APRIL INTERNATIONAL HINDI ASSOCIATION'S NEWSLETTER
अप्रैल 2026, अंक ५७
प्रबंध सम्पादक: श्री आलोक मिश्र । सम्पादक: डॉ. शैल जैन
Human Excellence Depends on Culture. The Soul of Culture is Language
भाषा द्वारा संस्कृति का प्रतिपादन
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अप्रैल का महीना नवसृजन, ऊर्जा और सांस्कृतिक उल्लास का प्रतीक है। वसंत ऋतु की मधुरता के साथ यह समय हमें नई प्रेरणा, नए संकल्प और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति की ओर से आप सभी को सादर नमस्कार।
हिंदी - संस्कृति और संवाद की वैश्विक पहचान
विश्वभर में फैला हमारा हिंदी परिवार निरंतर भाषा, साहित्य और संस्कृति के माध्यम से जुड़ रहा है। विभिन्न देशों में सक्रिय हमारी शाखाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रम हिंदी के प्रचार-प्रसार को नई ऊँचाइयों तक ले जा रहे हैं।
हम सभी सदस्यों, स्वयंसेवकों और पदाधिकारियों के प्रयासों की सराहना करते हैं, जिनके कारण हिंदी की वैश्विक उपस्थिति सुदृढ़ हो रही है।
अप्रैल के प्रमुख पर्वों की हार्दिक शुभकामनाएँ
अप्रैल का महीना भारतीय संस्कृति के अनेक महत्वपूर्ण पर्वों से सुसज्जित है। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की ओर से आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ -
बैसाखी – समृद्धि, परिश्रम और नए आरंभ का उत्सव
राम नवमी – मर्यादा, धर्म और आदर्श जीवन का प्रतीक
महावीर जयंती – अहिंसा, सत्य और करुणा का संदेश
हनुमान जयंती – भक्ति, शक्ति और समर्पण का प्रतीक
इन पर्वों की प्रेरणा हमें अपने जीवन और समाज में सकारात्मक मूल्यों को अपनाने की दिशा में प्रेरित करती है।
अप्रैल की प्रमुख गतिविधियाँ
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित हिंदी काव्य गोष्ठियाँ, हिंदी शिक्षण से जुड़े वेबिनार एवं कार्यशालाएँ, युवा रचनात्मक लेखन प्रतियोगिताएँ तथा विभिन्न शाखाओ द्वारा संचालित सांस्कृतिक कार्यक्रम हिंदी के वैश्विक प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हम सभी शाखाओं से अनुरोध करते हैं कि वे अपनी गतिविधियों को नियमित रूप से साझा करें, ताकि इस सामूहिक प्रयास के माध्यम से हिंदी के वैश्विक मंच को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
डिजिटल एकीकरण – हमारी सामूहिक जिम्मेदारी
आज के डिजिटल युग में यह अत्यंत आवश्यक है कि हमारी गतिविधियाँ व्यापक स्तर पर दिखाई दें और अधिकाधिक लोगों तक पहुँचें। इसी संदर्भ में, मैं विशेष रूप से सभी शाखाओं से आग्रह करता हूँ कि वे अपनी गतिविधियों, कार्यक्रमों और उपलब्धियों को नियमित रूप से हमारी आधिकारिक वेबसाइट www.hindi.org पर साझा करें।
मैं समिति के सभी शाखा अध्यक्षों और पदाधिकारियों से अपेक्षा करता हूँ कि वे इस दिशा में सक्रिय पहल करें और अपनी-अपनी शाखाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाएँ।
हमारा संकल्प – 2026
वर्ष 2026 में हमारा लक्ष्य है कि हिंदी को तकनीक, नवाचार और वैश्विक मंचों से और अधिक प्रभावी रूप से जोड़ा जाए। हम एक ऐसे सशक्त और एकीकृत हिंदी समुदाय का निर्माण करना चाहते हैं, जो भौगोलिक सीमाओं से परे होकर एक साझा उद्देश्य के लिए कार्य करे।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की ओर से आप सभी सदस्यों, शाखाओं और स्वयंसेवकों के प्रति हृदय से आभार । आपके सहयोग और समर्पण से हिंदी का यह वैश्विक अभियान निरंतर प्रगति कर रहा है।
