प्रेस विज्ञप्तियाँ

अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति द्वारा आयोजित

संयुक्त राज्य अमेरिका के १६ महानगरों में

११ अप्रैल से ११ मई २०१४ तक

हास्यकवि प्रदीप चौबे                      गीतकार आलोक श्रीवास्तव                  व्यंग्यकार सर्वेश अस्थाना

Fri 11 April – Richmond, VA
Sat 12 April – Washington, DC
Sun 13 April – Detroit, MI
Fri 18 April – Cleveland, OH
Sat 19 April – Boston, MA
Sun 20 April – Chicago, IL
Fri 25 April – Columbus, OH
Sat 26 April – Dayton, OH
Sun 27 April – Raleigh, NC
Fri 2 May – Dallas, TX
Sat 3 May – Houston, TX
Sun 4 May – San Jose, CA
Wed 7 May – Tulsa, OK
Fri 9 May – Pittsburgh, PA
Sat 10 May – New York, NY
Sun 11 May – New Jersey

अधिक जानकारी के लिये सम्पर्क करें
सुधा ओम ढ़ींगरा 919 678 9056
alok.misra@hindi.org
प्रदीप चौबे:
हास्य सम्राट प्रदीप चौबे सुप्रसिद्ध हास्य कवि (स्वर्गीय) शैल चतुर्वेदी के छोटे भाई हैं| हास्य-व्यंग्य की प्रतिभा उन्हें विरासत में मिली है। उनका किसी मंच पर होना ही उस मंच के लिए सफलता के नये प्रतिमान निर्धारित कर देता है। महाराष्ट्र में जन्में व पढ़े, प्रदीप चौबे पिछले कई वर्षों से ग्वालियर में रह रहे हैं। अब तक की अपनी काव्य-यात्रा में वे अनगिनत कवि-सम्मेलनों में काव्य-पाठ कर चुके हैं। इन कवि-सम्मेलनों में देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित ‘लाल किला कवि-सम्मेलन’, ‘स्वतंत्रता दिवस कवि-सम्मेलन’, और ‘डी०सी०एम० कवि-सम्मेलन’ जैसे समारोह भी शामिल हैं। अनेक संस्थायें उन्हें सम्मानित करके स्वयं सम्मानित हो चुकी हैं।
प्रदीप चौबे को हास्य-व्यंग्य के अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें ‘काका हाथरसी पुरस्कार’, ‘अट्‌टहास युवा पुरस्कार’, ‘अट्‌टहास शिखर पुरस्कार’, और ‘टेपा पुरस्कार’ विशेष उल्लेखनीय हैं।
उन्हें भारत के राष्ट्रपति डा० शंकर दयाल शर्मा द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। ‘बहुत प्यासा है पानी’, ‘बाप रे बाप’, ‘आलपिन’, ‘ख़ुदा ग़ायब है’, और ‘चले जा रहे हैं’ उनकी चर्चित पुस्तकें हैं। उनकी रचनाओं का गुजराती और कन्नड़ में भी प्रकाशन हो चुका है। प्रदीप चौबे एक ऐसे लोकप्रिय हास्य-व्यंग्य कवि हैं जिन्होंने केवल भारत ही नहीं अपितु अनेक देशों में अपनी कविताओं से धूम मचाई है। वह आस्ट्रेलिया, बेल्ज़ियम, जर्मनी, स्विटज़रलैण्ड, हाँगकाँग, सिंगापुर, थाईलैंड (बैंकाक), ओमान (मस्कट), दुबई (संयुक्त अरब अमीरात), बहरीन, आदि देशों में काव्य-पाठ कर चुके हैं।
अमेरिका की यह उनकी पांचवीं यात्रा है।

