आकर्षण था। माँ का नाम भले ही उसके छोटे भाई लट्टू के नाम पर प्रसिद्ध हो लेकिन घर में काम करने और छोटे भाई-बहन की देखभाल का पूरा जिम्मा उसने उठा लिया।
"इस कलूटे को नहलाने में पूरी एक बालटी पानी लगता है।" निम्मी ने लट्टू को गोद में लेकर प्यार से शिकायत की। वह दीदी की गोद में हँस रहा था।
‘’तू किसी मेमसाहब के घर होती तो अच्छे से चोटी करके स्कूल जाती।‘’ माँ की इस इच्छा का अर्थ उसके पल्ले ज्यादा नहीं पड़ा।
काफी दिनों बाद माँ और बच्चे एक जगह सोये। नींद के आगोश में जाने से पहले खूब बातें हुई। ‘’इस दीवाली में मैं चरखी चलाऊँगी।’’ झुप्पा बोली। ‘’मुझे दो चरखी चाहिए।‘’ लट्टू बिस्तर पर पड़े-पड़े दो उँगलियॉं दिखाकर बोला। ‘’चल मेरे बाबू तूझे मैं अपनी चरखी दूँगी।‘’ निम्मी ने उसके गाल को छूकर कहा।
माँ सबको शाब्दिक वाहन में बैठाकर दीवाली की खरीदारी कराने बाजार घूमा लायी।
लट्टू की माँ कॉलोनी के उन घरों में गयी जहाँ वह पहले काम करती थी। उधार माँगा। संसार अभी धर्मात्माओं से रिक्त नहीं हुआ है। उसे कर्ज मिल गया। लेकिन सीढि़यों से उतरते हुए उसे कुछ सुनायी
दिया। इसका अपने देवर से रिश्ता बना था। देवर ने शादी करने से मना कर दिया। पराये बच्चों वाली को कोई क्यों ढ़ोएगा?
‘’मेरे बच्चें हैं। इनकी जिम्मेवारी निभाने का दम रखती हूँ।‘’ वह सगर्व बोली।
आज सुबह से ही लट्टू का बदन गर्म था। शायद रात में भी बुखार रहा होगा। वह डॉक्टर को दिखाने ले गयी। डॉक्टर ने दवा लिखते हुए पूछा,’’क्या इसको समय पर टीका लगवाया था?’’ उसकी चुप्पी पर वह व्यंग्य से मुँह बना कर बोला,’’चलो अब कम से कम ये दवाईयॉं समय पर देना।’’
दो दिन बीत गए। लट्टू बरसों पुराने अखबार के पन्ने सरीखा पीला पड़ा था। रोजी-रोटी की खातिर वह काम नहीं छोड़ पायी।
देर शाम को जब अंधियारा गहराने लगा तब निम्मी उसे ढूँढ़ती हुई बाजार आयी। ‘’माई...!!’’ आवाज संवाद का माध्यम और संदेश का जरिया होती है। परंतु हर आवाज की प्रतिध्वनि नहीं होती है। निम्मी की चीत्कार में रोंगटे खड़ी कर देने वाली प्रतिध्वनि थी।
‘’माई लट्टू के पास जल्दी चलो। वह पानी नहीं पी रहा है। ऑंख भी नहीं खोल रहा है।’’ वह फौरन झुग्गी की ओर भागी। रास्ते में घुप अंधेरा था। स्ट्रीट लाइटें मुर्दे की तरह बुझी पड़ी थीं। इस भुतहे अंधेरे में राहगीर काली छाया की तरह विलीन हो रहे थे। दूसरी तरफ से आने वाले अलबत्ता आश्चर्य की भॉंति प्रकट होते थे। उसे दौड़ता देखकर एकाध राहगीर उत्सुकता से रुक गए। घर पहुँचते-पहुँचते अंधियारे ने हर चीज के मूल रंग पर कालिमा पोत कर अपने जैसा मनहूस बना दिया। सदा चरखी जैसा नाचने वाले लट्टू की देह आटे की लोई की भॉंति लटकी हुई थी। माँ का मन कहाँ मानता है। रिक्शे पर अपने बेटे को लेकर वह अस्पताल गयी। शायद मन के कोने में यह उम्मीद थी कि उसकी औलाद मृत्यु का तट स्पर्श करके वापस आ जाएगा। लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। अस्पताल के प्रॉगण में कुछ घड़ी तक चीख-पुकार मची।
अगले दिन सुबह लोगों ने हैरानी से देखा कि उसकी माँ दीवाली के दीये और रोशनी वाले झालर ठेले पर लगाए बाजार में सामान बेच रही है। स्वसंकल्पाभिभूत होकर मानो उद्घोषणा कर रही हो कि अकेले ही गोवर्धन पर्वत उठाएगी। बड़ी कठकरेजी औरत है। जिसने देखा वही यह बोला कि जिसका औलाद मर गया हो वह ऐसे वक्त क्या काम-धंधा करने निकलेगी? घर में बच्चे का मृत शरीर रात से पड़ा है।
अकेला इंसान रोये या कब्र खोदे। हाथ में ठेले का सामान बेचकर पैसा आया तो वह घर गयी। कफन-दफन वगैरह का इंतजाम जो करना है। झुग्गी के बाहर लगे मजमा की नजरें उस पर जमी थी। बीमारी की उत्पत्ति से लेकर मृत्यु तक का सोपान मूलक वर्णन सुनने की जिज्ञासा अधूरी रह गयी। किसी को कर्ण और बलि की पंक्ति में सम्मिलित होने का अवसर नहीं दिया गया। उसने सीधे चादर से ढ़के बच्चे के शव की ओर रुख किया। इस बार वह किसी के भरोसे नहीं रहेगी। गली का कुत्ता अर्थी के पीछे कुछ दूर तक भागा।