आइए, अप्रैल की इस नव ऊर्जा के साथ हिंदी को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाने का संकल्प लें।
सादर,
संजीव जायसवाल
राष्ट्रीय अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति २०२६–२०२७
ईमेल: president@hindi.org;
www.hindi.org
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- आगामी कार्यक्रम
हास्य कवि सम्मेलन 2026
द्वारा : आलोक मिश्रा, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, न्यासी समिति
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सात सप्ताह का हास्य कवि सम्मेलन शुक्रवार, 10 जुलाई से प्रारंभ होकर रविवार, 23 अगस्त तक चलेगा। यह कार्यक्रम कविता और हास्य का सुंदर संगम होगा, जो श्रोताओं को भरपूर हँसी और आनंद प्रदान करेगा।
यदि आप अपने शहर में हास्य कवि सम्मेलन आयोजित करने में रुचि रखते हैं, तो कृपया जल्द हमसे संपर्क करें। यात्रा कार्यक्रम को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से हम आपकी प्राथमिकताओं का यथासंभव ध्यान रखेंगे। कृपया ध्यान दें कि कवियों की यात्रा को सहज और प्रभावी बनाने के लिए निकटवर्ती तीन शहरों को मिलाकर एक सप्ताहांत समूह बनाया जाएगा।
हमें आशा है कि आप 2026 के हास्य कवि सम्मेलन को भव्य सफलता बनाने में हमारे साथ जुड़ेंगे!
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कवियों के बारे में संक्षिप्त विवरण
संपत सरल
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के माणकसास गाँव में 8 अप्रैल 1962 को जन्मे संपत सरल भारत के सबसे सम्मानित समकालीन हिंदी व्यंग्यकारों में से एक हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर और बी.एड. की शिक्षा प्राप्त सरल जी की भाषा और अभिव्यक्ति पर जबरदस्त पकड़ है। वे हिंदी और राजस्थानी दोनों भाषाओं में समान अधिकार से लेखन करते हैं।
उनकी साहित्यिक कृतियों में 'एक मंज़िला मकान में लिफ्ट', 'निठल्ले बहुत बिजी हैं' और 'चाकी देख चुनाव की' (राजस्थानी काव्य) प्रमुख हैं। मंच पर उनकी उपस्थिति बौद्धिक तीक्ष्णता और सधे हुए प्रस्तुतीकरण के लिए जानी जाती है। उन्होंने शरद जोशी और के.पी. सक्सेना जैसे महान व्यंग्यकारों की परंपरा को आधुनिक संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ाया है।
साहित्य के साथ-साथ उन्होंने 'हम हैं ना' और 'चक्कर पे चक्कर' जैसे टेलीविजन धारावाहिकों के लिए पटकथा व गीत भी लिखे हैं। वैश्विक स्तर पर वे कनाडा, रूस, जापान और यूएई सहित अनेक देशों में प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं। वर्ष 2025 में उन्हें प्रतिष्ठित 'काका हाथरसी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
चिराग जैन
नई दिल्ली में जन्मे चिराग जैन हिंदी के एक प्रखर कवि और लोकप्रिय परफोर्मर हैं। हिंदी साहित्य की लगभग सभी विधाओं में पारंगत चिराग को उनकी निष्पक्ष और मानवीय दृष्टि के लिए जाना जाता है।
वर्ष 2002 से काव्यमंचों पर सक्रिय चिराग ने अब तक 2,500 से अधिक कवि-सम्मेलनों में काव्य पाठ किया है। वे लालकिला कविसम्मेलन का संचालन करनेवाले सबसे कम उम्र के कवि हैं। टेलीविजन की दुनिया में 'वाह-वाह क्या बात है' और 'लपेटे में नेताजी' जैसे दर्जनों कार्यक्रमों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। वर्तमान में वे 'पुरुषोत्तम' नामक महाकाव्य की रचना और मंचन कर रहे हैं, जो रामायण का एक मनोवैज्ञानिक और आधुनिक चित्रण है।
'कोई यूँ ही नहीं चुभता', 'छूकर निकली है बेचैनी' और 'मन तो गोमुख है' समेत दर्जनों पुस्तकें उनके सृजन का प्रमाण हैं। उनकी 'गुल्लक' पाठ्यक्रम शृंखला विद्यालयों में टेक्स्ट बुक का काम कर रही है।