आलोक श्रीवास्तव:
भारत के श्रेष्ठ हिंदी ग़ज़लकारों में से एक आलोक श्रीवास्तव पिछ्ले दो दशकों से साहित्य व पत्रकारिता में सक्रिय हैं। पेशे से टीवी पत्रकार हैं तथा इन दिनों दिल्ली में एक प्रतिष्ठित हिंदी न्यूज़ चैनल से संबद्ध हैं। आलोक श्रीवास्तव के जीवन का बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक नगर विदिशा में गुज़रा और वहीं से उन्होंने हिंदी में एम०ए० किया। साल 2007 में आलोक श्रीवास्तव का पहला ग़ज़ल-संग्रह ‘आमीन’ प्रकाशित हुआ तत्पश्चात 20013 में कहानी संग्रह ‘आफ़रीन’| उनका पहला ही ग़ज़ल संग्रह आमीन हिंदी की सर्वाधिक चर्चित कविता-पुस्तकों में शुमार हो चुका है। जिसके लिए आलोक श्रीवास्तव को म०प्र० साहित्य अकादमी के ‘दुष्यंत कुमार पुरस्कार’, हेमंत स्मृति कविता सम्मान, परम्परा ऋतुराज सम्मान और रूस के ‘अंतरराष्ट्रीय पुश्किन सम्मान’ सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। मानवीय-मूल्यों और इंसानी-रिश्तों के मर्म को समझाती कविताओं के संग्रह ‘आमीन’ के बाद से ही आलोक अपने समकालीनों में ‘रिश्तों का कवि’ कहे जाने लगे। आलोक की लेखनी में घर, परिवार, दोस्त और माता-पिता के अंतरंग रिश्तों की बड़ी दुनिया है, जो दिल को छूती ही नहीं, प्यार, सम्मान और ज़िम्मेदारी का एहसास भी कराती है। आलोक की रचनाओं का रूसी व चेक के अलावा पंजाबी, गुजराती व अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो रहा है। उर्दू के अनेक शायरों की पुस्तकों का हिंदी में संपादन कर चुके आलोक श्रीवास्तव दैनिक भास्कर, इंडिया टुडे और हिंदी आउटलुक के लिए भी काम कर चुके हैं। आलोक श्रीवास्तव ने टीवी पत्रकारिता की शुरुआत 2005 में इंडिया टीवी से की, जहां उन्होंने लगभग 2 वर्ष तक प्रोड्यूसर के पद पर कार्य किया। टीवी धारावाहिकों में गीत और कथालेखन करने वाले आलोक श्रीवास्तव हिंदी पट्टी के इकलौते ऐसे हुवा ग़ज़लकार हैं जिनके गीतों, ग़ज़लों और नज़्मों को ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह, पंकज उधास, तलत अज़ीज़, उस्ताद अहमद हुसैन-मो. हुसैन, जसविंदर सिंह और शास्त्रीय गायिका शुभा मुद्गल सहित पार्श्व गायक सुरेश वाडेकर, कविता कृष्णमूर्ति, अलका याज्ञिक, उदित नारायण, सुखविंदर और शान जैसे अनेक गायकों ने स्वर दिया है। सितार वादक पंडित रविशंकर की बेटी अनुष्का शंकर के यूएस से रिलीज़ हुए एलबम ‘ट्रैवलर’ में भी आलोक के गीत शामिल किए गए हैं। जिसे ग्रैमी अवॉर्ड में नॉमिनेशन मिला। हाल ही में संगीतकार आदेश श्रीवास्तव के लिए उन्होंने कई जनगीत लिखे जिनमें से एक को सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने भी अपना स्वर दिया। आलोक श्रीवास्तव भारतवर्ष के अतिरिक्त अमेरिका, इंग्लैड, रूस, यूएई, दोहा-क़तर और कुवैत सहित अनेक देशों के प्रतिष्ठित मंचों पर कविता-पाठ कर चुके हैं। अमेरिका की यह उनकी दूसरी यात्रा है।

सर्वेश अस्थाना:
हास्य व्यंग्य के साधक सर्वेश अस्थाना शिक्षा से एल०एल०बी, एम०बी०ए हैं। पेशे से पत्रकार होते वह इण्डियन फेडरेशन आफ वर्किग जर्नलिस्ट तथा उत्तरप्रदेश प्रेस क्लब के सदस्य हैं। वह भारत में कई धर्मार्थ संगठनों से भी जुड़े हुए हैं, जिसमें जन संचार संस्थान -सर्च फ़ाउण्डेशन प्रमुख है। यह संस्था निराश्रित, असहाय एवं अपंग बच्चों की सहायता हेतु समर्पित है। सर्वेश अस्थाना इस संस्था के संस्थापक हैं। लख्ननऊ उनका निवास स्थल है। कवि के रूप में वह भारत के अग्रणी हास्य कवियों में जाने जाते हैं। १९८९ में शुरु अपनी काव्य यात्रा में अब तक सैकड़ों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में भाग ले चुके हैं। अनेकों प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित सर्वेश अस्थाना माननीय अटल बिहारी बाजपेई, पद्मभूषण नीरज, क़ैफ़ी आज़मी, मजरूह सुल्तानपुरी, जावेद अख़्तर, ख़ुमार बाराबंकवी, हुल्लड मुरादाबादी, सुरेन्द्र शर्मा, अशोक चक्रधर, शैल चतुर्वेदी, भारत भूषण, सोम ठाकुर, कुंवर बेचैन, समीर, आदि भारत के सभी जाने माने कवियों के साथ महत्वपूर्ण अवसरों पर काव्य पाठ कर चुके हैं। उनकी कविता में हिन्दी-उर्दू हास्य के साथ मानवीय भावनाओं को व्यक्त करने  वाला कलात्मक व्यंग्य एवम् मर्मज्ञ गीत-ग़ज़ल का मिश्रण होता है। जब वह मंच पर आते हैं तो हॉल लगातार ठहाकों से भर जाता है। आकाशवाणी, बी॰बी॰सी, ज़ी टीवी, ई टीवी, आई॰बी॰एन, सहारा, इण्डिया लाइव, आस्था व दूरदर्शन पर उनकी अनेकों व्यंग्य रचनाओं का प्रसारण हो चुका है। ‘हीरो कौन’ व ‘मिस रामकली’ उनके दो प्रसारित हास्य टीवी सीरियल हैं। वृत्तचित्रों में – शायर क़ैफ़ी आज़मी पर आधारित दूरदर्शन के राष्ट्रीय प्रसारण से प्रसारित ‘कैफ़ी की कैफि़यत’ तथा पद्मभूषण गोपाल दास नीरज के जीवन पर आधारित सृजन फिल्म्स द्धारा निर्माणाधीन ‘कारवाँ गीतों का’ प्रमुख हैं। स्तम्भ लेखन सहित सभी प्रमुख समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में सर्वेश जी की रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। ‘शादी का विज्ञापन’, ‘वज़ीर बादशाह’, तथा ‘शमशान घाट’ उनकी हास्य-व्यंग की पुस्तकें हैं, तथा ‘इनको जानो इन्हे मनाओ’ (बालगीत संग्रह), ‘खौलता मकरंद’ (गीत संग्रह), ‘तन्हाईयां आबाद हैं’ (ग़जल संग्रह) हैं। वह ब्रिटेन, थाईलैंड, ओमान, दुबई, इंडोनेशिया, कनाडा, तथा अमेरिका के विभिन्न शहरों में काव्य-पाठ कर चुके हैं।
लोकप्रिय मांग पर यह उनकी अमेरिका की पांचवीं यात्रा है।