***
|
|
|
|
|
"बाल विभाग ( किड्स कार्नर)"
|
|
|
|
|
"दिव्य प्रेम परिभाषित होता"
|
|
|
|
|
|
|
डॉ. राकेश कुमार गुप्ता
डॉ. राकेश कुमार गुप्ता, मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश से हैं। योग एक्सपर्ट. सेवानिवृत्त अधिकारी इंटेलीजेंस विभाग, उत्तर प्रदेश से हैं। बाल साहित्य में विशेष रूचि रखते हैं।
***
|
|
|
|
|
दिव्य प्रेम परिभाषित होता
दिव्य प्रेम परिभाषित होता
घर पावन संसार।
भारत की माटी में बसता
मिला - जुला परिवार।।
घर का पूरा आँगन चहके
चहके है कोना - कोना।
सबके मन भी एक सुमन हैं
घर लगता चाँदी सोना।।
चिंतन , चिंता एक सभी की
पायल खनकें प्यार।
दिव्य प्रेम परिभाषित होता
घर पावन संसार।।
हो अपनत्व भाव हर दिल में,
जीवन नित्य सरसता है।
संपति में हक सबका होता,
स्वर में घुली मधुरता है।।
दादा, दादी, पोता - पोती
गाएँ गीत मल्हार।
दिव्य प्रेम परिभाषित होता
घर पावन संसार।।
दृढ़ होती है नींव प्रेम की,
प्राण -प्राण हर्षाता है।
रिश्तों की मजबूत डोर है,
बने सुखों से नाता है।।
घर का मुखिया एक रीढ़ हो,
वही सुखी परिवार।
दिव्य प्रेम परिभाषित होता
घर पावन संसार।।
ताई - ताऊ , चाची - चाचा
बहना - भाई हैं मिलते
बूआ - फूफा, जेठ- जिठानी
मुन्ना - मुन्नी सब हँसते
दृढ़ रिश्तों के पुष्प महकते
बिखरें हरसिंगार।
दिव्य प्रेम परिभाषित होता
घर पावन संसार।।
भारत की माटी से जुड़कर
युग निर्माण करेंगे हम
मिलजुलकर परिवार हँसेगा
एकल नहीं बनाएँ हम
योग, यज्ञ प्रातः वंदन हो
मिटते हृदय विकार।
दिव्य प्रेम परिभाषित होता
घर पावन संसार।।
***
|
|
|
|
|
चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान 3 के विक्रम लैंडर की सफलता पूर्वक लैंडिंग
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की ओर से बहुत-बहुत बधाई
|
|
|
|
|
24 अगस्त 2023 को अंतरिक्ष जगत में भारत ने इतिहास रच दिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मिशन चंद्रयान-3 की चन्द्रमा के दच्छिनी पोल पे सफल लैंडिंग हो गई है। चंद्रयान की सॉफ्ट लैंडिंग के साथ भारत चंद्रमा पर पहुंचने वाला चौथा देश और दच्छिनी पोल पर पहुंचने वाला पहला देश बन गया है। ईस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए इसरो (ISRO) संगठन और भारत के सभी लोगों को अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की ओर से बहुत-बहुत बधाई।
***
|
|
|
|
|
“संवाद” की कार्यकारिणी समिति
|
|
|
|
|
प्रबंद्ध संपादक – संपादक मंडल sushilam33@hotmail.com
सहसंपादक – अलका खंडेलवाल, OH, alkakhandelwal62@gmail.com
डिज़ाइनर – डॉ. शैल जैन, OH, shailj53@hotmail.com
तकनीकी सलाहकार – मनीष जैन, OH, maniff@gmail.com
|
|
|
|
|
सम्पादक मंडल संदेश
सितम्बर अंक का प्रकाशन अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति की पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध संपादक स्वर्गीय श्रीमती सुशील मोहनका के श्रद्धांजलि में भेंट होगी । आप अपनी श्रद्धांजलि जल्द ही ईमेल पर भेजें
sushilam33@hotmail.com
or
shailj53@gmail.com
|
|
|
|
|
रचनाओं में व्यक्त विचार लेखकों के अपने हैं। उनका अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की रीति - नीति से कोई संबंध नहीं है।
|
|
|
|
|
|
|
 |
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
This email was sent to {{ contact.EMAIL }}You received this email because you are registered with International Hindi Association
mail@hindi.org | www.hindi.org
Management Team
|
|
|
|
|
|
|
|
|
© 2020 International Hindi Association
|
|
|
|
|
|
|