उन्होंने 'कहाँ शुरू कहाँ खत्म' नामक बॉलीवुड फिल्म में ब्रजभाषा के संवाद भी लिखे हैं। उन्हें 'काका हाथरसी हास्य रत्न' (2024), 'भाषादूत सम्मान' सरीखे लगभग दो दर्जन अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। उन्होंने IIIT वडोदरा जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का कुलगीत लिखा है। कोविड काल में उनके द्वारा चलाए गए मानवीय अभियान 'गिलहरी प्रयास' की भी बहुत सराहना हुई।
गोविन्द राठी
मध्य प्रदेश के अकोदिया मंडी (शाजापुर) में 7 अप्रैल 1967 को जन्मे गोविन्द राठी, हिंदी कवि सम्मेलन मंच के एक प्रतिष्ठित व्यंग्यकार हैं। अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर राठी जी ने वर्ष 2004 में अपनी काव्ययात्रा प्रारंभ की। वे कम शब्दों में मारक और अर्थपूर्ण व्यंग्य करने की कला में माहिर हैं।
उनकी कविताओं के माध्यम से वे पारिवारिक विसंगतियों, पति-पत्नी के रिश्तों, सामाजिक कुरीतियों और भ्रष्टाचार पर तीखा प्रहार करते हैं। पिछले दो दशक में उन्होंने 2,000 से अधिक लाइव प्रदर्शन किए हैं, जिनमें दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'गणतंत्र दिवस कवि सम्मेलन 2025' भी शामिल है। भारत के अलावा उन्होंने उज्बेकिस्तान, यूएई और नेपाल जैसे देशों में काव्यपाठ किया है।
उन्हें 'बालकृष्ण शर्मा नवीन पुरस्कार' (2018), 'ब्रज शुक्ल घायल पुरस्कार' (2024), और सब टीवी द्वारा 'छुपा रुस्तम' (2012) जैसे सम्मानों से नवाजा जा चुका है। दूरदर्शन, ज़ी न्यूज़ और सब टीवी जैसे चैनलों पर उनकी सक्रिय उपस्थिति ने उन्हें सोशल मीडिया पीढ़ी के बीच भी अत्यंत लोकप्रिय बना दिया है।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति -- उत्तर पूर्व ओहायो शाखा
इंडियन हेरिटेज कल्चर कैंप, वार्षिक
स्थानीय संस्थाओं के साथ
रिचफील्ड, ओहायो, जुलाई 6 - 24 , 2026
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नमस्ते शैल जी
हमारी टीम यह घोषणा करते हुए अत्यंत उत्साहित है कि 2026 के लिए registration पहले ही पूर्ण हो चुका है और अब छात्रों की waiting list भी बन चुकी है। हम अभी भी volunteers और teachers की तलाश में हैं—यदि आप इच्छुक और सक्षम हों, तो कृपया संपर्क करें।
कृपया किरण खेतान जी के अनुरोध पर संलग्न Volunteer flyer देखें।
यदि आप समिति के लोगों से संपर्क कर रहे हैं, तो flyer पर दिए गए QR Codes कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, volunteers के लिए registration form उपलब्ध है।
हमारी सहायता करने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।
धन्यवाद
Mr. Lalit Sangtani, Admin/ Operations: 419-829-0223
e-mail: ihasummercamp@gmail.com
Mrs. Kiran Khaitan, Program Director: 330-622-1377
Mrs. Kanika Agarwalla, Co-Director: 862-754-0670
Mrs. Shalini Goyal, Co-Director: 440-590-5605
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति — टेनेसी शाखा रिपोर्ट
फागोत्सव 2026 — रंग, उमंग और एकता का उत्सव
द्वारा : कोमल जोशी, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, टेनेसी शाखा
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति – टेनेसी शाखा द्वारा आयोजित भारतीय समुदाय के बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम फागोत्सव 2026 ने इस वर्ष होली के उत्सव की रंगीन और उल्लासपूर्ण शुरुआत की। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है—और जैसा कि तस्वीरों व वीडियो में झलकता है—यह वास्तव में वसंत, रंग, संगीत और आनंद का सुंदर उत्सव था।
कार्यक्रम की शुरुआत आदरणीय वरिष्ठ सदस्यों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई। इसके पश्चात एक छोटे बच्चे द्वारा श्लोकों के मधुर पाठ ने पूरे वातावरण को पवित्र और मंगलमय बना दिया। आईएचए की अध्यक्ष श्रीमती सीमा वर्मा ने उपाध्यक्ष श्रीमती प्रेरणा शर्मा के साथ सभी का स्वागत करते हुए वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान किया तथा पूरी टीम का परिचय दर्शकों से कराया।
इसके बाद मंच पर होली की सच्ची रंगत दिखाई देने लगी। समूह गीत, एकल प्रस्तुतियाँ और ऊर्जावान नृत्य ने पूरे वातावरण को उत्साह और रंगों से भर दिया। एक विशेष और भावुक क्षण तब आया जब एक अभिभावक द्वारा लिखी गई सुंदर कविता को उनकी बेटी ने मंच पर सुनाया। यह पिता-पुत्री की अनूठी प्रस्तुति दर्शकों के दिलों को छू गई।
इसी क्रम में दो नन्हीं बच्चियों ने प्रसिद्ध होली गीत “चल जा रे हट नटखट” पर कठपुतली नृत्य प्रस्तुत किया। उनका मासूम और प्यारा अभिनय इतना मनमोहक था कि पूरे सभागार में मुस्कान और भावुकता दोनों ही दिखाई देने लगीं।
जहाँ बच्चे अपनी प्रतिभा से मंच को रंगीन बना रहे थे, वहीं आईएचए टीम के सदस्यों ने भी “रंग रसिया” नामक विशेष प्रस्तुति में लोकप्रिय बॉलीवुड होली गीतों को बड़े उत्साह और मधुरता के साथ प्रस्तुत किया। इसी क्रम में हमारे एक प्रतिभाशाली युवा द्वारा कृष्ण की बांसुरी की मधुर धुन ने पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान एक अभिभावक ने होलिका दहन और होली के महत्व की कथा भी साझा की, जिसमें प्रह्लाद, हिरण्यकश्यप और होलिका की कहानी के माध्यम से इस पर्व के आध्यात्मिक संदेश को सुंदर ढंग से समझाया गया।
जनता की माँग पर इस वर्ष भी आयोजित होली पोस्टर प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी रचनात्मकता के रंग बिखेरे। उनके पोस्टरों पर बिखरे रंग केवल रंग नहीं थे, बल्कि उनकी कल्पना, मासूमियत और स्नेह की सुंदर अभिव्यक्ति थे। विभिन्न आयु वर्गों के बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए गए और जब बच्चों ने अपने चित्रों का भाव वरिष्ठ सदस्यों को समझाया, वह पल अत्यंत मधुर और यादगार बन गया।
कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण ढोल तमाशा के साथ हुआ। जैसे ही ढोल की थाप पर “बारी बरसी खटन गया सी…” की धुन गूँजी, पूरा सभागार नृत्य और उल्लास से झूम उठा।
हर प्रस्तुति में रंगों की छटा थी, आयोजन की हर व्यवस्था में समन्वय था और पूरी टीम के प्रयासों में समर्पण का रंग साफ झलक रहा था।
फागोत्सव 2026 केवल एक कार्यक्रम नहीं था — यह संस्कृति, रचनात्मकता और सामुदायिक एकता का जीवंत उत्सव था।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति - टेनेसी शाखा रिपोर्ट
विश्व हिंदी दिवस 2026 समारोह
ब्रेंटवुड लाइब्रेरी, 18 जनवरी 2026
द्वारा : कोमल जोशी, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, टेनेसी शाखा
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अंतराष्ट्रीय हिंदी समिति (IHA) - टेनेसी शाखा द्वारा ब्रेंटवुड लाइब्रेरी में विश्व हिंदी दिवस का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। इस वर्ष का समारोह “वंदे मातरम्” के 150 गौरवपूर्ण वर्षों को समर्पित रहा, जिसने कार्यक्रम को विशेष ऐतिहासिक एवं भावनात्मक महत्व प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं वरिष्ठ सदस्यों के परिचय के साथ हुआ। इसके पश्चात काव्य-पाठ, गीत-संगीत एवं विविध साहित्यिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों ने स्वयं रचित कविताओं के साथ-साथ हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित कवियों, जैसे मैथिलीशरण गुप्त एवं दुष्यंत कुमार की रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। एक सदस्य द्वारा प्रस्तुत बॉलीवुड मिमिक्री ने वातावरण को हल्का-फुल्का और मनोरंजक बना दिया।
कार्यक्रम में बच्चों की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। फैंसी ड्रेस प्रस्तुति के माध्यम से नन्हे प्रतिभागियों ने रानी लक्ष्मीबाई, भारत माता, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय सहित अनेक प्रेरणादायी व्यक्तित्वों का सजीव चित्रण किया, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया।
विभिन्न आयु वर्गों के लिए आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता ने प्रतिभागियों की रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति को प्रदर्शित किया। रंगों के माध्यम से व्यक्त किए गए देशप्रेम एवं सांस्कृतिक भावों ने सभी को प्रभावित किया। प्रत्येक चित्र प्रतिभा और संवेदनशीलता का सुंदर उदाहरण था।
संगीत प्रस्तुतियों में “वंदे मातरम्” की बाँसुरी धुन तथा बच्चों द्वारा गाए गए देशभक्ति गीतों ने
दर्शकों को भावविभोर कर दिया। साथ ही, IHA सदस्यों द्वारा प्रस्तुत लघु नाटिका ने आधुनिक एवं डिजिटल भारत की प्रगति को प्रभावी ढंग से दर्शाया।
कार्यक्रम का समापन “वंदे मातरम्” एवं राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ हुआ, जिसने उपस्थित सभी में देशप्रेम और एकता की भावना को और सुदृढ़ किया। आयोजन समिति के सदस्यों, स्वयंसेवकों, प्रतिभागियों एवं वार्षिक प्रायोजकों — डॉ. शेफाली ग्रोवर (कूल स्प्रिंग ऑर्थोडॉन्टिक्स) एवं रारित फाइनेंशियल्स — के सहयोग से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति और सामुदायिक एकता को बढ़ावा देने की दिशा में IHA की एक सार्थक पहल सिद्ध हुआ।
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वसुधैव कुटुम्बकम (The World is one Family)
इंटरफेथ समूह की स्थापना
रिचफील्ड, ओहायो 2025 में
विविधता में एकता का सुंदर प्रयास और अनुभव
द्वारा: डॉ. शैल जैन, पूर्व अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति
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रिचफील्ड , ओहायो (Richfield, Ohio) में वर्ष 2025 के दौरान आयोजित इंटरफेथ समुदाय केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समुदाय को जोड़ने वाला एक भावनात्मक और प्रेरणादायक अनुभव बनकर उभरा। इस सराहनीय पहल की कल्पना और नेतृत्व नगर के मेयर माईकल व्हीलर (Michael Wheeler )द्वारा किया गया, जिनकी सोच थी कि अलग-अलग आस्थाओं को समझकर ही सच्चे अर्थों में एकता को महसूस किया जा सकता है।
इस पहल की शुरुआत एक आत्मीय आमंत्रण से हुई, जिसमें मेयर व्हीलर ने अपने शहर और आसपास स्थित विभिन्न आस्था के समूहों को आमंत्रित किया। ऐसा कर उन्होंने इंटरफेथ कोएलिशन के समूहों को साथ आने और इस विचार को साकार करने के लिए प्रेरित किया।
उनके इस प्रयास ने समुदाय में एक नई ऊर्जा और आपसी जुड़ाव की भावना को जन्म दिया।
इस इंटरफेथ समूह में लगभग 10–12 विभिन्न धार्मिक समुदायों ने भाग लिया। इनमें प्रमुख रूप से भाग लिया --
Richfield United Church of Christ,
St. Victor Catholic Church
Bethel Lutheran Church
United Church of Christ
Sikh Gurudwara (Richfield)
Palyul Ohio Vajrayana Buddhist Temple
Jain Society of Greater Cleveland,
Chinmaya Mission,
Shree Venkateswara Temple of Cleveland
यह विविधता अपने आप में एक सुंदर संदेश थी कि अलग-अलग आस्थाओं के बावजूद हम सभी एक साझा मानवीय मूल्यों से जुड़े हुए हैं।
कार्यक्रम का सबसे विशेष भाग विभिन्न पूजा स्थलों / संस्थाओं का भ्रमण रहा, जहाँ प्रतिभागियों ने न केवल अलग-अलग धर्मों के बारे में जाना, बल्कि उन्हें निकट से अनुभव भी किया। प्रत्येक स्थान पर वहाँ की परंपराओं, मान्यताओं और जीवन मूल्यों का परिचय बड़े ही आत्मीय भाव से कराया गया, जिसने सभी के मन पर एक गहरा और सकारात्मक प्रभाव छोड़ा।
इस अवसर पर प्रतिभागियों ने मेयर व्हीलर के दूरदर्शी नेतृत्व के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। साथ ही सभी धर्म समुदायों के नेताओं का भी विशेष धन्यवाद किया गया, जिन्होंने विश्वास और खुले मन से इस पहल को अपनाया। विभिन्न संगठनों के स्वयंसेवकों और आयोजकों की निष्ठा और सहयोग ने इस आयोजन को सहज, सफल और यादगार बना दिया।
यह इंटरफेथ टूर केवल एक आयोजन नहीं था, बल्कि दिलों को जोड़ने की एक सच्ची पहल थी। रिचफील्ड समुदाय ने इसे पूरे हृदय से सराहा और अब सभी भविष्य में ऐसे और अवसरों की आशा कर रहे हैं, जहाँ संवाद, समझ और एकता की भावना और भी प्रगाढ़ हो सके।
“जब विविधता को समझने का प्रयास होता है, तभी सच्ची एकता का मार्ग प्रशस्त होता है।”
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वार्षिक गुलाब जयंती २०२६ का आयोजन
शिव विष्णु मंदिर, पारमा, ओहायो
१० अप्रैल, २०२६ की झलकियाँ, विस्तृत समाचार अगले अंक में
द्वारा : डॉ. शोभा खंडेलवाल
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अपनी कलम से
डॉ. महादेव चाँद, मेरे पिता जी की पुण्यतिथि पर स्मरण
7 अप्रैल 2011
द्वारा: शैल जैन, पुत्री
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स्वर्गीय डॉ. महादेव चाँद
जनवरी 1, 1928 -- अप्रैल 7, 2011
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7 अप्रैल मेरे और मेरे पूरे परिवार के लिए एक अत्यंत भावनात्मक और स्मरणीय दिन है। इस दिन वर्ष 2011 में हमने अपने पिता को शारीरिक रूप से खो दिया, परंतु उनके संस्कार, मूल्य और आदर्श आज भी मेरा और हमारे पूरे परिवार का मार्गदर्शन करते हैं।
मेरे पिता पेशे से एक चिकित्सक थे और हृदय से एक सच्चे समाजसेवी। अपने पूरे जीवन में उन्होंने निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा की। वे रोटरी इंटरनेशनल (Rotary International) के समर्पित सदस्य थे और उसके आदर्श वाक्य “Service Above Self” को उन्होंने अपने जीवन में पूर्ण रूप से अपनाया। उनके लिए सेवा केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक मार्ग था।
भारत में उन्होंने वर्षों तक रोगियों की सेवा पूरी निष्ठा और करुणा के साथ की। भारत में पटना रोटरी क्लब, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रोटरी डिस्ट्रिक्ट 325 और रोटरी इंटरनेशनल में उन्होंने काफी काम किया। अपनी तीनों बेटियों और पत्नी के अलावा विस्तृत परिवार के लोगों को भी आगे बढ़ाया। समाज में यदि किसी को कोई समस्या या परेशानी हो तो उसका तुरंत समाधान करने में अपनी पूरी क्षमता लगा देते थे। आज भी वे अपनी निस्वार्थ समाज सेवा और कार्यों की वजह से हमारी यादों में ज़िंदा हैं।
1990 के दशक में वे सेवानिवृत होने के बाद अपनी पत्नी सुशीला मोहनका के साथ अमेरिका चले आए। अमेरिका में दोनों ने एक्रन ( Akron) यूनिवर्सिटी में २ साल तक कंप्यूटर सीखा ताकि भारत और अमेरिका दोनों जगहों पर सेवा कार्य निरंतर जारी रख सकें । उन्होंने अपने अंतिम समय तक समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और सेवा भावना को बनाए रखा।
यह भी एक विशेष संयोग है कि 7 अप्रैल को विश्वभर में World Health Day मनाया जाता है, जो World Health Organization की स्थापना का प्रतीक है। यह दिन स्वास्थ्य के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित है—और यह वही मूल्य है जिसे मेरे पिता ने अपने जीवन में साकार किया।
उनकी पुण्यतिथि पर हम न केवल एक स्नेही पिता को याद करते हैं, बल्कि एक ऐसे महान व्यक्तित्व को भी नमन करते हैं, जिन्होंने अपने जीवन से सेवा, विनम्रता और करुणा का संदेश दिया। उनका जीवन और उनका आदर्श हम सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
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अपनी कवितायेँ
"जिंदगी "
द्वारा: प्रकाश सिन्हा , अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, उत्तर पूर्व ओहायो शाखा
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पटना विश्वविद्यालय में 3 वर्षों तक अंग्रेज़ी पढ़ाने के बाद प्रकाश सिन्हा ने नई दिल्ली में‘ द टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ ( Times of India) में संपादक के रूप में कार्यभार संभाला।
1997 में इन्होनें एक अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रबंधन कंपनी में संपादक एवं उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए अमेरिका आए, जहाँ से वे हाल ही में सेवानिवृत्त हुए। तत्काल ये ओहायो के क्लीवलैंड से प्रकाशित भारतीय समुदाय के समाचार पत्र “इंडिया न्यूज़ इंटरनेशनल” के प्रकाशक एवं संपादक हैं। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, उत्तर पूर्व ओहायो शाखा के लंबे समय से सहायक और प्रचारक भी है ।
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जिंदगी
ज़िंदगी के हर रास्ते मुश्किल न थे,
पर जहाँ थे, वहीं से जीना सीखा।
कैसे भूल जाऊँ वो अँधेरी गलियाँ,
जहाँ गिरने के बाद उठना सीखा।
कभी भटक गए थे हम जिस मोड़ पर,
उसी मोड़ से राह सही पकड़ना सीखा।
जब मुड़ गए जो साथ चले थे हमारे,
कठिन राहों पर अकेले चलना सीखा।
कैसे भूल जाऊँ वक़्त के बदलते मिज़ाज,
वहीं से तो हमने संभलना सीखा।
क्या डरेगा वो शख़्स गिरने से कभी,
जिसने ठोकरें खाकर चलना सीखा।
यक़ीन रखना, मिल जाएँगी मंजिलें
अगर हर हाल में चलना सीखा।
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( सूचना : ये कविता मार्च संवाद में भी प्रकाशित की गई थी । हमें खेद है कि गीतकार का नाम ग़लत लिखा गया । सही नाम प्रकाश सिन्हा है )
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अपनी कवितायेँ
"आओ कुछ इस तरह होली मनाएं"
द्वारा: पूजा दुगर, कोलकाता, भारत
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पूजा दुगर, कोलकाता, आरकेडी के ग्रुप ऑफ कंपनियों में असिस्टेंट कंपनी सेक्रेटरी हैं ।
इन्हें स्कूल के दिनों से ही हिंदी कवितायेँ लिखने में रुचि रही है। यें वार्षिक स्कूल की पत्रिकाओं के लिए हिंदी कविताएँ लिखती थीं और सामुदायिक कार्यक्रमों में भी भाग लेती थी।
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आओ कुछ इस तरह होली मनाएं
आओ कुछ इस तरह होली मनाएं
रंग में घुल जाएँ कुछ इस तरह,
कि सदियों तक रंग उतर ना पाए।
बस खुशी ही खुशी निखरे हर चेहरे पर,
आओ कुछ इस तरह होली मनाएं।।
हो प्यार से भरी पिचकारी मन में,
हाथों पर लगा प्रेम का गुलाल हो।
भाईचारे की खुशबू महके सर्वत्र,
हर जिंदगी ऐसी खुशहाल हो।।
जिधर नजर पड़े, उधर ही,
मुस्कुराता हुआ चेहरा नजर आये।
आओ कुछ इस तरह होली मनाएं।।
ठंडाई में रिश्तों की मिठास हो, जहाँ हर कोई,
बादाम पिस्ता की तरह खास हो।
ढप की ताल में जहाँ, थिरकती झंकार हो।
जहाँ आज नहीं अग्रजों के आगे, झुकता शीश बारम्बार हो।।
अडिग हो जहाँ विश्वास का रंग,
जो कदापि तन से उतर ना पाएँ।
आओ कुछ इस तरह होली मनाएं।।
हर मन में मीरा की भक्ति हो,
हर नारी में माँ दुर्गा की शक्ति हो।
बच्चों में जहाँ श्री कृष्णा हो,
युवाओं में लक्ष्य की तृष्णा हो।।
हो भक्त प्रह्लाद सा विश्वास हर एक मन में,
पथ मुश्किलों में भी ना डगमगाएँ।
आओ कुछ इस तरह होली मनाएं।।
आओ होली की ज्वाला में,
राग द्वेष को जला डालें ।
अतीत में हुए नोक झोंक को,
रंगों की फुहार में भुला डालें ।।
हो ना अकेला कोई इस जग में,
हम सब एक दूसरे के हो जाएँ।
आओ कुछ इस तरह होली मनाएं।।
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भावभीनी एवं विनम्र श्रद्धांजलि
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति एवं सभी हिंदी प्रेमियों की ओर से
स्वर–सम्राज्ञी आशा भोंसले को
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स्वर–सम्राज्ञी आशा भोंसले
(8 सितम्बर 1933 — 12 अप्रैल 2026)
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आशा भोंसले भारतीय संगीत जगत की एक अद्वितीय और युगप्रवर्तक गायिका थीं। उनका पूरा नाम आशालता गणपत भोंसले था। वे केवल एक महान पार्श्वगायिका ही नहीं, बल्कि एक सफल व्यवसायी, अभिनेत्री और टेलीविज़न व्यक्तित्व भी थीं।
अपनी असाधारण बहुमुखी प्रतिभा के लिए प्रसिद्ध आशा जी ने हिंदी सिनेमा सहित अनेक भाषाओं में हजारों गीत गाए। शास्त्रीय, ग़ज़ल, पॉप, लोक और फिल्मी संगीत—हर शैली में उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और श्रोताओं के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी।
उनकी मधुर आवाज़, प्रयोगधर्मिता और संगीत के प्रति समर्पण ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे महान और प्रभावशाली गायकों में स्थान दिलाया।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति परिवार आशा भोंसले की महान विभूति को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है और उनके अतुलनीय योगदान को सदैव स्मरण करता है।
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All the Samwad editions, starting from June 2021 till current - are available online now.
https://hindi.org/samwad
द्वारा : डॉ. शैल जैन, ई-संवाद संपादक, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति
हिंदी लेखन के लिए स्वयंसेवकों की आवश्यकता
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प्रबंध सम्पादक: श्री आलोक मिश्र
alok.iha@gmail.com
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प्रबंद्ध संपादक – श्री आलोक मिश्र, NH, alok.iha@gmail.com
संपादक -- डॉ. शैल जैन, OH, shailj53@hotmail.com
सहसंपादक – अलका खंडेलवाल, OH, alkakhandelwal62@gmail.com
डिज़ाइनर – डॉ. शैल जैन, OH, shailj53@hotmail.com
तकनीकी सलाहकार – मनीष जैन, OH, maniff@gmail.com
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